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Monday, June 6, 2016

हिंदुओं का धर्मांतरण कराने वाली ईसाई संस्थाओं को कांग्रेस सरकार ने बांटें करोड़ों, RTI से खुलासा, हड़कंप

हिंदुओं का धर्मांतरण कराने वाली ईसाई संस्थाओं को कांग्रेस सरकार ने बांटें करोड़ों, RTI से खुलासा, हड़कंप

ईसाई धर्म को बढ़ावा देने के लिए विदेशों से भारत में जड़ जमाने के लिए तमाम मिशनरीज संचालित हैं। ये हिंदु व दूसरे धर्म के लोगों को तमाम तरह के खैरात बांटकर उन्हें ईसाई धर्म अपनाने के लिए प्रेरित करती हैं। इसके लिए ये मिशनरीज उनके धर्म की बुराइयां आदि करती हैं।

हिंदुओं का धर्मांतरण कराने वाली ईसाई संस्थाओं को कांग्रेस सरकार ने बांटें करोड़ों, RTI से खुलासा, हड़कंप

RTI से यह खुलासा हुआ कि कांग्रेस शासित राज्य कर्नाटक में सिद्धरमैया की सरकार ने बीते कुछ समय में ईसाई संस्थाओं को करोड़ो रुपये दान किए हैं. इससे सवाल उठता है कि क्या कर्नाटक में कांग्रेस सरकार ईसाई धर्म को बढ़ावा दे रही है. ये पैसे राज्य मे बने चर्च की मरम्मत और सुंदरीकरण के नाम पर दिए गए हैं. इसके अलावा बड़ी रकम नए चर्च और क्रिक्ष्चियन कम्युनिटी हॅाल बनाने के लिए दी गई है . किसी भी सेकुलर देश मे कोई सरकार धार्मिक संस्थाओं को पैसा नहीं दे सकती. यह संविधान की मूल भावना का उल्लंघन हैं. खुद को सेकुलर पार्टी बताने वाली कांग्रेस में कहीं ऐसा तो नहीं कि ईसाई संस्थाओं की जेब भरने का काम आलाकमान के इशारो पर ही हो रहा है.
ईसाई धर्म को बढ़ावा देने का एजेंडा ?
26 मार्च को RTI  के तहत 4 सवाल पूछे गए . ये सवाल सरकारी आदेश नंबर - MWD318MD2011 दिनांक 16/01/2012 के हवाले से राज्य अल्पसंख्यक विभग की तरफ से चर्च को दिए जा रहे फंड के बारे में था.
Q1. चर्च की मरम्मत के लिए सरकार की तरफ से साल दर साल कितना फंड दिया गया ?
Q2. उन ईसाई संस्थाओं  के नाम और पते बताएं जिन्हें मरम्मत के नाम पर सरकार से पैसे मिले हैं
Q3 नए चर्च बनाने पर साल दर साल राज्य सरकार ने कितने पैसे जारी किए ?
Q4.उन ईसाई संस्थाओं के नाम और पते बताएं जिन्हें नएचर्च बनाने के लिएपैसे दिए गए ?


चर्च के लिए खोला सरकारी खजाना
2013-14 में कर्नाटक सरकार ने राज्य के 134 गिरिजाघरों को 12.30 करोड़ रुपये दिए. इसके अलावा 6.72 करोड़ रुपये क्रिक्ष्चियन कम्युनिटी सेंटर बनाने के लिए दिए गए. इन कम्युनिटी सेंटरों में ही धर्मांतरण का ज्यादातर काम होता है
2014-15 में यह फंडिग और बढ़ गई . इस दौरान 125 चर्चों को 16 .56 करोड़ रुपये सरकारी खजाने से दिए गए. इसी तरह 55 ईसाई समुदाय भवन बनाने के लिए करीब 15 करोड़ रुपये बांटे गए.
2015-2016 में चर्च की मरम्मत पर 15 करोड़ रुपये बांटे गए. इस दौरान कम्युनिटी सेंटर बनाने के खर्च का ब्योरा नहीं दिया गया.
  
साल दर साल चर्च की फंडिंग बढ़ती गई 
तीन साल के अंदर कांग्रेस सरकार ने चर्च को बांटे करोड़ो रुपये. अमेरिका जैसे दुनिया के बड़े - बड़े ईसाई देशों में भी सरकारें चर्च बनाने या मरम्मत करने के नाम पर एक भी पैसा नहीं देती. कई देशों में ऐसा करना गैर-कानूनी है. सेकुलर देश होने के नाते भारत मे भी कोई सरकार किसी धर्म धर्म के  पूजास्थल बनाने या मरम्मत के लिए पैसे नहीं दे सकती . जहां तक कर्नाटक सरकार का सवाल है उसने राज्य कई हिंदू मंदिरों की करोड़ो की संपत्ति सील कर रखी है. राज्य के सैकड़ो साल पुराने मंदिरों की हालत बेहद जर्जर होती जा रही है. 
कैसे अपनी जड़े जमाती हैं इसाई मिशनरियां
ईसाई धर्म को बढ़ावा देने के लिए विदेशों से भारत में जड़ जमाने के लिए तमाम मिशनरीज संचालित हैं। ये हिंदु व दूसरे धर्म के लोगों को तमाम तरह के खैरात बांटकर उन्हें ईसाई धर्म अपनाने के लिए प्रेरित करती हैं। इसके लिए ये मिशनरीज उनके धर्म की बुराइयां आदि करती हैं। हिंदुओं में छुआछूत व जातिवाद की भावनाओं के नाम पर भड़काकर अपने पाले में लाने की कोशिश करती हैं। 


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Monday, May 30, 2016

सोनिया गाँधी का वह सच जो आपके होश उड़ा देगा -



 सोनिया गाँधी का वह सच जो आपके होश उड़ा देगा -


सभी लोगो से अनुरोध है की इस जानकारी को अधिक से अधिक लोगो के पास पहुचाये
यह भी पढ़े...सोनिया गांधी अथवा एनटोनिया मैनो का सच, भारत की धरोहर इटली भेजती थी यह महिला 


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Thursday, May 26, 2016

OMG, BJP को बदनाम करने के लिए कांग्रेस नेताओं ने ढूंढें अजीब तरीके


OMG, BJP को बदनाम करने के लिए कांग्रेस नेताओं ने ढूंढें अजीब तरीके

Faridabad 26 May 2016: बीजेपी सरकारों और बीजेपी नेताओं को जनता की नजर में गिराने के लिए कांग्रेस नेताओं से ऐसे ऐसे तरीके ढूंढ निकाने हैं कि सुनकर किसी के भी पैरों तले जमीन खिसक सकती है। इस खबर को पढ़ने के बाद आपको पता चल जाएगा कि जिस राज्य से कांग्रेस के पैर उखड़ते हैं वहां पर कांग्रेस सत्ता के लिए कितनी बेचैन हो जाती है और सत्ता में वापसी के लिए कैसे कैसे हथकंडे अपनाती है। इसके लिए अगर जनता को बिजली और पानी के लिए रात रात भर परेशान भी करना पड़े तो ये नेता गुरेज नहीं करते।
ताजा मामला फरीदाबाद का है। बता दें क़ि भले ही हरियाणा और फरीदाबाद में बीजेपी की सरकार हो गयी हो लेकिन फरीदाबाद नगर निगम में कांग्रेस के ही पार्षद हैं और कांग्रेस के चमचे हैं क्योंकि यहाँ पर 10 साल तक कांग्रेस का ही राज रहा है।
अब नगर निगम के दोबारा चुनाव होने वाले हैं जिसमें कांग्रेस के पूर्व पार्षद फिर से चुनाव जीतने के लिए तरह तरह के तरीके आजमा रहे हैं। जानकारी के लिए बता दें कि इन पार्षदों की नगर निगम और बिजली कर्मचारियों से साठ गाँठ है क्योंकि 10 साल तक फरीदाबाद में इनकी तूती बोलती थी।
कोंग्रेसियों ने क्या अपनाए तरीके
बता दें कि बीजेपी सरकार बनने के बाद फरीदाबाद में सबसे पहला काम बिजली और पानी पर दिया जाने लगा था। कांग्रेस सरकार में जहाँ 15-16 घंटे बिजली मिलती थी वहीँ बीजेपी सरकार आने के बाद फरीदाबाद में 22-24 घंटे मिलने लगी है।

कांग्रेस के नेता अक्सर अपने इलाकों में ट्यूबवेल चौकीदारों या पानी की टंकी पर बैठने वाले लोगों से कहकर या उन्हें ले देकर पानी बंद करवा देते हैं, कभी कभी पानी की नालियों में ईंट पत्थर भरवाकर उन्हें जाम करवा देते हैं, कभी बिजली कटवा देते हैं और कभी पानी की नालियाँ जाम करवा देते हैं। जब जनता परेशान हो जाती है तो ये नेता कहते हैं कि बीजेपी नेता पानी नहीं दे रहे हैं, बीजेपी नेता बिजली कटवा रहे हैं, बीजेपी सरकार में गन्दगी फ़ैल रही है। उसके बाद ये नेता बिजली और पानी के लिए परेशान जनता को इकठ्ठा करते हैं और बिजली दफ्तर और नगर निगम के ऑफिस के बाहर धरना देते हैं। धरना देने के बाद ये लोग बिजली अपने आप सही करवा देते हैं, पानी का कनेक्शन भी सही करवा देते हैं और काम का क्रेडिट खुद ले लेते हैं। मतलब समस्या भी खुद खड़ी करना और क्रेडिट भी खुद ले लेना। वाह क्या तरीका ढूंढ निकाला है।
ये कलयुगी नेता चुनाव जीतने के लिए कुछ भी करने को तैयार रहते हैं। हाल ही में एक नेता ने अपने इलाके का पानी का कनेक्शन कटवा दिया, जनता करीब 10 दिन तक पानी की समस्या के लिए तड़पती रही, उसके बाद उस नेता के पास पहुंची तो उसने पहले एक टैंकर भिजवाया उसके बाद उन लोगों से बोला कि मै कल धरना देने वाला हूँ आप लोग भी मेरे साथ आइये, उसके बाद वो नेता कई लोगों को अपनी गाड़ियों में भरकर नगर निगम पहुंचा और 10 मिनट का धरना दिया और फोटो परेशान लोगों के साथ फोटो खिंचवा लिए। जब तक कि वह घर पहुँचता पानी की समस्या सही हो चुकी थी क्योंकि उसने फोन करके बोल दिया कि भैया मेरा धरना ख़त्म हो गया है, जनता मेरा गुणगान कर रही है अब आप पानी का कनेक्शन खोल दें।

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Thursday, May 19, 2016

2013 में देशद्रोही कांग्रेस ने हटाये थे दाउद पर से आतंकी आरोप.


 2013 में देशद्रोही कांग्रेस ने हटाये थे दाउद पर से आतंकी आरोप.





1993 मुंबई सीरियल धमाकों के दो दशक बाद पहली बार दाऊद भारत में मुकदमे क सुनवाई को तैयार हुआ था। इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक दाऊद के प्रस्ताव पर पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और तत्कालीन सुरक्षा सलाहकार शिवशंकर मेनन के बीच भी चर्चा हुई थी।

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अखबार के मुताबिक इस मुद्दे पर पूर्व सुरक्षा सलाहकार का पक्ष नहीं लिया जा सका, लेकिन मनमोहन सिंहकी ओर से इस बाबत ई-मेल भेजा गया, जिसमें उन्होंने लिखा है कि दाऊद के लौटने के प्रस्ताव पर किसी तरह की चर्चा होने की बात उन्हें याद नहीं है, लेकिन अखबार ने अधिकारियों के हवाले से दावा किया है कि डॉन के प्रस्ताव की जानकारी पहले कांग्रेस नेतृत्व को दी गई और बाद में इसकी चर्चा पीएमओ से भी हुई।जिस वकील ने दाऊद को लेकर कांग्रेस नेताओं से संपर्क साधा था वो डी कंपनी के कई मामलों को भी देख रहे हैं।


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अटल बिहारी वाजपई ने 2003 में दाउद को ग्लोबल आतंकी घोषित कर दिया था.लेकिन 10 साल बाद देशद्रोही कांग्रेस ने दाउद पर से सारे इल्जाम खारिज कर दिए.अटल बिहारी वाजपई जी ने अपनी पूरी मेहनत लगा दी थी दाऊद को  ग्लोबल आतंकी घोषित करने में परन्तु देशद्रोही कांग्रेस ने सारी मेहनत पर पानी फेर दिया.
विकिपीडिया में भी दाउद के बारे में सारी खबरे अपडेट कर दी गयी है.देखे सबूत
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कांग्रेस कुछ नहीं सिर्फ एक आतंकी पार्टी है.खुलेआम कांग्रेस आतंकियों का साथ दे रह है लेकिन हम है की हाथ पे हाथ रखे बैठे है.अपनी आखें बंद कर  रखी है हम लोगो ने. 

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Tuesday, May 17, 2016

जनता के साथ धोखा - कांग्रेस ने 2010 को 25 पाकिस्तानी आतंकियों को जेल से कर दिया था रिहा


जनता के साथ धोखा - कांग्रेस ने 2010 को 25 पाकिस्तानी आतंकियों को जेल से कर दिया था रिहा







 मनमोहन सिंह के नेत्रत्त्व वाली कांग्रेस की गठबंधन सरकार ने वर्ष 2010 में पाकिस्तान के उन 25 खतरनाक आतंकियों को जिन्हें 1999 में वाजपेई सरकार ने एयर इंडिया के विमान IC814 के हाइजैक करने वाली डील में भी नहीं छोड़ा था उन्हें केवल इसलिए छोड़ दिया था क्योंकि मनमोहन सिंह सरकार पाकिस्तान के साथ अपने रिश्तों में सुधार लाना चाहती थी | अब NIA ने खुलासा किया है कि उन्ही 25 में से एक आतंकी जिसे भारत में आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद का हैंडलर माना जाता था, जिसका नाम लतीफ है | उसी ने 2 जनवरी को पठानकोट एयरबेस पर हुए हमले का नेत्रत्त्व किया था | सारे आतंकियों को कपडे, जूते, आदि सामान उसी ने मुहैया करवाए थे |
हिजबुल मुजाहिद्दीन, लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद के आतंकियों को छोड़ दिया था यूपीए सरकार ने –
TOI में छपी खबर के मुताबिक इन आतंकियों को देश की सबसे सुरक्षित माने वाली जेलों से कांग्रेस सरकार के आदेश पर 28 मई 2010 को छोड़ा गया था | इन आतंकियों को पकड़ने के बाद जम्मू-कश्मीर, श्रीनगर, आगरा, वाराणसी, नैनी और तिहाड़ की जेलों में रखा गया था | लेकिन तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने इन आतंकियों को इन जेलों से छोड़कर बाघा सीमा के रास्ते से पाकिस्तान पहुँचा दिया था |

1999 में हुए कंधार प्लेन हाइजैक के वक्त भी नहीं छोड़ा था वाजपेई सरकार ने इन्हें –
यह आतंकी कितने खतरनाक थे इस बात का अंदाजा इसीसे लगाया जा सकता है कि पंडित अटलबिहारी वाजपेई की सरकार के समय में हाइजैक किये गए एयर इंडिया के विमान IC814 को आतंकियों की कैद से छुडाने के बदले में भी आतंकियों ने इसी लतीफ समेत कुल 31 आतंकियों को छोड़ने की मांग रखी थी लेकिन वाजपेई सरकार ने इन्हें छोड़ने से साफ़ मना कर दिया था | लेकिन कांग्रेस ने केवल पाकिस्तान के साथ अपने रिश्तों को सुधारने के लिए दुनिया के इन 25 सबसे खूंखार आतंकियों को छोड़ दिया था |

कौन है लतीफ-
लतीफ को आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख मौलाना मसूद अजहर का सबसे नजदीकी माना जाता है | लतीफ को भारत में जैश का मुखिया भी कहा जाता है | इसे गिरफ्तार करने के बाद सबसे पहले जम्मू-कश्मीर की जेल में रखा गया था लेकिन जैसे ही सरकार को इस बात की भनक लगी की लतीफ को छुडाने के लिए उसके कुछ साथी कोई बड़ा हमला या फिर कोई बड़ी शाजिश को अंजाम दे सकते है तो ऐसे में भारत सरकार ने उसे जम्मू-कश्मीर की जेल से सीधे वाराणसी की जेल में बंद कर दिया था |

लेकिन जब 28 मई 2010 को तत्कालीन यूपीए सरकार ने 25 खूंखार आतंकियों को छोड़ा था और उन्हें पूरी सुरक्षा में पाकिस्तान भेजा था तो उनमें से एक आतंकी यह भी था | एनआईए ने खुलासा किया है कि पठानकोट एयरबेस पर हुए हमले को अंजाम देने वाला और इसे पूर्णतः हैंडल करने वाला लतीफ ही है |
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Monday, May 16, 2016

पठानकोट हमले का कांग्रेस कनेक्शन











पठानकोट हमले में कांग्रेस भले ही सरकार पर आक्रामक होने की कोशिश कर रही थी लेकिन पठानकोट हमले की असली वजह कांग्रेस सरकार थी। जी हां, ये बात सच है। एक अंग्रेजी अखबार के मुताबिक पठानकोट हमले का हैंडलर शाहिद लतीफ को मनमोहन सिंह सरकार ने 2010 में गुडविल जेस्चर के तहत छोड़ा था। यूपीए सरकार ने यह कदम पाकिस्तान के साथ रिश्ते सुधारने के लिए उठाया था। अंग्रेजी अखबार ने अपने सूत्रों के हवाले से यह दावा किया कि लतीफ 11 साल से भारतीय जेल में आतंकी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप में बंद था। वह उन हिजबुल मुजाहिद्दीन और लश्कर के तैयबा के उन 25 आतंकियों में शामिल था जिसे 28 मार्च 2010 को यूपीए सरकार द्वारा छोड़ा गया था। उन आतंकियों को कश्मीर, काशी और देश के अन्य जेलों में बंद रखा गया था। 




दिलचस्प बात यह भी है कि लतीफ को कांधार विमान अपहरण के दौरान भी छुड़वाने की कोशिश की गई थी लेकिन वाजपेयी सरकार ने इसकी इजाजत नहीं दी। अखबार ने लिखा है कि जो काम आईएसआई कांधार अपहरण के जरिए न कर सका वो इसने बड़ी आसानी से मनमोहन सरकार को मना कर करवा लिया। आईएसआई मनमोहन सरकार को ये समझाने में कामयाब रहा कि लतीफ को छोड़ने से दोनों देश के बीच के रिश्ते सुधरेंगे। 


शाहिद लतीफ पठानकोट हमले का हैंडलर है और वो आतंकी गुट के सरगना मसूद अजहर के काफी करीब माना जाता है। वो जैश के आतंकी गतिविधियों को भारत में बढ़ने का जिम्मा संभालता है।  

Sunday, May 15, 2016

PM मोदी पर बना नया गाना हुआ सुपरहिट, सुनकर शेयर जरूर करे !

PM मोदी पर बना नया गाना सुनकर शेयर जरूर करे !





सोनिया की कांग्रेस सरकार में हुए भ्रस्टाचार से पूरा देश आहत हुआ है| श्री नरेंद्र मोदी जी का ये गाना सुनकर आप सभी के जान में जान आ जायेगी| सुनिए मोदी जी पर बना नया गाना सुनकर शेयर जरूर करे |







सुब्रमणयम स्वामी ने खोला सोनिया गांधी का एक और काला चिट्ठा (देखें विडियो)

सुब्रमणयम स्वामी ने खोला सोनिया गांधी का एक और काला चिट्ठा (देखें विडियो)


 हैलीकाप्टर घोटाले के बाद गांधी परिवार की एक और काली करतूत सामने आई है। गांधी परिवार पर स्ट्रोक पर स्ट्रोक मारने वाले बीजेपी के वरिष्ठ नेता और राज्य सभा से सांसद सुब्रमणयम स्वामी ने एक और सोनिया गांधी का काला चिट्ठा खोल कर रख दिया है। लगातार गांधी परिवार और सोनिया गांधी को निशाना बना रहे स्वामी ने कहा की सोनिया गांधी की डिग्री नकली है।
इस बात का खुलासा तब हुआ जब चुनाव आयोग को दिये गये हलफ नामें में सोनिया गांधी ने अपने आप को विश्वविख्यात अमेरिकी कैंब्रिज विश्वविद्यालय का अंग्रेजी विषय का डिग्री धारक बताया। स्वामी के कथन के अनुसार जब वो कैंब्रिज विश्वविद्यालय के ईकोनामिक्स का लेक्चर लेने गये , तब वहां जाकर उन्हे ये पता लगा कि सोनिया जिस डिग्री का हवाला चुनाव आयोग को दे रहीं है, वो फर्जी डिग्री है। सोनिया गांधी कभी कैंब्रीज विश्वविद्यालय में पढीं ही नही वो उस विश्वविद्यालय की स्टूडेन्ट रहीं ही नही। कैंब्रिज विश्वविद्यालय को लिखे एक पत्र में भी विश्वविद्यालय ने भी स्वामी के दावो की प्रमाणिकता साबित कर दी। विश्वविद्यालय ने स्वामी के पत्र के जवाब में ये कहा सोनिया गांधी यहां की स्टूडेन्ट कभी नही थी।
उन्होने कहा की पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी इस विश्वविद्यालय में फेल हो गये थे फिर उन्होने लंदन में इम्पोरियम में एडमीशन लिया वहां भी वो फेल हो गई। फिर उन्होने सोनिया से शादी कर ली । सोनिया से शादी करने के बाद उन्हे असफलत ही असफलता हांथ लगी।
स्वामी जी ने जब सोनिया गांधी से डिग्री के विषय में दिये गये झूठे हलफनामें के विषय में सवाव पूछा,तो सोनिया गांधी ने पहले तो मिस प्रींटिंग का बहाना किया फिर टाईपिंग में मिस्टेक बताया। स्वामी जी ने कौमेडी करते हुए कहा कि इस टाईपिंग मिस्टेक को गिनीज बुक आफ वर्ल्ड रिकार्ड में दर्ज करा देना चाहिए। अब देखना यह होगा कि मोदी की असली डिग्री पर भी सवाल ऊठाने वाले केजरीवाल अब सोनिया की नकली डिग्री पर क्या करतें हैं।

देखें  विडियो



Friday, May 13, 2016

‎Agusta और Air India के बाद तीसरा बड़ा Scam, अब नेवी के जहाज खरीद में घिरी यूपीए सरकार...

Agusta और Air India के बाद तीसरा बड़ा Scam, अब नेवी के जहाज खरीद में घिरी यूपीए सरकार...

यूपीए सरकार पर अब अगस्ता वेस्टलैंड डील से भी बड़े घोटाले के आरोप लग रहे हैं. 'आज तक' ने खुलासा किया है कि मनमोहन सिंह की सरकार के दौरान नेवी के 9 जहाजों की खरीद में सरकारी खजाने को बड़े स्तर पर चूना लगाया गया. 

केंद्र सरकार ने इस डील के तहत इटली की कंपनी द्वारा डिलीवर किए गए दो नौसैनिक टैंकरों की खरीद मामले में जांच के लिए आदेश दे दिए हैं.

नेवी के लिए जहाज की खरीद में यह गड़बड़ी अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर सौदे से भी बड़ा घोटाला हो सकता है, क्योंकि शुरुआती जानकारी के मुताबिक, तत्कालीन यूपीए सरकार ने इटली की कंपनी को विशेष छूट देते हुए इस डील को मंजूरी दी थी.
टैंकरों के सौदे को लेकर उठे बड़े सवाल-

1. यह मामला भारतीय नौसेना के बेड़े में शामिल आईएनएस दीपक और आईएनएस शक्ति के सौदे से जुड़ा हुआ है.

2. इस सौदे को अंतिम रूप देने के लिए साल 2009 में यूपीए सरकार और इंटली की कंपनी के बीच हुआ समझौता जांच के दायरे में है.

3. यूपीए सरकार पर आरोप है कि उसने इटली के कंपनी को डील के लिए नियम से हटकर विशेष छूट दी थी.

4. बताया जाता है कि दोनों टैंकरों के निर्माण में मनमोहन सरकार ने इटली की कंपनी को घटिया किस्म के स्टील इस्तेमाल की छूट दी थी.

5. नेवी के एक अधिकारी ने टैंकरों में घटिया किस्म के स्टील इस्तेमाल किए जाने का मामला उठाते हुए साल 2009 में ही जांच की मांग की थी, लेकिन तब मामला ठंडा पड़ गया था.

6. यूपीए सरकार ने साल 2009 और 2011 में आईएनएस दीपक और आईएनएस शक्ति को इटली की कंपनी से खरीदा था.

7. जब इन टैंकरों की डील हुई थी, तब एके एंटनी रक्षा मंत्री थे.

8. जहाज बनाने वाली इतावली कंपनी पर आरोप हैं कि उसने हथियार बनाने वाले स्टील की जगह कमर्शि‍यल ग्रेड के स्टील का इस्तेमाल किया था. जबकि मनमोहन सरकार ने जानकारी होते हुए भी इसकी इजाजत दी थी.

9. साल 2010 में CAG ने भी इस डील की अलोचना करते हुए सवाल खड़े किए थे. संस्था ने सरकार पर इटली की कंपनी को फेवर करने का आरोप लगाया था.

10. डील में गड़बड़झाला सामने आने के बाद रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने जांच कराने के लिए आदेश दे दिए हैं.
गौरतलब है कि साल 2006 में भारत सरकार ने टैंकरों के सौदे के लिए टेंडर जारी किया था. जिसके बाद रूस, 

कोरिया और इटली की कंपनी ने सौदे के लिए टेंडर भरा. टेंडर के मुताबिक, सिर्फ रूस की कंपनी हथियारों में इस्तेमाल होने वाले स्टील से टैंकर निर्माण के लिए तैयार थी. जबकि अचानक नियमों को बदलाव कर 2009 में इटली की कंपनी को टेंडर जारी कर दिया गया.

Tuesday, May 10, 2016

“सोनिया गांधी” की फ़र्ज़ी डिग्री का “सुब्रमण्यम स्वामी” ने किया खुलासा


 सोनिया गांधीकी फ़र्ज़ी डिग्री का सुब्रमण्यम स्वामीने किया खुलासा




हमेशा से कांग्रेस पार्टी और गांधी परिवार की काली करतूतों का खुलासा करने वाले भारतीय जनता पार्टी के नेता और राज्य सभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने कांग्रेस प्रमुख “सोनिया गांधी” के खिलाफ एक और खुलासा किया है | इस बार सोनिया गांधी की फ़र्ज़ी डिग्री सबके सामने आई है जिसमे, चुनाव आयोग को दिए हलफनामें में, सोनिया गांधी ने खुद को विश्वविख्यात अमेरिका के कैंब्रिज विश्वविद्यालय से अंग्रेजी विषय ने डिग्री धारक बताया है | स्वामी जी का कहना है कि जब वे कैंब्रिज विश्वविद्यालय के इकोनॉमिक्स डिपार्टमेंट में एक लेक्चर लेने गए थे तब उन्हें पता चला कि सोनिया गांधी वहां कभी विद्यार्थी रही ही नहीं | स्वामी जी के लिखे पत्र के जवाब में कैंब्रिज विश्वविद्यालय ने यह प्रमाणित भी किया |



सुब्रमण्यम स्वामी ने राजीव गांधी के बारे में कहा कि राजीव पहले कैंब्रिज विश्वविद्यालय में फेल हुए, फिर लंदन के इम्पीरियल कॉलेज में फेल हुए और सोनिया से शादी कर उन्हें असफलता ही हाँथ लगी | स्वामी जी ने जब सोनिया गांधी से उनके डिग्री को लेकर दिए झूठे हलफनामे पर सवाल किया तो मैडम सोनिया जी ने इसे पहले प्रिंटिंग और फिर टाइपिंग मिस्टेक करार दिया | स्वंय जी ने भी व्यंग कस्ते हुए इस टाइपिंग मिस्टेक को गिनीज़ बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकार्ड्स में दर्ज़ कराने का सुझाव दिया | अब देखना है कि मोदी जी की डिग्री को लेकर झूठा प्रचार करने वाले सत्यवान केजरीवाल अपनी अम्मा सोनिया जी की डिग्री पर कब सवाल करते हैं ? 

‎Agusta स्कैम के बाद ‪‎Air India Scam‬ सामने आया मतलब कॉग्रेस के लिये बुरे दिन...




एअर इंडिया से जुड़े एक बड़े घोटाले का खुलासा हुआ है। विमान में चढ़ने वाले यात्रियों की पहचान के लिये उपयोग किया जाने वाला उपकरण 'बायोमीट्रिक फेशियल रिकग्निशन डिवाइस' खरीदी गई थी। ज़ी न्यूज के पास मौजूद एक्सक्लूसिव रिपोर्ट के मुताबिक यह जरूरत सिर्फ इसलिये पैदा की गई थी, ताकि कमीशन के रूप में रिश्वत ली जा सके। इस संबंध में 24 फरवरी 2006 को एयर इंडिया प्रार्थना प्रस्ताव भी जारी किया था और इस टेंडर के लिए कनाडा की क्रिप्टोमेट्रिक्स सहित 20 कंपनियों ने आवेदन किया था।

रिपोर्ट के मुताबिक इस टेंडर को हासिल करने के लिये क्रिप्टोमेट्रिक्स ने नाजिर कारीगर नाम के एक व्यक्ति के ज़रिए एयर इंडिया के अधिकारियों को रिश्वत दी थी। नाजिर कारीगर एक कनाडा में रह रहे एक अप्रवासी भारतीय उद्योगपति हैं। एयर इंडिया के के अधिकारियों से कारीगर की मिलीभगत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उसके पास एयर इंडिया के इस टेंडर की पूरी कॉपी 28 दिसंबर 2005 को यानि सार्वजनिक होने के करीब दो महीने पहले से ही मौजूद थी। इस दौरान टेंडर की प्रक्रिया में क्रिप्टोमेट्रिक्स को आगे रखने के लिए 4 लाख 50 हजार डॉलर की रिश्वत नाजिर कारीगर के मुंबई के अकाउंट में दी गई। मामले में रिश्वत के लेन-देन के लिये भी कॉन्ट्रैक्ट किया गया था, जिसके मुताबिक 40 लाख डॉलर यानी 26 करोड़ 64 लाख रुपये की रिश्वत तत्कालीन उड्डयन मंत्री प्रफुल्ल पटेल को देना थी। साथ ही यह भी लिखा था कि जैसे-जैसे डील आगे बढ़ेगी उसी हिसाब से रिश्वत के पैसे भी पहुंचाए जाते रहेंगे। हालांकि ये डील अपने अंजाम तक नहीं पहुंच पाई।

'ज़ी न्यूज' के पास इस घोटाले से जुड़े सैकड़ों कागजात हैं, जिनका गहराई से अध्ययन किया जा रहा है। ऐसे में अभी कई और अहम जानकारियां सामने आ सकती हैं। नाजिर कारीगर ने इस पूरे रिश्वतकांड में मध्यस्थ की भूमिका निभाई है। नाजिर कारीगर ने प्रफुल्ल पटेल से मुलाकात करके रिश्वत पहुंचाने का भी दावा किया है। यह डील करीब 10 करोड़ 50 लाख डॉलर यानी करीब 698 करोड़ रुपये की थी, जिसका 30 प्रतिशत हिस्सा नाजिर कारीगर के जरिये एयर इंडिया के अधिकारियों और पीपी (प्रफुल्ल पटेल) को दिया जाना था।

#‎AgustaWestland‬ स्कैम का मामला शांत ही नहीं हुआ और ये ‪#‎AirIndiaScam‬ और आ गया मतलब आने वाले दिन कॉग्रेस के लिये रोमांचक होने वाले है...

Monday, May 9, 2016

5000 करोड़ के नेशनल हेराल्ड घोटाले की भाजपा कराएगी सीबीआइ जांच, मुश्किल में गांधी परिवार

5000 करोड़ के नेशनल हेराल्ड घोटाले की भाजपा कराएगी सीबीआइ जांच, मुश्किल में गांधी परिवार



नई दिल्लीः नेशनल हेराल्ड अखबार की देशभर में फैली पांच हजार करोड़ रुपये की संपत्तियों और इससे देश के रसूखदार नेताओं की जुड़ी भूमिका को देखते हुए हरियाणा की मनोहर खट्टर नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार ने इसकी सीबीआइ जांच कराने की तैयारी की है। हरियाणा सरकार का मानना है कि राज्य की विजिलेंस ब्यूरो पंचकुला जमीन सौदे से संबंधित मामले की छानबीन महज राज्य की सीमा तक ही  करने में सक्षम है। पावरफुल नेताओं से सच उगलवाने में सीबीआई की काबिल रहेगी। इस फैसले से जमीन सौदे में फंसे हरियाणा के पूर्व सीएम भूपेंद्र सिहं हुड्डा के साथ गांधी परिवार की मुश्किलें बढ़ गई हैं।


दरअसल नेशनल हेराल्ड अखबार का संचालन करने वाली एसोसिएट जर्नल्स लिमिटेड(एजेएल) को पंचकुला के सेक्टर 6 में 3500 स्क्वायर मीटर जमीन सीएम रहने के दौरान 2005 में हुड्डा ने रीअलाटमेंट किया था। जमीन कंपनी को 1982 के रेट पर पुनः आवंटित की गई थी। इस मामले में हरियाणा की स्टेट विजिलेंस ब्यूरो ने हुड्डा व एजेएल पदाधिकारियों पर शनिवार को धोखाधड़ी की विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया था। चूंकि हेराल्ड मामले में सोनिया गांधी और राहुल गांधी की भूमिका पर सवाल उठते रहे हैं। इस नाते अगर सीबीआइ जांच शुरू हुई तो इसकी आंच उन तक भी पहुंचेगी। बता दें कि भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने नेशनल हेराल्ड की पांच हजार करोड़ रुपये की संपत्तियों को गलत तरीके से कब्जे में लेने के लिए सोनिया-राहुल गांधी आदि के खिलाफ कोर्ट में मुकदमा दायर कर रखा है। वाद के मुताबिक महज 50 लाख पूंजी में यंग इंडिया नामक कंपनी को 2010 में खड़ाकर सोनिया-राहुल ने स्वामिभक्त कांग्रेसी नेताओं के साथ मिलकर 90 करोड़ लोन सहित पांच हजार करोड़ रुपये की नेशनल हेराल्ड की संपत्तियों को यंग इंडिया के सुपुर्द कराकर अपने कब्जे में ले लिया। इसमें आयकर अधिनियम समेत कई नियमों का उल्लंघन हुआ। 

Saturday, May 7, 2016

बीएसएनएल UPA के शासनकाल में घाटे में, एक और स्कैम हो सकता हैं उजागर !

बीएसएनएल UPA के शासनकाल में घाटे में, एक और स्कैम हो सकता हैं उजागर !




यूपीए ने अपने दस वर्ष के कार्यकाल में जिस तरह से योजनाबद्ध तरीके से सरकारी दूरसंचार कंपनी भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) को वित्तीय नुकसान पहुंचाया था, राजग सरकार उसकी तह में जाने की सोच रही है। सरकार इस बात की जांच करवाएगी कि वर्ष 2004 में 10 हजार करोड़ रुपये का मुनाफा कमाने वाली यह कंपनी किस तरह से वर्ष 2014 में 8,000 करोड़ रुपये का घाटा उठा रही थी। वैसे इस मामले में नया मोड़ यह आया है कि बीएसएनएल एक बार फिर मुनाफा कमाने की स्थिति में आ गई है। ऐसा पहली बार हुआ है कि ग्राहकों की संख्या बढ़ाने में इसने एयरटेल, वोडाफोन और आइडिया जैसी बड़ी दूरसंचार कंपनियों को पीछे छोड़ा है।


बीएसएनएल राष्ट्र की संपत्ति है और अगर किसी ने इसे नुकसान पहुंचाने की कोशिश की है तो उसका पता जरुर लगाया जाना चाहिए। बीएसएनएल को इस हालात में पहुंचाने की जांच करने के लिए सरकार जांच समिति गठित करेगी सरकार कई विकल्पों पर विचार कर रही है। जांच समिति का गठन भी एक विचार का बिंदू है। हां, इसमें कोई दोराय नहीं है कि पूर्व पीएम मनमोहन सिंह की सरकार ने जान बूझ कर बीएसएनएल को आगे नहीं बढ़ने दिया। अगर ऐसा नहीं होता तो आज सिर्फ दो वर्षो में यह कंपनी फिर से न मुनाफा अर्जित करने की स्थिति में आ गई है बल्कि निजी मोबाइल कंपनियों को बेहद कड़ी टक्कर दे रहा है।


उधर, दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (टीआरएआइ) के ताजे आंकड़े बताते हैं कि फरवरी, 2016 में बीएसएनएल के नए ग्राहकों की संख्या में 1.67 फीसद की बढ़ोतरी हुई है जबकि इस दौरान अन्य सभी कंपनियों के नए ग्राहकों की संख्या में संयुक्त तौर पर 0.85 फीसद का ही इजाफा हुआ है। इस दौरान एयरटेल के ग्राहकों की संख्या में 1.18 फीसद, वोडाफोन के ग्राहकों की संख्या में 1.04 फीसद की बढ़ोतरी हुई है। रात में मुफ्त काल सेवा देने की योजना से ग्राहकों की संख्या बढ़ाने में सबसे ज्यादा मदद मिली है। कंपनी के अधिकारियों का कहना है कि सेवाओं के आधुनिकीकरण का काम पिछले दस वर्षो से ठप्प पड़ा था जिसे अब फिर से रफ्तार दे दिया गया है। वर्ष 2014-15 में 672 करोड़ रुपये का संचालन लाभ अर्जित करने वाली यह कंपनी चालू वित्त वर्ष के दौरान मुनाफा कमाएगी।

Friday, May 6, 2016

बराक ओबामा और ब्रिटेन की महारानी से भी ज्यादा अमीर हैं सोनिया गांधी!



बराक ओबामा और ब्रिटेन की महारानी से भी ज्यादा अमीर हैं सोनिया गांधी!


सिलेब्रिटी नेटवर्थ.कॉम वेबसाइट द्वारा दुनिया के सबसे अमीर राजनेताओं की सूची जारी की है जिसके अनुसार सोनिया गाँधी की सम्पत्ति का जो खुलासा किया गया है, उसने दुनिया की धनवान महारानी क्वीन एजिलाबेथ द्वितीय और अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा को भी पीछे छोड़ दिया है। सोनिया गांधी की कुल संपत्ति 2 अरब डॉलर यानी करीब 1 खरब 24 अरब रुपए की बताई जा रही है।
विवादों से गहरा नाता रखने वाली सिलेब्रिटी नेटवर्थ.कॉम ने कांग्रेस अध्यक्ष को दुनिया की उन 20 राजनेताओं में शुमार किया, जो सबसे ज्यादा धनवान हैं। वेबसाइट ने सूची में सोनिया गांधी को 12वें नंबर पर रखा है। वेबसाइट के मुताबिक सोनिया के पास 2 अरब डॉलर यानी करीब 1 खरब 24 अरब रुपए की दौलत है।
सिलेब्रिटी नेटवर्थ.कॉम मानता है कि सोनिया गांधी और ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ द्वितीय की सम्पत्ति में 40 से 50 करोड़ अमेरिकी डॉलर का फर्क है। सिलेब्रिटी नेटवर्थ ने दुनिया के जिन 20 धनवान राजनेताओं की सूची जारी की है, उसमें 18 पुरुष और 2 महिलाएं हैं। सोनिया के अलावा दूसरी महिला क्वीन एलिजाबेथ द्वितीय का नाम है।
वैसे अगर एसोशिएसन फॉर डेमोक्रेटिक राइट्स की वेबसाइट नेशनल इल्केशन वॉच की मानें तो सोनिया के पास 1.38 करोड़ की संपत्ति है जिनमें 75 हजार नकद, 28.61 लाख की बैंक डिपोजिट है। उनके पास 20 लाख के म्यूचुअल फंड और 12 लाख के आरबीआई के बांड हैं। 1 लाख 99 हजार पोस्ट ऑफिस में जमा हैं जबकि 24.88 लाख पीपीएफ में जमा हैं।

जानिये स्लाइड्स के जरिये दुनिया के 20 अमीर राजनेताओं की सूची (अमेरिकी डॉलर में)

1. व्लादिमीर पुतिन (रूसी राष्ट्रपति) 40 अरब



2. भूमिबोल अदुल्यादेज (थाईलैंड के राजा) 30 अरब



3. हस्सानल बोल्किआह (ब्रूनेई के सुल्तान) 20 अरब



4. अब्दुलाह-बिन-अब्दुल अजीज-अल-साउद (सऊदी अरब के राजा) 18 अरब



5. खलिफा-बिन-जायेद-अल-नहयान (यूएई के राष्ट्रपति) 15 अरब



6. मोहम्मद-बिन-राशिद-अल-मकतूम (दुबई के अमीर) 14 अरब



7. किम जोंग-उन (उत्तर कोरिया के नेता) 5 अरब



8. हैंस एडम द्वितीय (लिचेंस्टीन के राजकुमार) 5 अरब



9. मोहम्मद छठे (मोरक्को के राजा) 2.5 अरब



10. सेबेस्टियन पीनेरा (चिली के राष्ट्रपति) 2.5 अरब


11. हमदाद-बिन-खलीफा-अल-थानी (कतर के अमीर) 2 अरब



12. सोनिया गांधी (कांग्रेस अध्यक्ष) 2 अरब


13. एल्बर्ट द्वितीय (मोनाको के राजकुमार) 1 अरब



14. काबूस बिन सैयद (ओमान के सुल्तान) 0.70 अरब



15. तेओडोरो ओबियांग नगुएमा म्बासुगु (इक्वेटोरियल गिनी के राष्ट्रपति) 0.60 अरब



16. बशर-अल-असद (सीरिया के राष्ट्रपति) 0.55 अरब



17. इल्हाम अलियेव (अजरबैजान के राष्ट्रपति) 0.50 अरब



18. एलिजाबेथ द्वितीय (ब्रिटेन की महारानी) 0.40 से 0.50 अरब



19. सबाह चौथे (कुवैत के शेख) 0.40 अरब



20. मस्वाती तृतीय (स्वाजीलैंड के राजा) 0.10 अरब

गरीबो के लिए लड़ते लड़ते आज तुम लोग ब्रिटेन की महारानी से भी अमीर हो गए होअब हम गरीबो को खुद ही लड़ने दो...                                                                                                                                                           

Tuesday, May 3, 2016

60 सालों मे हमने काम नही किया, तो बीजेपी को कैसे करने देंगे...?

60 सालों मे हमने काम नही किया, तो बीजेपी को कैसे करने देंगे...?


आश्चर्य नहीं कि नरेंद्र मोदी सरकार अपने पांच साल पूरे करते करते घोर विरोध में घिरकर देश की जनता के सामने ऐसी प्रतीत हों, जैसे उसने देश की उम्मीदों को ठगा हो। क्योंकि जिस गति से देश के विकास विरोधीजन मोदी सरकार पर निशाना साधे जा रहे हैं, यहां तक कि संसद को चलने नहीं दिया, प्रेस कांफ्रेंस के जरिये नित नये फिजूल के मुद्दे उठा रहे हैं, और सरकार को कटघरे में खड़ा कर देश के हितों के साथ गंदा खेल खेला जा रहा है, इन सब को देखते हुए यही लगता है कि बड़े ही शातिराना ढंग से सरकार को असफल दिखाने की कोशिशें की जा रही हैं और इससे जनता की उम्मीदों पर पानी फिरता जा रहा है।


संसद के शीतकालीन सत्र में एक भी दिन ऐसा नहीं गुजरा होगा, जब कांग्रेस ने या अन्य विपक्षी पार्टियों ने हंगामा न किया हो। इस सत्र में कई सारे महत्वपूर्ण बिल हैं जो देश की जनता को दिशा देने वाले थे, वह पास नहीं हो सके और विपक्ष तो मोदी सरकार के जनता हितार्थ सारे रास्तों पर अवरोध पैदा करने में जुटा हुआ दिखा।
संसद से बाहर अरविन्द केजरीवाल जैसे नेता हैं, जो हंगामा खड़ा कर सरकार के खिलाफ वातावरण बना रहे हैं। दरअसल इस देश की सबसे बड़ी कमजोरी यही है कि यहां की जनता का बहुत बड़ा हिस्सा सच नहीं देख पाता। वो वही देखता है जो मीडिया उसे दिखाती है। मीडिया वही दिखाती है, जिसमे उसका टीआरपी वाला कॉलम भरा हुआ रहे।
जनता को लगता है मानो कोई भूचाल आ गया हो और उस भूचाल को सरकार दबाने में नाकामयाब हो रही है। दरअसल भूचाल पैदा किया जा रहा है। कृत्रिम तरीके से पैदा किया जा रहा है ताकि मोदी सरकार नेस्तनाबूद हो सके , वह जनता की आंखों से उतर सके और फिर वे ही लोग काबिज हों जिन्होंने घोटालों और भ्रष्टाचार की सारी हदें पार कर ली थी।
सच तो यह है कि भारत में पहली बार एक ऐसी सरकार अपने पूरे बहुमत के साथ विराजी है, जिसमें देशभक्ति और देश हितार्थ कार्य करने का पूरा पूरा सामर्थ्य दीखता है। सच यह भी है कि अपनी सरकार के पहले दिन, पहले मिनिट से ही उसने अपने लोक हितार्थ कार्य करने की शुरुआत कर दी थी। सच यह भी है कि जनता से चुनावों में किये गए वादे एकाध दिनों में पूरे नहीं होते हैं।
सच यह भी है कि देश की जो हालत मोदी सरकार को मिली वह दयनीय और बद से बदतर थी जिसे सामान्य बनाने की प्रक्रिया में ही वक्त लगेगा। सच यह भी है कि इस सरकार ने अपने सारे कदम बेमिसाल ढंग से उठाते हुए विश्व में एक पहचान बनाई है। सच यह भी है कि इसी कामयाबी के डर से विपक्ष हड़बड़ा गया है और सरकार के खिलाफ रणनीतियां बनाने में जुट चुका है।
डेढ़ वर्ष से अधिक हो चुका है , अब तक के कार्यों का आकलन करेंगे तो पाएंगे इस सरकार का कोई भी मंत्री किसी भी प्रकार के भ्रष्टाचार या घोटालों में लिप्त नहीं पाया गया। अरविन्द केजरीवाल जैसे नेता जिन अरुण जेटली पर आरोप लगाते नजर आते हैं, वो सिवाय सरकार की विकास गति को रोकने तथा बदनाम करने का षड़यंत्र है।
दरअसल अपनी ईमानदारी के जिस ढकोसले में वे जनता को मूर्ख बनाते आ रहे हैं, अपनी तथाकथित ईमानदारी का जो चोला उन्होंने पहन रखा है, वो उनके ही ख़ास और करीबी व्यक्ति के भ्रष्टाचार में फंसने से उतरता दिखने लगा है, जिसे छिपाने और मुद्दे को भटकाने के लिए ही उनका यह सारा व्यूह चक्र रचा गया है। वरना क्या कारण था कि सीबीआई की एक रेड से उनकी तिलमिलाहट सातवें आसमान पर पहुंच गई और तुरत फुरत बदले की भावना को आकार देते हुए उन्होंने डीडीसीए के मुद्दे को उछाल कर जेटली विवाद का रूप दे दिया? जबकि उन्हें तो अपने उस अधिकारी की बेईमानी पर खड़े होकर अपनी ईमानदारी प्रकट करनी चाहिए थी , जिसका डंका वे और उनके समर्थक पीटते रहे हैं।
बहरहाल , क्या आप जानते हैं सरकार कौन-कौन से बिल लेकर संसद में है ? क्या आपको पता है कि सरकार ने लोक हितार्थ कार्यों को अंजाम देने के लिए संसद में विपक्ष से सहयोग की मांग की है? क्या आप जानते हैं कि देश का प्रधानमंत्री 18-18 घंटे सतत कार्य कर रहा है? क्या आपको पता है कि ‘सबका साथ , सबका विकास’ मंत्र को लेकर चल रहे प्रधानमंत्री और उनकी सरकार पर कैसे-कैसे कीचड़ उछाला जा रहा है?
कभी धार्मिक विवाद को लेकर तो कभी जातिगत मसलों को लेकर , कभी ऐसे मुद्दो को लेकर जिसका वर्तमान समय में कोई अर्थ ही नहीं है तो कभी किसी मंत्री या किसी नेता की टिप्पणियों को प्रचारित कर उसे कुप्रचार में तब्दील कर। माना कि विपक्ष कभी नहीं चाहेगा कोई सरकार अपने किये गए वादों में सफल हो जाए। किन्तु वो देश हित भी न चाहता हो , इससे बड़ी देश के लिए खराब बात क्या हो सकती है। शीतकालीन सत्र भी ऐसे ही ख़त्म हो गया। कई महत्‍वपूर्ण बिल बिना पास हुए ही रह गए।
इसलिए ‪#‎नमो‬ के साथ रहे क्योकि जब गर्मी लू के साथ पड़ रही है तो बरसात भी अच्छी ही होगी ।

2014 में अगर कांग्रेस फिर आ जाती तो 2016 में ये हो जाता हिन्दुओ का हाल !

2014 में अगर कांग्रेस फिर आ जाती तो 2016 में ये हो जाता हिन्दुओ का हाल !

UPA 2 सरकार देश में एक ख़ास बिल ला रही थी जिसका नाम कुछ "सांप्रदयिकता विरोधी कानून" था जिसे सोनिया गांधी व् उसके मंत्री खुद ड्राफ्ट कर रहे थे


उस कानून में क्या क्या नियम थे जरा वो देख लें, अगर कांग्रेस सत्ता में आ जाती 2014 में तो आज 2016 में हिन्दुओ के साथ ये सब हो रहा होता


* अगर हिन्दू महिला का बलात्कार दंगे में हो जाये तो उस बलात्कार के लिए मुस्लिम को दोषी नहीं माना जायेगा, बलात्कार का केस भी नहीं होगा


* हिन्दू को कोई भी पूजा पाठ, घर में भी करना हो तो इलाके के अल्पसंख्यको से आज्ञा लेकर करना होगा
* दंगा हुआ तो उसके लिए दोषि केवल हिन्दू को माना जायेगा और उसपर केस किया जायेगा


* अगर मुस्लिम कोई भी केस हिन्दू पर करेगा तो उसकी सुनवाई केवल विशेष अदालत में होगी जिसमे 7 जज होंगे, 4 मुस्लिम तथा 3 अन्य वामपंथी


* बलात्कार की शिकार हिन्दू महिला थाने में शिकायत भी नहीं कर सकेगी, अन्यथा उसी पर घृणा फ़ैलाने का केस दर्ज कर लिया जायेगा


* 100 किलोमीटर दूर कोई भी मुस्लिम आप पर केस कर दे, चाहे वो आपको जनता भी ना हो, आप पर केस बन जायेगा और आपको अदालत में खुद को बेकसूर साबित करना होगा।


इस तरह की कई और भी धाराएं कांग्रेस ला रही थी
इनको ड्राफ्ट करने वालो में सोनिया गांधी, चिदंबरम, कपिल सिब्बल, सुशिल शिंदे, JNU के प्रोफेसर और कई अन्य बुद्धिजीवी थे।

सोनिया गांधी अथवा एनटोनिया मैनो का सच, भारत की धरोहर इटली भेजती थी यह महिला

सोनिया गांधी अथवा एनटोनिया मैनो का सच, भारत की धरोहर इटली भेजती थी यह महिला

सोनिया गांधी जिनका वास्तविक नाम एनटोनिया मैनो है, अपने जन्म प्रमाणपत्र के अधार पर ल्यूसिआना में दिसंबर 1944 में पैदा हुई थीं। लेकिन उनके पिता स्टीफानो मैनो सन् 1942 से 1945 तक रूस के जेल में बंद थे इसलिए उनका जन्मदिन और जन्मस्थान बदलकर 9 दिसंबर 1946 और ओरबासानो कर दिया गया। यह खुलासा 27 अप्रैल 1983 को इटली के राजदूत द्वारा दिल्ली में गृह मंत्रालय को दिए एक पत्र में किया गया था। सोनिया गांधी ने चुनाव आयोग को दिए हलफनामेे में यह दिखाया है कि उन्होंने अमरीका की कैंब्रिज विश्वविद्यालय से अंगे्रजी में डिप्लोमा किया है लेकिन वास्तव में इंदिरा दसवीं के आगे पढ़ी ही नहीं हैं। सोनिया गांधी के माता पिता बहुत गरीब थे और उनके पिता एक मजदूर का काम करते थे। उस जमाने में इटली की औरतें अक्सर अमरीका के बड़े संस्थानों में झाडू पोछे का काम करती थीं। सोनिया भी कैंब्रिज विश्वविद्यालय में कुछ ऐसे ही कामों के लिए गई थी ना कि अंग्रेजी में डिप्लोमा करने गई थीं।
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सेनिया राजीव की मुलाकात कैंब्रिज में ही हुई थी जब राजीव वहां पढ़ने गए थे। लकिन राजीव गांधी अपनी पढ़ाई जारी नहीं रख सके और कुछ समय बाद लंदन चले गए। सोनिया गांधी को भी लंदन में एक नौकरी मिल गई और वो भी लंदन पहुंच गईं। वहां इन दोनों की प्रेम कहानी की शुरूआत हुई। उस समय स्वर्गीय माधव राव सिंधिया भी लंदन में थे और इन दोनों के दोस्त बन गए थे। लंदन के ही एक चर्च में सोनिया और राजीव को शादी करनी पड़ी थी क्योंकि इंदिरा और संजय इस शादी के खिलाफ थे। इनकी शादी के बाद सोनिया और उनका इटालियन परिवार गरीब से कुछ वर्षो में करोड़पति बन गया तथा इसके कारणों की चर्चा हम लेख में आगे करेंगे।
भारत में आने के बाद सोनिया गांधी ने सरकारी बीमा कंपनी ओरिएंटल फायर एंड इंश्योरेंस में नौकरी करनी शुरू कर दी। इसके लिए उन्होंने अपना व्यवसायिक पता प्रधानमंत्री अवास दिया था जिससे लोगों पर दबाव डाला जा सके। नवंबर 1974 में जब सुब्रम्यणम स्वामी ने लोकसभा में प्रतिरोध जताया तो मजबूरी में इंदिरा गांधी को सोनिया की नौकरी छुड़वानी पड़ी क्योंकि यह फेरा के नियमों का उल्लंघन था। सोनिया ने भारत में आते ही अपने आप को वोटर रजिस्टर्ड किया था। यह भारत के नियमों का साफ उल्लंघन था क्योंकि सोनिया गांधी ने अपनी इटली की नागरिकता नहीं छोड़ी थी। मीडिया के प्रश्न उठाने पर दिल्ली के मुख्य चुनाव आयुक्त ने उनका नाम वोटर लिस्ट से काट दिया लेकिन फिर भी सोनिया ने सन् 1983 में वोटर आईडी कार्ड बनवा लिया जबकि उनके पास इटली की नागरिकता भी थी।
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इंदिरा और राजीव गांधी के प्रधानमंत्री कार्यकाल के दौरान ऐसा कोई भी दिन नहीं रहा जब प्रधानमंत्री सुऱक्षाकर्मियों ने भारतीय शिल्प कला की वस्तुएं, देवी देवताओं की मूर्तियां, मशहूर पेंटिग्स और कई सारी बहुमूल्य वस्तुएं रोम ना भेजी हों। ऐसा सोनिया गांधी के कहने पर होता था तथा इन वस्तुओं को सोनिया गांधी की बहन एलीसांडरा मैनो वींची की रिवोल्टा और ओरबसानो स्थित दुकानों एथनिका और गणपती पर बेचने के लिए भेजा जाता था। 

PM Modi के साथ ही Sonia Gandhi पर निशाना साध कर, Kejriwal बड़े संकेत देते हैं !

PM Modi के साथ ही Sonia Gandhi पर निशाना साध कर, Kejriwal बड़े संकेत देते हैं !




Kejriwal की कोशिश है कि Congress से राष्ट्रीय राजनीति में भी उसकी जगह छीन ली जाए.

दिल्ली के मुख्यमंत्री और Aam Aadmi Party (AAP) के संयोजकArvind Kejriwal प्रधानमंत्री Narendra Modi के खिलाफ तो अक्सर बोलते रहते हैं, लेकिन कांग्रेस अध्यक्ष Sonia Gandhi के खिलाफ आमतौर पर नहीं बोलते हैं, लेकिन उनकी रणनीति में बदलाव दिख रहा है। उन्होंने एक साथ ही PM Modi पर भी निशाना साधा है और कांग्रेस अध्यक्ष Sonia Gandhi पर भी वार किया है। उन्होंने विवादास्पद AgustaWestland हेलीकॉप्टर डील के बहाने पीएम मोदी पर निशाना साधा है कि वो इस मामले में कांग्रेस अध्यक्ष गांधी को गिरफ्तार क्यों नहीं करते।

Kejriwal ने ट्वीट करके पीएम मोदी से पूछा है कि ‘इटली अदालत के आदेश में यदि मेरा नाम होता, मोदी जी अभी तक मुझे गिरफ़्तार कर चुके होते। पर सोनिया जी से पूछताछ तक नहीं कर रहे। क्यों?’एक और ट्वीट में उन्होंने PM Modi की चुप्पी पर सवाल उठाया है और उन पर निशाना साधते हुए कहा है कि ‘मोदी जी ने मुझ परCBI रेड कराई, सोनिया जी और वाड्रा जी पर नहीं कर रहे। मोदी जी को गांधी परिवार ईमानदार लगता है’।
कांग्रेस और बीजेपी दोनों के ही खिलाफ एक साथ Kejriwal के ये हमलावर तेवर ऐसे वक्त में दिखाई दे रहे हैं जब कि उनकी पार्टी ने दो दिन पहले ही राष्ट्रीय संयोजक के तौर पर उनके कार्यकाल को 3सालों के लिए और बढ़ा दिया। अब केजरीवाल की बारी है पार्टी के फैसले पर खरे उतरने की। आजकल वो AAP को दिल्ली की सीमाओं से बाहर निकाल कर पंजाब और गोवा तक फैलाने की तैयारियों में लगे हुए हैं और ऐसा तभी मुमकिन है जब कि BJP में वो पीएम मोदी पर और Congress में गांधी परिवार पर एक साथ ही निशाना साधें, सोनिया गांधी पर उनका हमला इसीलिए दिखाई पड़ा है।

Kejriwal के PM Modi और Sonia Gandhi पर हमले को ‘राजनीतिक तौर पर सबसे बेहतर लाइन’ चुनने के रूप में देखा जा रहा है। AAPअगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों में Punjab में जीत को लेकर पूरी तरह आश्वस्त दिखाई देती है, केजरीवाल ने गुरुवार को हुए अपने पंजाब दौरे में बीजेपी और कांग्रेस को दिल्ली जैसी हालत में पहुंचाने का दावा किया। उन्होंने कहा कि पंजाब में भी कांग्रेस को शून्य पर आउट कर देंगे और बीजेपी-अकाली दल को दो अंकों में नहीं पहुंचने देंगे। पंजाब में विधानसभा की 117 सीटें हैं और इतने में विरोधियों को इस हालत में पहुंचा देने का दावा उनके आत्मविश्वास को ही दिखाता है।

सिर्फ पंजाब ही नहीं अगले साल होने वाले Goa विधानसभा चुनावों के बारे में भी AAP का ऐसा ही खयाल है। Punjab में Shiromani Akali Dal-BJP का गठबंधन सत्ता में है, लेकिन AAP इस राज्य में अपनी सबसे बड़ी चुनौती Congress को मानती है। इसी तरह से Goa मेंBJP की सरकार है और AAP की नजर में वहां सबसे बड़ी चुनौतीBJP ही है। इस तरह से केजरीवाल और उनकी Aam Aadmi Party के लिए 2017 के राजनीतिक दुश्मनों का चेहरा बिल्कुल साफ है, एक कांग्रेस है और दूसरी बीजेपी।

दिल्ली से बाहर निकल कर अपने आपको राष्ट्रीय पार्टी बनाने की कोशिश में लगी AAP अपनी रणनीति को मजबूत करने में लगी है और इसके लिए बहुत ही सावधानी और चालाकी से काम किया जा रहा है। पार्टी के एक सीनियर नेता कहते हैं कि पंजाब जीतने को लेकर पार्टी काफी आश्वस्त है और ऐसा होने के बाद  AAP ऐसी पार्टी होगी जिसकी BJP और Congress के बाद दो राज्यों में सरकार होगी। ये 2019 के चुनावों को देखते हुए राष्ट्रीय पार्टी बनने की दिशा में बहुत बडी कामयाबी होगी। इससे 2019 के आम चुनावों में बीजेपी के साथ सीधी लड़ाई की तस्वीर भी साफ हो जाएगी।
यानी कि पंजाब और गोवा के बाद AAP की नजर 2019 के लोकसभा चुनावों पर है और पार्टी अभी से उसकी तैयारी में भी जुटी हुई है। उसकी कोशिश बीजेपी के मुकाबले में खड़े होने की है, यानी कि कांग्रेस को पछाड़ना है तभी ये पोजीशन पाई जा सकती है, इसीलिएSonia Gandhi और Rahul Gandhi भी अब केजरीवाल के निशाना पर हुआ करेंगे। कांग्रेस के विकल्प के तौर पर उभरने की केजरीवाल की मंशा का खुलासा एक रीट्वीट से भी होता है। एक मीडिया हाउस के ट्वीट को Kejriwal ने रीट्वीट किया है।इस में कहा गया है किModi ji अपने विरोधियों को सलाखों के पीछे भेजने में देर नहीं लगाते, इसका मतलब ये है कि Sonia Gandhi उनकी विरोधी नहीं हैं।

Kejriwal ने इस ट्वीट के जरिए खुद को Sonia Gandhi की जगह और PM Modi के मुकाबले में खड़ा करने की कोशिश की है। इसी कोशिश में अब केजरीवाल की पार्टी सामाजिक समीकरणों, आरक्षण और विदेश नीति पर भी अपनी राय रखने लगी है, जबकि ऐसे मसलों पर पहले पार्टी चुप ही रहा करती थी। दिल्ली में AAP ने अवैध कॉलोनियों, जेजे कॉलोनियों, अल्पसंख्यकों, गरीबों के बीच पैठ बनाई, इसी तरह से वो पंजाब में दलितों के बीच अच्छी पैठ बना चुकी है। दलित पंजाब में करीब-करीब एक-तिहाई हैं और जिधर हो जाएं उसे सत्ता में ले ही आएंगे। ये वोट बैंक असल में कांग्रेस का है जिसे Kejriwal ने छीन लिया है। अब वो राष्ट्रीय राजनीति में Congress से उसकी जगह छीनना चाहते हैं, बीजेपी का नंबर तो बाद में आएगा ही.