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Thursday, July 21, 2016

कांग्रेस सांसद के स्कूल में 14 हिन्दू लड़कियों का बर्बर बलात्कार, मीडिया व् नेता खामोश



कांग्रेस सांसद के स्कूल में 14 हिन्दू लड़कियों का बर्बर बलात्कार, मीडिया व् नेता खामोश



महाराष्ट्र स्थित यवतमाल में जवाहरलाल दर्डा एजुकेशन सोसायटी द्वारा संचालित यवतमाल अंग्रेजी मीडियम पब्लिक स्कूल में दो शिक्षकों द्वारा 14 हिन्दू छात्राओं के बलात्कार का मामला सामने आया है। दोनों को पुलिस द्वारा गिरफ्तार किया जा चुका है।

इससे पहले दोनों आरोपी शिक्षकों के साथ गिरफ्तार किए गए आरोपों से घिरे संस्था के सचिव किशोर दर्डा व स्कूल के मुख्याध्यापक जेकब दास को न्यायालय ने जमानत पर रिहा कर दिया गया था। और दोनों आरोपी शिक्षकों को न्यायालय ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजने का निर्णय सुनाया। यह स्कूल श्री जवाहरलाल दर्डा एजुकेशन सोसायटी द्वारा संचालित किया जाता है, 

अत: उल्लेखनीय है कि कोयला घोटाले के चर्चित नाम और कांग्रेस से राज्यसभा सांसद विजय दर्डा इस स्कूल की गवर्निंग बॉडी के संस्थापक हैं और औरंगाबाद (पश्चिम ) की विधानसभा सीट से पूर्व विधायक श्री राजेन्द्र जवाहरलाल दर्डा इस स्कूल कमेटी के उपाध्यक्ष हैं

कुछ यूं हुआ था मामला उजागर, प्राइमरी की एक छात्रा ने जब अपने परिजन से कहा कि स्कूल में उसका यौन शोषण हुआ है। 

परिजन स्कूल पहुंचे तो स्कूल द्वारा उन्हें टालने का प्रयास किया गया। इसके बाद ऐसी 14 शिकायतें और स्कूल को मिलीं, मगर स्कूल प्रशासन ने ध्यान नहीं दिया। इसके बाद शहर में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए थे, वाहनों में आग लगा दी गई थी। सैकड़ों लोगों ने डीएम ऑफिस तक प्रदर्शन किया और शिक्षकों के साथ स्कूल प्रशासन के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की।

अखिल भारत हिन्दू महासभा (युवा मोर्चा) द्वारा यवतमाल के एक इंग्लिश कान्वेंट स्कुल में 14 हिन्दू लड़कियों के साथ हुए बलात्कार का विरोध किया गया व् आरोपियों को फासी की सजा देने की मांग भी की गई। अखिल भारत हिन्दू महासभा स्थानीय नेता निखिल वर्मा ने स्थानीय कार्यकर्ताओं के साथ अमरावती जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंप कहा है कि ईसाई संस्थाओं द्वारा चल रहे प्रत्येक प्राइवेट स्कुल और कॉलेज के कमरों में सीसीटीवी कैमेरा लगाया जायें, ताकि इस प्रकार की घटना फिर से न हो और स्कुल कॉलेज में अश्लीलता पर भी रोक लग सके। 


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Sunday, July 17, 2016

Modi सरकार ने एक अहम फैसला लिया है। ये फैसला यौन शोषण पीड़ित महिलाओं के लिए सबसे बड़े मरहम के समान है।


यौन शोषण पीड़ितों के लिए Modi सरकार का सबसे बड़ा मरहम !



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Modi सरकार ने एक अहम फैसला लिया है। ये फैसला यौन शोषण पीड़ित महिलाओं के लिए सबसे बड़े मरहम के समान है।

New Delhi, Jul 17:  केंद्र की मोदी सरकार ने देश में महिलाओं की हालत सुधारने की दिशा में कितना काम किया है इस पर बहस हो सकती है। लेकिन हाल ही में जो एक फैसला मोदी सरकार ने महिलाओं के हित में लिया है वो काबिले तारीफ है। मोदी सरकार ने फैसला किया है कि यौन शोषण पीड़ितों को 90 दिन की पेड लीव दी जाएगी। यौन शोषण के मानसिक संताप से निकलने के लिए ये अवकाश काफी मददगार साबित हो सकता है।


मोदी सरकार का ये फैसला फिलहाल केंद्रीय महिला कर्मचारियों के लिए है। सरकार ने ये फैसला यौन शोषण पीड़ितों को डराने और धमकाने के मामलों को देखते हुए लिया है। यौन शोषण पीड़ितों के लिए मोदी सरकार का ये सबसे बड़ा मरहम साबित हो सकता है। इस फैसले के मुताबिक केंद्रीय कर्मचारियों को पहले से दिए जा रहे अवकाश से अलग होंगी ये 90 दिन की पेड लीव।
केंद्र सरकार के डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनल एंड ट्रेनिंग ने इस बाबत आदेश जारी किया है। इसमें कहा गया है कि यौन शोषण के मामलों में जांच के दौरान पीड़ित सरकारी महिला कर्मचारी को 90 दिन का अवकाश दिया जाए। 90 दिनों की पेड लीव को पहले से दिए जा रहे अवकाशों में नहीं काटा जा सकता है। 90 दिन की पेड लीव का प्रावधान कार्यस्थल पर महिलाओं के साथ यौन उत्पीड़न एक्ट, 2013 के तहत लाया गया है।

मोदी सरकार के DoPT ने अब इस प्रावधान को सेंट्रल सिविल सर्विसेज रूल्स 1972 के साथ जोड़ दिया है। वरिष्ठ DoPT अधिकारियों का कहना है कि इस फैसले के बाद यौन शोषण के सदमें से गुजर रही महिलाओं को थोड़ी राहत मिलेगी। किसी भी महिला के लिए वो दौर सबसे कठिन होता है। ऐसे में लगातार छुट्टी पर रहने के कारण नौकरी पर खतरा बन आता है। इस फैसले के बाद यौन शोषण पीड़ितों को मानसिक तौर पर उबरने में मदद मिलेगी। 

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Monday, May 23, 2016

आसाराम के शिष्‍य ने कबूला, AK-47 खरीदने और गवाहों की हत्‍या के लिए जुटाए थे 25 लाख

आसाराम के शिष्‍य ने कबूला, AK-47 खरीदने और गवाहों की हत्‍या के लिए जुटाए थे 25 लाख

आसाराम के शिष्‍य और उनके कथित शार्प शूटर कार्तिक हलदार ने पुलिस को दिए बयान में चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। 30 पन्‍नों के अपने बयान में उसने मोतेरा आश्रम में रहते हुए आसाराम के विरोधियों को खत्‍म करने के बारे में विस्‍तार से बताया है।







अहमदाबाद क्राइम ब्रांच के सामने दिए बयान में कार्तिक हलदार ने कबूला है कि उसे आसाराम और उसके बेटे के खिलाफ बलात्‍कार के मुकदमे के तीन महत्‍वपूर्ण गवाहों ने हत्‍या की और चार अन्‍य को मारने की कोशिश की। प‍ुलिस के मुताबिक, उसने आसाराम के खिलाफ बोलने वाले लोगों को खत्‍म करने की बात मानी है। इसके लिए देश भर के साधकों से 25 लाख रुपए जुटाए गए थे।
अपने बयान में हलदार ने बताया, “जब मैंने आसाराम के विरोधियों को मारना शुरू किया तो भारत में फैले आसाराम के सेवकों से पैसे जुटाए गए। झारखंड के रहने वाले दामोदर सिंह को एकेे-47 खरीदने के लिए 15 लाख रुपए दिए गए थे। लेकिन दो साल बाद भी उसने एके-47 नहीं दी। हालांकि दामोदर ने अखिल गुप्‍ता को मारने के लिए इस्‍तेमाल हुए दोनाली बंदूक और 40 कारतूस मुहैया कराए थे।” अखिल को पिछले साल मुज़फ्फरनगर में मार दिया गया था।
हलदार ने पुलिस को बताया कि गवाहों को मारने के अलावा, असिस्‍टेंट कमिश्‍नर आफ पुलिस चंचल मिश्रा को मारने की साजिश भी रची गई थी। चंचल ने जोधपुर में बलात्‍कार केस की जांच की थी। हलदार ने बताया कि चंचल आसाराम बापू से सख्‍ती से बात करती थी, इसलिए उन्‍हें बम से उड़ाने का प्‍लान बनाया गया था। हलदार ने कहा कि उसे किसी किशन उर्फ बॉबी ने खबर दी थी कि मुंबई से डायनामाइट लाया जा रहा है।
पश्चिम बंगाल का रहने वाला हलदार, दिल्‍ली से 2001 में मोतेरा आश्रम आया था। यहां उसने गऊ-मूत्र संग्रह करने के साथ-साथ आसाराम बापू के बैंक अकाउंट में पैसे भी जमा किए। हलदार के बयान से पता चलता है कि आसाराम के खिलाफ बोलने वाले राजू चंडक की 2009 में हत्‍या करने के बाद वह आसाराम का खास बन गया था। जब आसाराम को 2013 में बलात्‍कार के मामले में जोधपुर जेल में रखा गया तो हलदार ने दर्जनों समर्पित साधकों के साथ मिलकर गवाहों को एक-एक करके मारने की योजना बनाई।
हलदार को गुजरात के आतंकवाद-निराधी दस्‍ते ने 14 मार्च को रायपुर से गिरफ़्तार किया गया था। आरोप है कि हलदार ने ही अमृत प्रजापति को जून 2014 में उसके राजकोट स्थित आयुर्वेद क्लिनिक को गोली मारी थी। प्रजापति आसाराम का पुराना साथी और केस का महत्‍वपूर्ण गवाह था। हलदार ने कथित तौर पर 2001-05 तक आसाराम के निजी सहयोगी रहे महेन्‍द्र चावला की भी हत्‍या की। महेश को पानीपत स्थित उसके घर में मई 2015 में गोली मारी गई थी।
हलदार ने दिल्‍ली में हुई एक बैठक का जिक्र किया है जहां ये तय हुआ कि आसाराम के खिलाफ जाने वाले हर एक श्‍ाख्‍स को मार दिया जाए। निशाने पर प्रजापति, शेखर, राजू चंडक, राहुल सचान, महेन्‍द्र चावला और दिनेश भगचंदानी थे। कई गवाह बाद में इस सूची में जोड़े गए। हलदार के मुताबिक,  “दिल्‍ली बैठक के दो महीने बाद भी जब कोई गवाह खत्‍म नहीं हुआ तो मैंने पानीपत में साधक दुष्‍यंत, संतोष और नारायण पांडेय के सामने कसम खाई कि अगर मैं किसी को एक महीने में नहीं मारता, तो मैं खुद को गोली मार लूंगा।”

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गांधी परिवार पर हुआ एक और खुलासा, राहुल गांधी पर बलात्कार का लगा आरोप


 गांधी परिवार पर हुआ एक और खुलासा, राहुल गांधी पर बलात्कार का लगा आरोप




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Source:-http://intellibriefs.blogspot.in/2007/01/rahul-gandhi-involved-in-gang-rape.html?m=1

घटना ३ दिसंबर २००६ की है जब राहुल गांधी अपने ७ और दोस्तों के साथ अमेठी के प्रवास पर थे जिनमें ४ विदेशी भी थे जो ब्रिटेन और इटली से आये हुए थे | रात लगभग ९ बजे ये सब लोग हाई सिक्योरिटी जोन में स्थित एक गेस्ट हाउस में शराब पीने में व्यस्त थे जब एक बिना बुलाया मेहमान गलती से वहां पहुँच गया | ये मेहमान अमेठी के कांग्रेस पार्टी कार्यकर्ता बलराम सिंह की २४ वर्षीया बेटी, सुकन्या सिंह थी जिसका परिवार गांधी-नेहरू परिवार का हमेशा से ही भक्त रहा है | सुकन्या एक पार्टी कार्यकर्ता होने के नाते पिछले २ सालों से बार बार राहुल गांधी से मिलने का समय मांग रही रही पर बेचारी को मिलने के लिया बुलाया गया तो भी कहाँ, रात ९ बजे उसी अमेठी के गेस्ट हाउस में |
जब सुकन्या राहुल गांधी से मिलने गेस्ट हाउस के अंदर पहुंची तो पहले राहुल गांधी ने उससे थोड़ी बहुत बातें की फिर अपने दोस्तों के साथ बैठा लिया और शराब पीने का निमंत्रण दिया | सुकन्या ये सब देख काफी हैरान थी और खुद को काफी असहज महसूस करने के कारण शराब पीने से मना कर दिया और घर जाने की आज्ञा मांगी | उसके मना करने के बावजूद उसे जबरदस्ती रोक लिया गया और ना सिर्फ उसे जबरन शराब पिलाई गयी बल्कि बारी बारी से उसके साथ बलात्कार भी किया गया | वो रोटी रही, चिल्लाती रही और मदद की गुहार करती रही लेकिन सुरक्षा कर्मियों समेत किसी ने उसकी एक ना सुनी और कई घंटे तक उसके साथ दुराचार होता रहा | उसे अपना मुंह बंद करने के लिए धमकी दी गयी और ५०००० रुपयों का लालच दिया गया |

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रोती-बिलखती सुकन्या सीढ़ी पुलिस थाने पहुंची पर उसे वहां भी निराशा ही हाँथ लगी | सत्ता की गुलाम उत्तर प्रदेश पुलिस ने राहुल गांधी के खिलाफ केस दर्ज़ करने से साफ़ मना कर दिया और और उसे घर जाने को बोला | इसी बीच पुलिस की सूचना पर अमेठी के कांग्रेस कार्यकर्ता इकठ्ठा हो सुकन्या के घर जा पहुंचे और इससे पहले पीड़िता कुछ बोल पाती, उन लोगों ने एक झूठी कहानी परिवार को सुना डाली | उन लोगों ने उल्टे लड़की पर ही चरित्रहीन होने और राहुल गांधी को जानबूझकर फंसने का दोष लगा दिया | लड़की के पिता ने भी उसकी एक ना सुनी और बुरी तरह पीट दिया | जब उस बलात्कार की घटना के गवाह, गेस्ट हाउस के सुरक्षा कर्मी, लड़की के पिता से मिले और वास्तविकता बताई तो पिता ने राहुल गांधी और कांग्रेस परिवार से डरकर चुप रहना ही ठीक समझा |

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सुकन्या की माँ सुमित्रा देवी, जिन्होंने इस घटना की वास्तविकता समझ प्रतिरोध करने की हिम्मत दिखाई, बेटी को लेकर अमेठी पुलिस मुख्यालय जा पहुंचीं | लेकिन वहां भी पुलिस अधिकारियों ने शिकायत दर्ज़ करने से इंकार कर उन्हें चुप रहने का सुझाव दिया | माँ बेटी न्याय की आशा में इधर से उधर भटकते रहे लेकिन किसी ने भी उनकी मदद नहीं की | सभी गांधी परिवार का प्रभुत्व जानते थे और इसी वजह से चुप रहना ही ठीक समझा | सुमित्रा देवी द्वारा बुलाई गयी प्रेस कांफ्रेंस में भी बहुत काम पत्रकार आये और कांग्रेस पार्टी कार्यकर्ताओं ने प्रेस कॉन्फ्रेंस बीच में ही रुकवा माँ बेटी को गन्दी गालियां दीं और उन्हें बेइज़्ज़त किया |

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२७ अक्टूबर २००६ को सुमित्रा देवी ने दिल्ली आकर सोनिया गांधी से मिलाने का वक़्त माँगा लेकिन सोनिया ने मिलने से मना कर दिया | कोई और रास्ता ना देख पीड़िता की माँ ने मानवाधिकार आयोग में गुहार लगायी लेकिन उन लोगों ने भी सिर्फ शिकायत दर्ज़ कर उन्हें जाने को बोल दिया | कांग्रेस पार्टी के बड़े नेताओं ने परिवार से मिलकर मीडिया में ये बात लाने की हालत में जान से मारने की धमकी दे डाली और जिन मीडिया हाउस को बात पता भी लगी उन्हें मुंहमांगी कीमत पहुंचा, उन्हें चुप करा दिया गया | आज भी ये परिवार न्याय की आशा में इधर उधर भटक रहा है और इन्हें इन्साफ दिलाना हिन्दू समाज का कर्त्तव्य है | 

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Sunday, May 8, 2016

बच्चे का बलात्कार हमारी संस्कृति का हिस्सा – मुस्लिम धर्मगुरु

बच्चे का बलात्कार हमारी संस्कृति का हिस्सा मुस्लिम धर्मगुरु


डेनमार्क की एक प्रमुख मस्जिद के धर्मगुरु ने अपने अनुयायियों को उपदेश दिया है कि जो धर्मत्यागी और व्यभिचारी किसी मुस्लिम को हानि पहुंचाता है उसे मार देना चाहिए. मस्जिद अध्यक्ष ने उपदेश का बचाव करते हुए कहा , “हम इस्लाम में विश्वास करते हैं “.

आरहूस में Grimhøj मस्जिद पिछले महीने से सुर्खियों में है क्यूंकि उनके इमामों में से एक ने हाल ही में बच्चे के बलात्कार को जायज़ बताते हुए कहा कि यह उनकी संस्कृति का हिस्सा है.

बता दें कि ये मस्जिद 2014 में आतंकवादी सन्गठन इस्लामिक स्टेट को भी समर्थन दे चुकी है. हालांकि, स्थानीय पुलिस ने बाद में मस्जिद की प्रशंसा की और दावा किया कि मस्जिद उस समय जिहाद में शामिल होने से युवा मुसलमानों को रोकना चाहती थी.

इस दौरान डेनमार्क की ब्रॉडकास्ट TV2 द्वारा ने एक डाक्यूमेंट्री से इस बहस को फिर से जन्म दे दिया है कि क्या ये मस्जिद बंद कर देनी चाहिए. उन्होंने चुपके से इस मस्जिद के कट्टरपंथी उपदेशक अबू बिलाल इस्माइल को ये भी कहते हुए फिल्माया है कि :

” एक विवाहित या तलाकशुदा महिला नाजायज़ सम्बन्ध रखती है, और वह एक कुमारी नहीं है, तो उसे मरने तक पत्थर मारने की सज़ा दी जानी चाहिए. ”

इसके साथ ही वो कहते हैं – ” अगर कोई भी आदमी या औरत उनकी शादी के बीच में आ जाता है और नाजायज़ रिश्ता रखता है तो उनका खून मुस्लिम कानून के तहत हलाल है और इस तरह उन्हें मरने तक पत्थर मारने की सज़ा मिलनी चाहिए. ”

क्लिप में मुस्लिम धर्मगुरु जैसे को तैसे की कहावत के सहारे कहते हैं कि – ” अगर कोई मुस्लिम को मार देता है तो उसे मार देना चाहिए लेकिन अगर कोई इस्लाम त्यागता है तो उसे भी मार देना चाहिए. ”

वहीं विरोध होने पर मस्जिद के प्रमुख धर्मगुरु ओउस्सामा सादी ने अपने धर्मगुरु का बचाव करते हुए कहा कि – ” टीवी प्रसारक के जासूस ने धोखे से शरिया के बारे में पुछा तो ग्मारे धर्मगुरु को जवाब देना बनता था क्यूंकि हम अपने धर्म के बारे में कुछ गलत नही बता सकते और धोखा नही दे सकते. ”

इस बारे में वहां की पुलिस का कहना है कि वो तथ्यों की जांच करेगी और सही पाने पर सज़ा भी देगी.

Saturday, May 7, 2016

बाप और बेटी में तो बलात्कार होता ही रहता है - मोहम्मद इक़बाल, मंत्री/नेता - UP/सपा

बाप और बेटी में तो बलात्कार होता ही रहता है - मोहम्मद इक़बाल, मंत्री 

 यूपी के दर्जा प्राप्त मंत्री और समाजवादी पार्टी ने नेता मोहम्मद इकबाल ने पिता और बेटी के रिश्ते को ही बदल दिया है। 

दरअसल इन मंत्री महोदय ने अपनी पार्टी के पूर्व जालौन-गरौठा-भोगनीपुर­ सांसद घनश्याम अनुरागी का बचाव करने के लिए कहा कि पिता और बेटी में बलात्कार होता रहता है। पूर्व सासंद पर उनकी पत्नी ने बेटी के साथ दुष्कर्म का प्रयास और अपने भाई की पत्नी के साथ अनैतिक संबन्ध होने का आरोप लगाया था।
बुंदेलखंड के जनपद जालौन में आये सपा के दर्जा प्राप्त मंत्री मोे. इकबाल कादरी उत्तर प्रदेश राज्य बीज प्रमाणीकरण संस्थान के उपाध्यक्ष हैं।
जालौन-गरौठा-भोगनीपुर­ सांसद घनश्याम अनुरागी पर उनकी पत्नी द्वारा बेटी के साथ दुष्कर्म का प्रयास और भाई की पत्नी के साथ सांसद के अवैध संबन्ध होने का आरोप लगाया था। जब इसका पत्नी ने विरोध किया तो उसे वह उसके बच्चों को जान से मारने का भी प्रयास किया गया।
भयभीत होकर किसी प्रकार अपनी बेटी के साथ भागकर दिल्ली पहुंची और युपी पुलिस समेत युपी के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से आरोपी सांसद पति के खिलाफ कार्रवाही कर जान बचाने की मांग की। जब पत्नी द्वारा पूर्व सांसद पर लगाये गये आरोपों के बारें में दर्जा प्राप्त मंत्री मों. इकबाल कादरी से बात की गयी तो उन्होंने एक अजीब और विवादित बयान देते हुये कहा कि पिता और बेटी के साथ बलात्कार होता रहता है और रही आरोपों की बात तो वह जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है।
उनके इस बयान ने पिता और बेटी के रिश्ते की परिभाषा ही बदल दी है।

Tuesday, May 3, 2016

2014 में अगर कांग्रेस फिर आ जाती तो 2016 में ये हो जाता हिन्दुओ का हाल !

2014 में अगर कांग्रेस फिर आ जाती तो 2016 में ये हो जाता हिन्दुओ का हाल !

UPA 2 सरकार देश में एक ख़ास बिल ला रही थी जिसका नाम कुछ "सांप्रदयिकता विरोधी कानून" था जिसे सोनिया गांधी व् उसके मंत्री खुद ड्राफ्ट कर रहे थे


उस कानून में क्या क्या नियम थे जरा वो देख लें, अगर कांग्रेस सत्ता में आ जाती 2014 में तो आज 2016 में हिन्दुओ के साथ ये सब हो रहा होता


* अगर हिन्दू महिला का बलात्कार दंगे में हो जाये तो उस बलात्कार के लिए मुस्लिम को दोषी नहीं माना जायेगा, बलात्कार का केस भी नहीं होगा


* हिन्दू को कोई भी पूजा पाठ, घर में भी करना हो तो इलाके के अल्पसंख्यको से आज्ञा लेकर करना होगा
* दंगा हुआ तो उसके लिए दोषि केवल हिन्दू को माना जायेगा और उसपर केस किया जायेगा


* अगर मुस्लिम कोई भी केस हिन्दू पर करेगा तो उसकी सुनवाई केवल विशेष अदालत में होगी जिसमे 7 जज होंगे, 4 मुस्लिम तथा 3 अन्य वामपंथी


* बलात्कार की शिकार हिन्दू महिला थाने में शिकायत भी नहीं कर सकेगी, अन्यथा उसी पर घृणा फ़ैलाने का केस दर्ज कर लिया जायेगा


* 100 किलोमीटर दूर कोई भी मुस्लिम आप पर केस कर दे, चाहे वो आपको जनता भी ना हो, आप पर केस बन जायेगा और आपको अदालत में खुद को बेकसूर साबित करना होगा।


इस तरह की कई और भी धाराएं कांग्रेस ला रही थी
इनको ड्राफ्ट करने वालो में सोनिया गांधी, चिदंबरम, कपिल सिब्बल, सुशिल शिंदे, JNU के प्रोफेसर और कई अन्य बुद्धिजीवी थे।

Thursday, April 28, 2016

क्या बुर्का न पहनकर महिलाएँ पुरुषों को बलात्कार करने का आमंत्रण देती हैं..?

बुर्का पर्दा नुमा आकृतिहीन परिधान सुरक्षा की गारंटी की तरह पेश किया जाता है..!

 कुछ लोगों का कहना है कि बुर्का न पहनकर महिलाएँ पुरुषों को बलात्कार करने का आमंत्रण देती हैं..! जबकि मुझे लगता है कि वस्त्र कभी भी बलात्कार का कारण नहीं रहे हैं, इस बारे में मैं पहले से कहता आ रहा हूँ और लिख चुका हूँ फिर भी आश्चर्य होता है कि बहुत से लोग अब भी लिख रहे हैं कि महिलाओं के अंगप्रदर्शक पहनावे के कारण पुरुषों के लिए अपने आपको काबू में रखना मुश्किल हो जाता है। इसी तर्क को आधार बनाकर मैं आपके सामने आज एक ऐसा उदाहरण प्रस्तुत करने जा रहा हूँ, जिससे पता चलता है कि प्रचलित धारणा के विपरीत बुर्के में पूरी तरह ढँकी-छिपी महिलाएँ भी बलात्कार से बच नहीं पातीं..!
जी हाँ, यह एक तथ्य है। इस्लाम ने इस मूर्खतापूर्ण विचार का अनुगमन किया कि बलात्कार होने पर वह पीड़िता का दोष माना जाएगा और उन्होंने औरतों के लिए बुर्का पहनने का यह भयंकर नियम लागू कर दिया। मुस्लिम महिलाओं को, उनके परिवार की धार्मिक कट्टरता के अनुपात में, अपने शरीर के अधिकांश या किसी भी अंग को खुला रखने की इजाज़त नहीं है। उनके विचार में महिलाओं के बाल, उनके सामान्य कपड़े, उनके हाथ, यहाँ तक कि उनका चेहरा और आँखें भी किसी पुरुष को इतना उत्तेजित करने के लिए काफी हैं कि वह उन पर बलात्कार करने के लिए उद्यत हो जाए। यह पर्दा-नुमा, आकृतिहीन परिधान उनकी सुरक्षा की गारंटी की तरह पेश किया जाता है..!
करीब दो साल पहले मैं लखनऊ, गया था जहां मुसलमानों की तादाद तुलनात्मक रूप से कुछ ज़्यादा है, तब वहाँ मैंने लगभग दस साल की एक लड़की को बुर्का पहने देखा। मुझे वह बड़ा अमानवीय लगा, जैसे उस मासूम बच्ची को जेल में डाल दिया गया हो। मेरी नज़र में यह एक बीमार समाज द्वारा की जाने वाली कार्यवाही है। बुर्के के पीछे का मूल विचार यह है कि पुरुष किसी महिला को देखकर अपनी यौनेच्छाओं पर काबू नहीं रख सकते, भले ही वह महिला एक दस साल की अबोध बच्ची ही क्यों न हो। क्या पुरुष वास्तव में अपने आपको काबू में रखने में इतने असमर्थ होते हैं..?
मुझे यह सोचकर बड़ा दुख होता है हालांकि वह बच्ची ऐसा महसूस नहीं करती होगी और न ही उसकी माँ या बहन। मैं जानता हूँ कि उसका समाज अपने दैनिक जीवन में इतनी गहराई से नहीं सोचेगा लेकिन मेरे लिए यह बहुत कठोर बात है और यह मुझे आम तौर पर सभी धर्मों पर और विशेषकर इस मज़हब पर सवाल उठाने के लिए मजबूर करता है..!
मेरी नज़र में यह पूरी तरह तर्क-हीन बात है कि पहले तो महिला से बुर्का पहनने के लिए कहा जाए कि यह उन्हें पुरुषों से सुरक्षित रखेगा और अगर बलात्कार हो ही जाए तो दोष भी उन्हीं पर मढ़ा जाएगा। कुछ लोग तर्क करेंगे कि मुस्लिम समाज में और मुस्लिम देशों में बलात्कार की घटनाएं बहुत कम देखने में आती हैं। ऐसे देशों में, जहां इस्लाम के शरिया कानून लागू हैं, बलात्कार से पीड़ित महिला को आज भी चार पुरुषों कि गवाही का इंतज़ाम करना पड़ता है, जो पुष्टि करते हैं कि उसके साथ बलात्कार होता हुआ उन्होंने अपनी आँखों से देखा है, जैसे कि खुद पर हुए बलात्कार की दोषी वही हो..! इसलिए आखिर अपने ऊपर हुए बलात्कार की रिपोर्ट वह करे ही क्यों...?
परिवार के पुरुष और महिलाएं सभी बलात्कार को छिपाना चाहते हैं-शर्म, कलंक और यहाँ तक कि बलात्कार के परिणामस्वरूप दी जाने वाली संभावित सज़ा का डर उन्हें सताता है। जी हाँ, इतनी बुरी तरह प्रताड़ित महिला अगर चार पुरुष गवाहों को हाजिर करने में असमर्थ रहती है तो प्रकरण खारिज हो जाता है और फिर दोष उसी पर मढ़ दिया जाता है..!
जी नहीं, आपके कपड़े आप पर होने वाले बलात्कार का कारण नहीं हो सकते और किसी महिला को सर से पाँव तक एक काले लबादे में ढँक देना भी उसे बलात्कार से सुरक्षा प्रदान नहीं कर सकता, बल्कि उसकी संभावना बढ़ जाती है..!
जी हाँ, मैं जानता हूँ कि बहुत सी मुस्लिम महिलाएं कहती हैं कि बुर्के में वे अपने आपको सुरक्षित महसूस करती हैं। प्रश्न यह है कि बुर्के के बगैर वे असुरक्षित क्यों महसूस करती हैं। कारण स्पष्ट है: क्योंकि यह आपका दोष है, उन बीमार-दिमाग धार्मिक लोगों का दोष जो खुले आम कहते हैं कि एक नाबालिग, छह साल की बच्ची को देखकर भी वे अपनी यौनेच्छा पर काबू नहीं रख पाते..!
अगर आप चाहें तो मुझे धार्मिक रूढ़ियों के प्रति असहिष्णु कह लें लेकिन जब तक ऐसी स्थिति है मैं अपनी इस बात पर अडिग रहूँगा: अगर कोई धर्म औरतों से कहता है कि यौन दुराचार और बलात्कार से बचने के लिए वह अपने आपको ढँककर रखे तो यह गलत बात है और हमेशा गलत ही रहेगी और ऐसा धर्म भी मेरी नज़र में हमेशा गलत ही रहेगा..!!