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Tuesday, July 12, 2016

PM मोदी के समर्थन में आई प्रियंका गांधी




संसद का मॉनसून सत्र अगले महीने में होने की सम्भावना है, और आशंका व्यक्त की जा रही है कि मोदी सरकार जीएसटी बिल को पास कराने में कामयाब हो जाएगी। यदि सब कुछ ठीक-ठाक रहा तो वस्तु एवम सेवा कर को राज्य सभा में पास करा लिया जाएगा। मोदी सरकार का यह सबसे बड़ा बिल है जोकि लोकसभा में पास हो चूका है, लेकिन राज्य सभा में यह पास नहीं हो पाया है। 

भले ही देश में मोदी की सरकार है लेकिन राज्य सभा में अभी भी कांग्रेस बहुमत में है। इसलिए जीएसटी बिल को राज्य सभा में पास कराने के लिए मोदी सरकार को कांग्रेस पार्टी की सहयोग की जरुरत है। हालांकि, मोदी सरकार के वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि वस्तु एवम सेवा कर को पास कराने में कांग्रेस पार्टी जरूर सहयोग करेगी क्योंकि ये बिल कांग्रेस सरकार के समय से संसद में लंबित है।

इसी क्रम में मोदी सरकार के दो वर्ष के कार्यकाल में पहली बार हुआ है जब कांग्रेस पार्टी की प्रमुख हस्ती प्रियंका गांधी वाड्रा ने मोदी सरकार की तारीफ की है। एक न्यूज़ एजेंसी ने इस बात का खुलासा किया है कि प्रियंका गांधी वाड्रा ने मोदी का समर्थन करते हुए कहा है कि वो मोदी सरकार के जीएसटी बिल के समर्थन में है, और इसके लिए उन्होंने अपने भाई और कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी को भी मनाया है।

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी को भी मनाया है 

जीएसटी को लेकर प्रियंका गांधी वाड्रा की विचारधारा कांग्रेस पार्टी के अन्य नेताओं से भिन्न है। प्रियंका की माने तो इससे देश का भला होगा। जिससे देश में रोजगार का सृजन होगा तथा विकास कार्य में तेजी आएगी।

हालांकि, कांग्रेस के कई नेता प्रियंका की इस बयान से नाखुश है। पार्टी के कई दिग्गज नेताओं का मानना है कि प्रियंका में राजनीति परख की सीमा सिमित है। p

आपको बता दें की प्रियंका गांधी उत्तर प्रदेश चुनाव में सी एम पद की उम्मीदवार बन सकती है। आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि नहीं की गई है, परन्तु आशंका व्यक्त की जा रही है कि प्रियंका गांधी वाड्रा उत्तर प्रदेश चुनाव में कांग्रेस पार्टी से सीएम पद के उम्मीदवार होंगी। 

ऐसे में प्रियंका गांधी नहीं चाहती है कि देश और खास कर उत्तर प्रदेश की जनता को लगे कि कांग्रेस पार्टी जानबूझकर देश की प्रगति में अवरोध पैदा कर रही है। प्रियंका चाहती है कि एक साफ़ छवि लेकर वो राजनीति के मैदान में उतरें। इस संदर्भ में प्रियंका पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के संपर्क में है और उन्हें भी मनाने की कोशिश कर रही है। अब अगले मॉनसून सत्र में वस्तु एवम सेवा कर बिल को राज्य सभा में पास होने की पूरी संभावना है। 

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Thursday, May 26, 2016

OMG, BJP को बदनाम करने के लिए कांग्रेस नेताओं ने ढूंढें अजीब तरीके


OMG, BJP को बदनाम करने के लिए कांग्रेस नेताओं ने ढूंढें अजीब तरीके

Faridabad 26 May 2016: बीजेपी सरकारों और बीजेपी नेताओं को जनता की नजर में गिराने के लिए कांग्रेस नेताओं से ऐसे ऐसे तरीके ढूंढ निकाने हैं कि सुनकर किसी के भी पैरों तले जमीन खिसक सकती है। इस खबर को पढ़ने के बाद आपको पता चल जाएगा कि जिस राज्य से कांग्रेस के पैर उखड़ते हैं वहां पर कांग्रेस सत्ता के लिए कितनी बेचैन हो जाती है और सत्ता में वापसी के लिए कैसे कैसे हथकंडे अपनाती है। इसके लिए अगर जनता को बिजली और पानी के लिए रात रात भर परेशान भी करना पड़े तो ये नेता गुरेज नहीं करते।
ताजा मामला फरीदाबाद का है। बता दें क़ि भले ही हरियाणा और फरीदाबाद में बीजेपी की सरकार हो गयी हो लेकिन फरीदाबाद नगर निगम में कांग्रेस के ही पार्षद हैं और कांग्रेस के चमचे हैं क्योंकि यहाँ पर 10 साल तक कांग्रेस का ही राज रहा है।
अब नगर निगम के दोबारा चुनाव होने वाले हैं जिसमें कांग्रेस के पूर्व पार्षद फिर से चुनाव जीतने के लिए तरह तरह के तरीके आजमा रहे हैं। जानकारी के लिए बता दें कि इन पार्षदों की नगर निगम और बिजली कर्मचारियों से साठ गाँठ है क्योंकि 10 साल तक फरीदाबाद में इनकी तूती बोलती थी।
कोंग्रेसियों ने क्या अपनाए तरीके
बता दें कि बीजेपी सरकार बनने के बाद फरीदाबाद में सबसे पहला काम बिजली और पानी पर दिया जाने लगा था। कांग्रेस सरकार में जहाँ 15-16 घंटे बिजली मिलती थी वहीँ बीजेपी सरकार आने के बाद फरीदाबाद में 22-24 घंटे मिलने लगी है।

कांग्रेस के नेता अक्सर अपने इलाकों में ट्यूबवेल चौकीदारों या पानी की टंकी पर बैठने वाले लोगों से कहकर या उन्हें ले देकर पानी बंद करवा देते हैं, कभी कभी पानी की नालियों में ईंट पत्थर भरवाकर उन्हें जाम करवा देते हैं, कभी बिजली कटवा देते हैं और कभी पानी की नालियाँ जाम करवा देते हैं। जब जनता परेशान हो जाती है तो ये नेता कहते हैं कि बीजेपी नेता पानी नहीं दे रहे हैं, बीजेपी नेता बिजली कटवा रहे हैं, बीजेपी सरकार में गन्दगी फ़ैल रही है। उसके बाद ये नेता बिजली और पानी के लिए परेशान जनता को इकठ्ठा करते हैं और बिजली दफ्तर और नगर निगम के ऑफिस के बाहर धरना देते हैं। धरना देने के बाद ये लोग बिजली अपने आप सही करवा देते हैं, पानी का कनेक्शन भी सही करवा देते हैं और काम का क्रेडिट खुद ले लेते हैं। मतलब समस्या भी खुद खड़ी करना और क्रेडिट भी खुद ले लेना। वाह क्या तरीका ढूंढ निकाला है।
ये कलयुगी नेता चुनाव जीतने के लिए कुछ भी करने को तैयार रहते हैं। हाल ही में एक नेता ने अपने इलाके का पानी का कनेक्शन कटवा दिया, जनता करीब 10 दिन तक पानी की समस्या के लिए तड़पती रही, उसके बाद उस नेता के पास पहुंची तो उसने पहले एक टैंकर भिजवाया उसके बाद उन लोगों से बोला कि मै कल धरना देने वाला हूँ आप लोग भी मेरे साथ आइये, उसके बाद वो नेता कई लोगों को अपनी गाड़ियों में भरकर नगर निगम पहुंचा और 10 मिनट का धरना दिया और फोटो परेशान लोगों के साथ फोटो खिंचवा लिए। जब तक कि वह घर पहुँचता पानी की समस्या सही हो चुकी थी क्योंकि उसने फोन करके बोल दिया कि भैया मेरा धरना ख़त्म हो गया है, जनता मेरा गुणगान कर रही है अब आप पानी का कनेक्शन खोल दें।

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Wednesday, May 25, 2016

राहुल का दलित प्रेम: दलित के घर पे, पानी पीने से मना ही नहीं, गिलास तक फेंक दिया

राहुल का दलित प्रेम: दलित के घर पे, पानी पीने से मना ही नहीं, गिलास तक फेंक दिया 


राहुल गाँधी, दलितों के घर पहुँच कर, फोटो खींचना तो खूब जानते हैं लेकिन यदि बात करें कुछ शिष्टाचार की तो आइये दिखाते हैं क्या होता है!
देखते हैं क्या होता है जब राहुल गाँधी एक दलित के घर जाते हैं.. सब फोटो वोटो लेके, जाते वक्त, उन्हीं दलितों से कैसा व्यवहार किया!



राहुल गाँधी और पूरी कांग्रेस पार्टी, देश में जगह-जगह, अपने आप को दलित-हितैषी सिद्ध करने के लिए, समय-समय पर, कोई न कोई नौटंकी करते रहते हैं! हम दलितों के विरुद्ध ही नहीं, हर भारतीय के खिलाफ होने वाले अत्याचार के विरुद्ध हैं! हम हिन्दुओं से जुड़े विषय जरूर उठाते हैं, क्योंकि वो हमारी प्राथमिक जिम्मेवारी है लेकिन, हम तब भी उतने ही दुखी होते हैं जब एक भारतीय मुसलमान के साथ जादती होती है!
हम राष्ट्रवादी हिन्दू हैं. और हमारे लिए, हर हिन्दू, श्रेष्ठ हन्दू है.
लेकिन, कांग्रेस का दलित-प्रेम, परिस्थितियों को देख कर उमड़ता है!
केस 1: यदि राज्य में भाजपा है
क्या अत्याचार करने वाला कोई दूसरा हिन्दू है?
यदि हाँ, तो कांग्रेस पार्टी, हिन्दुओं को विभाजित करने की पुरजोर कोशिश करेगी! उस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर  उछाला जायेगा और ये दिखाया जाएगा की हिन्दुओं में एक जाति, दूसरी जाति को जीने नहीं दे रही!
क्या अत्याचार करने वाला कोई मुसलमान अथवा इसाई है?
इस स्थिति में, कांग्रेस पार्टी एकदम चुप्पी साध, मुख-बधिर बन खड़ी रहेगी! क्योंकि, मुसलमान और इसाई, वोट-बैंक हैं! उन्हें भला कैसे नाराज़ किया जा सकता है! इस केस में, दलित के लिए कांग्रेस की तरफ से सांत्वना भी नहीं आएगी!
केस 2: यदि राज्य में भाजपा नहीं है

इस स्थिति में, कांग्रेस पार्टी, दलित-हितैषी वाला अपना नकाब एक तरफ रख देती है! न कोई बवाल और न कोई मुआइना!

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Monday, May 23, 2016

गांधी परिवार पर हुआ एक और खुलासा, राहुल गांधी पर बलात्कार का लगा आरोप


 गांधी परिवार पर हुआ एक और खुलासा, राहुल गांधी पर बलात्कार का लगा आरोप




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Source:-http://intellibriefs.blogspot.in/2007/01/rahul-gandhi-involved-in-gang-rape.html?m=1

घटना ३ दिसंबर २००६ की है जब राहुल गांधी अपने ७ और दोस्तों के साथ अमेठी के प्रवास पर थे जिनमें ४ विदेशी भी थे जो ब्रिटेन और इटली से आये हुए थे | रात लगभग ९ बजे ये सब लोग हाई सिक्योरिटी जोन में स्थित एक गेस्ट हाउस में शराब पीने में व्यस्त थे जब एक बिना बुलाया मेहमान गलती से वहां पहुँच गया | ये मेहमान अमेठी के कांग्रेस पार्टी कार्यकर्ता बलराम सिंह की २४ वर्षीया बेटी, सुकन्या सिंह थी जिसका परिवार गांधी-नेहरू परिवार का हमेशा से ही भक्त रहा है | सुकन्या एक पार्टी कार्यकर्ता होने के नाते पिछले २ सालों से बार बार राहुल गांधी से मिलने का समय मांग रही रही पर बेचारी को मिलने के लिया बुलाया गया तो भी कहाँ, रात ९ बजे उसी अमेठी के गेस्ट हाउस में |
जब सुकन्या राहुल गांधी से मिलने गेस्ट हाउस के अंदर पहुंची तो पहले राहुल गांधी ने उससे थोड़ी बहुत बातें की फिर अपने दोस्तों के साथ बैठा लिया और शराब पीने का निमंत्रण दिया | सुकन्या ये सब देख काफी हैरान थी और खुद को काफी असहज महसूस करने के कारण शराब पीने से मना कर दिया और घर जाने की आज्ञा मांगी | उसके मना करने के बावजूद उसे जबरदस्ती रोक लिया गया और ना सिर्फ उसे जबरन शराब पिलाई गयी बल्कि बारी बारी से उसके साथ बलात्कार भी किया गया | वो रोटी रही, चिल्लाती रही और मदद की गुहार करती रही लेकिन सुरक्षा कर्मियों समेत किसी ने उसकी एक ना सुनी और कई घंटे तक उसके साथ दुराचार होता रहा | उसे अपना मुंह बंद करने के लिए धमकी दी गयी और ५०००० रुपयों का लालच दिया गया |

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रोती-बिलखती सुकन्या सीढ़ी पुलिस थाने पहुंची पर उसे वहां भी निराशा ही हाँथ लगी | सत्ता की गुलाम उत्तर प्रदेश पुलिस ने राहुल गांधी के खिलाफ केस दर्ज़ करने से साफ़ मना कर दिया और और उसे घर जाने को बोला | इसी बीच पुलिस की सूचना पर अमेठी के कांग्रेस कार्यकर्ता इकठ्ठा हो सुकन्या के घर जा पहुंचे और इससे पहले पीड़िता कुछ बोल पाती, उन लोगों ने एक झूठी कहानी परिवार को सुना डाली | उन लोगों ने उल्टे लड़की पर ही चरित्रहीन होने और राहुल गांधी को जानबूझकर फंसने का दोष लगा दिया | लड़की के पिता ने भी उसकी एक ना सुनी और बुरी तरह पीट दिया | जब उस बलात्कार की घटना के गवाह, गेस्ट हाउस के सुरक्षा कर्मी, लड़की के पिता से मिले और वास्तविकता बताई तो पिता ने राहुल गांधी और कांग्रेस परिवार से डरकर चुप रहना ही ठीक समझा |

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सुकन्या की माँ सुमित्रा देवी, जिन्होंने इस घटना की वास्तविकता समझ प्रतिरोध करने की हिम्मत दिखाई, बेटी को लेकर अमेठी पुलिस मुख्यालय जा पहुंचीं | लेकिन वहां भी पुलिस अधिकारियों ने शिकायत दर्ज़ करने से इंकार कर उन्हें चुप रहने का सुझाव दिया | माँ बेटी न्याय की आशा में इधर से उधर भटकते रहे लेकिन किसी ने भी उनकी मदद नहीं की | सभी गांधी परिवार का प्रभुत्व जानते थे और इसी वजह से चुप रहना ही ठीक समझा | सुमित्रा देवी द्वारा बुलाई गयी प्रेस कांफ्रेंस में भी बहुत काम पत्रकार आये और कांग्रेस पार्टी कार्यकर्ताओं ने प्रेस कॉन्फ्रेंस बीच में ही रुकवा माँ बेटी को गन्दी गालियां दीं और उन्हें बेइज़्ज़त किया |

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२७ अक्टूबर २००६ को सुमित्रा देवी ने दिल्ली आकर सोनिया गांधी से मिलाने का वक़्त माँगा लेकिन सोनिया ने मिलने से मना कर दिया | कोई और रास्ता ना देख पीड़िता की माँ ने मानवाधिकार आयोग में गुहार लगायी लेकिन उन लोगों ने भी सिर्फ शिकायत दर्ज़ कर उन्हें जाने को बोल दिया | कांग्रेस पार्टी के बड़े नेताओं ने परिवार से मिलकर मीडिया में ये बात लाने की हालत में जान से मारने की धमकी दे डाली और जिन मीडिया हाउस को बात पता भी लगी उन्हें मुंहमांगी कीमत पहुंचा, उन्हें चुप करा दिया गया | आज भी ये परिवार न्याय की आशा में इधर उधर भटक रहा है और इन्हें इन्साफ दिलाना हिन्दू समाज का कर्त्तव्य है | 

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Saturday, May 21, 2016

अपने कुत्ते का झूठा बिस्किट खा लेते हैं राहुल गाँधी,, कांग्रेसियों को भी खिलाते हैं वही बिस्किट..


खुलासा: अपने कुत्ते का झूठा बिस्किट खा लेते हैं राहुल गाँधी




New Delhi: राहुल गाँधी के बारे में एक सनसनीखेज खुलासा हुआ है। यह खुलासा एक समय कांग्रेस के कद्दावर नेता रहे हेमंत विश्वा शर्मा ने किया है। वर्तमान में विश्वा बीजेपी से जुड़ चुके हैं और इस चुनाव में जीतकर बीजेपी से विधायक भी बन चुके हैं, उन्हें असम की जीत का दूसरा हीरो कहा जा रहा है।
उन्होंने Zee News ने बातचीत में राहुल गाँधी के बारे में कई खुलासे किये। उन्होंने कहा कि राहुल गाँधी अपनी पार्टी की दिक्कतों पर ध्यान देने से अधिक समय अपने पालतू कुत्तों से खेलने में बिताते हैं।
उन्होंने बताया कि जब कांग्रेस के नेता राहुल गाँधी से मिलने जाते हैं और उन्हें खाने के लिए टेबल पर बिस्किट रखा जाता है तो उसमे से उनका कुत्ता भी बिस्किट उठा उठाकर खाता रहता है, राहुल गाँधी कुत्ते का जूठा बिस्किट खुद भी खाते हैं और दोस्तों को भी खिलाते हैं।

कौन हैं हेमंत विश्वा
हेमत विश्वा शर्मा असम में 2011 विधानसभा चुनाव में जीत के सूत्रधार थे लेकिन कांग्रेस में उनकी अनदेखी के कारण उन्होंने पिछले साल बीजेपी ज्वाइन कर लिया और इस चुनाव में जीत की पटकथा लिख दी।
उन्होंने कहा कि राहुल गाँधी का किसी चीज में ध्यान नहीं लगता, जब उनके यहाँ कोई मिलने जाता है तो वे अपने कुत्ते पर अधिक ध्यान देते हैं और लोगों से बातचीत में कम ध्यान देते हैं, उनका कुत्ता रिश्तेदारों को सर्व की गयी प्लेट में से बिस्किट उठाकर खाने लगता है और राहुल भी वही बिस्किट खाते हैं। उन्होंने बताया कि राहुल गाँधी का देश की समस्याओं में भी कोई ध्यान नहीं रहता।

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Tuesday, May 17, 2016

जनता के साथ धोखा - कांग्रेस ने 2010 को 25 पाकिस्तानी आतंकियों को जेल से कर दिया था रिहा


जनता के साथ धोखा - कांग्रेस ने 2010 को 25 पाकिस्तानी आतंकियों को जेल से कर दिया था रिहा







 मनमोहन सिंह के नेत्रत्त्व वाली कांग्रेस की गठबंधन सरकार ने वर्ष 2010 में पाकिस्तान के उन 25 खतरनाक आतंकियों को जिन्हें 1999 में वाजपेई सरकार ने एयर इंडिया के विमान IC814 के हाइजैक करने वाली डील में भी नहीं छोड़ा था उन्हें केवल इसलिए छोड़ दिया था क्योंकि मनमोहन सिंह सरकार पाकिस्तान के साथ अपने रिश्तों में सुधार लाना चाहती थी | अब NIA ने खुलासा किया है कि उन्ही 25 में से एक आतंकी जिसे भारत में आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद का हैंडलर माना जाता था, जिसका नाम लतीफ है | उसी ने 2 जनवरी को पठानकोट एयरबेस पर हुए हमले का नेत्रत्त्व किया था | सारे आतंकियों को कपडे, जूते, आदि सामान उसी ने मुहैया करवाए थे |
हिजबुल मुजाहिद्दीन, लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद के आतंकियों को छोड़ दिया था यूपीए सरकार ने –
TOI में छपी खबर के मुताबिक इन आतंकियों को देश की सबसे सुरक्षित माने वाली जेलों से कांग्रेस सरकार के आदेश पर 28 मई 2010 को छोड़ा गया था | इन आतंकियों को पकड़ने के बाद जम्मू-कश्मीर, श्रीनगर, आगरा, वाराणसी, नैनी और तिहाड़ की जेलों में रखा गया था | लेकिन तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने इन आतंकियों को इन जेलों से छोड़कर बाघा सीमा के रास्ते से पाकिस्तान पहुँचा दिया था |

1999 में हुए कंधार प्लेन हाइजैक के वक्त भी नहीं छोड़ा था वाजपेई सरकार ने इन्हें –
यह आतंकी कितने खतरनाक थे इस बात का अंदाजा इसीसे लगाया जा सकता है कि पंडित अटलबिहारी वाजपेई की सरकार के समय में हाइजैक किये गए एयर इंडिया के विमान IC814 को आतंकियों की कैद से छुडाने के बदले में भी आतंकियों ने इसी लतीफ समेत कुल 31 आतंकियों को छोड़ने की मांग रखी थी लेकिन वाजपेई सरकार ने इन्हें छोड़ने से साफ़ मना कर दिया था | लेकिन कांग्रेस ने केवल पाकिस्तान के साथ अपने रिश्तों को सुधारने के लिए दुनिया के इन 25 सबसे खूंखार आतंकियों को छोड़ दिया था |

कौन है लतीफ-
लतीफ को आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख मौलाना मसूद अजहर का सबसे नजदीकी माना जाता है | लतीफ को भारत में जैश का मुखिया भी कहा जाता है | इसे गिरफ्तार करने के बाद सबसे पहले जम्मू-कश्मीर की जेल में रखा गया था लेकिन जैसे ही सरकार को इस बात की भनक लगी की लतीफ को छुडाने के लिए उसके कुछ साथी कोई बड़ा हमला या फिर कोई बड़ी शाजिश को अंजाम दे सकते है तो ऐसे में भारत सरकार ने उसे जम्मू-कश्मीर की जेल से सीधे वाराणसी की जेल में बंद कर दिया था |

लेकिन जब 28 मई 2010 को तत्कालीन यूपीए सरकार ने 25 खूंखार आतंकियों को छोड़ा था और उन्हें पूरी सुरक्षा में पाकिस्तान भेजा था तो उनमें से एक आतंकी यह भी था | एनआईए ने खुलासा किया है कि पठानकोट एयरबेस पर हुए हमले को अंजाम देने वाला और इसे पूर्णतः हैंडल करने वाला लतीफ ही है |
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Monday, May 16, 2016

पठानकोट हमले का कांग्रेस कनेक्शन











पठानकोट हमले में कांग्रेस भले ही सरकार पर आक्रामक होने की कोशिश कर रही थी लेकिन पठानकोट हमले की असली वजह कांग्रेस सरकार थी। जी हां, ये बात सच है। एक अंग्रेजी अखबार के मुताबिक पठानकोट हमले का हैंडलर शाहिद लतीफ को मनमोहन सिंह सरकार ने 2010 में गुडविल जेस्चर के तहत छोड़ा था। यूपीए सरकार ने यह कदम पाकिस्तान के साथ रिश्ते सुधारने के लिए उठाया था। अंग्रेजी अखबार ने अपने सूत्रों के हवाले से यह दावा किया कि लतीफ 11 साल से भारतीय जेल में आतंकी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप में बंद था। वह उन हिजबुल मुजाहिद्दीन और लश्कर के तैयबा के उन 25 आतंकियों में शामिल था जिसे 28 मार्च 2010 को यूपीए सरकार द्वारा छोड़ा गया था। उन आतंकियों को कश्मीर, काशी और देश के अन्य जेलों में बंद रखा गया था। 




दिलचस्प बात यह भी है कि लतीफ को कांधार विमान अपहरण के दौरान भी छुड़वाने की कोशिश की गई थी लेकिन वाजपेयी सरकार ने इसकी इजाजत नहीं दी। अखबार ने लिखा है कि जो काम आईएसआई कांधार अपहरण के जरिए न कर सका वो इसने बड़ी आसानी से मनमोहन सरकार को मना कर करवा लिया। आईएसआई मनमोहन सरकार को ये समझाने में कामयाब रहा कि लतीफ को छोड़ने से दोनों देश के बीच के रिश्ते सुधरेंगे। 


शाहिद लतीफ पठानकोट हमले का हैंडलर है और वो आतंकी गुट के सरगना मसूद अजहर के काफी करीब माना जाता है। वो जैश के आतंकी गतिविधियों को भारत में बढ़ने का जिम्मा संभालता है।  

Sunday, May 15, 2016

सुब्रमणयम स्वामी ने खोला सोनिया गांधी का एक और काला चिट्ठा (देखें विडियो)

सुब्रमणयम स्वामी ने खोला सोनिया गांधी का एक और काला चिट्ठा (देखें विडियो)


 हैलीकाप्टर घोटाले के बाद गांधी परिवार की एक और काली करतूत सामने आई है। गांधी परिवार पर स्ट्रोक पर स्ट्रोक मारने वाले बीजेपी के वरिष्ठ नेता और राज्य सभा से सांसद सुब्रमणयम स्वामी ने एक और सोनिया गांधी का काला चिट्ठा खोल कर रख दिया है। लगातार गांधी परिवार और सोनिया गांधी को निशाना बना रहे स्वामी ने कहा की सोनिया गांधी की डिग्री नकली है।
इस बात का खुलासा तब हुआ जब चुनाव आयोग को दिये गये हलफ नामें में सोनिया गांधी ने अपने आप को विश्वविख्यात अमेरिकी कैंब्रिज विश्वविद्यालय का अंग्रेजी विषय का डिग्री धारक बताया। स्वामी के कथन के अनुसार जब वो कैंब्रिज विश्वविद्यालय के ईकोनामिक्स का लेक्चर लेने गये , तब वहां जाकर उन्हे ये पता लगा कि सोनिया जिस डिग्री का हवाला चुनाव आयोग को दे रहीं है, वो फर्जी डिग्री है। सोनिया गांधी कभी कैंब्रीज विश्वविद्यालय में पढीं ही नही वो उस विश्वविद्यालय की स्टूडेन्ट रहीं ही नही। कैंब्रिज विश्वविद्यालय को लिखे एक पत्र में भी विश्वविद्यालय ने भी स्वामी के दावो की प्रमाणिकता साबित कर दी। विश्वविद्यालय ने स्वामी के पत्र के जवाब में ये कहा सोनिया गांधी यहां की स्टूडेन्ट कभी नही थी।
उन्होने कहा की पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी इस विश्वविद्यालय में फेल हो गये थे फिर उन्होने लंदन में इम्पोरियम में एडमीशन लिया वहां भी वो फेल हो गई। फिर उन्होने सोनिया से शादी कर ली । सोनिया से शादी करने के बाद उन्हे असफलत ही असफलता हांथ लगी।
स्वामी जी ने जब सोनिया गांधी से डिग्री के विषय में दिये गये झूठे हलफनामें के विषय में सवाव पूछा,तो सोनिया गांधी ने पहले तो मिस प्रींटिंग का बहाना किया फिर टाईपिंग में मिस्टेक बताया। स्वामी जी ने कौमेडी करते हुए कहा कि इस टाईपिंग मिस्टेक को गिनीज बुक आफ वर्ल्ड रिकार्ड में दर्ज करा देना चाहिए। अब देखना यह होगा कि मोदी की असली डिग्री पर भी सवाल ऊठाने वाले केजरीवाल अब सोनिया की नकली डिग्री पर क्या करतें हैं।

देखें  विडियो



Friday, May 13, 2016

‎Agusta और Air India के बाद तीसरा बड़ा Scam, अब नेवी के जहाज खरीद में घिरी यूपीए सरकार...

Agusta और Air India के बाद तीसरा बड़ा Scam, अब नेवी के जहाज खरीद में घिरी यूपीए सरकार...

यूपीए सरकार पर अब अगस्ता वेस्टलैंड डील से भी बड़े घोटाले के आरोप लग रहे हैं. 'आज तक' ने खुलासा किया है कि मनमोहन सिंह की सरकार के दौरान नेवी के 9 जहाजों की खरीद में सरकारी खजाने को बड़े स्तर पर चूना लगाया गया. 

केंद्र सरकार ने इस डील के तहत इटली की कंपनी द्वारा डिलीवर किए गए दो नौसैनिक टैंकरों की खरीद मामले में जांच के लिए आदेश दे दिए हैं.

नेवी के लिए जहाज की खरीद में यह गड़बड़ी अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर सौदे से भी बड़ा घोटाला हो सकता है, क्योंकि शुरुआती जानकारी के मुताबिक, तत्कालीन यूपीए सरकार ने इटली की कंपनी को विशेष छूट देते हुए इस डील को मंजूरी दी थी.
टैंकरों के सौदे को लेकर उठे बड़े सवाल-

1. यह मामला भारतीय नौसेना के बेड़े में शामिल आईएनएस दीपक और आईएनएस शक्ति के सौदे से जुड़ा हुआ है.

2. इस सौदे को अंतिम रूप देने के लिए साल 2009 में यूपीए सरकार और इंटली की कंपनी के बीच हुआ समझौता जांच के दायरे में है.

3. यूपीए सरकार पर आरोप है कि उसने इटली के कंपनी को डील के लिए नियम से हटकर विशेष छूट दी थी.

4. बताया जाता है कि दोनों टैंकरों के निर्माण में मनमोहन सरकार ने इटली की कंपनी को घटिया किस्म के स्टील इस्तेमाल की छूट दी थी.

5. नेवी के एक अधिकारी ने टैंकरों में घटिया किस्म के स्टील इस्तेमाल किए जाने का मामला उठाते हुए साल 2009 में ही जांच की मांग की थी, लेकिन तब मामला ठंडा पड़ गया था.

6. यूपीए सरकार ने साल 2009 और 2011 में आईएनएस दीपक और आईएनएस शक्ति को इटली की कंपनी से खरीदा था.

7. जब इन टैंकरों की डील हुई थी, तब एके एंटनी रक्षा मंत्री थे.

8. जहाज बनाने वाली इतावली कंपनी पर आरोप हैं कि उसने हथियार बनाने वाले स्टील की जगह कमर्शि‍यल ग्रेड के स्टील का इस्तेमाल किया था. जबकि मनमोहन सरकार ने जानकारी होते हुए भी इसकी इजाजत दी थी.

9. साल 2010 में CAG ने भी इस डील की अलोचना करते हुए सवाल खड़े किए थे. संस्था ने सरकार पर इटली की कंपनी को फेवर करने का आरोप लगाया था.

10. डील में गड़बड़झाला सामने आने के बाद रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने जांच कराने के लिए आदेश दे दिए हैं.
गौरतलब है कि साल 2006 में भारत सरकार ने टैंकरों के सौदे के लिए टेंडर जारी किया था. जिसके बाद रूस, 

कोरिया और इटली की कंपनी ने सौदे के लिए टेंडर भरा. टेंडर के मुताबिक, सिर्फ रूस की कंपनी हथियारों में इस्तेमाल होने वाले स्टील से टैंकर निर्माण के लिए तैयार थी. जबकि अचानक नियमों को बदलाव कर 2009 में इटली की कंपनी को टेंडर जारी कर दिया गया.

Tuesday, May 10, 2016

‎Agusta स्कैम के बाद ‪‎Air India Scam‬ सामने आया मतलब कॉग्रेस के लिये बुरे दिन...




एअर इंडिया से जुड़े एक बड़े घोटाले का खुलासा हुआ है। विमान में चढ़ने वाले यात्रियों की पहचान के लिये उपयोग किया जाने वाला उपकरण 'बायोमीट्रिक फेशियल रिकग्निशन डिवाइस' खरीदी गई थी। ज़ी न्यूज के पास मौजूद एक्सक्लूसिव रिपोर्ट के मुताबिक यह जरूरत सिर्फ इसलिये पैदा की गई थी, ताकि कमीशन के रूप में रिश्वत ली जा सके। इस संबंध में 24 फरवरी 2006 को एयर इंडिया प्रार्थना प्रस्ताव भी जारी किया था और इस टेंडर के लिए कनाडा की क्रिप्टोमेट्रिक्स सहित 20 कंपनियों ने आवेदन किया था।

रिपोर्ट के मुताबिक इस टेंडर को हासिल करने के लिये क्रिप्टोमेट्रिक्स ने नाजिर कारीगर नाम के एक व्यक्ति के ज़रिए एयर इंडिया के अधिकारियों को रिश्वत दी थी। नाजिर कारीगर एक कनाडा में रह रहे एक अप्रवासी भारतीय उद्योगपति हैं। एयर इंडिया के के अधिकारियों से कारीगर की मिलीभगत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उसके पास एयर इंडिया के इस टेंडर की पूरी कॉपी 28 दिसंबर 2005 को यानि सार्वजनिक होने के करीब दो महीने पहले से ही मौजूद थी। इस दौरान टेंडर की प्रक्रिया में क्रिप्टोमेट्रिक्स को आगे रखने के लिए 4 लाख 50 हजार डॉलर की रिश्वत नाजिर कारीगर के मुंबई के अकाउंट में दी गई। मामले में रिश्वत के लेन-देन के लिये भी कॉन्ट्रैक्ट किया गया था, जिसके मुताबिक 40 लाख डॉलर यानी 26 करोड़ 64 लाख रुपये की रिश्वत तत्कालीन उड्डयन मंत्री प्रफुल्ल पटेल को देना थी। साथ ही यह भी लिखा था कि जैसे-जैसे डील आगे बढ़ेगी उसी हिसाब से रिश्वत के पैसे भी पहुंचाए जाते रहेंगे। हालांकि ये डील अपने अंजाम तक नहीं पहुंच पाई।

'ज़ी न्यूज' के पास इस घोटाले से जुड़े सैकड़ों कागजात हैं, जिनका गहराई से अध्ययन किया जा रहा है। ऐसे में अभी कई और अहम जानकारियां सामने आ सकती हैं। नाजिर कारीगर ने इस पूरे रिश्वतकांड में मध्यस्थ की भूमिका निभाई है। नाजिर कारीगर ने प्रफुल्ल पटेल से मुलाकात करके रिश्वत पहुंचाने का भी दावा किया है। यह डील करीब 10 करोड़ 50 लाख डॉलर यानी करीब 698 करोड़ रुपये की थी, जिसका 30 प्रतिशत हिस्सा नाजिर कारीगर के जरिये एयर इंडिया के अधिकारियों और पीपी (प्रफुल्ल पटेल) को दिया जाना था।

#‎AgustaWestland‬ स्कैम का मामला शांत ही नहीं हुआ और ये ‪#‎AirIndiaScam‬ और आ गया मतलब आने वाले दिन कॉग्रेस के लिये रोमांचक होने वाले है...

Monday, May 9, 2016

5000 करोड़ के नेशनल हेराल्ड घोटाले की भाजपा कराएगी सीबीआइ जांच, मुश्किल में गांधी परिवार

5000 करोड़ के नेशनल हेराल्ड घोटाले की भाजपा कराएगी सीबीआइ जांच, मुश्किल में गांधी परिवार



नई दिल्लीः नेशनल हेराल्ड अखबार की देशभर में फैली पांच हजार करोड़ रुपये की संपत्तियों और इससे देश के रसूखदार नेताओं की जुड़ी भूमिका को देखते हुए हरियाणा की मनोहर खट्टर नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार ने इसकी सीबीआइ जांच कराने की तैयारी की है। हरियाणा सरकार का मानना है कि राज्य की विजिलेंस ब्यूरो पंचकुला जमीन सौदे से संबंधित मामले की छानबीन महज राज्य की सीमा तक ही  करने में सक्षम है। पावरफुल नेताओं से सच उगलवाने में सीबीआई की काबिल रहेगी। इस फैसले से जमीन सौदे में फंसे हरियाणा के पूर्व सीएम भूपेंद्र सिहं हुड्डा के साथ गांधी परिवार की मुश्किलें बढ़ गई हैं।


दरअसल नेशनल हेराल्ड अखबार का संचालन करने वाली एसोसिएट जर्नल्स लिमिटेड(एजेएल) को पंचकुला के सेक्टर 6 में 3500 स्क्वायर मीटर जमीन सीएम रहने के दौरान 2005 में हुड्डा ने रीअलाटमेंट किया था। जमीन कंपनी को 1982 के रेट पर पुनः आवंटित की गई थी। इस मामले में हरियाणा की स्टेट विजिलेंस ब्यूरो ने हुड्डा व एजेएल पदाधिकारियों पर शनिवार को धोखाधड़ी की विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया था। चूंकि हेराल्ड मामले में सोनिया गांधी और राहुल गांधी की भूमिका पर सवाल उठते रहे हैं। इस नाते अगर सीबीआइ जांच शुरू हुई तो इसकी आंच उन तक भी पहुंचेगी। बता दें कि भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने नेशनल हेराल्ड की पांच हजार करोड़ रुपये की संपत्तियों को गलत तरीके से कब्जे में लेने के लिए सोनिया-राहुल गांधी आदि के खिलाफ कोर्ट में मुकदमा दायर कर रखा है। वाद के मुताबिक महज 50 लाख पूंजी में यंग इंडिया नामक कंपनी को 2010 में खड़ाकर सोनिया-राहुल ने स्वामिभक्त कांग्रेसी नेताओं के साथ मिलकर 90 करोड़ लोन सहित पांच हजार करोड़ रुपये की नेशनल हेराल्ड की संपत्तियों को यंग इंडिया के सुपुर्द कराकर अपने कब्जे में ले लिया। इसमें आयकर अधिनियम समेत कई नियमों का उल्लंघन हुआ। 

Saturday, May 7, 2016

बीएसएनएल UPA के शासनकाल में घाटे में, एक और स्कैम हो सकता हैं उजागर !

बीएसएनएल UPA के शासनकाल में घाटे में, एक और स्कैम हो सकता हैं उजागर !




यूपीए ने अपने दस वर्ष के कार्यकाल में जिस तरह से योजनाबद्ध तरीके से सरकारी दूरसंचार कंपनी भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) को वित्तीय नुकसान पहुंचाया था, राजग सरकार उसकी तह में जाने की सोच रही है। सरकार इस बात की जांच करवाएगी कि वर्ष 2004 में 10 हजार करोड़ रुपये का मुनाफा कमाने वाली यह कंपनी किस तरह से वर्ष 2014 में 8,000 करोड़ रुपये का घाटा उठा रही थी। वैसे इस मामले में नया मोड़ यह आया है कि बीएसएनएल एक बार फिर मुनाफा कमाने की स्थिति में आ गई है। ऐसा पहली बार हुआ है कि ग्राहकों की संख्या बढ़ाने में इसने एयरटेल, वोडाफोन और आइडिया जैसी बड़ी दूरसंचार कंपनियों को पीछे छोड़ा है।


बीएसएनएल राष्ट्र की संपत्ति है और अगर किसी ने इसे नुकसान पहुंचाने की कोशिश की है तो उसका पता जरुर लगाया जाना चाहिए। बीएसएनएल को इस हालात में पहुंचाने की जांच करने के लिए सरकार जांच समिति गठित करेगी सरकार कई विकल्पों पर विचार कर रही है। जांच समिति का गठन भी एक विचार का बिंदू है। हां, इसमें कोई दोराय नहीं है कि पूर्व पीएम मनमोहन सिंह की सरकार ने जान बूझ कर बीएसएनएल को आगे नहीं बढ़ने दिया। अगर ऐसा नहीं होता तो आज सिर्फ दो वर्षो में यह कंपनी फिर से न मुनाफा अर्जित करने की स्थिति में आ गई है बल्कि निजी मोबाइल कंपनियों को बेहद कड़ी टक्कर दे रहा है।


उधर, दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (टीआरएआइ) के ताजे आंकड़े बताते हैं कि फरवरी, 2016 में बीएसएनएल के नए ग्राहकों की संख्या में 1.67 फीसद की बढ़ोतरी हुई है जबकि इस दौरान अन्य सभी कंपनियों के नए ग्राहकों की संख्या में संयुक्त तौर पर 0.85 फीसद का ही इजाफा हुआ है। इस दौरान एयरटेल के ग्राहकों की संख्या में 1.18 फीसद, वोडाफोन के ग्राहकों की संख्या में 1.04 फीसद की बढ़ोतरी हुई है। रात में मुफ्त काल सेवा देने की योजना से ग्राहकों की संख्या बढ़ाने में सबसे ज्यादा मदद मिली है। कंपनी के अधिकारियों का कहना है कि सेवाओं के आधुनिकीकरण का काम पिछले दस वर्षो से ठप्प पड़ा था जिसे अब फिर से रफ्तार दे दिया गया है। वर्ष 2014-15 में 672 करोड़ रुपये का संचालन लाभ अर्जित करने वाली यह कंपनी चालू वित्त वर्ष के दौरान मुनाफा कमाएगी।

Friday, May 6, 2016

बराक ओबामा और ब्रिटेन की महारानी से भी ज्यादा अमीर हैं सोनिया गांधी!



बराक ओबामा और ब्रिटेन की महारानी से भी ज्यादा अमीर हैं सोनिया गांधी!


सिलेब्रिटी नेटवर्थ.कॉम वेबसाइट द्वारा दुनिया के सबसे अमीर राजनेताओं की सूची जारी की है जिसके अनुसार सोनिया गाँधी की सम्पत्ति का जो खुलासा किया गया है, उसने दुनिया की धनवान महारानी क्वीन एजिलाबेथ द्वितीय और अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा को भी पीछे छोड़ दिया है। सोनिया गांधी की कुल संपत्ति 2 अरब डॉलर यानी करीब 1 खरब 24 अरब रुपए की बताई जा रही है।
विवादों से गहरा नाता रखने वाली सिलेब्रिटी नेटवर्थ.कॉम ने कांग्रेस अध्यक्ष को दुनिया की उन 20 राजनेताओं में शुमार किया, जो सबसे ज्यादा धनवान हैं। वेबसाइट ने सूची में सोनिया गांधी को 12वें नंबर पर रखा है। वेबसाइट के मुताबिक सोनिया के पास 2 अरब डॉलर यानी करीब 1 खरब 24 अरब रुपए की दौलत है।
सिलेब्रिटी नेटवर्थ.कॉम मानता है कि सोनिया गांधी और ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ द्वितीय की सम्पत्ति में 40 से 50 करोड़ अमेरिकी डॉलर का फर्क है। सिलेब्रिटी नेटवर्थ ने दुनिया के जिन 20 धनवान राजनेताओं की सूची जारी की है, उसमें 18 पुरुष और 2 महिलाएं हैं। सोनिया के अलावा दूसरी महिला क्वीन एलिजाबेथ द्वितीय का नाम है।
वैसे अगर एसोशिएसन फॉर डेमोक्रेटिक राइट्स की वेबसाइट नेशनल इल्केशन वॉच की मानें तो सोनिया के पास 1.38 करोड़ की संपत्ति है जिनमें 75 हजार नकद, 28.61 लाख की बैंक डिपोजिट है। उनके पास 20 लाख के म्यूचुअल फंड और 12 लाख के आरबीआई के बांड हैं। 1 लाख 99 हजार पोस्ट ऑफिस में जमा हैं जबकि 24.88 लाख पीपीएफ में जमा हैं।

जानिये स्लाइड्स के जरिये दुनिया के 20 अमीर राजनेताओं की सूची (अमेरिकी डॉलर में)

1. व्लादिमीर पुतिन (रूसी राष्ट्रपति) 40 अरब



2. भूमिबोल अदुल्यादेज (थाईलैंड के राजा) 30 अरब



3. हस्सानल बोल्किआह (ब्रूनेई के सुल्तान) 20 अरब



4. अब्दुलाह-बिन-अब्दुल अजीज-अल-साउद (सऊदी अरब के राजा) 18 अरब



5. खलिफा-बिन-जायेद-अल-नहयान (यूएई के राष्ट्रपति) 15 अरब



6. मोहम्मद-बिन-राशिद-अल-मकतूम (दुबई के अमीर) 14 अरब



7. किम जोंग-उन (उत्तर कोरिया के नेता) 5 अरब



8. हैंस एडम द्वितीय (लिचेंस्टीन के राजकुमार) 5 अरब



9. मोहम्मद छठे (मोरक्को के राजा) 2.5 अरब



10. सेबेस्टियन पीनेरा (चिली के राष्ट्रपति) 2.5 अरब


11. हमदाद-बिन-खलीफा-अल-थानी (कतर के अमीर) 2 अरब



12. सोनिया गांधी (कांग्रेस अध्यक्ष) 2 अरब


13. एल्बर्ट द्वितीय (मोनाको के राजकुमार) 1 अरब



14. काबूस बिन सैयद (ओमान के सुल्तान) 0.70 अरब



15. तेओडोरो ओबियांग नगुएमा म्बासुगु (इक्वेटोरियल गिनी के राष्ट्रपति) 0.60 अरब



16. बशर-अल-असद (सीरिया के राष्ट्रपति) 0.55 अरब



17. इल्हाम अलियेव (अजरबैजान के राष्ट्रपति) 0.50 अरब



18. एलिजाबेथ द्वितीय (ब्रिटेन की महारानी) 0.40 से 0.50 अरब



19. सबाह चौथे (कुवैत के शेख) 0.40 अरब



20. मस्वाती तृतीय (स्वाजीलैंड के राजा) 0.10 अरब

गरीबो के लिए लड़ते लड़ते आज तुम लोग ब्रिटेन की महारानी से भी अमीर हो गए होअब हम गरीबो को खुद ही लड़ने दो...                                                                                                                                                           

Tuesday, May 3, 2016

हेलिकॉप्टर घोटाले में एक और बड़ा खुलासा, बुरी तरह फंसे राहुल गांधी

हेलिकॉप्टर घोटाले में एक और बड़ा खुलासा, बुरी तरह फंसे राहुल गांधी


 बीजेपी सांसद किरीट सोमैया ने सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय को पत्र लिखा है। जिसमें उन्होंने अगस्ता वेस्टलैंड हेलिकॉप्टर घोटाला और कॉमनवेल्थ गेम्स घोटाले में लिंक बताया है। उन्होंने इन दोनों घोटालों से कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के सलाहकार कन‍िष्क सिंह का नाम भी जोड़ा है। साथ ही सोमैया ने इनके खिलाफ जांच की मांग की है।

हेलिकॉप्टर घोटाला

हेलिकॉप्टर घोटाला : एमार एमजीएफ से संबंधों की जांच होनी चाहिए

सोमैया ने मांग की है कि आगूस्ता हेलिकॉप्टर घोटाला डील में दलाली के आरोपी मिशेल हेशके, रियल एस्टेट कंपनी एमार एमजीएफ और कनिष्क सिंह के संबंधों की जांच होनी चाहिए। मिशेल हेशके कॉमनवेल्थ घोटाले में दोषी पाया गया था। किरीट के मुताबिक एम्मार एमजीएफ कंपनी को कनिष्क के परि‍वार ने खड़ा किया था, जो राहुल गांधी के सलाहकार और प्रमुख सचिव हैं। वहीं कनिष्क सिंह ने आरोपों को झूठा और राजनीति से प्रेरित बताते हुए कहा है कि सोमैया ऐसे आरोप 2013 से लगाते आ रहे हैं। किरीट के आरोपों को कांग्रेस के मीडिया प्रभारी रणदीप सुरजेवाला ने खारिज कर दिया है। सुरजेवाला ने कहा है कि बीजेपी सरकार और उसके कई नेताओं के कड़ुवाहट और षडयंत्र भरे झूठे आरोप दिन प्रतिदिन हद पार करते जा रहे हैं।
अमित शाह ने किया था सोनिया पर हमला
हेलिकॉप्टर घोटाला मामले में सोनिया गांधी से सवाल करते हुए अमित शाह ने कहा था कि सौदे को अंतिम रूप देने के तुरंत बाद इटली की मीडिया में सौदे में घूस की खबरें आयी लेकिन तत्कालीन यूपीए सरकार इसे रोके जाने वाले निविदा प्रावधान करने की बजाए आगे बढ़ी। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार साबित होने के बाद 2013 में इसे ‘होल्ड’ पर रखा गया। साथ ही कहा कि कांग्रेस प्रमुख को जवाब देना चाहिए कि हेलिकॉप्टर घोटाला मामले के लिए कौन जिम्मेदार था।
क्‍या है अगस्‍टा हेलिकॉप्टर घोटाला ?
आपको बता दें कि अगस्‍टा वेस्‍टलैंड कंपनी ने भारत में 3600 करोड़ में 12 वीवीआईपी हेलिकॉप्टरों का सौदा किया था। माना जाता है कि सौदा करने के लिए 10 फीसदी यानी करीब 350 करोड़ रुपये की घूस दी गई। अब इटली की अदालत ने माना कि अगस्टा वेस्‍टलैंड कंपनी ने 12 हेलिकॉप्टर बेचने के लिए भारत में करीब 125 करोड़ की घूस दी है।

Monday, May 2, 2016

10 कारण, 2019 तक क्यों Congress मुक्त हो जाएगा भारत ?

2019 के लोकसभा चुनाव तक Congress का सफाया हो जाएगा. ये हम नहीं कह रहे हैं बल्कि कांग्रेस के हालात इस तरफ इशारा कर रहे हैं।


साल 2014 के लोकसभा चुनाव में Congress ने अपने इतिहास का सबसे बुरा प्रदर्शन किया था। देश की सबसे पुरानी पार्टी महज 44 सीटों पर सिमट के रह गई थी। हार के सदमें से Congress अभी तक उबर नहीं पाई है। 2014 के बाद से जिस तरह कांग्रेस खुद को संभालने की नाकाम कोशिश कर रही उस से भविष्य के अच्छे संकेत नहीं मिल रहे हैं। कहा जा रहा है कि 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव तक कांग्रेस का शायद सफाया हो जाए। हलांकि ये कहना अतिश्योक्ति होगा लेकिन हालात कुछ ऐसे ही दिख रहे हैं। इसके पीछे के कुछ कारण हैं जो हम आपको बता रहे हैं।

कांग्रेस नेताओं पर चलते कानूनी मामले


सबसे पहला कारण तो ये है कि Congress के कई नेता कानूनी झमेलों में फंसे हैं। कई वरिष्ठ नेताओं पर घोटालों के आरोप हैं, जिन पर सुनवाई चल रही है। पी चिदंबरम, सोनिया गांधी, राहुल गांधी, वीरभद्र सिंह, शशि थरूर, ओमान चांडी, मल्लिकार्जुन खड़गे, वीरप्पा मोइली, अशोक चव्हाण, भूपेंद्र सिंह हुड्डा, कार्ती चिदांबरम सब पर लगे आरोपों पर सुनवाई हो रही है। 2018-19 तक इनमें से कुछ नेताओं को अगर सजा का एलान हो जाता है तो पीएम मोदी इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ  अपनी जीत के तौर पर प्रचारित करेंगे।खास बात ये है कि NDA-2 के राज में भी UPA-2 के घोटालों की चर्चा हो रही है।

फंड की कमी से जूझती कांग्रेस

लोकसभा चुनाव हारने के बाद से Congress के फंड में लगातार गिरावट देखी जा रही है। कांग्रेस के पास पैसों की सख्त कमी है। अफवाहें तो यहां तक हैं कि Congress ने पार्टी नेताओं से पैसे देने की अपील की है। ये पहली बार है जब विपक्ष में होने के बाद कांग्रेस पैसों की कमी से जूझ रही है। यही हाल रहा तो 2019 तक पार्टी कैसे सर्वाइव कर पाएगी।

हाथ से निकलती राज्य सरकारें


Congress एक के बाद एक राज्यों के चुनाव हारती जा रही है। कांग्रेस का इतना बुरा हाल कभी नहीं रहा था। आज की तारीख में बीजेपी के पास Congress से ज्यादा विधायक हैं। जितने राज्यों में कांग्रेस की सरकार है वो भी कोई खास महत्व नहीं रखते हैं राष्ट्रीय राजनीति में। वहीं बीजेपी लगातार राज्यों में अपनी पैठ बनाती जा रही है। इस लिहाज से देखें तो 2019 तक कांग्रेस राज्यों में भी सिमट के रह जाएगी।

राज्यसभा में भी कांग्रेस की हालत खराब होगी

हाल के दिनों में देखा गया है कि केंद्र सरकार लोकसभा में विपक्ष के हंगामे पर खामोश रह जाती है। लेकिन 2016 तक ये खत्म हो जाएगा। 2016 तक बीजेपी राज्यसभा में सबसे बड़ी पार्टी बन जाएगी। 2018 तक Congress और बीजेपी के बीच का अंतर और बढ़ जाएगा। ये अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है कि जब बीजेपी दोनो सदनों में बहुमत में होगी तो क्या होगा। कांग्रेस के भविष्य के लिए ये खतरे की घंटी से कम नहीं है।
Congress Free India

बीजेपी की पसंद के होंगे राष्ट्रपति

2012 तक राष्ट्रपति चुनाव में Congress की मर्जी चलती थी। यहां तक कि अटल बिहारी वाजपेई को एपीजे अब्दुल कलाम का नाम आगे करना पड़ा ताकि सबकी सहमति बन सके। लेकिन 2017 तक बीजेपी लोकसभा राज्यसभा और राज्य विधानसभाओं के सदस्यों के आधार पर राष्ट्रपति चुनाव में अपने मर्जी चलाएगी। बीजेपी की पसंद का राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति होने से कांग्रेस के पास विकल्प और कम हो जाएंगे। यानि कांग्रेस एक कोने में दिखाई देगी।

बिजली-सड़क-रेल बीजेपी का नया मंत्र

मोदी सरकार के तीन मंत्रालय और उनकी मंत्री लगातार काम कर रहे हैं। रेल मंत्री सुरेश प्रभु, परिवहन मंत्री नितिन गडकरी और ऊर्जा मंत्री पीयूश गोयल सरकारी नीतियों को हकीकत का जामा पहनाने में लगे हैं। 2018 तक इनका काम और नतीजा जनता को दिखाई देने लगेगा। बिजली-पानी-सड़क के बदले बीजेपी बिजली-सड़क-रेल के मुद्दे पर जनता का दिल जीतेगी। Congress के लिए इसका मुकाबला करना बहुत कठिन होगा, क्योंकि कांग्रेस शासित राज्यों में गवर्नेंस बिखरा हुआ दिखाई दे रहा है।

कौन होगा कांग्रेस का पीएम कैंडिडेट?

2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेसCongress की तरफ से पीएम कैंडिडेट कौन होगा इस पर भी कांग्रेस का भविष्य निर्भर करता है। पीएम मोदी को टक्कर देने के लिए राहुल गांधी नाकाफी हैं। कांग्रेस किसी और नेता को आगे नहीं बढ़ा रही है। क्या कांग्रेस गठबंधन के सहारे चुनाव में उतरेगी, तो फिर पीएम कैंडिडेट के लिए मारामारी होगी। यानि यहां भी कांग्रेस के लिए हालात अच्छे नहीं दिख रहे हैं। पीएम मोदी के काम से जनता खुश लग रही है और कांग्रेस के पास इसकी कोई काट नहीं है।

पीएम मोदी की रहस्यमयी रणनीति


पीएम मोदी को आज की तारीख में देश का सबसे चलाक नेता माना जाता है। इसके पीछे कारण भी है। नरेंद्र मोदी ने अपने जीवन की सभी महत्वपूर्ण चुनावी लड़ाईयां जीती हैं। उनके दिमाग में मिशन 2019 को लेकर खास रणनीति जरूर होगी। जिस तरह से 2014 में नरेंद्र मोदी की रणनीति ने Congress को 44 सीटों पर ला दिया उसी तरह 2019 के लिए भी पीएम मोदी के पास जरूर कोई खास रणनीति होगी। जिसका काट खोजना कांग्रेस के लिए आसान नहीं होगा।

कांग्रेस का नवनिर्माण कैसे होगा?

कांग्रेस का इतिहास देखें तो पता चलता है कि इस पार्टी ने कई मौकों पर खुद को फिर से खड़ा किया है। इंदिरा गांधी से लेकर राजीव गांधी तक कई उदाहरण है। लेकिन हाल के दिनों में कांग्रेस नेताओं में मुद्दों की समझ और पार्टी कैडर को फिर से खड़ा करने की समझ नहीं दिखाई दे रही है। Congress के सबसे बड़े नेता राहुल गांधी की राजनीतिक समझ पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। वो हर मुद्दे पर जल्दबाजी दिखाते हैं। यही जल्दबाजी कांग्रेस के लिए सेल्फगोल का काम करती है। ऐसे में सवाल इस बात का है कि कांग्रेस की नवनिर्माण कैसे होगा और अगर नहीं होगा तो 2019 तक वो अपने सफाए की तरफ बढ़ जाएगी। बीजेपी के कांग्रेस मुक्त भारत के सपने को कांग्रेस खुद पूरा करती दिख रही है।

Sunday, April 17, 2016

जुलाई में होगी राहुल गांधी की शादी ! ब्राह्मण लड़की के साथ होगी शादी...!

देश के सबसे चर्चित कुंवारों में शामिल कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी की शादी तय हो गई है। हालांकि गांधी परिवार ने इस खबर की पुष्टि नहीं की है, लेकिन इस परिवार के बेहद नजदीकी सूत्रों ने बताया कि राहुल की शादी तय हो गई है और जल्द ही इसकी घोषणा भी कर दी जाएगी। सूत्रों पर यकीन करें तो राहुल गांधी की शादी में ढाई महीने का समय ही बचा है। शादी इलाहाबाद के आनंद भवन में होगी।

गांधी परिवार के करीबी सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार राहुल गांधी ( 46 वर्ष ) का विवाह एक ब्राह्मण परिवार की लड़की के साथ होना निश्चित हुआ है। यह परिवार उत्तर प्रदेश से संबंध रखता है और राजीव गांधी के करीबी रहे एक अधिकारी के सीधे संबंध में आता है। इस पूर्व अधिकारी से आज भी गांधी परिवार के करीबी संबंध हैं। जानकारी के अनुसार इस अधिकारी की पहल पर ही यह रिश्ता तय हुआ है।




आनंद भवन में ही होगी शादी


राजनीतिक हलकों के लिए इस हाई प्रोफाइल शादी को सोनिया और राहुल की इच्छा के कारण इलाहबाद के आनंद भवन में रखा गया है। सूत्रों ने बताया कि कुछ दिन पूर्व सोनिया गांधी ने आनंद भवन का दौरा किया था। तब हालांकि इस दौरे को राजनीतिक बताया गया था, लेकिन अब बताया जा रहा है कि वे वास्तव में शादी के लिए आनंद भवन की उपयुक्तता परखने के लिए ही गई थीं। 

जुलाई के दूसरे सप्ताह में शादी?


सूत्रों पर यकीन करें तो शादी में अधिक दिन शेष नहीं हैं। जुलाई के दूसरे सप्ताह में शादी कराने की तैयारी की जा रही है। सूत्रों का कहना है कि इसकी तैयारियां अत्यंत गोपनीय तरीके से चल रही हैं और सारी तैयारियां होने के बाद ही इसकी जानकारी सार्वजनिक की जाएगी।

उत्तर प्रदेश की राजनीति पर पड़ेगा बड़ा फर्क


गांधी परिवार इस जगह से शादी करके पूरे उत्तर प्रदेश में एक सकारात्मक संदेश देना चाहता है। वह उत्तर प्रदेश को संदेश देना चाहते हैं कि उनकी जड़ें उत्तर प्रदेश और इलाहाबाद में ही हैं और इसलिए वह उनके करीबी हैं।

एक वरिष्ठ कांग्रेसी कार्यकर्ता के अनुसार अगर यह खबर सच है तो यह उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के पुराने कार्यकर्ताओं के लिए एक बहुत बड़ी खुशखबरी होगी। उन्होंने उम्मीद व्यक्त की कि राहुल गांधी की शादी आनंद भवन में होने से पूरे प्रदेश से इस परिवार का सीधा जमीनी सम्पर्क हो जाएगा, जिसका आने वाले चुनावी समय में बहुत ही सकारात्मक असर पड़ेगा।

इसके आलावा सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक अगर ब्राह्मण परिवार की लड़की से राहुल शादी करते हैं तो इससे ब्राह्मण एक बार फिर कांग्रेस से जुड़ेंगे। ध्यान रहे कि मंडल राजनीति के पहले ब्राह्मण कांग्रेस का ख़ास वोटबैंक हुआ करते थे, लेकिन वीपी सिंह के मंडल आयोग लागू करने पर ब्राह्मण कांग्रेस से दूर हो गए।

Thursday, March 24, 2016

ये कौन सी सहिष्णुता ?

ये कौन सी सहिष्णुता ?
इस तरह की गई थी डाक्टर नारंग की हत्या, एक महिला भी थी शामिल
नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी में बेटे के साथ क्रिकेट खेल रहे 41 वर्षीय दंत चिकित्सक की गेंद सड़क पर एक मोटरसाइकिल सवार को जा लगी। जिसके बाद हुई बहस में कुछ लोगों ने डाक्टर की पीट-पीट कर हत्या कर दी। पश्चिमी दिल्ली के विकासपुरी इलाके में बुधवार आधी रात को यह वारदात हुई। दांत के डाक्टर पंकज नारंग अपने बेटे के साथ घर में क्रिकेट खेल रहे थे।
पंकज नारंग
पंकज नारंग के रिश्तेदार पर भी हमला
गेंद घर की बालकनी से निकल कर मोटरसाइकिल सवार को जा लगी। इसके बाद बहस शुरू हो गई। पुलिस ने बताया कि बाइकसवार ने अपने 10 दोस्तों को बुला लिया और पंकज नारंग को घर से खींचकर डंडों और ईंटों से पीट-पीट कर मार डाला। बताया गया है कि डाक्टर के एक रिश्तेदार ने इसमें हस्तक्षेप करने की कोशिश की, लेकिन उस पर भी हमला किया गया। इससे पहले कि पुलिस वहां पहुंच पाती, हमलावर घटनास्थल से फरार हो गए।
आरोपियों को पुलिस ने किया गिरफ्तार
पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि हमने इस मामले में शामिल पांच लोगों को गिरफ्तार किया है, जिसमें एक महिला भी शामिल है। चार लड़कों को भी पकड़ा गया है। ये सभी झुग्गी बस्तियों में रहते हैं। गिरफ्तार महिला की पहचान मयस्सर के रूप में हुई है। दो अन्य आरोपियों की पहचान एक ही नाम आमिर खान के रूप में हुई है। दो अन्य आरोपियों में गोपाल सिंह व नसीर खान हैं। एक पुलिस अधिकारी ने कहा कि नसीर खान मुख्य आरोपियों में से एक है और उस वक्त किशोर के साथ वही मोटरसाइकिल चला रहा था।

Sunday, February 28, 2016

आज राहुल गाँधी कहते है की केंद्र सरकार कन्हैया की आवाज दबा रही है

आज राहुल गाँधी कहते है की केंद्र सरकार कन्हैया की आवाज दबा रही है ..विश्व में पहली बार कम्यूनिस्टो ने चुनावो द्वारा सत्ता केरल में 1957 में हासिल की थी.. ई एम् एस नम्बूदरीपाद केरल के मुख्यमंत्री बने ... भारत के किसी राज्य में पहली बार गैर कांग्रेसी दल सत्ता में आया था ...
नम्बूदरीपाद ने सत्ता मिलते ही अपना वामपंथी एजेंडा लागु करना शुरू कर दिया ..केरल में भारत के सम्विधान को भी मानने से जैसे इंकार कर दिया था ..फिर मात्र २ साल बाद ही नेहरु ने नम्बूदरीपाद सरकार को बर्खास्त कर दिया .आजादी में बाद नम्बूदरीपाद सरकार पहली ऐसी सरकार थी जिसे आर्टिकल 356 के द्वारा केंद्र ने बर्खास्त किया हो ...
और आज वही वामपंथी सूअर कांग्रेस की गोद में बैठकर आजादी की बात करने लगे

और एक बात भारत में मुस्लिम लीग से बड़ा साम्प्रदायिक दल दूसरा कोई नही होगा ..इसकी स्थापना ही सिर्फ मुसलमानों के लिए की गयी थी .. देश को तोड़ने में मुस्लिम लीग का सबसे बड़ा हाथ था ..आजादी के बाद भी मुस्लिम लीग के कुछ सदस्य भारत में ही रहे और उन्होंने मुस्लिम लीग को जिन्दा रखा ..भारत में मुस्लिम लीग का सबसे ज्यादा प्रभाव केरल में है..
मुस्लिम लीग के साथ गठबंधन करके सीपीआई ने केरल में पांच बार सरकार बनाई है... वामपंथी दलों की ये कैसी धर्मनिरपेक्षता की ये मुस्लिम लीग को साम्प्रदायिक पार्टी नही मानते जिसके सम्विधान में ही लिखा है की हम सिर्फ मुस्लिमो की भलाई के लिए काम करेंगे और भारत को इस्लामिक राष्ट्र बनायेंगे

Sunday, February 14, 2016

'चंदा बंद तो धंधा बंद' - चंदा पर चौकीदारी क्या लगी देश में तथाकथित असहिष्णुता ही आ गयी है.

  • पिछड़े डेढ़-दो साल से इस मुल्क में अघोषित एजेंडे के तहत अजीब सा माहौल दिखाने का मीडियाई मंचन चल रहा है. निर्देशन से लेकर पटकथा तक और मंचन से लेकर मुनादी तक, सबकुछ तय एजेंडे से हो रहा है. ऐसा करने वाले कोई और नहीं बल्कि वही लोग हैं जो कभी नरेंद्र मोदी पर फब्तियां कसते थे और देश की अस्मिता की परवाह किये बगैर उनके खिलाफ अमेरिका में वीजा रुकवाने का लेटर लिखते थे. सेक्युलर कबीले के ये लोग मोदी का नाम लेकर लोगों को डराते भी थे. लेकिन इनकी तमाम कोशिशों के बावजूद मोदी प्रचंड बहुमत से जीतकर आ गये. अमेरिका ने भी सर आँखों पर बिठा दिया. जिनको डराया गया वो आज पहले से ज्यादा सुरक्षित हैं. अब चूँकि सरकार तो बदल ही गयी थी लेकिन सरकार चलाने की संस्कृति भी बदल गयी है. सरकार चलाने की संस्कृति का यह बदलाव ही इस छटपटाहट की मूल वजह है. अब केंद्र में जो सरकार है वो 'मौन' सरकार नहीं है बल्कि 'बोलती' हुई सरकार है. मोदी ने आते ही जो शुरुआती डंडा चलाया उसके तहत सीधा हमला उन तथाकथित गणमान्यों पर हुआ जो बिना हिसाब दिए विदेशी चंदे पर पल रहे थे. चंदा आ तो बेहिसाब रहा था लेकिन जा कहां रहा था इसका कोई लेखा-जोखा नहीं था. इसी नस पर मोदी ने ऊंगली क्या रख दी, मच गया चौतरफा कोहराम!
पिछले साल ही ये खबर आई थी कि मोदी सरकार ने विदेशी चंदे पर पल रहे उन 9000 से ज्यादा गैर-सरकारी संगठनों का पंजीकरण लाइसेंस निरस्त कर दिया है, जिन्होंने विदेशी चंदा अधिनियम कानून अर्थात एफसीआरए का उलंघन किया है. 16 अक्तूबर 2014 को गृहमंत्रालय द्वारा कुल 10343 गैर-सरकारी संगठनों को वर्ष 2009 से लेकर 2012 तक मिले विदेशी चंदे का ब्यौरा माँगा गया था. जवाब के लिए तय 1 महीने की समय सीमा बीत जाने के बाद तक मात्र 229 गैर-सरकारी संगठनों ने इसका जवाब दिया. बड़ा सवाल ये कि बाकी संस्थाओं ने हिसाब क्यों नहीं दिया? क्या दाल में कुछ काला था या कहीं पूरी  दाल तो काली नहीं थी? चंदे के धंधे से फल-फूल रहे इस कारोबार पर लगाम लगाने की कवायदों में ही केंद्र सरकार ने अमेरिका के बहु-चर्चित फोर्ड फाउंडेशन द्वारा भारत में दिए चंदे को निगरानी में रखने का आदेश जारी किया था. अगर बारीकी से मामलों को देखा जाय तो फोर्ड फाउन्डेशन पर सरकार की सख्त निगरानी बहुत पहले रखी जाने चाहिए थी, लेकिन न जाने किस परस्पर हितों को साधने के लिए पिछली संप्रग सरकार ने फोर्ड फाउन्डेशन को भारत में बिना किसी निगरानी के काम करने और पैसा देने की खुली छूट दे रखी थी.
फोर्ड फाउंडेशन का 'तीस्ता' कनेक्शन
फोर्ड फाउंडेशन पर गुजरात सरकार की रिपोर्ट में यह कहा गया है कि, सबरंग ट्रस्ट और सबरंग कम्युनिकेशंस ऐंड पब्लिशिंग प्राइवेट लिमिटेड (एससीपीपीएल) फोर्ड फाउंडेशन के प्रतिनिधि कार्यालय हैं और फोर्ड फाउंडेशन लंबी अवधि की अपनी किसी योजना की वजह से इन्हें स्थापित करने के साथ ही इसका इस्तेमाल कर रहा है. फाउंडेशन ने सबरंग ट्रस्ट को 2,50,000 डॉलर और एससीपीपीएल को 2,90,000 डॉलर चंदे के तौर पर दिए हैं. बड़ा सवाल ये है कि गैर-सरकारी संगठनों का ताना-बाना बुनकर देश के समाजिक और राजनीतिक मामलों में हस्तक्षेप करने वाले किसी भी किस्म के विदेशी पैसों को निगरानी से बाहर क्यों रखा जाय? जिस सबरंग ट्रस्ट की बात यहां की जा रही है, उसका प्रत्यक्ष जुड़ाव तीस्ता सीतलवाड से है. लिहाजा फोर्ड और तीस्ता सीतलवाड़ के ट्रस्ट के बीच का यह चंदा कनेक्शन साफ समझा जा सकता है. अब चू्ंकि फोर्ड पर लगाम लगाई जा चुकी है तो इनसे सहानुभूति रखने वाले गिरोह की छटपटाहट भी स्वाभाविक है.

कहाँ के फारवर्ड थे ये?
संप्रग काल में फारवर्ड प्रेस नाम की एक हिंदी-अंग्रेजी पत्रिका भी बेहद संदिग्ध ढंग से उलूल-जुलूल विमर्शों को समय-समय पर हवा देती रही है. चाहे महिषासुर को मनगढ़ंत ढंग से स्थापित करने की असफल कोशिश का मामला हो अथवा विलियम कैरी को अगस्त-2011 के अंक में आधुनिक भारत का पिता बताने की कोशिश हो, ये पत्रिका लागातार ऐसे एजेंडे पर काम करती रही. जिस विलियम कैरी को 'आधुनिक भारत का पिता' लिखा गया है, उसका योगदान भारत में महज बाइबिल का भारतीय भाषाओं में अनुवाद करने से ज्यादा कुछ भी नहीं है. विलियम कैरी एक चर्च के पादरी भी रहे हैं. फारवर्ड प्रेस पत्रिका कांग्रेस-नीत सरकार के दौरान 2009 में शुरू होती है और दिल्ली के एक महंगे इलाके में सहजता से दफ्तर भी मिल जाता है. 2009 से अब तक इस पत्रिका की छपाई एवं कागज आदि की गुणवत्ता में कोई कमी नहीं आई थी, जबकि सही मायनों में इस पत्रिका के पास विज्ञापन न के बराबर थे. नाममात्र के विज्ञापनों को छोड़ दें तो यह पूरी पत्रिका बिना विज्ञापन के चल रही थी. इस पत्रिका से जुड़े ज्यादातर शीर्ष लोग क्रिश्चियन मिशनरीज से जुड़े हैं. लेकिन अब खबर है कि यह पत्रिका बंद हो रही है. जो पत्रिका संप्रग काल में बेबाक चल रही थी वो अचानक बंद क्यों हो गयी? क्या इसे 'चंदा बंद तो धंधा बंद' मान लिया जाए?
ऐसे में आज जब चारों तरफ नाटकीय ढंग से बुनावटी कोहराम का ढोंग रचा जा रहा है तो यह समझना बिलकुल भी मुश्किल नहीं है कि ये सब क्यों हो रहा है. सीधी सी बात है कि जो लोग बेरोक-टोक के विदेशी पैसों पर पल रहे थे अब उन्हें हिसाब देने के लिए कह दिया गया है. चूँकि हिसाब देने की आदत रही नहीं सो उनसे हिसाब मांगना 'असहिष्णुता' जैसा दिख रहा है. ऐसे में मोदी का विरोध करने के लिए मोदी विरोधी एका की स्थिति स्वभाविक है. चूँकि राजनीति में आने से पहले केजरीवाल और मनीष सिसोदिया के एनजीओ भी करोड़ों का फंड फोर्ड से लेते रहे हैं, लिहाजा इस एका में उनकी भागीदारी भी कोई नई बात नहीं है. देश में असहिष्णुता सिर्फ उनके लिए है जिनकी अवैध खुराक मोदी ने रोक रखी है. चंदा पर चौकीदारी क्या लगी देश में तथाकथित असहिष्णुता ही आ गयी है.