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Monday, June 6, 2016

हिंदुओं का धर्मांतरण कराने वाली ईसाई संस्थाओं को कांग्रेस सरकार ने बांटें करोड़ों, RTI से खुलासा, हड़कंप

हिंदुओं का धर्मांतरण कराने वाली ईसाई संस्थाओं को कांग्रेस सरकार ने बांटें करोड़ों, RTI से खुलासा, हड़कंप

ईसाई धर्म को बढ़ावा देने के लिए विदेशों से भारत में जड़ जमाने के लिए तमाम मिशनरीज संचालित हैं। ये हिंदु व दूसरे धर्म के लोगों को तमाम तरह के खैरात बांटकर उन्हें ईसाई धर्म अपनाने के लिए प्रेरित करती हैं। इसके लिए ये मिशनरीज उनके धर्म की बुराइयां आदि करती हैं।

हिंदुओं का धर्मांतरण कराने वाली ईसाई संस्थाओं को कांग्रेस सरकार ने बांटें करोड़ों, RTI से खुलासा, हड़कंप

RTI से यह खुलासा हुआ कि कांग्रेस शासित राज्य कर्नाटक में सिद्धरमैया की सरकार ने बीते कुछ समय में ईसाई संस्थाओं को करोड़ो रुपये दान किए हैं. इससे सवाल उठता है कि क्या कर्नाटक में कांग्रेस सरकार ईसाई धर्म को बढ़ावा दे रही है. ये पैसे राज्य मे बने चर्च की मरम्मत और सुंदरीकरण के नाम पर दिए गए हैं. इसके अलावा बड़ी रकम नए चर्च और क्रिक्ष्चियन कम्युनिटी हॅाल बनाने के लिए दी गई है . किसी भी सेकुलर देश मे कोई सरकार धार्मिक संस्थाओं को पैसा नहीं दे सकती. यह संविधान की मूल भावना का उल्लंघन हैं. खुद को सेकुलर पार्टी बताने वाली कांग्रेस में कहीं ऐसा तो नहीं कि ईसाई संस्थाओं की जेब भरने का काम आलाकमान के इशारो पर ही हो रहा है.
ईसाई धर्म को बढ़ावा देने का एजेंडा ?
26 मार्च को RTI  के तहत 4 सवाल पूछे गए . ये सवाल सरकारी आदेश नंबर - MWD318MD2011 दिनांक 16/01/2012 के हवाले से राज्य अल्पसंख्यक विभग की तरफ से चर्च को दिए जा रहे फंड के बारे में था.
Q1. चर्च की मरम्मत के लिए सरकार की तरफ से साल दर साल कितना फंड दिया गया ?
Q2. उन ईसाई संस्थाओं  के नाम और पते बताएं जिन्हें मरम्मत के नाम पर सरकार से पैसे मिले हैं
Q3 नए चर्च बनाने पर साल दर साल राज्य सरकार ने कितने पैसे जारी किए ?
Q4.उन ईसाई संस्थाओं के नाम और पते बताएं जिन्हें नएचर्च बनाने के लिएपैसे दिए गए ?


चर्च के लिए खोला सरकारी खजाना
2013-14 में कर्नाटक सरकार ने राज्य के 134 गिरिजाघरों को 12.30 करोड़ रुपये दिए. इसके अलावा 6.72 करोड़ रुपये क्रिक्ष्चियन कम्युनिटी सेंटर बनाने के लिए दिए गए. इन कम्युनिटी सेंटरों में ही धर्मांतरण का ज्यादातर काम होता है
2014-15 में यह फंडिग और बढ़ गई . इस दौरान 125 चर्चों को 16 .56 करोड़ रुपये सरकारी खजाने से दिए गए. इसी तरह 55 ईसाई समुदाय भवन बनाने के लिए करीब 15 करोड़ रुपये बांटे गए.
2015-2016 में चर्च की मरम्मत पर 15 करोड़ रुपये बांटे गए. इस दौरान कम्युनिटी सेंटर बनाने के खर्च का ब्योरा नहीं दिया गया.
  
साल दर साल चर्च की फंडिंग बढ़ती गई 
तीन साल के अंदर कांग्रेस सरकार ने चर्च को बांटे करोड़ो रुपये. अमेरिका जैसे दुनिया के बड़े - बड़े ईसाई देशों में भी सरकारें चर्च बनाने या मरम्मत करने के नाम पर एक भी पैसा नहीं देती. कई देशों में ऐसा करना गैर-कानूनी है. सेकुलर देश होने के नाते भारत मे भी कोई सरकार किसी धर्म धर्म के  पूजास्थल बनाने या मरम्मत के लिए पैसे नहीं दे सकती . जहां तक कर्नाटक सरकार का सवाल है उसने राज्य कई हिंदू मंदिरों की करोड़ो की संपत्ति सील कर रखी है. राज्य के सैकड़ो साल पुराने मंदिरों की हालत बेहद जर्जर होती जा रही है. 
कैसे अपनी जड़े जमाती हैं इसाई मिशनरियां
ईसाई धर्म को बढ़ावा देने के लिए विदेशों से भारत में जड़ जमाने के लिए तमाम मिशनरीज संचालित हैं। ये हिंदु व दूसरे धर्म के लोगों को तमाम तरह के खैरात बांटकर उन्हें ईसाई धर्म अपनाने के लिए प्रेरित करती हैं। इसके लिए ये मिशनरीज उनके धर्म की बुराइयां आदि करती हैं। हिंदुओं में छुआछूत व जातिवाद की भावनाओं के नाम पर भड़काकर अपने पाले में लाने की कोशिश करती हैं। 


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Monday, March 21, 2016

सनातन धर्म भला प्रकृति को कैसे नुकसान पहुंचाएंगे

महाशय, बात जिद्दीपन या अड़ियल रवैये की नहीं है। हम तो सनातन धर्म को मानने वालों में से है...हम भला प्रकृति को कैसे नुकसान पहुंचाएंगे। सनातन धर्म में तो गाय से लेकर नाग तक को पूजा जाता है, पुष्प से लेकर वृक्ष तक को पवित्र माना जाता है, धरती माँ से लेकर आसमान तक सभी को आदर दिया जाता है...यही वो धर्म है जो प्रकृति में मौजूद सभी वस्तुओ का आदर करना सीखाता है। इस धर्म में तो अग्नि, वायु व जल तक को देवता का स्थान दिया गया है।
बात है आपकी एकतरफा उद्दंडता की, आप एक बार निष्पक्ष तो होइए। हर त्यौहार चाहे वो होली हो या ईद, क्रिसमस हो या पोंगल...सब में कहीं का कहीं प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग व दोहन होता ही है। बाकी पर्वो पर आपकी चुप्पी और सिर्फ होली दीपावली पर पानी बचाओ व वायु प्रदुषण का रोना हमें अंदर तक कचोटता है। बुरा ना मानिए पर ईद में बकरो की हलाली के बाद उस स्थान को साफ़ करने के लिए हज़ारो लीटर पानी का व्यय होता है, क्रिसमस में बंटने वाली शराब को बनाने के लिए लाखों लीटर पानी लगता है, होली में भी करोड़ो लीटर पानी बह जाता है। तो जरुरत है सबके साथ की, एकतरफा बात से ना हल निकलेगा ना सुनवाई होगी।
कमरतोड़ महंगाई के दौर में पटाखे फोड़ना कई गुना कम हो गया है, भागमभाग भरी ज़िन्दगी में होली खेलना भी कई गुना कम हुआ है..फिर भी आपको पर्वो से आपत्ति है। वैसे भी होली में उतना ही पानी का इस्तेमाल होता है जितना जरुरी होता है, पागलो की तरह पानी कोई ना बहाता है। यकीन मानिए सनातन धर्म वाले कभी प्रकृति का अहित नहीं चाहते, आप बस एक बार निष्पक्ष होकर सभी धर्म वालो से पानी, वायु के अपव्यय को रोकने की गुज़ारिश करे...इस मुहीम में सनातन धर्म वाले सबसे आगे ना आए तो कहियेगा। लेकिन हाँ...अगर आप लोग एकतरफा आलोचना व कुंठा निकालेंगे तो आपकी कोई ना सुनेगा। या तो सभी धर्मो को साथ लेकर प्रकृति को बचाने की मुहीम चलाइए अन्यथा अपने विचारो को एक कागज़ में लिख उसकी बत्ती बनाकर अपने स्थान विशेष में डाल लीजिये। नमस्कार !!

Saturday, March 5, 2016

हम अचानक कब अपने समाज के हितैषी के बदले दूसरे समाज के दुश्मन बन जाते है हमको पता ही नहीं चलता

कभी कभी फेसबुक पर मित्रों के ऐसे "पोस्ट" होते है जो तर्क से हटा हमें गुस्सा दिलाने की कोशिश करते है..!
कई बार हम जिस समाज से आते है या जिसकी हम फ़िक्र करते है चाहे वो हिन्दू हो , मुस्लिम हो , दलित हो , क्रिस्चियन हो या सिख हो – उससे सम्बंधित ऐसी बर्बरता को दिखाई जाती है जिससे हमारा खून खौलने लगता है..!
हम अचानक कब अपने समाज के हितैषी के बदले दूसरे समाज के दुश्मन बन जाते है हमको पता ही नहीं चलता । कब हम एक समाज के रक्षक से दूसरे समाज के भक्षक बन जाता है पता ही नहीं चलता..!
हम युवा नफरत और बदले की आग में इस प्रकार जलने लगते है की कब हम मानवता तक भूल जाते है हमें खुद ही पता नहीं चलता । कई बार हम उन उग्रवादी और कट्टरपंथी संगठनो तक से जुड़ जाते है जो की धार्मिक उन्माद के नाम पर निर्दोष बच्चो तक से हिंसा कराने में नहीं चूकते..!
फिर हम युवा ये भी कहने लगते है उन्होंने भी तो हमारे घर जलाये थे – हमने तो बस जबाब दिया है । लेकिन हम ये भूल जाते है की जबाब उनको नहीं मिलती जिन्होंने ऐसा किया हो बल्कि हजारो निर्दोष बच्चो को , महिलाओ को और बुढो को जिनका इनसे दूर-दूर तक कोई नाता नहीं होता..!
कई बार ऐसे काम पोलिटिकल पार्टी भी करने लगती है , ताकि समाज के बिच तनाव पैदा हो और उसे किसी एक वोट बैंक का लाभ मिले..! नफरत इतनी भर जाती है है की कब हम अपने देश में ही दरार पैदा करने लगते है पता ही नहीं चलता..!
और हम कई बार इन सब के चक्कर में आकर ये तो भूल ही जाते है की हम नफरत में कभी भी किसी समाज , देश या मानवता की भलाई नहीं कर सकते..!
हमारे देश में अनेक भाषा है , अनेक रंग है..!!

Thursday, February 25, 2016

धरती को प्रणाम करने की क्या ज़रूरत थी......ऐसे तिरंगे को सल्यूट मारने की क्या ज़रूरत थी...

''वो बाहर आया उसे धरती दिखी....और झट से सबसे पहले उसे छू के प्रणाम किया.....फिर पीछे मुड़ा और जेल के उपर लगे तिरंगे को सीना फुला कर सलाम मारा..........लेकिन मुझे हैरानी है,...
....ये धरती तो जेल के अंदर भी थी...और तिरंगा तो जेल के अंदर से भी दिख रहा था......तो फिर बाहर आकर ऐसे धरती को प्रणाम करने की क्या ज़रूरत थी......ऐसे तिरंगे को सल्यूट मारने की क्या ज़रूरत थी.......
.....चलो चले 1947 से पहले के दिनो में.......जब हम अँग्रेज़ों की गुलामी में ज़िंदगी गुज़ारा करते थे......
ना हम हिंदू थे ,,ना मुस्लिम थे ना सिख थे...ना ईसाई थे....हम सिर्फ़ गुलाम थे,.,,,अंग्रेज़ो के गुलाम......हम कैदी थे.....
.....अपनी ही धरती की जेल में....जहा से अपनी ज़मीन को चूमते तो थे...लेकिन डर डर कर............
.........एक दिन संग्राम हुवा...आज़ादी की लड़ाई का.......हम लड़े और आज़ाद हो गये.....हम लोग गुलामी से छूट गये...
....हमे अपनी ज़मीन अपनी धरती माँ वापस मिल गयी........
लेकिन जब हमे आज़ाद भारत मिल गया तो हम सबके सुर ही बदल गये......हिंदू अलग,,मुस्लिम अलग..सिख अलग....सब अलग अलग.....फिर आज़ाद भारत के दो टुकड़े भी हो गये.....जिसे जिन्ना पाकिस्तान लेके चला गया.........
........बाकी बचे हिंदुस्तानियों पे आज़ादी का रंग चढ़ने लगा....और चढ़े भी क्यों ना....ना जाने कितना खून दे के तो आज़ादी मिली........आज़ाद भारत की आबो हवा के हम आदि हो गये.....धीरे धीरे हम ज़िंदगी को आज़ादी के पहिए से फिर आगे की ओर ले जाने लगे.......हम तरक्की करने लगे....हम विश्व से कदम से कदम मिला कर चलने लगे......
......लेकिन इन सब के बीच हम एक चीज़ भूलते जा रहे थे........अपनी माँ अपनी धरती मां के गौरव को.......
......हम जैसे जैसे आगे बढ़ रहे थे....मक्कारी...बेईमानी.......गद्दारी......लालच फरेब. भ्रष्टाचार..ये सब भी अपने साथ तेज़ी से आगे ले जा रहे थे......हम क़ैद होते जा रहे थे....एक ऐसी जेल में जहाँ से हमे अपनी धरती माँ नही सिर्फ़ अपना स्वार्थ दिखता है.......मेरे भाइयों मैं तो सिर्फ़ इतना कहना चाहता हूँ की एक बार बस एक बार उस पिछली ज़िंदगी को कुछ दिन के लिए जी के देखों जहाँ हमारी औकात....कोंडों और अँग्रेज़ों की बेतों की मार भर है.....जहाँ चुल्लू भर पानी के लिए भी पूरा पूरा दिन अँग्रेज़ों ने धूप में खून जलवाया है.....बस कुछ दिन अपने लिए ऐसी जेल बना कर और उसमे रह कर देखों,............
...फिर जब तुम पश्चाताप की आग में जल कर उस जेल से बाहर आओगे ना.....और जैसे ही तुम्हे अपनी आज़ाद धरती माँ दिखेगी ना...मेरे भाई तुम इस तरह सजदा करोगे उसे....इस तरह चूमोगे उसे...जैसे किसी बच्चे को उसकी खोई हुई माँ मिल गयी हो.......बस इसके आगे लिखूंगा तो मेरी स्याही मेरे आँसू... समुंदर बन जाएँगे........
.............कोई ग़लती हो तो इस छोटे से लेखक दोस्त को माफी दे दीजिएगा....... ....................''मुझे है फख्र की सजदे में जब मैं चूमता उसको
.....................नमाज़े भी मेरी कहती तेरी मिट्टी महकती है"
........................एक हिंद नेक हिंद जय हिंद................