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Saturday, August 20, 2016

अब दलितों के हाथों से निवाला खा रहे हैं कांग्रेसी, दलित वोट बैंक के लिए कांग्रेस की नई चाल!






लखनऊ। यूपी में अपनी खोई हुई सियासी जमीन फिर से तलाशने की कोशिश में जुटी कांग्रेस तमाम कोशिशें कर रही है। इन्हीं कोशिशों के तहत अब वो दलितों पर भी डोरे डाल रही है। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की जयंती पर कांग्रेस ने आज यूपी के अलग अलग जिलों में भीम भोज का भी आयोजन किया है। 

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भीम भोज के तहत आज यूपी कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राजबब्बर ने भी आज लखनऊ में दलितों के बीच जाकर उनके साथ भोजन किया। राजबब्बर ने तो दलित महिलाओं के हाथ से निवाले भी खाए। इस तरह के भीम भोज का आयोजन पूरे प्रदेश में किया गया है। कांग्रेस को उम्मीद है कि भीम भोज से उसे दलितों को रिझाने में सफलता हासिल होगी।


राजबब्बर ने भीम भोज को सियासी स्टंट मानने से इनकार किया और कहा कि भीम भोज से सामाजिक समरसता बढ़ाने में मदद मिलेगी। राजबब्बर के साथ रीता बहुगुणा जोशी और दूसरे तमाम नेता भी भीम भोज में शामिल हुए।


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Tuesday, July 19, 2016

संघ ने सीएम कैंडिडेट के लिए महंत आदित्यनाथ का नाम सुझाया




संघ ने सीएम कैंडिडेट के लिए महंत आदित्यनाथ का नाम सुझाया



यूपी चुनाव में कांग्रेस के ‘ब्राह्मण कार्ड’ से भाजपा पसोपेश में है। कांग्रेस ने शीला दीक्षित को यूपी विधानसभा चुनाव में सीएम कैंडिडेट बनाकर बड़ा दांव खेला है। कांग्रेस का चुनावी प्रबंधन संभाल रहे प्रशांत किशोर की इस चाल का जवाब फिलहाल भगवा ब्रिगेड के पास नहीं है। ऐसे में संघ ने भाजपा को सीएम कैंडिडेट के रूप में गोरखपुर के सांसद महंत आदित्यनाथ का नाम सुझाया है।
इसके पीछे संघ का तर्क है कि चुनाव में भाजपा को महंत की कट्टर हिंदूवादी छवि का पूरा लाभ मिलेगा। हालांकि सीएम कैंडिडेट के लिए भगवा खेमे में दो लोगों महंत आदित्यनाथ और वरुण गांधी के नाम पिछले पांच-छह महीने से जोरशोर से चल रहे हैं।
भाजपा सूत्रों की मानें तो पिछले दिनों इलाहाबाद में हुई राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में सीएम कैंडिडेट के नाम पर चर्चा होनी थी मगर शीर्ष नेतृत्व ने उस वक्त यह कहकर चर्चा से इनकार कर दिया कि सीएम कैंडिडेट का फैसला पार्टी का संसदीय बोर्ड करेगा।
वरुण गांधी भी हैं दावेदार
बताया जा रहा है कि वरुण समर्थकों के दबाव से उबरने के लिए पार्टी ने सीएम कैंडिडेट के नाम का एलान टाल दिया था। भाजपा के प्रदेश के पूर्व प्रवक्ता अशोक पांडेय कहते हैं, योगी आदित्यनाथ ऐसा नाम है जिसे हर वर्ग का समर्थन हासिल है। वे फायर ब्रांड नेता हैं और संघ के काफी करीब भी हैं। ऐसे में यदि पार्टी उन पर दांव लगाती है तो यूपी चुनाव में निश्चित ही फायदा होगा।
संघ अगड़े वोटरों को सहेजने को लेकर भले ही व्यूहरचना बना रहा हो मगर भाजपाध्यक्ष अमित शाह का पूरा जोर पिछडे़, अति पिछड़े और दलित वोटरों को साथ लाने पर है। यही वजह है कि वे बीते एक साल से यूपी में लगातार दौरा कर रहे हैं।
वे अपने मिशन में काफी हद तक कामयाब भी हुए हैं। कुर्मियों और राजभरों की पार्टी को उन्होंने अपने साथ जोड़ने में कामयाबी पाई है। धीरे-धीरे शाह एनडीए का कुनबा बढ़ा रहे हैं। उन्हीं का प्रयास है कि आज पूर्वांचल के दो बड़ी क्षेत्रीय पार्टियां अपना दल और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी भाजपा के साथ गठबंधन में हैं।

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Sunday, July 17, 2016

योगी के मुख्यमंत्री बनते ही बनेगा राम मंदिर , पढ़िए पूरी खबर

योगी के मुख्यमंत्री बनते ही बनेगा राम मंदिर, पढ़िए पूरी खबर




गोरखपुर: प्रदेश में आसन्न चुनावों के बीच बीजेपी अपने मुख्यमंत्री पद के चेहरे को लेकर भले पेशोपेश में हो, किन्तु ये तो तय है कि इस चेहरे के लिए केंद्रीय मंत्रियो की पसंद योगी आदित्यनाथ ही है। जिसकी वकालत केंद्रीय मंत्री राम शंकर कठेरिया और स्वामी चिन्मयानंद भी कर रहे है।
सोमवार को शुरू हुए शंखा ढाल कार्यक्रम में उक्त भाजपा नेताओं ने अपने गोरखपुर प्रवास के दौरान योगी को ही मुख्यमंत्रित्व का भार सौपने की इच्छा भी जताई।
जहाँ अतिथित्व सम्हालते हुए स्वामी ने कहा कि योगी आदित्यनाथ ही एक ऐसे है, जो कि प्रदेश की कमान सभाल सकते है, और उन्ही के शासन काल में राम मंदिर का निर्माण भी हो सकता है, क्योकि बाकी सरकारों के रहते एसा कभी नहीं हो सकता है, चाहे कोर्ट भी निर्णय सूना दे या फिर संसद से पारित हो जाए, लेकिन इन सरकारों में राम मंदिर नहीं बन सकता है, ये सिर्फ योगी आदित्य नाथ के प्रदेश की कमान सभालने के बाद ही बन सकता है |
वहीँ केंद्रीय मानव संसाधन राज्यमंत्री रामशंकर कठेरिया ने भी उनकी बातो पर सहमति जताते हुए ये कहा कि साधू संत और हम सभी लोग यही कामना करते है, की एसा ही हो ।
जब मंच पर स्वामी चिन्मयानन्द मंच पर आये तो उन्होंने हिन्दुत्त्व को लेकर कई ऐसी कई बाते की, और साथ ही कहा कि इस्लामी आतंकवाद ने आज पुरे देश में कब्जा कर लिया है और आज हिन्दुत्त्व को मजबुत करने के लिए एक एसे नेता की जरूरत है, जो की हिन्दुत्त्व को मजबूत करके प्रदेश की कमान सम्हाले |बांग्लादेश में धर्म के नाम पर निर्ममता पूर्वक हत्या की गई. जो कुरान की आयते पढ़ दिया, उसे बख्श दिया गया।
लंका के राक्षस किसी न किसी रूप में घुसकर आतंक फैला रहा है. सीमा पर कोई संकट नहीं है. लेकिन, कैराना, दादरी जैसे संकट हमारे लिए ख़तरा हैं । मंच से स्वामी चिन्मयानद ने आह्वान किया कि ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ को भारत रत्न दिया जाना चाहिए |
प्रो. राम शंकर कठेरिया ने कहा, कि सामान नागरिक कानून बीजेपी लाएगी, कुछ लोग कह रहे हैं, कि भगवाकरण हो रहा है। सुप्रीम कोर्ट सामान नागरिक संहिता की बात कह रहा है ।जो तीन तलाक-तलाक से परेशान हैं, वो सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे पर जा रहे हैं। प्रो. राम शंकर कठेरिया ने योगी आदित्यनाथ की ओर इशारा करते हुए कहा, कि स्वामीजी प्रदेश की कमान संभालें, यही सारे साधु-संत और हमलोग कामना करते हैं ।
कार्यक्रम में बोलते हुए बीजेपी सांसद महंत योगी आदित्यनाथ ने बांग्लादेश में हुए आतंकी हमले पर प्रतिकिया देते कहा, कि ये घटना निंदनीय और
शर्मनाक है। उन लोगों के लिए जो, पूरी दुनिया को कठमुल्लापन के कारण बर्बाद कर देना चाहते हैं और आतंक फैला रहे हैं। उन सब के लिए शर्मनाक होनी चाहिए । मानवता के नाम पर शर्मनाक स्थिति है और इस्लाम के नाम पर हो रहा है, ये उससे भी शर्मनाक स्थिति है । हम इस घटना की निंदा करते हैं । घटना की निंदा करते हैं । उसमें भारत से भी जुड़े हुए कुछ लोग उसके शिकार हुए हैं।
उन्होंने कहा की दुनिया को सोचना चाहिए कि मात्र मजहब और सम्प्रदाय के नाम पर दुनिया के अंदर जो हिंसा चल रही है, अगर अब भी आँखें नहीं खुल रही हैं, आतंकवाद के मूल कारणों को जानने की, तो इस प्रकार की बर्बरता से बचने के लिए लोगों को स्वयं उपाय निकालना पड़ेगा ।
देश की सुरक्षा के सवाल पर उन्होने कहा कि आज भारत के अंदर एक मजबूत सरकार है, मजबूर नहीं । आतंकवाद के खिलाफ इस सरकार ने पहले से ही जीरो टोरलेन्स के उपाय किये हैं। इसलिए यहाँ और घबराने की आवश्यकता नहीं है, लेकिन, अगर किसी ने भी इस प्रकार का दुस्साहस किया, तो मुहतोड़ जवाब दिया जायेगा।
आदित्यनाथ ने पंजाब में अरविन्द केजरीवाल के तीन दिवसीय दौरे के सवाल पर कहा कि, देखिये जो चीजे हैं, पंजाब के लोगों को इस बात से सावधान होना पड़ेगा। जो गलती दिल्ली के लोगों ने की है ।जैसे दिल्ली के लोग बुनियादी सुविधाओं के लिए तड़प रहे हैं, तरस रहे हैं इस प्रकार की स्थिति उनके सामने न आये इसके लिए उन्हें सावधान होना पड़ेगा ।


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Wednesday, June 15, 2016

खून से रंगी मथुरा, सो रही सरकार, न गुंडाराज न भ्रष्टाचार अबकी बार BJP सरकार

खून से रंगी मथुरा, सो रही सरकार, न गुंडाराज न भ्रष्टाचार अबकी बार BJP सरकार

 
वाराणसी: दो दिनो तक संगम नगरी मे भाजपा की कार्यसमिति की बैठक मे हुए मंथन में निकल कर आये मुद्दे अब पोस्टर की शक्ल लेने लगे हैं। इसकी शुरुआत की गई है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी से। 

बीजेपी के जारी किए गए पोस्टर में सरकार की गोद में बैठे शख्स को एक पुलिसकर्मी को गोली मारते हुए दिखाया गया है।

एक बार फिर पोस्टरबाजी से बीजेपी ने सियासी माहौल को गर्मा दिया है। वाराणसी में बीजेपी ने मथुरा कांड पर एसपी सरकार को लेकर एक विवादित पोस्टर जारी किया है। इसमें लिखा है कि खून से रंगी मथुरा, सो रही सरकार। इसके बाद लिखा है न गुंडाराज न भ्रष्टाचार अबकी बार बीजेपी सरकार। 

जो कहा जा रहा था, वो कुछ-कुछ बीजेपी के विवादित पोस्टर में दिख रहा है। बीजेपी के बारे में कहा जा रहा था कि 2017 विधानसभा चुनाव में मथुरा हिंसा और कैरान पलायन मामला बीजेपी के दो सबसे बडे़ मुद्दे रहेंगे। इसपर वो एसपी सरकार को घेरेगी। वो एजेंडा इस पोस्टर की शक्ल में जमीन पर उतारा गया है।

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Monday, June 13, 2016

भावुक हुए PM नरेंद्र मोदी कहा, शरीर का कण-कण राष्ट्र के नाम



भावुक हुए PM नरेंद्र मोदी कहा, शरीर का कण-कण राष्ट्र के नाम



इलाहाबाद में बीजेपी की कार्यकारिणी में बोलते वक्त भावुक हुए PM नरेंद्र मोदी। कहा, शरीर का कण-कण राष्ट्र के नाम
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इलाहाबाद: कार्यकारिणी को संबोधित करते हुए भावुक हुए PM मोदी, बोले- शरीर का कण-कण देश के लिए
संगम नगरी इलाहाबाद में बीजेपी राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक का सोमवार को दूसरा और आखि‍री दिन है. इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र ने कार्यकारिणी को संबोधित किया. खास बात यह रही कि इस दौरान वह थोड़े भावुक हो गए. पीएम ने भावुक होते हुए कहा कि शरीर का कण-कण और जीवन का पल-पल इस देश को समर्पित है.
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा-
– हम अपनी ताकत दिखाने नहीं, अपने संस्‍कार दिखाने आए हैं.
– हम दुनिया को अपने संस्‍कारों की पूंजी दिखाना चाहते हैं.
– देश बदल रहा है और वो आगे बढ़ रहा है.
– सरकार की उपलब्धियां किसी एक शख्‍स की नहीं है बल्कि संगठन की हैं.
– मेरा जीवन देश के लिए समर्पित है.
– अभी हमें और कड़ी मेहनत की जरूरत है.
बीजेपी राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक में पीएम मोदी ने दिए ये सात मंत्र-
1. सेवाभाव
2. संतुलन
3. संयम
4. समन्‍वय
5. सकारात्‍मकता
6. सद्भावना
7. संवाद
बता दें कि कार्यकारिणी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन के बाद परेड ग्राउंड में एक जनसभा होनी है. पीएम नरेंद्र मोदी इसको संबोधित कर उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के अभियान की शुरुआत करेंगे. इससे पहले प्रधानमंत्री कार्यकारिणी में शामिल होने के लिए जाने से पहले शहीद चंद्रशेखर पार्क गए और वहां चंद्रशेखर आजाद की प्रतिमा को नमन किया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शहीद स्थल को नमन करने के साथ पुष्प भी अर्पित किए.

इससे पहले रविवार को कार्यकारिणी की बैठक में आर्थिक प्रस्ताव पेश किया गया. कार्यकारिणी में सोमवार को भी दो प्रस्ताव पेश किए जाने की संभावना है. बैठक में पांच राज्यों खासकर उत्तप्रदेश के चुनाव पर भी चर्चा होगी और इसके लिए सांगठनिक ताना-बाना कैसा हो इस पर बात होगी. वरिष्ठ केंद्रीय मंत्री व पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी ने पार्टी के द्वारा कृषि के क्षेत्र में किये जा रहे कार्यों का प्रेस कान्फ्रेंस में उल्लेख भी किया.

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Monday, June 6, 2016

पीएम की होर्डिंग पर कालिख, टुच्ची हरकतों से उप्र जीतने की कोशिश में कांग्रेस






 उत्तरप्रदेश में चौथे नंबर की पार्टी बन चुकी सोनिया गांधी की पार्टी विधानसभा चुनाव के पहले टुच्ची हरकतों पर उतर आई है. राजधानी लखनऊ में  कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष डॉ़ निर्मल खत्री की अगुआई में कार्यकर्ताओं ने देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की होर्डिंग पर कालिख पोती.
अभी यह पता चलना बाक़ी है कि प्रदेश अध्यक्ष खत्री के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने यह शर्मनाक हरकत कांग्रेस आलाकमान यानी सोनिया-राहुल के कहने पर की या कांग्रेस के रणनीतिकार बने प्रशांत किशोर के सुझाव पर.
डीजल पेट्रोल के दाम बढ़ने और कांग्रेस नेताओं के नाम पर चल रही योजनाओं के नाम बदलने के विरोध में कांग्रेसियों ने रविवार को प्रदर्शन करते हुए शहर के सदर क्रॉसिंग पेट्रोल पंप पर यह कुकृत्य किया.
लखनऊ में जिला इकाई द्वारा किए गए प्रदर्शन की अगुआई डॉ़ निर्मल खत्री ने की. शहर कांग्रेस कमिटी के नेतृत्व में शहरी इलाकों के सभी वार्डों में प्रदर्शन हुए.
डॉ़ निर्मल खत्री ने कहा, भारत के पहले पीएम प़ं जवाहर लाल नेहरू, पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी, पूर्व प्रधानमंत्री स्व़ राजीव गांधी के नाम पर चलाई जा रहीं यूपीए सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का नाम हटवाकर मोदी सरकार राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के विचारकों के नाम पर रख रही है. यह आपत्तिजनक है.
अलीगढ़ में कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का पुतला फूंककर विरोध किया. प्रदेश कांग्रेस द्वारा जानकारी दी गई है कि तमाम जिलों में रविवार को विरोध प्रदर्शन हुआ जबकि कुछ जिलों में सोमवार को विरोध प्रदर्शन होगा.


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Friday, June 3, 2016

‘चाणक्य नीति’ की चाल और इस रणनीति के कमाल से UP में खिलेगा कमल!



‘चाणक्य नीति’ की चाल और इस रणनीति के कमाल से UP में खिलेगा कमल!

 राजनीतिक लिहाज से उत्तर प्रदेश देश का सबसे अहम सूबा है। कहा जाता है कि केंद्र में यदि लंबे समय तक सत्तासीन रहना है तो 80 लोकसभा सीटों वाले इस प्रदेश पर मजबूत पकड़ जरूरी है। इसे देखते हुए ही यहां अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए सभी दलों ने अभी से कमर कसनी शुरू कर दी है।इसमें योगी आदित्यनाथ नाथ बहुत  अहम भूमिका निभाएगे.

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सत्तारूढ़ सपा के बाद सबसे अधिक प्रतिष्ठा का प्रश्र लोकसभा चुनावों में 73 सीटें जीतने वाली भारतीय जनता पार्टी के लिए है। उस पर जहां एक तरफ अपनी बढ़त कायम रखने का दबाव है, वहीं विधानसभा चुनाव जीतकर यह भी साबित करना होगा कि केंद्र की मोदी सरकार का विश्वास जनता के मन में कायम है।
इसके लिए पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने खास मास्टर प्लान किया है। आइए जानते हैं कि भाजपा के चाणक्य अमित शाह ने यूपी फतह करने के लिए किन-किन रणनीतियों पर काम कर रहे हैं…और इस रणनीति में  प्रमुख  सहयोग जिस नेता का रहेगा वो  हैं योगी आदित्यनाथ नाथ जो  उत्तरप्रदेश के चुनाव में बहुत अहम भूमिका निभाएगे क्योंकि योगी जी चीफ मिनिस्टर पद के सबसे प्रबल दावेदार भी हैं.

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पिछड़ी जातियों का समीकरण
उत्तर प्रदेश में अति पिछड़ी जाति के वोटरों की संख्या 30 फीसदी है। ईबीसी के अंतर्गत कुर्मी, लोध और कोइरी वोटरों की संख्या ज्यादा है। अब तक के विधानसभा चुनावों में सपा और बसपा इन समुदायों का वोट हासिल करने के लिए क्षेत्रीय नेताओं पर दांव खेलती रही हैं, लेकिन बीजेपी की अच्छी खासी पकड़ लोध जाति के वोटरों पर है और इसका कारण कल्याण सिंह और उमा भारती जैसे नेताओं का इसी जाति से होना है। पार्टी ने यूपी में सत्ता भी कल्याण सिंह को आगे करके ही हासिल की थी, लेकिन बाद में प्रदेश के कुछ प्रभावशाली नेताओं की ओर से कल्याण सिंह को दरकिनार कर दिया गया। नतीजा यह रहा कि पार्टी लाख कोशिशों के बाद भी आज तक प्रदेश में सत्ता हासिल नहीं कर सकी है।
अब पिछड़ी जातियों को दिया महत्व
आखिरकार पार्टी को समझ आ गया कि प्रदेश में यदि सत्ता हासिल करनी है तो पिछड़ी जातियों को अपनी तरफ लाना होगा। तभी पार्टी ने पहले कोइरी वर्ग को लुभाने के लिए केशव प्रसाद मौर्य को प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी। अब सीएम पद के लिए किसी पिछड़े वर्ग के नेता को ही आगे करने की बात कही जा रही है। जहां तक कुर्मी वोट का सवाल है तो 2014 के लोकसभा चुनाव में जरूर एकजुट होकर बीजेपी का समर्थन किया था लेकिन इससे पहले ऐसा कम ही देखा गया है।
 दिलचस्प होगा यह समीकरण


अति पिछड़े समुदायों पर अब तक किसी एक पार्टी की मजबूत पकड़ नहीं है और ऐसे में सभी पार्टियां इन्हें अपनी तरफ खींचने में लगी है। यूपी में अगड़ी जातियों के वोटरों का हिस्सा करीब 24 फीसदी है। और राजनीतिक विश्लेषकों का ऐसा मानना है कि ये मतदाता बीजेपी की तरफ झुके हुए हैं। प्रदेश में 18 पर्सेंट मुस्लिम वोटर समाजवादी पार्टी के साथ मजबूती से जुड़े हुए हैं। लेकिन इन सबके बीच अगर कांग्रेस भी अपनी स्थिति में सुधार कर पाई तो इसमें कोई दो राय नहीं कि सेक्युलर वोट में बिखराव होगा। इससे सियासी गणित भी बिगड़ेंगे। चुनावी विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस अपना वोट शेयर तो बढ़ा लेगी, लेकिन सीट नहीं बढ़ा पाएगी जो बीजेपी के लिए अच्छा होगा।

ये है चाणक्य का मास्टर प्लान
चुनाव और संगठन की दृष्टि से अच्छे रणनीतिकार माने जाते रहे अमित शाह ने दलितों को अपने साथ जोडऩे की शुरुआत कर दी है। दलित परिवार के साथ जमीन पर बैठकर खाना और दलित साधुओं के साथ स्नान करके भी शाह ने सियासी दांव चला था।
अमित शाह ने सोशल इंजीनियरिंग के जरिए विपक्षी पार्टियों में सेंध लगाने के जिम्मा यूपी बीजेपी अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य को सौंपा है। जातिगत समीकरणो को ध्यान में रखते हुए पार्टी ने इस बार 94 जिला अध्यक्षों और नगर अध्यक्षों में से 44 पिछड़ी और अति पिछड़ी जाति से, 29 ब्राह्मण, 10 ठाकुर, 9 वैश्य और 4 दलित समाज से बनाए हैं ।

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65 फीसदी वोटरों पर खास नजर
आपको बता दें कि पिछले 2 दशकों में जिला अध्यक्ष अधिकतर ब्राह्मण और ठाकुर ही बनाए जाते थे। यूपी में यादव, जाटव और मुस्लिम 35 फीसदी हैं और यह वोटबैंक बीजेपी के पक्ष में कभी नहीं रहा है। यही वजह है कि बीजेपी की नजर बाकी 65 फीसदी पर है और इसी समीकरण को साध कर बीजेपी यूपी में परचम लहराना चाहती है।
कार्यकर्ताओं की गतिविधियों पर भी नजर
शाह ने कार्यकर्ताओं के लिए अटेंडेस काड्र्स भी जारी किया है। इस कार्ड का फायदा अमित शाह लोकसभा चुनाव में भी देख चुके हैं। नए इलेक्ट्रॉनिक काड्र्स से नेता और वर्कर्स के पास एक यूनीक नंबर आ जाएगा। इसके जरिए वो लाइब्रेरी, पॉलिसीस और डॉक्यूमेंट्स को देखने के साथ साथ  मीटिंग्स की जानकारी भी सीधे बड़े नेताओं को भेज सकेंगे। इससे जमीन पर क्या काम हो रहा है, इसकी जानकारी सेंट्रल लीडरशिप को मिल सकेगी। ऑनलाइन काड्र्स की ये व्यवस्था जुलाई में पूरी तरह शुरू हो जाएगा। इसके पहले फेज में करीब 1800 डिवीजनल ऑफिस इंचार्ज ऑनलाइन हो जाएंगे। इसके बाद 1.5 लाख वर्कर्स को इससे जोड़ा जाएगा जो बूथ लेवल पर काम करेंगे

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मायावती के वोट बैंक में भी सेंध लगाने का प्रयास
मायावती के कोर वोट बौद्ध भिक्षुओं में भी सेंध लगाने की पूरी तैयारी बीजेपी ने कर ली है। कुछ अन्य छोटी जातियां जिनका प्रभाव कुछ विधानसभा क्षेत्रों तक सीमित है, बीजेपी उन्हें अपने साथ लाने की कोशिश कर रही है। उदाहरण के लिए राजभर जाति का देवरिया, बलिया, आजमगढ़, सलेमपुर और गाजीपुर समेत कई अन्य जिलों में प्रभाव है और बीजेपी इन्हें अपने साथ लाने के फिराक में है। दूसरी तरफ यूपी की कुर्मी बिरादरी से जुड़ी पार्टी अपना दल के साथ बीजेपी का पहले से ही गठबंधन हैं, जिसका प्रभाव प्रतापगढ़, जौनपुर, इलाहाबाद, वाराणसी और मिर्जापुर में आने वाली लगभग 30 विधानसभा सीटों पर है। यदि दांव सफल रहा तो पार्टी भाजपा पूर्वांचल और इससे सटे जिलों की 100 से अधिक सीटों पर काफी मजबूत बनकर उभरेगी।

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आरएसएस का भी पूरा साथ
यूपी चुनाव के लिए अमित शाह आरएसएस का भी भरपूर साथ लेंगे। इसी को देखते हुए आरएसएस और अमित शाह ने लखनऊ में केशव प्रसाद मौर्य, ओम माथुर, सुनील बंसल और शिव प्रकाश जैसे नेताओं को सक्रिय कर रखा है, जो पार्टी को जीत दिलाने में रणनीतियां बना रहे हैं। यही नहीं बीजेपी के प्रदेश प्रवक्ता चन्द्रमोहन का भी संबंध संघ से ही है। इस टीम से साफ लग रहा है कि 2014 की तरह की चुनाव कैम्पेन चलाया जाएगा।
अखिलेश के सामने कल्याण!
यूपी चुनाव में रैलियों का मोर्चा भी अध्यक्ष अमित शाह और गृह मंत्री राजनाथ सिंह संभालेंगे। अमित शाह अपनी रणनीति के तहत यूपी में स्थानीय नेताओं को तवज्जो देने पर काम कर रही है। पार्टी प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य ने जिला अध्यक्षों की घोषणा में भी इस बात का पूरा ध्यान रखा है। हर जि़ले में जाति के आधार पर ऐसे नेताओं को चुना गया जो पार्टी के काम में बरसों से लगे हैं। यही नहीं, वरिष्ठ नेता कल्याण सिंह और राजनाथ सिंह के करीबियों को भी जगह दी गई ताकि गुटबाजी पर लगाम कसी जा सके। कयास यह भी लगाए जा रहे हैं कि अखिलेश के सामने कल्याण सिंह को ही मैदान में उतारा जाए।

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इसी माह शुरू हो जाएंगी रैलियां
माना जा रहा है कि अगले एक महीने में अमित शाह और राजानाथ सिह अलग-अलग 6-6 रैलियों को संबोधित करेंगे। शाह ने पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ बड़ी बैठकों की योजना भी बनाई है। शाह की रणनीति 2014 के कैंपेन की तरह ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचने की है और यही कारण है कि पीएम मोदी के भरोसेमंद ओम माथुर यूपी में इलेक्शन मैनेजमेंट संभालेंगे। इस चुनाव में अमित शाह ने किसी भी पीआर एजेंसी के सहयोग से भी इंकार कर दिया है। हालांकि लोकसभा चुनाव में भी अमित शाह ने यूपी में एजेंसी की मदद नहीं ली थी।
दो साल में 15 से 42 फीसद पहुंचा वोट प्रतिशत
यूपी के विधानसभा चुनावों का ट्रेंड पिछले तीन चुनावों में बीजेपी के खिलाफ ही रहा है। 2002, 2007 और 2012 के विधानसभा चुनाव में मुख्य मुकाबला सपा और बसपा के बीच रहा है। इन चुनावों में बीजेपी तीसरे स्थान पर रही है। 1991 में पार्टी ने किसी को सीएम उम्मीदवार घोषित नहीं किया था और उसे 415 में से 221 सीटें मिली थीं। यह उसका श्रेष्ठ प्रदर्शन था। 2012 के चुनाव में बीजेपी को 15 फीसदी वोट मिले थे जो बसपा के करीब आधे थे। 2012 के यूपी विधान सभा चुनाव में बीजेपी को 15 फीसदी वोट मिले थे और 2014 के लोकसभा चुनाव में उसका वोट शेयर बढ़कर 42.63 फीसदी हो गया। बीजेपी को यहां तक पहुंचाने में राज्य की अति पिछड़ी जातियों के वोटरों की अहम भूमिका रही। परंपरागत रूप से पहले ये मतदाता मायावती के साथ थे और कुछ संख्यां में ये समाजवादी पार्टी के साथ भी थे।

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Thursday, May 26, 2016

मुस्लिमों ने मोदी के लिए मांगी दुआ, बोले- अब बीजेपी को वोट देंगे यूपी के मुस्लिम

मुस्लिमों ने मोदी के लिए मांगी दुआ, बोले- अब बीजेपी को वोट देंगे यूपी के मुस्लिम

Saturday, May 7, 2016

बाप और बेटी में तो बलात्कार होता ही रहता है - मोहम्मद इक़बाल, मंत्री/नेता - UP/सपा

बाप और बेटी में तो बलात्कार होता ही रहता है - मोहम्मद इक़बाल, मंत्री 

 यूपी के दर्जा प्राप्त मंत्री और समाजवादी पार्टी ने नेता मोहम्मद इकबाल ने पिता और बेटी के रिश्ते को ही बदल दिया है। 

दरअसल इन मंत्री महोदय ने अपनी पार्टी के पूर्व जालौन-गरौठा-भोगनीपुर­ सांसद घनश्याम अनुरागी का बचाव करने के लिए कहा कि पिता और बेटी में बलात्कार होता रहता है। पूर्व सासंद पर उनकी पत्नी ने बेटी के साथ दुष्कर्म का प्रयास और अपने भाई की पत्नी के साथ अनैतिक संबन्ध होने का आरोप लगाया था।
बुंदेलखंड के जनपद जालौन में आये सपा के दर्जा प्राप्त मंत्री मोे. इकबाल कादरी उत्तर प्रदेश राज्य बीज प्रमाणीकरण संस्थान के उपाध्यक्ष हैं।
जालौन-गरौठा-भोगनीपुर­ सांसद घनश्याम अनुरागी पर उनकी पत्नी द्वारा बेटी के साथ दुष्कर्म का प्रयास और भाई की पत्नी के साथ सांसद के अवैध संबन्ध होने का आरोप लगाया था। जब इसका पत्नी ने विरोध किया तो उसे वह उसके बच्चों को जान से मारने का भी प्रयास किया गया।
भयभीत होकर किसी प्रकार अपनी बेटी के साथ भागकर दिल्ली पहुंची और युपी पुलिस समेत युपी के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से आरोपी सांसद पति के खिलाफ कार्रवाही कर जान बचाने की मांग की। जब पत्नी द्वारा पूर्व सांसद पर लगाये गये आरोपों के बारें में दर्जा प्राप्त मंत्री मों. इकबाल कादरी से बात की गयी तो उन्होंने एक अजीब और विवादित बयान देते हुये कहा कि पिता और बेटी के साथ बलात्कार होता रहता है और रही आरोपों की बात तो वह जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है।
उनके इस बयान ने पिता और बेटी के रिश्ते की परिभाषा ही बदल दी है।

Friday, April 29, 2016

जानें, कौन होगा यूपी में भाजपा का सीएम उम्मीदवार ?

जानें, कौन होगा यूपी में भाजपा का सीएम उम्मीदवार ?


यूपी चुनाव भाजपा के लिए काफी अहम होने वाला है। दिल्ली और बिहार में करारी शिकस्त होने के बाद, भाजपा के लिए यूपी का चुनाव नाक की लड़ाई बनने वाला है। दिल्ली और बिहार में भाजपा के पास वहां के स्थानीय नेताओं के कद का कोई भी नेता नहीं ता जो उन्हें चुनौती दे सके। ये बात भाजपा बखूबी समझती है। उसे पता है कि अगर उसने यूपी में पार्टी के लिए चेहरा घोषित नहीं किया तो दिल्ली और बिहार की तरह उसे यहां भी नुकसान उठाना पड़ सकता है। यही वजह है कि पार्टी अपना हर कदम फूंक-फूंक कर रख रही है। 

 

पार्टी ने इसी कड़ी में एक अपनी ही तरह की सोसल इंजीनियरिंग आजमाते हुए केशव प्रसाद मौर्य को यूपी में भाजपा का अध्यक्ष बनाया है। हालांकि उनकी छवि उतनी अच्छी नहीं है कि पार्टी उन्हें सीएम पद के लिए प्रोजेक्ट किया जाए। अब सवाल उठता है कि पार्टी फिर किसे सीएम पद के लिए प्रोजेक्ट कर सकती है। आईए, कुछ नामों पर नजर डालते हैं।

1.योगी आदित्यनाथ: भाजपा के फायरब्रांड सांसद माने जाने वाले योगी कट्टर हिंदुत्व नेता हैं। योगी मजह 26 साल की उम्र में पहली बार सांसद बने थे और तब से लगातार पांचवी बार सांसद हैं। अगर पार्टी योगी को सीएम पद का उम्मीदवार घोषित करती है तो वोटों का ध्रुवीकरण होना तय है। राजपुत होने की वजह से उन्हें उच्च वर्ग का समर्थन मिलेगा। अपनी हिंदुवादी छवि की बदौलत वो ओबीसी वोटरों को भी अपने पाले में कर सकते हैं।

2.स्मृति इरानी: हाल के दिनों में स्मृति भाजपा के लिए एक मजबूत नेता बन कर उभरी हैं। जिस तरह से उन्होंने राहुल गांधी का सामना किया है, ये पार्टी में उनकी छवि को और ज्यादा धार देता है। वो एक कुशल वक्ता हैं और लोगों को अपने पाले में कर सकती हैं। इरानी के अमित शाह से रिश्ते बहुत मधुर नहीं माने जाते हैं लेकिन वो पीएम मोदी की करीबी हैं और इस वक्त भाजपा में पीएम मोदी के करीबी होने का मतलब है कि सभी दरवाजे खुले होते हैं। 

3.वरुण गांधी: युवा होने की वजह से पार्टी के लिए काफी मददगार हो सकते हैं। वरुण गांधी को पार्टी ने राष्ट्रीय कार्यकारिणी से निकाल दिया था लेकिन इसके पीछे की वजह पार्टी की वन फैमिली, वन पोस्ट की नीति बताई गई। वरुण कई बार पार्टी लाईन से हटकर भी बयान दे चुके हैं जिस वजह से पार्टी को फजीहत झेलनी पड़ी है।


4.कल्याण सिंह: 84 साल के हो चुके कल्याण सिंह को भले हीं उम्र साथ नहीं दे रही हो, लेकिन यूपी का वोटर कंबिनेशन उनको अब भी इस रेस में शामिल करता है। लोधों के नेता माने जाने वाले कल्याण सिंह एक वक्त यूपी में भाजपा के सबसे कट्टर हिंदुवादी नेता माने जाते थे। कल्याण सिंह अपने सीएम पद की उम्मीदवारी से जुड़े सवालों पर टाल-मटोल करते रहे हैं। ये इस बात की ओर इशारा करता है कि वो भी इसके लिए इच्छुक हैं।    

Sunday, April 17, 2016

जुलाई में होगी राहुल गांधी की शादी ! ब्राह्मण लड़की के साथ होगी शादी...!

देश के सबसे चर्चित कुंवारों में शामिल कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी की शादी तय हो गई है। हालांकि गांधी परिवार ने इस खबर की पुष्टि नहीं की है, लेकिन इस परिवार के बेहद नजदीकी सूत्रों ने बताया कि राहुल की शादी तय हो गई है और जल्द ही इसकी घोषणा भी कर दी जाएगी। सूत्रों पर यकीन करें तो राहुल गांधी की शादी में ढाई महीने का समय ही बचा है। शादी इलाहाबाद के आनंद भवन में होगी।

गांधी परिवार के करीबी सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार राहुल गांधी ( 46 वर्ष ) का विवाह एक ब्राह्मण परिवार की लड़की के साथ होना निश्चित हुआ है। यह परिवार उत्तर प्रदेश से संबंध रखता है और राजीव गांधी के करीबी रहे एक अधिकारी के सीधे संबंध में आता है। इस पूर्व अधिकारी से आज भी गांधी परिवार के करीबी संबंध हैं। जानकारी के अनुसार इस अधिकारी की पहल पर ही यह रिश्ता तय हुआ है।




आनंद भवन में ही होगी शादी


राजनीतिक हलकों के लिए इस हाई प्रोफाइल शादी को सोनिया और राहुल की इच्छा के कारण इलाहबाद के आनंद भवन में रखा गया है। सूत्रों ने बताया कि कुछ दिन पूर्व सोनिया गांधी ने आनंद भवन का दौरा किया था। तब हालांकि इस दौरे को राजनीतिक बताया गया था, लेकिन अब बताया जा रहा है कि वे वास्तव में शादी के लिए आनंद भवन की उपयुक्तता परखने के लिए ही गई थीं। 

जुलाई के दूसरे सप्ताह में शादी?


सूत्रों पर यकीन करें तो शादी में अधिक दिन शेष नहीं हैं। जुलाई के दूसरे सप्ताह में शादी कराने की तैयारी की जा रही है। सूत्रों का कहना है कि इसकी तैयारियां अत्यंत गोपनीय तरीके से चल रही हैं और सारी तैयारियां होने के बाद ही इसकी जानकारी सार्वजनिक की जाएगी।

उत्तर प्रदेश की राजनीति पर पड़ेगा बड़ा फर्क


गांधी परिवार इस जगह से शादी करके पूरे उत्तर प्रदेश में एक सकारात्मक संदेश देना चाहता है। वह उत्तर प्रदेश को संदेश देना चाहते हैं कि उनकी जड़ें उत्तर प्रदेश और इलाहाबाद में ही हैं और इसलिए वह उनके करीबी हैं।

एक वरिष्ठ कांग्रेसी कार्यकर्ता के अनुसार अगर यह खबर सच है तो यह उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के पुराने कार्यकर्ताओं के लिए एक बहुत बड़ी खुशखबरी होगी। उन्होंने उम्मीद व्यक्त की कि राहुल गांधी की शादी आनंद भवन में होने से पूरे प्रदेश से इस परिवार का सीधा जमीनी सम्पर्क हो जाएगा, जिसका आने वाले चुनावी समय में बहुत ही सकारात्मक असर पड़ेगा।

इसके आलावा सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक अगर ब्राह्मण परिवार की लड़की से राहुल शादी करते हैं तो इससे ब्राह्मण एक बार फिर कांग्रेस से जुड़ेंगे। ध्यान रहे कि मंडल राजनीति के पहले ब्राह्मण कांग्रेस का ख़ास वोटबैंक हुआ करते थे, लेकिन वीपी सिंह के मंडल आयोग लागू करने पर ब्राह्मण कांग्रेस से दूर हो गए।