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Friday, April 22, 2016

RSS के बारे में झूठा प्रचार किया जा रहा है - ऑल इंडिया मुस्लिम महिला पर्सनल लॉ बोर्ड

RSS के विरोध में पूरा विपक्ष अपनी ताकत लगा रहा है, इन के बीच ऑल इंडिया मुस्लिम महिला पर्सनल लॉ बोर्ड की चेयरमैन का एक बयान संघ के विरोधियों से सवाल पूछ रहा है।

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की विचारधारा और उसके काम करने के तरीके को लेकर इन दिनों एक बहस चल रही है, कांग्रेस समेत तमाम विपक्ष संघ पर हमला कर रहा है। केंद्र सरकार पर भी आरोप लगाए गए कि वो संघ के एजेंडे को देश में लागू करने का काम कर रही है।

RSS का समर्थन करने वाले भी इन आरोपों के जवाब में सवाल पूछते हैं कि आखिर संघ का एजेंडा क्या है, किस एजेंडे के तहत संघ काम कर रहा है, क्या संघ देश के खिलाफ कोई काम कर रहा है. आखिर संघ के खिलाफ हमला क्यों किया जाता है।
हाल ही में RSS प्रमुख मोहन भागवत ने लखनऊ का दौरा किया था। लखनऊ दौरे के दौरान ऑल इंडिया मुस्लिम महिला पर्सनल लॉ बोर्ड की चेयरमैन शाइस्ता अंबर ने मोहन भागवत से मुलाकात की। मुलाकात के दौरान शाइस्ता ने मोहन भागवत से अपने क्षेत्र में बनी मस्जिद और धर्मशाला देखने की अपील की, जिस पर भागवत ने हामी भर दी।

मोहन भागवत से मुलाकात के बाद शाइस्ता अंबर ने कहा कि RSS को लेकर भ्रम फैलाया जा रहा है, जब मैं भागवत जी से मिली तो लगा कि इनमें रत्ती भर भी सच्चाई नहीं है। शाइस्ता अंबर ने कहा कि उन्होने मोहन भागवत का पूरा भाषण सुना।
मोहन भागवत का भाषण सुनने के बाद लगा कि वो किसी समुदाय के खिलाफ नहीं बोलते हैं, वो समाज को जोड़ने की बात करते हैं, मानवता की और सेवा की बात करते हैं। अपने भाषण में उन्होने हिंदुत्व की चर्चा की किसी समुदाय के खिलाफ नहीं बोला। 

Monday, April 4, 2016

लोग भाजपा की साम्प्रदायिक राजनीति का विरोध तो खूब करते हैं लेकिन अपनी मज़हबी मान्यताओं की बखिया उधेड़े जाने पर बिलबिलाने लगते

जो मज़हबी लोग भाजपा की साम्प्रदायिक राजनीति का विरोध तो खूब करते हैं लेकिन अपनी मज़हबी मान्यताओं की बखिया उधेड़े जाने पर बिलबिलाने लगते हैं और कुतर्कों की झड़ी लगा देते हैं, उन्हें साम्प्रदायिक राजनैतिक इतिहास के आईने में अपना चेहरा भी देख लेना चाहिये.. शायद सन् 85 या 86 की बात है, एक बूढ़ी औरत शाहबानों को तलाक़ तलाक़ तलाक़ बोल के घर से बाहर निकाल दिया गया था, रोटी कपड़े और छत के के लिये उसने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, समाज के कुछ जिम्मेदार लोगों की वजह से ये मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था और सुप्रीम कोर्ट ने फैंसला दिया कि शाहबानो का पति हर महीने तीन सौ रूपये उस बेसहारा बुजुर्ग औरत को गुजारे भत्ते के तौर पर दे, बस फ़िर क्या था मुसलसल ईमान वालों का मज़हब कोर्ट के इस फैंसले से खतरे में पड़ गया, अमनपसंद कौम के लोगों ने सड़कों में उतर कर सुप्रीमकोर्ट के खिलाफ़ ही जुलूस निकालने शुरू कर दिये, उनके हिसाब से बूढ़ी शाहबानो या तो रोटी कपड़ा और छत के लिए दूसरे आदमी की बीवी बनती, या वक्फ़ बोर्ड के आगे अनाथों की तरह हाँथ फैलाती या भीख मांग कर गुज़ारा करती। मुसलमानों के विरोध प्रदर्शन हद से ज्यादा बढ़ गये तो वोटबैंक खोने के डर से केंद्र पर काबिज कांग्रेस सरकार ने मुसलमानों की बात मान ली, और संसद में विधेयक पास करा कर सुप्रीम कोर्ट के इस फैंसले को पलट दिया..
अब देश का बहुसंख्यक हिन्दू, जो अपने धर्म ग्रंथों को दरकिनार कर के सुधारवादी सोंच को अपना रहा था, यह सब देख कर भौचक्का रह गया, उनके लिये ये समझ पाना मुश्किल था कि आखिर एक बूढ़ी बेसहारा औरत को 300 रु. गुज़ाराभत्ता दे देने से इस्लाम कैसे खतरे में पड़ जायेगा????
एक तरफ़ हिन्दू मैरिज एक्ट, मेंटीनेंस, विधवा पुनर्विवाह, बाल विवाह सतीप्रथा और छुआ छूत उन्मूलन समेत दत्तक ग्रहण उत्तराधिकार के नये नये कानून बनाए और लागू किये जा रहे थे.... दूसरी तरफ़ इस्लाम और शरीया _ सुप्रीम कोर्ट, न्याय साम्या और नैतिकता से भी ऊपर हो गया था मुसलमानों के लिये और दोगली धर्मनिरपेक्ष कांग्रेस सरकार के लिये, देश का बहुसंख्यक वर्ग खुद को ठगा सा महसूस कर रहा था।
कांग्रेस पर मुस्लिम तुष्टिकरण का इल्ज़ाम लगने लगा, अब हिन्दू वोट बैंक को अपने से दूर जाता देख कर तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने हिन्दुओं को खुश करने के लिये विवादित बाबरी मस्ज़िद या राम मंदिर के दरवाज़े खुलवा दिये..
हाँ राजनैतिक महत्वकांक्षाओं और कई कारणों से विभाजन और छिट पुट दंगे देश ने पहले भी भुगते थे.. लेकिन इस घटना के बाद यकीनी तौर पर भारतीय समाज में हिन्दू मुस्लिम के बीच स्पष्ट खाई खींचने का श्रेय कांग्रेस और कट्टर मुसलमानों को ही जाता है..
भाजपा तब देश की राजनीति में अपना वजूद तलाश रही थी, आडवाणी जैसे नेताओं और हिन्दू संगठनों ने इस सुनहरे मौके को लपक लिया, और आक्रोशित असंतुष्ट हिन्दुओं के मन में खुद को हिंदुत्व के रक्षक के रूप में रोप कर साम्प्रदायिकता की नई राजनैतिक परम्परा शुरू की.. जिसका नतीजा हम बाबरी विध्वंश, गुजरात, मुज़फ्फर नगर समेत अनेक दंगों के रूप में भुगतते आ रहे हैं। इखलाक/ हेमंत करकरे/ या तंज़ील अहमद ने संभवतः इसी साम्प्रदायिक राजनीति के षड्यंत्रों में अपनी जान गंवाई..
आज भी भाजपा और इन चरमपंथी संगठनो को ऑक्सीजन मुसलमानों की धार्मिक कट्टरता, मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड बनाये रखने की ज़िद, और फ़तवेबाज मुल्लों से ही मिलती है.. वो दिखाते हैं कि जहाँ जहाँ मुस्लिम बहुसंख्यक हैं वहां इस्लाम ही शासन का आधार है तो हिन्दू बहुसंख्यक होने के बावजूद भी भारत हिन्दू राष्ट्र क्यों नहीं बन सकता?? वो चिंगारी भड़काते हैं और कुछ लोग भारत माता की जय न बोलने का फ़तवा दे कर, बीफ़ पार्टी का आयोजन कर के उस चिंगारी में पेट्रोल डाल देते हैं.. देश सुलग रहा है, इस आग में निर्दोष मासूम मारे जा रहे हैं.. और धर्मांध आज भी धर्म मज़हब की ही फ़िक्र लिये बैठे हैं।

Monday, March 21, 2016

सनातन धर्म भला प्रकृति को कैसे नुकसान पहुंचाएंगे

महाशय, बात जिद्दीपन या अड़ियल रवैये की नहीं है। हम तो सनातन धर्म को मानने वालों में से है...हम भला प्रकृति को कैसे नुकसान पहुंचाएंगे। सनातन धर्म में तो गाय से लेकर नाग तक को पूजा जाता है, पुष्प से लेकर वृक्ष तक को पवित्र माना जाता है, धरती माँ से लेकर आसमान तक सभी को आदर दिया जाता है...यही वो धर्म है जो प्रकृति में मौजूद सभी वस्तुओ का आदर करना सीखाता है। इस धर्म में तो अग्नि, वायु व जल तक को देवता का स्थान दिया गया है।
बात है आपकी एकतरफा उद्दंडता की, आप एक बार निष्पक्ष तो होइए। हर त्यौहार चाहे वो होली हो या ईद, क्रिसमस हो या पोंगल...सब में कहीं का कहीं प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग व दोहन होता ही है। बाकी पर्वो पर आपकी चुप्पी और सिर्फ होली दीपावली पर पानी बचाओ व वायु प्रदुषण का रोना हमें अंदर तक कचोटता है। बुरा ना मानिए पर ईद में बकरो की हलाली के बाद उस स्थान को साफ़ करने के लिए हज़ारो लीटर पानी का व्यय होता है, क्रिसमस में बंटने वाली शराब को बनाने के लिए लाखों लीटर पानी लगता है, होली में भी करोड़ो लीटर पानी बह जाता है। तो जरुरत है सबके साथ की, एकतरफा बात से ना हल निकलेगा ना सुनवाई होगी।
कमरतोड़ महंगाई के दौर में पटाखे फोड़ना कई गुना कम हो गया है, भागमभाग भरी ज़िन्दगी में होली खेलना भी कई गुना कम हुआ है..फिर भी आपको पर्वो से आपत्ति है। वैसे भी होली में उतना ही पानी का इस्तेमाल होता है जितना जरुरी होता है, पागलो की तरह पानी कोई ना बहाता है। यकीन मानिए सनातन धर्म वाले कभी प्रकृति का अहित नहीं चाहते, आप बस एक बार निष्पक्ष होकर सभी धर्म वालो से पानी, वायु के अपव्यय को रोकने की गुज़ारिश करे...इस मुहीम में सनातन धर्म वाले सबसे आगे ना आए तो कहियेगा। लेकिन हाँ...अगर आप लोग एकतरफा आलोचना व कुंठा निकालेंगे तो आपकी कोई ना सुनेगा। या तो सभी धर्मो को साथ लेकर प्रकृति को बचाने की मुहीम चलाइए अन्यथा अपने विचारो को एक कागज़ में लिख उसकी बत्ती बनाकर अपने स्थान विशेष में डाल लीजिये। नमस्कार !!

Saturday, March 5, 2016

गिरगिट हिन्दू और मकड़ी मुसलमान

गिरगिट हिन्दू और मकड़ी मुसलमान
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नेताजी सुभाष चन्द्र बोस जी को "तोजो का कुत्ता" कहने वाले, 1962 में भारत-चीन युद्ध में चीन का साथ देने वाले, बंगाल जैसे संपन्न राज्य को अपने दशकों के शासन में गरीबी-भुखमरी-बेरोजगारी के नरक में झोंकने वाले नीच बामपंथीयों को "जिहादी नक्सल यूनिवर्सिटी" में विकास -आजादी और देशभक्ति का प्रोपगेंडा करते देख यह मशहूर किस्सा याद आया।
इन्ही लाल चड्डी गैंग की तरह मदरसों में भी मासूम बच्चों का "माईंडवाश" किया जाता है, यह बचपन का किस्सा भी उसी की एक बानगी है। दरअसल मदरसे में मौलाना साहेब हमें "कर्बला जंग" के बारे में बता रहे थे। कर्बला के जंग में इमाम हुसैन साहब "हिन्दुओं की फ़ौज" से अपने परिवार और बच्चों के साथ जान बचाने के लिए एक सूखे कुँवें में छिप जाते हैं।
तभी अल्लाह अपने बन्दों की रक्षा के लिए एक फरिश्ता भेजता है, जो मकड़ी के रूप में आकर उसे कुँवे को जाले से कुछ इस तरह ढँक देता है, जिससे से की कुँवे के अंदर झाँकने से बाहर वालों को कुछ दिखाई न दे।
लेकिन तभी हिन्दुओं के देवता ने गिरगिट के वेश में आकर कुँवे के मुंडेर पर बैठ "हिन्दुओं के फ़ौज" को बार-बार सर हिलाकर हुसैन साहब के अंदर छिपे होने का इशारा कर देता है। हिन्दुओं की फ़ौज जाले को हटाती है और हुसैन साहब को कुनबे समेत क़त्ल कर देती है। किस्सा सुनकर बच्चे "हाय हुसैन" करने लगे और हिन्दुओं के लिए लानत बरसाने लगे।
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जब की हकीकत यह है की --- इमाम अली साहेब और उनके बेटे हसन और हुसैन के साथ अन्याय शुरुआत से ही इन्ही सुन्नियों ने किया। मुआविया और उसके बेटे यजीद सुन्नी खलीफा अबु-बकर, उमर और उस्मान की मदद से ही इस कुकृत्य को अन्जाम देने में सफल हुए थे। और फाइनली निहत्थे इमाम हुसैन साहब की कुनबे सहित "कर्बला" में जघन्य हत्या कर दी गयी। शिम्र नामके व्यक्ति ने इमाम हुसैन का सर काट कर उनको शहीद कर दिया , शिम्र बनू उमैय्या का कमांडर था। उसका पूरा नाम "Shimr Ibn Thil-Jawshan Ibn Rabiah Al Kalbi (also called Al Kilabi (Arabic: شمر بن ذي الجوشن بن ربيعة الكلبي) था।
दूसरी बात भारतीय हिंदुओं में एक परिवार या समुदाय "हुसैनी ब्राह्मण" कहलाता है, हुसैनी ब्राह्मण दरदना भट्टाचार्य के वंशज थे. उनमें आत्माभिमान, बहादुरी, और रहमत कूट-कूट कर भरी थी, वे इमाम अली साहब और उनके परिवार के प्रति सम्मान और आस्था रखते थे। कर्बला में इमाम हुसैन की शहादत की खबर सुनी तो हुसैनी ब्राह्मण रिखब दत्त इराक पहुंचे।
यजीद के सैनिक इमाम हुसैन के शरीर को मैदान में छोड़कर चले गए थे। तब रिखब दत्त ने इमाम के सर को अपने पास छुपा लिया था। यूरोपी इतिहासकार रिखब दत्त के पुत्रों के नाम इसप्रकार बताते हैं ,1 सहस राय ,2हर जस राय 3,शेर राय ,4राम सिंह ,5राय पुन ,6गभरा और7 पुन्ना। बाद में जब यजीद को पता चला तो उसके लोग इमाम हुसैन का सर खोजने लगे कि यजीद को दिखा कर इनाम हासिल कर सकें। जब रिखब दत्त ने सर का पता नहीं दिया तो यजीद के सैनिक एक एक करके रिखब दत्त के पुत्रों से सर काटने लगे ,फिर भी रिखब दत्त ने पता नहीं दिया। सिर्फ एक लड़का बच पाया था। जब बाद में मुख़्तार ने इमाम के क़त्ल का बदला ले लिया था तब विधि पूर्वक इमाम हुसैन के सर को दफनाया गया।
रिखब दत्त के इस बलिदान के कारण उसे सुल्तान की उपाधि दी गयी थी और उसके बारे में "जंग नामा इमाम हुसैन " के पेज 122 में यह लिखा हुआ है ,"वाह दत्त सुल्तान ,हिन्दू का धर्म मुसलमान का इमान,आज भी रिखब दत्त के वंशज भारत के अलावा इराक और कुवैत में भी रहते हैं ,और इराक में जिस जगह यह लोग रहते है उस जगह को आज भी हिंदिया कहते हैं।
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जिस रसूल के नाम का कलमा पढ़ा, उसी के नवासे को परिवार सहित निर्दयता से क़त्ल कर उसका दोष निर्दोष हिन्दुओं पर मढ़ने वाले सुन्नियों और नीच बामपंथियों का प्रोपगेंडा फ़ैलाने में महारथ हासिल है

Tuesday, March 1, 2016

ये जो मोदी विरोध का नशा है ना...बड़ा जहरीला होता है...!

हुजूर-ए-आला ये जो मोदी विरोध का नशा है ना...बड़ा जहरीला होता है जी...प्यार, मोहब्बत,भाईचारे,अमन की बाते करने वाले तथाकथित ह्यूमनवादी कब इस जहर की चपेट में आकर इस समाज के लिये जहरीले नाग बने जा रहे हैं इन्हें खुद नहीं समझ आ रहा।
देशद्रोही और देशभक्ति के सर्टिफिकेट पर रं रो करने वालों की दोगलईती देखो साहेब....सिर्फ भाजपा को सपोर्ट करने भर से ही ये खुद एक सेकंड में लोगों को संघी का सर्टिफिकेट बांटने से नहीं चूकते।
इस फॉर्मूले से तो 2014 लोस चुनावों में भाजपा को वोट देकर भारी बहुमत से उसकी सरकार बनाने वाली देश की आधी जनता इनके लिये संघी हो गई...और संघियों से इनकी नफरत जगजाहिर है.. फिर देश की आधी जनता मतलब संघियों से नफरत करने वाले खुद किस मुंह से भाईचारे की बात करतें हैं?
श्री श्री रविशंकर जी वर्तमान में भारत के सिंगल ऐसे आध्यात्मिक गुरु हैं जिनकी मैं दिल से इज्जत करता हूँ...ये हमेशा प्यार मुहब्बत भाईचारे की बात करतें हैं...इन्होंने आज तक कभी नफरत फैलाने वाला कोई विवादित बयान नहीं दिया....ना ही ये कभी किसी भी बात के लिये विवादों में ही आये...लेकिन सिर्फ मोदीजी को सपोर्ट करना इतना बड़ा गुनाह हो गया की एक टुच्ची सी वजह से खुद को मानवतावादी कहने वाले दोगले इनके चरित्रहनन पूरे जी जान से जुट गये।
हम पर असहिष्णु,अंधभक्त का आरोप लगाने से पहले इन्हें खुद के गिरेबान में झाँककर देखना चाहिये की सिर्फ विपरीत विचारधारा होने की वजह से दिन भर भक्त,अंधभक्त, संघी का सर्टिफिकेट बाँटा करते हैं......खुद विपरीत विचारधारा को स्वीकार करने की हिम्मत नहीं और हमको असहिष्णु बोलते हैं...गजब की कुत्तई है यार।
अभी तक जिस कन्हैया को खुद का बाप बनाये घूम रहे थे उसी बाप ने सेना को बलात्कारी बोल दिया...अब बाप की बात से लौंडा तो सहमत होगा ही...है की नही?
मतलब अब तुम उसी सेना को बलात्कारी कहो जिसकी वजह से सुरक्षित घर में बैठे बुद्धिजीवीयापा छांट रहे हो फिर इसी बात पर हम तुमको देशद्रोही कह दे तो हम असहिष्णु, अंधभक्त संघी हो गये?
अभी वो एक जो फरार हो गया विजय माल्या...कॉंग्रेस के राज में 9000 करोड़ का लोन लिया...कोई पुछत्तर नहीं था...अभी भाजपा की सरकार बनते ही पूछताछ हुई...खुद को फंसता देख देश छोड़कर फरार हो गया....अब इसके लिये भी इल्जाम मोदी पर?
माने कॉंग्रेस होती तो 9000 करोड़ का लोन और दे देती....किसी को कानोकान खबर ना लगती...मिडीया में कोई बवाल ना होता....सब कुछ वैसे ही चलता रहता तब तो बढ़िया था लेकिन मोदी ने उसकी पूँछ पर लात रख दी तो मोदी बुरे हो गये? मतलब अब सच्चाई सामने लाना भी गुनाह हो गया?
अभी वो भागा नहीं की बगैर किसी सुबूत के सरकार पर उसको भगाने का इल्जाम लगा दिया...अबे कुछ दिन इन्तजार तो कर लेते...अगर कोई कार्यवाही ना होती तो हम भी तुमसे सहमत होते...पर तुम तो मोदी विरोध में इतने अंधे हो चुके हो की बिना सोचे समझे तुरन्त आरोप फेंकने को तैयार रहते हो...अबे कुछ तो सबर चाटो...
दिल में भरे मोदी से नफरत का जहर निकाल नहीं पा रहे और हमे भाईचारे का ज्ञान बाँटते हैं।
खुद नफरत का बीज बोकर हम पर जहर की खेती का आरोप लगाते हैं...भाई ताली एक हाँथ से नहीं बजती.....दूसरों से जैसे व्यवहार की अपेक्षा करते हो पहले खुद वैसा व्यवहार करना सीखो...
सबको पता है सांप को चाहे कितना भी दूध पिलाओ लेकिन साला वो काटेगा जरूर.....जाओ पहले खुद के जहर भरे दांत तोड़कर आओ फिर अगले से दूध पिलाने की उम्मीद करना।

Wednesday, February 24, 2016

देवी दुर्गा को वेश्या कहा गया, फिर भी कोन सी बोलने की आज़ादी चाहिए...?

स्मृति ईरानी ने जो बातें सदन में रखी हैं उन्होंने वाक़ई मुझे झकझोर कर रख दिया है कि किस तरह से उमर ख़ालिद ने देवी दुर्गा जिसकी सामान्य हिन्दू भगवती माँ मानकर पूजता है।उन्हें वैश्या कहा।यह भी कहा कि उन्होंने महिषासुर को बिस्तर पर धोखे से मारा।
मैं तो सोच रहा था कि उसने देशद्रोही नारे लगाए हैं मगर इसने तो हिन्दू होता तो समझो कि मुहम्मद साहब की माँ के कपड़े उतारकर उन्हें वैश्या कह दिया।
या इससे भी आगे जाकर कि उमर ख़ालिद ने अपनी माँ के वस्त्रों का हनन किया है।मेरी लिए सभी की माँ वन्दनीया हैं।मगर उमर ख़ालिद की मानसिकता का पोस्टमार्टम कहता है कि उसने पहले अपनी माँ के कपड़े उतारे हैं।
क्या मुसलमानों को ऐसा नौजवान क़ुबूल हैं जो मुहम्मद साहब जैसे महापुरुष पर इतनी गन्दी छींटाकशी करे?
जो अपनी माँ पर गन्दी नज़र रखता हो।
जी हाँ!ये उसी के समान है।आप लोग समझो कि मैं कह रहा हूँ के जो किसी को भी माँ की गाली दे वो निश्चित रूप से अपनी मां की इ्ज़्जत रोज़ उतारता होगा।
जो अपनी माँ को मान देता है;किसी भी माँ को गाली नहीं दे सकता,और अगर देता है तो स्वयं की माँ को देता है।
देशद्रोह तो इस मानसिकता के सामने बहुत छोटी बात है।देश की संकल्पना हर काल में अलग अलग होती है।लेकिन माँ तो पहली गुरु होती है।माँ से ही मानवता आती है।
उमर ख़ालिद जैसे जितने भी हिन्दू;मुस्लिम; सिख या ईसाई नौजवान हैं उनकी माँ की कोख तो कलंकित हो गई है।अब इनको उन्हीं के परिवार द्वारा विष देकर वो कलंक धो लेना चाहिए नहीं तो जनता तो उन्हें मार ही देगी।
स्मृति ईरानी ने और भी बहुत महत्त्वपूर्ण बिन्दु तथ्यों के साथ उठाए जिसमें चौथी कक्षा के बच्चों को क्या शिवाजी की निन्दा पढ़ाती तीस्ता गरमबाड़ की किताब को पेश किया।काँग्रेस का सिर उसकी खोज में विफ़ल रहा जिसे चुलु्लू भर पानी कहते हैं;वरना राहुल गांधी का ज़िन्दा होना सम्भव न होता।
अनुराग ठाकुर से लेकर राजनाथ सिंह तक सभी ने विकराल शब्दों से काँग्रेस से लेकर वामियों की मोटी खाल उधेड़ दी।
मुलायम सिंह ने शानदार तरह से दो शब्दों में ये कहकर कि देशद्रोही नारे लगाने वालोंको माफ़ नहीं किया जा सकता; दिल का भार बढ़ने न दिया।
कुल मिलाकर मैं ये मान रहा हूँ कि भारत एक बार फिर पुनर्जीवित हो रहा है तभी इतनी उबकाई निकल रही है।
इसी राष्ट्रवाद ने एक बार अंग्रेजों को जाने के लिए मजबूर किया था।लेकिन अब फिर से जगा है;और अब राजनीति का अंग्रेज जाने वाला है।अब राजनीतिक दल वाम या काँग्रेस वाले ख़त्म होने वाले हैं।बीजेपी के दो भाग या कुछ क्षेत्रीय दलों का ही अस्तित्व रहने वाला है।
काँग्रेस ने इस मामले में कांग्रेस का हाथ देकर राजनीतिक आत्महत्या कर ली है और राहुल गाँधी ग़लतफ़हमी में सोच रहे हैं कि लोग उनसे डरते हैं।जिससे बच्चा बच्चा खेलता है;उससे कौन डरता होगा?
हाँ!काँग्रेस के शुभचिंतक डरते होंगे इससे तो इनकार नहीं किया जा सकता।

Monday, February 22, 2016

ब्राह्मणवाद से किसको आज़ादी चाहिए। जिसे आने वाली पीढ़ी हरामज़ादी चाहिए।

ब्राह्मणवाद से किसको आज़ादी चाहिए।
जिसे आने वाली पीढ़ी हरामज़ादी चाहिए।
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जो ब्रह्म की साधना से जीवन संजोता है।
मूर्खों!वास्तव में वही तो ब्राह्मण होता है।
ये मिश्रा;शुक्ला ब्राह्मण नहीं नेमप्लेट हैं।
कर्म से विनष्ट हुए कोई भला कैसे श्रेष्ठ है?
हालांकि मानता हूँ के;
आनुवंशिकता इन सबमें सहायक है।
मगर,शेष जातियों में भी;
कई ब्राह्मण कहे जाने के लायक़ हैं।
भूल गए;व्यास की माँ मल्लाह कन्या थीं।
तुलाधर वैश्य की माँ जाति से बनिया थीं।
वाल्मीकि की लूट से जनता बेहाल थी।
जाबाल ॠषि की माताजी चाण्डाल थी।
विश्वामित्र थे तो क्षत्रिय;बने गए थे ब्राह्मण।
अरे!तुम वो तपस्या क्या समझोगे चारण?
तुम्हें तो अपने ही देश की बर्बादी चाहिए।
ब्राह्मणवाद से किसको आज़ादी चाहिए???
जिसे आने वाली पीढ़ी हरामज़ादी चाहिए।
............
कर दी है तुमने लोकतंत्र की छीछालेदर।
कमीनीस्ट!देश बेचो;दोगे अपनी ही मातर।
उतनी ही ग़द्दारी फैलाओ;जितनी हो चादर।
के भारत की बर्बादी तक जंग रहेगी होकर।
ये तो सोचो;माँबेचकर जितने जुटा लो डालर।
काम न आएगी तुमको;विदेशियों की झाँझर।
राष्ट्रवाद से अगर तुमको आज़ादी चाहिए।
तुम्हें देश के हर घर में आतंकवादी चाहिए।
तो सभी ख़ालिदों!तुम्हें मौत से शादी चाहिए।
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Tuesday, February 16, 2016

वामपंथ नक्सलियों के समर्थक है

वामपंथ: ढहते किले बढती बौखलाहट
साहब लोग नक्सलियों के समर्थक है | साहब लोग अपना अपना एनजीओ चलाते हैं | साहब लोग छंटे हुए कथाकार हैं कहानियाँ लिखने में माहिर हैं | साहब लोगो का चार खुरों वाला नया भगवान् है | कहाँ से आया, कौन लाया, क्या किया इस भगवान् ने कुछ पता नहीं | साहब लोग आर्य अनार्य का विवाद खड़ा करते हैं | इसके पक्ष में संस्कृत कोट करते हैं बिना यह जाने कि संस्कृत तो आर्यों की भाषा थी | साहब लोग संघ को गाली देते हैं | यहाँ तक कि जिस संघ का कभी हिस्सा नहीं रहे उस पर कवर पेज स्टोरी लिखते हैं | साहब लोग देश की राजधानी में खुलेआम पाकिस्तान जिन्दावाद और हिंदुस्तान के टुकड़े होंगे के नारे लगाते हैं | बिना ये सोचे कि गर हिंदुस्तान न रहा तो इन लोगो को दाना पानी कहां से मिलेगा ? कहने की जरूरत नहीं कि साहब लोग JNU‬ वाले बौधिक आतंकवाद की उपज हैं | ऐसे तथाकथित “साहब लोग” हमारे देश में बुद्धिजीवी और समाजसेवी कहे जाते हैं |

इन "घाघ" बुद्धिजीवियों के हाथ में पूरे 60 साल देश की शिक्षा व्यवस्था का दारोमदार था | इन्हीं लोगो ने वीर शिवाजी को "पहाड़ी चूहा" और और सिख गुरुओं के हत्यारे औरंगजेब को "सूफी बादशाह" बनाया | भगत सिंह को "आतंकवादी" और शोभा सिंह को "महिमामंडित" करने वाले यही लोग थे | इतिहास के नाम पर जमा कूड़ा करकट देश के युवाओ को पीड़ी दर पीड़ी शर्बत बता पिलाया गया | यहाँ तक कि हमारी जड़ो से हमें काट के रख दिया | हेमू कौन था और दाहिर कौन हमें नहीं पता | हरी सिंह नलवा का नाम पूछने पर हम अपने कान खुजाते नजर आते हैं | क्यों भाई कौन बताएगा हमें इनके बलिदान के बारे में ? कौन कहेगा उन लाखों अनाम शहीदों की गाथा जो पिछले १२०० सालो में देश के लिए बलिदान हो गये ?
पूरे 60 साल देश ने इन लोगो को बिना उफ़ किये भुगता है | मगर आज महज 2 सालों में साहब लोगो के तख़्त हिलने लगे हैं | एक "हाफ चड्डी" पहने कल का चाय वाला छोकरा आज "लाल सलाम" का भगवाकरण करने में लगा है और साहब लोग कुछ नहीं कर पा रहे हैं | तय नहीं कर पा रहे हैं कि वैचारिक प्रतिरोध करें या फिर से मार्क्स की "खूनी क्रांति" लिख दें | पर क्या करें पूरा राष्ट्र केरल तो है नहीं जहाँ सघियों के आप कबाब बना कर खा सकें | “माना आपके शास्त्रों में लिखा है कि सत्ता बन्दूक की नालियों से होकर गुजरती है | पर ये चीन या रूस नहीं है जहाँ कत्ल की नयी -२ इबारतें लिखी गयी | ये भारत है जहाँ हमेशा शास्त्र ने शस्त्र को जीता है |”
ये तो महज एक शुरुवात है | मिर्च अभी और तेज होगी | वामपंथ अभी और बेनकाब होगा | आपका बौधिक आतंकवाद अब समाप्ति की ओर है | आवाहन हो चुका है | ध्यान से सुनिए आपको नए भारत की पदचाप सुनाई देगी | भारत नव निर्माण के पवित्र यज्ञ में आहूति लगना शुरू हो चुकी हैं | हो सके तो आप भी इस यज्ञ हिस्सा बनिए और खुद को शुद्ध कीजिये | वरना तय जानिए कि इस बार इतिहास हमारी कलमे लिखेंगी | जिसमे आपका असल वर्णन विस्तार से होगा |
साभार

जब मुहम्मद साहब के कार्टून बने थे वो भी तो फ्रीडम ऑफ़ एक्सप्रेशन था तब क्यों बुरी लगी थी..?

क्या "JNU" मामले में देशद्रोह कानून का दुरूपयोग हो रहा है..? - गौतम नवलखा
जब मुहम्मद साहब के कार्टून बने थे वो भी तो फ्रीडम ऑफ़ एक्सप्रेशन था तब क्यों बुरी लगी थी..?
कमलेश तिवारी ने मुहम्मद साहब के ऊपर बयान दिया था वो भी तो फ्रीडम ऑफ़ स्पीच थी फिर क्यों बौखला रहे थे..?
जब मकबूल फिदा हुसैन मॉ सरस्वती की नंगी तस्वीर बनाता है तो उसे एक कलाकार की रचना कहते है...!
सलमान रशदी की किताब अथवा तस्लीमा नसरीन की किताब भी तो फ्रीडम ऑफ़ एक्सप्रेशन था, तब क्यों बुरी लगी थी..?
अब JNU में देश तोड़ने को फ्रीडम ऑफ़ स्पीच बता कर ज्ञान बाँट रहे हो हमारे ही घर में हमको धमकाने निकले हैं, एक शेर के रहते कैसे कुत्ते खुलकर भौंक रहे हैं..!
अफज़ल पर तो छाती फटती देखी है बहुत लोगों की, मगर शहादत भूल गए हो सियाचीन के शेरों की और जब देशद्रोह के हमदर्दीैं तुच्छ सियासत करते है तब तो नहीं बोलते हो कुछ भी कोई भी सब लोग मुँह में दही जमाकर बैठ जाते हो और अब सब ज्ञान देने के लिए हाजिर हो हद है यार दोगली हरकतों की..!!

Monday, January 5, 2015

अंधा मोदी विरोध...!

मोदी विरोधी ये पोस्ट कृपया ना पढ़े आपकी देश द्रोही सोच को धक्का लग सकता है...

" मोदी विरोधी ताकते देश है वाकई मेँ कुछ विकास नहीं चाहते "

इसे भारतीय राजनीती की बिडंबना ही कहेंगे की जहाँ जम्मू-कश्मीर जैसे मुस्लिम बहुल राज्य को 80 हजार करोड़ का ऐतिहासिक पैकेज देने वाला "मुस्लिम बिरोधी" बताया जाता है, बिहार को 1.65 लाख करोड़ के विशेष पैकेज देने वाले Narendra Modi को बिहार चुनाव में "बाहरी" करार दिया जाता है।

भ्रस्टाचार से त्रस्त हिंदुस्तान को मात्र डेढ़ सालों में जिसने Corruption Perceptions Index

में चीन से बेहतर स्थिति में खड़ा कर दिया। वैश्विक मंदी के दौर में भी भारत "आर्थिक विकास दर " में चीन को पछाड़ दिया है।

जिस आदमी की सरकार पर इन डेढ़ सालों में "घोटाला" का एक आरोप नहीं है, ताज्जुब होता है की उसके कपड़ों पर भारत में टिप्पणी की जाती है।

मोदीजी के दबँग व्यक्तित्व का ही जलबा है, जहाँ पहली बार किसी भारतीय प्रधानमंत्री को World Economic Forum के 125 देशों के सर्वे में विश्व के 10 शक्तिशाली व्यक्ति के रूप में चुना जाता है।

पुतिन और ओबामा सरीखे नेताओं की प्रभवशाली कतार में Times Megazine जिसे शामिल करती है,

कौतुहल है की उसे लोग "कमजोर PM" कहते हैं। बिना किसी पूर्व अनुभव के अकेले दम पर जिसने अन्तराष्ट्रीय राजनीती में भारत का कद बढ़ाया, हिन्दी, गीता और हिंदुस्तान का मान बढ़ाया।

अपनी कूटनीतिक कुशलता से शक्तिशाली चीन को बियतनाम-जापान-भारत के ट्रैंगल-ट्रैप में फँसा दक्षिण चीन सागर में उलझा दिया।

यमन से हजारों भारतियों के सकुशल वापसी का मामला हो या दुबई में दाऊद इब्राहिम की चल-अचल संपत्ति को जब्त करवाने का मामला हो या आगामी ब्रिटेन दौरे में वहाँ भी दाऊद की संपत्ति जब्त करवाने का प्लान बनाना या हजारों करोड़ का Foreign Investments लाना या फिर UN की "स्थायी सदस्य्ता" में प्रबल दावेदारी का Achievement ---पर आश्चर्य की बात की,

हिंदुस्तान में उस आदमी के विदेशी दौरे पर ऊँगली उठाई जाती है।

जिस आदमी ने आम जनता की छोटी-छोटी परेशानी, माताओं-बहनों की समस्या पर काम करना चाहा, जिसने गरीबों को बैंक अकाउंट और इनश्योरेन्स का तोहफा देकर Moral Boostup किया, वहीँ Selfie With Daughter जैसी बात कर बेटियों का मान बढ़ाया।

जो स्कूल में लेडीज टॉयलेट बनबाने का सपना साकार किया, जिसने वाराणसी के एक गाँव को मॉडल गाँव बनाकर नेताओं के सामने उदाहरण प्रस्तुत किया उसे हिंदुस्तान में "सिर्फ मन की बात" करने वाला कहा जाता है। दशकों से पेंडिग OROP और "नेताजी की गुप्त फाइल" सहित कई मामलों में मोदी साहब को नाकाम दिखाने की कोशिश की गयी पर देर-सबेर उन्होंने जनता की आंक्षाओं पर खड़े उतरे वैसे ही महंगाई- बेरोजगारी - बिजली जैसी समस्याएं भी वे जरूर हल करेंगे।

जनता ने 65 साल सह लिए तो डेढ़ साल में आतुर नहीं हुई है, बस मोदी जी के राजनितिक दुश्मन बेचैन पड़े हैं।

मेहनती इतनी की खुद भी 20 घण्टे काम करते हैं, अकेले दम पर "2014 लोकसभा" सहित महाराष्ट्र, कश्मीर, हरियाणा और झारखण्ड में चुनाव प्रचार कर सफलता के झंडे गाड़े। मोदी साहब का ही जलवा है की दक्षिण भारत जहाँ BJP का कोई नामलेवा नहीं था वहाँ आज "निगम चुनाव" में 40% सीट जीत रही है, और रही बिहार और दिल्ली की बात तो दिल्ली तो नौंटकिक राजनीति भुगत रही हैँ ।

तथा बिहार मे पिछले 60 दिनोँमेँ 578 हत्याये हुयीँ हैँ, बिहार के लोगोँ ने जगंलराज 3 खुद चुना हैँ...

अंधा मोदी विरोध करने वाले Presstitutes मीडिया दरबार और Sickular जान लें की आम जनता अंधी-बहरी नहीं है, आपका सारा खेल देख रही है, समझ रही है।

और आपकी इसी अंधे मोदी विरोध ने मुझ जैसे Natural इन्सान को मोदी भक्त्त भक्त बना दिया।
I Proud To Be "भक्त" ---- मोदी भक्त