पान खाकर पिच्च से कहीं भी थूंक देतें हैं आप...
छत से ही कूड़ा भी फ़ेंक देतें हैं..
सड़क पर बेवजह हार्न बजातें हैं …
गलत साइड गाड़ी चलातें हैं..
राह जाती लड़की,महिला पर कमेंट कसतें हैं।
ट्रेन,बस में बिना टिकट यात्रा करतें हैं।
महिला,रोगी,बृद्
खुली दीवाल देखते ही आपको पेशाब लग जाता है…
खेत देखते ही आपको याद आता है की मैनें कल कायम चूर्ण खाया था।
सार्वजनिक स्थलों पर कूड़ेदान का कभी प्रयोग नहीं करतें हैं..
घर में वैध बिजली कनेक्शन के बावजूद भी कटिया फंसाकर हीटर भी जला लेतें हैं आप…
बिजली मीटर से छेड़छाड़ भी कर रखी है आपने…
दो चार दिन दौड़ने के बजाय किसी अधिकारी को घूस देकर काम कराना उचित समझते हैं….
पानी देखते ही आप पर उसे बर्बाद करने का भूत सवार हो जाता है…
खेत होने के बाबजूद आप खेती नहीं करते हैं…
आज तक अपने अपने हाथ से एक पेड़ तक नहीं लगाया।
देश, प्रदेश की तमाम सरकारी सुविधा,सब्सिडी,
इतना मेहनत करना आपको पसन्द नहीं।
तो भाई 19 रुपया में 75 MB डाटा कार्ड भरा के आपको फेसबुक पर ये पूछने का कोई अधिकार नहीं कि “कहाँ हैं अच्छे दिन”…?
जानकारी के लिये आपको बता दूँ आपके अच्छे दिन 2 साल क्या दो हजार साल में भी नहीं आयेंगे…
और मोदी आपको 15 लाख क्या 20 लाख भी दे दें तो आपको कभी जीवन जीने का ढंग नहीं आयेगा।
महाराज एक नागरिक का कर्तव्य बोध होना सबसे ज्यादा जरूरी है।
इतना जानिये कि सारी समस्या का समाधान केवल सरकार के पास नहीं होता।
कुछ अपना भी कर्तव्य है।
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