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Wednesday, May 11, 2016

रोहित वेमुला मामले में कांग्रेस का बहुत बड़ा हाथ! ये बड़ा खुलासा जान चौंक जायेगे आप !

रोहित वेमुला मामले में कांग्रेस का बहुत बड़ा हाथ! ये बड़ा खुलासा जान चौंक जायेगे आप !



हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी में चल रहे विवादों में बुधवार को एक और विवाद जुड़ गया। रोहित वेमुला की मौत के बाद यूनिवर्सिटी में आंदोलन के अगुआ रहे राजू साहू ने वामपंथी छात्र संगठन एसएफआई से नाता तोड़ लिया है। यूनिवर्सिटी छात्रसंघ के महासचवि राजू साहू ने एसएफआई में लोकतंत्र न होने का आरोप लगाते हुए कहा कि यूनियन के पदाधिकारियों को अपने विचार व्यक्त करने तक की आजादी नहीं है और यहां तक कि साधारण कार्यकर्ता भी सीधे शीर्ष नेतृत्व के निर्देश पर बिना सवाल उठाए काम करते हैं।
राजू ने कहा कि अब मुझे समझ में आ गया है कि एसएफआई की राजनीति सिद्धांतों पर नहीं बल्कि अवसरवादिता पर आधारित है। राजू साहू ने रोहित वेमुला की आत्महत्या के बाद कैंपस में संगठन द्वारा की जा रही राजनीति से अपने मतभेद जाहिर करते हुए संगठन पर कुछ गंभीर आरोप भी लगाए। उन्होंने कहा कि रोहित की आत्महत्या के मसले पर चलाए जा रहे आंदोलन के लिए कांग्रेस फंड मुहैया करा रही है।



राजू साहू रोहित वेमुला के मामले में काफी सक्रिय रहे थे। रोहित को न्याय दिलाने के लिए होने वाले प्रदर्शनों में उन्होंने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था। बुधवार को उन्होंने मीडिया को वामपंथी छात्र संगठन SFI की सदस्यता छोड़ने की घोषणा की। हालांकि, इसके बाद भी वह छात्र संघ के महासचिव बने रहेंगे। उन्होंने पार्टी पर गलत नीतियों को बढ़ाने का आरोप लगाया। साथ ही यह भी कहा कि वह इन दिनों रोहित की तरह ही खुद को बहुत अकेला महसूस करने लगे हैं।
साहू ने पार्टी छोड़ने के अपने फैसले के बारे में कहा, ‘मैं अपनी समझ के आधार पर कह सकता हूं कि रोहित के लिए शुरू किए गए आंदोलन को बड़े पैमाने पर कांग्रेस द्वारा फंड दिया जा रहा है। कैंपस के बाहर के कुछ लोग जिनमें राजनीतिक दलों के लोग भी शामिल हैं की इस विवाद को बढ़ाने में बड़ी भूमिका है।’


एसएफआई और जॉइंट ऐक्शन कमिटी फॉर सोशल जस्टिस के लिए अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए राजू साहू ने कहा, ‘रोहित वेमुला आंदोलन के लिए छात्रों के भविष्य को दांव पर लगाया जा रहा है।’ उन्होंने कहा कि इन सबकी वजह से वह बेहद अकेले हो गए हैं और तनाव में रहने लगे हैं। साहू ने कहा, ‘अकेलेपन और तनाव की वजह से मैं उसी रास्ते पर जाने के बारे में सोचने लगा हूं, जिस पर रोहित चला गया था।’ राजू ने कहा, ‘मुझे लगता है कि गलत रास्ते से खुद को दूर रखकर और थोड़ा बाहर निकलकर अपने को इन सबसे बचा सकता हूं।’
साहू ने संगठन छोड़ने के कई कारण बताए। उन्होंने पार्टी की अवसरवादी राजनीति और कुछ लोगों के खिलाफ झूठा प्रचार करने की नीति को भी पार्टी छोड़ने की वजह बताई। साथ ही यह भी आरोप लगाया कि एसएफआई के अप्रासंगिक आंदोलनों की वजह से छात्रों को अच्छे अवसर नहीं मिल पा रहे हैं। साहू ने कहा, ‘छात्र संघ चुनाव के लिए उम्मीदवारों के चयन में क्लास, जाति, और धार्मिक कार्ड खेला जा रहा है। एसएफआई की आंतरिक राजनीति में भी क्षेत्रीयता और धर्म बड़ी भूमिका निभाते हैं।’

Thursday, March 10, 2016

कामरेड कन्हैया कुमार; तुम्हारी उम्र क्या है ?

हाँ तो कामरेड कन्हैया कुमार;  तुम्हारी उम्र क्या है ?
यही कोई 30-31 साल ना और तुमने क्या कहा की "भारतीय सेना कश्मीर में रेप करती है ।
चलो मैं तुम्हे एक जगह ले चलता हू " आज से ठीक 15 साल 6 महीने 9 दिन पहले 29 June 1999 की रात जब तुम JNU के अपने हॉस्टल में गांजे और सिगरेट के धुंए के बीच विदेशी शराब के घूंट हलक से नीचे उतार क्रांति की बातें कर रहे थे उस वक्त Dras, kargil, Jammu & kashmir में Captain Vijayant Thapar शहीद हो गए थे ।
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जानते हो उस वक्त उम्र क्या थी उनकी ? मात्र २२ साल !
‪#‎तोलोलिंग‬ को कारगिल का निर्णायक मोड़ माना जाता है और Major Mohit Saxena की
assault team में शामिल विजयंत की प्लाटून ने पाकिस्तान के ‪#‎बरबाद_बंकर‬ पर तिरंगा फहराया ।
तोलोलिंग को जितना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन था, 2nd राजपूताना राईफल्स 1.5 महीने से लगातार असफल हो रही थी ।
ज्यादातर जवान और अधिकारी घायल थे और जब आदेश आया की अगर तुमसे नहीं होता तो खाली करो हम दूसरी रेजिमेंट भेजेंगे तब Commanding officer Col. M. B. Ravindranathan बोले की "राजपूताना की इज्ज़त का सवाल है ।
" बस 11 घंटे में तोलोलिंग पर तिरंगा था । that's the spirit of Indian Army, you bloody bastard.
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तोलोलिंग के बाद 2nd Rajputana को अगला task मिला three pimples & knoll को कब्जे में लेने का ।
जानते हो तोलोलिंग और टाईगर हिल के बीच sandwich की तरह फंसी काले पत्थरों की उबड़-खाबड़ भद्दी सी पहाड़ी हैं ।
29 जून की वो पूर्णिमा की रात थी, Northern light infantry (पाकिस्तान) की 6 वीं बटालियन चोटी पर 100 MM की gun और machine gun लेकर पूरी तैयारी से बैठी थी ।
चांदनी के उजाले में बेहद संकरे रास्ता, दोनो ओर करीब 15000 फीट की खड़ी ढाल, सामने से बचाव के लिए कोई ओट नहीं , केवल छोटी - छोटी चट्टानें जिस पर तुर्रा ये की तापमान -15℃ । साक्षात यमराज से भिड़ जाने सा था
यहाँ पर विजयंत की यूनिट ने असाल्ट शुरू किया कम्पनी कमांडर Major Padmpani Achary
के under में । जैसे ही चढ़ाई पूरी हुई दुश्मन ने मशीन गनों का मुंह खोल दिया और 100MM की
गोलाबारी शुरू हो गई । इसका बराबरी का जवाब दिया गया लेकिन नुकसान अपने ही पक्ष का ज्यादा हुआ ।
कुछ ही देर की मुठभेड़ में कंपनी कमांडर शहीद हो गए,ज्यादातर जवान या तो मर चुके थे या बुरी तरह जख्मी थे और इस निर्णायक घड़ी में विजयंत ने दुश्मन से सीधा सामना किया ।
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मात्र 15 मीटर की दूरी पर दो लाईट मशीन गनों के बीच आगे बढ़ कर मोर्चा लेना भारतीय सेना ही कर सकती है कन्हैया कुमार तुम्हारे जैसे किसी वामपंथी,गद्दार,नामर्द, नपुंसक & क्लीव के बस का नहीं जो 4 दिन जेल में रहकर खुद ही थूक कर चाट आये ।
कलेजा चाहिए होता है इसके लिए । समझे !
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मात्र 15 मीटर की दूरी से विजयंत को गोलियां बींध गईं थी; सीने , पेट और सिर में ........और वह रक्तरंजित नायक अपने साथी ‪#‎नायक_तिलक_सिंह‬ की बाहों में गिरा ।
जानते हो केवल 6 महीने हुए थे उसे सेना में भर्ती हुए और जब उन्हें ‪#‎वीर_चक्र‬ से सम्मानित किया गया तो पुरुष्कार लेने आईं थी उनकी 82 साल की वृद्धा दादी ।
उस बुढ़िया से पूछना उनकी छातियों में दूध उतार आया होगा उस वक्त ।
Greater Noida में उनकी अंतिम यात्रा में करीब 1.5 लाख की भीड़ उमड़ आई थी । .
और हाँ विजयंत केवल इसीलिए नहीं याद किये जाते एक 6 साल की बच्ची थी ‪#‎रुखसाना‬; आतंकियों ने हत्या की थी उसके परिवार की और इसी सदमें से उसकी आवाज चली गई थी ।
मात्र 5 महीने में ही उसकी आवाज लौट आई थी ।
जानते हो किसकी वजह से ??
विजयंत थापर की वजह से और सुनो कारगिल पर दुश्मनों के हमले के बाद, शायद अपनी आने वाली मौत को भांपते हुए कैप्टन विजयंत ने अपने परिवारवालों के नाम एक चिट्ठी लिखी थी। जिसमें उन्होंने लिखा कि, 'जब तक ये चिट्ठी आप लोगों तक पहुंचेगी, शायद मैं न रहूं। मेरे मरणोपरांत अनाथालय में कुछ रुपए दान करें, और रूखसाना को 50 रूपए प्रति माह भेजते रहें।' रूखसाना पांच वर्षीय बच्ची थी, जो कैप्टन के साथ खेला करती थी और उसे विजयंत से काफी स्नेह था।
विजयंत थापर के पिता कर्नल वी एन थापर ने भी भारतीय सेना में रहकर 37 वर्ष तक देश की सेवा की। पिछले १७ बारह साल से लगातार सैकड़ों मील की दूरी तय कर वह उस उजड़ी और सुनसान जगह पर जाते हैं जहां उनका बेटा दुश्मनों से लोहा लेते हुए खेत हो गया था। वह ऐसा सिर्फ अपने शहीद बेटे को याद करने के लिए नहीं बल्कि उससे किए गए एक वादे को पूरा करने के लिए भी करते हैं। अपनी इस मूक श्रद्धांजलि के द्वारा सेवानिवृत्त कर्नल वीएन थापर कारगिल युद्ध में शहीद हुए अपने बहादुर बेटे कैप्टन विजयंत थापर से किए गए उस वादे को पूरा करते हैं जिसमें उनके बेटे ने जीवन के अंतिम क्षणों में कहा था कि अगर हो सके तो वह उस जगह आकर देखें जहां भारतीय सेना उनके और देश के भविष्य के लिए लड़ रही है।
कन्हैया तुम और तुम्हारे साथी स्त्री देह के भूखे, बच्चों के मांस को भून कर खा जाने वाली विचारधारा के झंडा बरदार क्या जानो की भावनाएं क्या होती हैं । .
तुम्हारा आदर्श होगा वह झूठा, कायर, मानसिक दलित और भगोड़ा ‪#‎रोहित_वेमुला‬ पर हमें अभिमान है शहीद ‪#‎विजयंत_थापर‬ पर ; हमारा आदर्श कोई भारत को बांटने वाला वामपंथी कुत्ता नहीं बल्की वो 13 लाख की शत्रुहंता और मानवता की सेवक हमारी सेना है।
सुन वामपंथी कुत्ते - शहीद चमकते हैं , शहीद दमकते है , चेहरे याद नहीं हैं , फिर भी वो महकते हैं , लोग तो रोज मरते हैं....पर वो मर कर भी जी जाते हैं...क्योंकि वो शहीद कहलाते है...

जय हिन्द जय हिन्द की सेना...!!.

Sunday, March 6, 2016

रोहित वेमुला : एक हार हुआ नौजवान जिसने आत्महत्या कर ली थी, और शर्मनाक बात ये है कि हमारे देश का मीडिया उसे हीरो बना रहा है,

कन्हैय्या कुमार का बाप पैरालाइज़्ड है और कई सालों से बिस्तर पर है, माँ आंगनवाड़ी कार्यकर्ता है जहाँ उसे 3000 रूपये महीने की तनख्वाह मिलती है, एक भाई और है जो आईएएस की तैयारी कर रहा है। कन्हैया कुमार की उम्र लगभग 30 वर्ष है और वो जेएनयू में पीएचडी कर रहा है। कन्हैया कुमार बिहार के जिस इलाके का रहने वाला है वो बहुत पिछड़ा इलाका है और वहां हमेशा सीपीआई और सीपीआई माले का बोलबाला रहा है। अब सवाल ये उठता है कि जिस बेटे की माँ दिन रात मेहनत करके 3000 रूपये महीने कमाती हो उसका लड़का 30 साल की उम्र तक पढाई करेगा? दूसरा सवाल, जिसके क्षेत्र का विकास कम्युनिस्टों के रहते (या उनके कारण) नहीं हो पाया क्या वो उन्ही का फेवर करेगा? तीसरा सवाल, क्या एक गरीब दलित इतने महंगे वकील हायर कर सकेगा? और मजे की बात सुनिए, जिस लड़के को घर में इतनी परेशानियां हैं उसका आदर्श है, एक हार हुआ नौजवान जिसने आत्महत्या कर ली थी, और शर्मनाक बात ये है कि हमारे देश का मीडिया उसे हीरो बना रहा है, रविश कुमार जैसे सीरियस पत्रकार उसकी शान में कसीदे पढ़ रहे हैं।

Saturday, March 5, 2016

CPM यानी तानाशाही-वो भी एक छोटी सी यूनिवर्सिटी में

साल 2012 की बात है। ‪‎JNU‬ में SFI‬ के अध्यक्ष पद के उम्मीदवार वी.लेनिन कुमार ने राष्ट्रपति पद के लिए कांग्रेस की तरफ से प्रणब मुखर्जी की दावेदारी को सीपीएम का समर्थन देने पर विरोध जताया था। अभिव्यक्ति की आजादी के पैरोकार सीताराम येचुरी और प्रकाश करात की सीपीएम ने बिना देर किए लेनिन कुमार और चार साथियों को न केवल एसएफआई से बाहर कर दिया बल्कि जेएनयू की एसएफआई यूनिट ही बर्खास्त कर दी। लेनिन कुमार ने एसएफआई-जेएनयू बनाई और चुनाव लड़ा। लेनिन कुमार चुनाव जीत गया। और असल एसएफआई का उम्मीदवार 10वें नंबर पर रहा और उसे 4309 में से सिर्फ 107 वोट मिले। तो ये थी असल एसएफआई की कैंपस में हैसियत और कद लेनिन का बड़ा था। उस वक्त बकौल इंडियनएक्सप्रेस लेनिन ने कहा था-
"fundamental problem with the CPM-SFI" is that the combine now functions like a "dictatorship" with "no room for debate" and represents all that is "unprincipled and undemocratic".
यानी तानाशाही-वो भी एक छोटी सी यूनिवर्सिटी में। लेकिन सवाल लेनिन की जीत का नहीं, सवाल यह कि प्रणव मुखर्जी की दावेदारी का विरोध भर करने पर सीपीएम ने अपने छात्र नेताओं को पार्टी से बाहर कर दिया और वो अभिव्यक्ति की आजादी की बात कर रहे हैं। और सवाल यह भी है कि लेनिन समेत तमाम एसएफआई छात्र नेता प्रणव मुखर्जी को उस वक्त 'दलाल' और कांग्रेस को दलालों, भ्रष्टाचारियों और दलितों-गरीबों को लूटने वालों की पार्टी मानते थे (लेनिन का भाषण सुन लीजिए) लेकिन अब वही कांग्रेस वोट बैंक के लिए लेफ्ट की गोद मे बैठने को तैयार है और लेफ्ट को कांग्रेस में कोई बुराई नहीं दिख रही।
जो कन्हैया अब लेफ्ट पार्टियों का प्रचार करने को तैयार है, वो जेएनयू चुनाव के वक्त लेफ्ट के बाकी धड़ों से भी आजादी चाह रहा था। यकीं न तो उस वक्त के उसके भाषण सुन लीजिए(क्विंट पर बाइट है)। फिर एक सवाल ये भी जेहन में है कि क्या जेएनयू का लेफ्ट एबीवीपी से घबराया हुआु हैं क्योंकि बीते छात्र संघ चुनाव में 14 साल बाद एबीवीपी का एक कैंडिडेट सेंट्रल पैनल में पहुंचा। उपाध्यक्ष पद पर भी एबीवीपी कैंडिडेट दूसरे नंबर पर रहा। महासचिव पर भी एबीवीपी कैंडिडेट दूसरे नंबर पर रहा। यानी लेफ्ट के जितने धड़े जेएनयू में सक्रिय हैं-छात्रों का भरोसा उनसे उठ रहा है।
खैर, लेफ्ट को नया नेता मिल गया है। कॉमरेड कन्हैया अब लेफ्ट को तारेगा तो अच्छा है। लेकिन, अभिव्यक्ति की आजादी का सवाल बुलंद करे तो फिर लेनिन को बाहर करने का सवाल भी उठेगा ही और उठना भी चाहिए। जो पार्टी अपने छात्र नेताओं को असहमति का हक नहीं देती-वो कैसे अभिव्यक्ति की आजादी की बात करती है। लेनिन का भाषण भी सुन लीजिए।

Wednesday, February 17, 2016

जेएनयू के गद्दार रामा नागा के पिता चूड़ी बेचते हैं और उसकी मां मजदूरी करती है तो क्या इसीलिए उसे गद्दारी की छुट है?

कन्हैय्या कुमार का बाप पैरालाइज़्ड है और कई सालों से बिस्तर पर है, माँ आंगनवाड़ी कार्यकर्ता है जहाँ उसे 3000 रूपये महीने की तनख्वाह मिलती है, एक भाई और है जो आईएएस की तैयारी कर रहा है। कन्हैया कुमार की उम्र लगभग 30 वर्ष है और वो जेएनयू में पीएचडी कर रहा है। कन्हैया कुमार बिहार के जिस इलाके का रहने वाला है वो बहुत पिछड़ा इलाका है और वहां हमेशा सीपीआई और सीपीआई माले का बोलबाला रहा है। अब सवाल ये उठता है कि जिस बेटे की माँ दिन रात मेहनत करके 3000 रूपये महीने कमाती हो उसका लड़का 30 साल की उम्र तक पढाई करेगा? दूसरा सवाल, जिसके क्षेत्र का विकास कम्युनिस्टों के रहते (या उनके कारण) नहीं हो पाया क्या वो उन्ही का फेवर करेगा? तीसरा सवाल, क्या एक गरीब दलित इतने महंगे वकील हायर कर सकेगा? और मजे की बात सुनिए, जिस लड़के को घर में इतनी परेशानियां हैं उसका आदर्श है, एक हार हुआ नौजवान जिसने आत्महत्या कर ली थी, और शर्मनाक बात ये है कि हमारे देश का मीडिया उसे हीरो बना रहा है, रविश कुमार जैसे सीरियस पत्रकार उसकी शान में कसीदे पढ़ रहे हैं।
रविश कुमार के अनुसार जेएनयू के गद्दार रामा नागा के पिता चूड़ी बेचते हैं और उसकी मां मजदूरी करती है
तो क्या इसीलिए उसे गद्दारी की छुट है?

Monday, February 15, 2016

ये कौन सी वामपंथी विचारधारा है..?

देश में घटती हुई वामपंथीं (छद्यम धर्मनिरपेक्षता वाले दल) की विचारधारा और समर्थकों की कमी के कारण घबराकर अब गाली गलौज जातिवादी और देशद्रोही वाली राजनीति करने लगे..!
दिल्ली में पढें लिखे सभ्य जिंस टीशर्ट पहनने वाले वामपंथी छात्रों और छात्राओं द्वारा जो विरोध प्रदर्शन का ढोंग किया और देश के प्रधानमंत्री और दिल्ली पुलिस (संविधान और कानून के रक्षक) के लिये जो शब्दों का इस्तेमाल गाली गलोज के रुप में की उससे तो ऐसा प्रतीत होता ये छात्र छात्रायें कॉलेज या विश्वविधालय में गाली गलौज दंगा फसाद और जातिवाद पर PHD/ Diploma कर रहों हों..?
( रोहित वेमुला/दलित/ जातिवाद) की राजनीति करने लग गये यह देश के वामपंथियों के लिये सोचने वाली बात है..!
ये कौन सी वामपंथी विचारधारा है..?
ये विचारधारा कार्ल मार्क्स की लेनिन की या ज्योति बसु की वामपंथी विचारधारा तो नहीं लगती ..!
वामपंथी/कामरेड प्रकाश करात वृन्दा करात (पति-पत्नी)
सीताराम येचूरी D राजा और अन्य वामपंथी चिंतको के लिये सोचने वाली बात है..?