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Thursday, September 1, 2016

इस बैंक अकाउंट में जमा कराया गया केवल 1 रु भी शहिदों के परिवारों की करेगा सीधे मदद

इस बैंक अकाउंट में आपके द्वारा जमा कराया गया केवल 1 रुपया भी शहिद सैनिको के परिवारों की करेगा सीधे मदद




भारतीय रक्षा मंत्रालय ने सेना के लिए एक बैंक खाता खोला है जिसमें लोग पैसा जमा कर सकते हैं और शहीद सैनिको के परिवारों की सीधी मदद कर सकते हैं..
अब जनता सीधे कर सकेगी सैनिको की आर्थिक सहायता

रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता ने एक हिंदी न्यूज़ चेनल को बताया कि ये फंड इसलिए शुरू किया गया है क्योंकि बड़ी तादाद में देश के नागरिक युद्ध में घायल या शहीदों के लिए दान देना चाहते थे लेकिन इसकी कोई व्यवस्था नहीं होने से आम लोग ऐसा नहीं कर पाते थे. इसलिए एक बैटेल कैजयुल्टी फंड बनाया गया है. जो इच्छुक लोगों की इसमें मदद भी करेगा.

रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर की पहल पर जून 2016 में इस फंड को शुरु किया गया था. ‘बैटेल कैजुयल्टी’ का अर्थ हालांकि युद्ध या युद्ध जैसी स्थिति में अपने कर्तव्य को निभाते हुए घायल या शहीद होना होता है, लेकिन ये फंड खास तौर से शहीदों के परिवार के लिए बनाया गया है.
रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता ने ये बात भी साफ कर दी है कि ये फंड पूरी तरह से वॉलेंटेरी-फंड है यानि कोई भी अपनी इच्छा से इसमें जितना चाहे उतनी की मदद राशि दान में दे सकता है…अकाउंट की डिटेल्स इस तरह से हैं..

Bank: Syndicate Bank
Branch: South block , Newdelhi 110011
Account Name: Army Welfare Fund Battle Causalities
Acc. no: 90552010165915

IFSC: SYNB0009055



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मोदी सरकार ने शानदार निर्णय-ऑटोमैटिक मशीन गन सिमा पर तैनात, नहीं होंगे शहीद सैनिक!!



मोदी सरकार ने शानदार निर्णय-ऑटोमैटिक मशीन गन सिमा पर तैनात, नहीं होंगे शहीद सैनिक !!




आज़ादी के बाद से ही पाकिस्तान भारत के लिए एक सिर दर्द बना हुआ है । आए दिन हो रही घुसपैठ की कोशिशें हमेशा से भारत के लिए एक चिंता का विषय बनी हुई हैं । पाकिस्तान की ओर से आतनकवादी भारत की सीमा मे दाखिल होकर भारत में आतंकी घटनाओं को अंजाम देते हैं ।
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इससे निपटने के लिए भारत सरकार ने एक बड़ी सेना बार्डर पर तैनात की हुई है । हर साल सैकड़ों सैनिक पाक की तरफ से हो रही गोलीबारी में शहीद होते हैं । परंतु अब केंद्र में बैठी मोदी सरकार ने शानदार निर्णय लिया है ।


अब भारत सरकार रिमोट कंट्रोल से चलने वाली मशीन गन के सहारे से पाक की तरफ से हो रही घुसपैठ और गोलाबारी का मज़ा चखाएगी । इसके लिए सरकार कंट्रोल रूम का निर्माण करेगी । जहां बैठ फौज के अधिकारी कोई गलत गतिविधि देख तुरंत गोली चलाने का निर्देश देंगे ।
ये गंस भारत में ही निर्मित की जाएंगी । इनमे एक  कैमरा भी लगा होगा । जैसे ही कोई भी आतंकी भारत की इन्फ्रा रेड ग्रिड में प्रवेश करेगा , ये ऑटोमैटिक मशीन गन उनपर तुरंत फ़ाइरिंग करेंगी और घुसपैठिए को ढेर कर देंगी ।


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बस इस एक संधि को रद्द कर दें मोदी, हिल जाएगा पूरा पाकिस्तान, टेक देगा घुटने,

बस इस एक संधि को रद्द कर दें मोदी, हिल जाएगा पूरा पाकिस्तान, टेक देगा घुटने,









हनुमान जी के बारे में कहा जाता है कि उन्हें ख़ुद पता ही नहीं था कि वह कितने शक्तिशाली हैं और क्या कर सकते हैं, लिहाजा, अपने आपको वह साधारण वानर समझते थे। जब जामवंत ने उन्हें याद दिलाया कि वह तो सूर्य जैसे आग के प्रचंड गोले वाले देवता को बचपन में ही निगल गए थे, तब हनुमानजी को अहसास हुआ कि वाक़ई उनके पास बहुत ज़्यादा ताकत है और वह बहुत कुछ कर सकते हैं। यही हाल कमोबेश भारत का है, कमज़ोर लीडरशिप के चलते इस देश को पता ही नहीं है कि वह कितना ताकतवर है और क्या-क्या कर सकता है। कहने का मतलब इस देश को भी उसकी शक्ति का अहसास कराने के लिए जामवंत की ज़रूरत है।

Hanuman Before Sita from the Ramayana

दरअसल, देश के तथाकथित महान नेताओं ने जनता को सहिष्णुता और शांति की ऐसी घुट्टी पिलाई कि सब के सब सहिष्णु और शांति का उपासक हो गए। यह सर्वविदित है कि पूरी दुनिया केवल और केवल ताक़त को सलाम करती है और सहिष्णुता या शांति की बात करने वाले को कायर और कमज़ोर मानती है। प्रधानमंत्री के सुरक्षा सलाहकार अजित डोवाल भी मानते हैं कि इतिहास केवल ताकतवर लोगों को ही याद रखता है। लिहाज़ा, हरदम सहिष्णुता और शांति की पूजा करने के कारण दुनिया में भारत की इमैज सॉफ़्ट और वीक नेशन की बन गई है। 


आज अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नज़र में भारत ऐसा लाचार देश है, जो अपने ही नागरिकों की रक्षा कर पाने में सक्षम नहीं और अपने निर्दोष नागरिकों की हत्या करने वाले आतंकवादियों और उन्हें पनाह देने वालों के ख़िलाफ़ ऐक्शन नहीं ले पाता। भारत ऐक्शन लेने की जगह हत्यारों के ख़िलाफ़ प्रमाण पेश करता है। आबरत की इस नीति पर दुनिया हंसती है।

kashmir

जैसा कि सर्वविदित है, भारत जैसा विशाल देश सन् 1947 में विभाजन के बाद से पाक जैसे छोटे शरारती देश की हरकतों से खासा परेशान रहा है। अंतरराष्ट्रीय मंच पर इस आतंकी देश की हरकतों की मय सबूत शिकायत करता रहता है, लेकिन किसी के कान पर जूं नहीं रेंगती। सब हंसकर कह देते हैं, ये प्रमाण पर्याप्त नहीं हैं। लिहाज़ा, कोई एक्शन नहीं लिया जा सकता।
दरअसल, सबसे मज़ेदार बात यह है कि इस देश के पास एक ऐसा ब्रम्हास्त्र है, जिसे इस्तेमाल करके वह शरारती पाकिस्तान को सबक ही नहीं सिखा सकता है, बल्कि इस्लामाबाद को आतंकवाद का समर्थन और आतंकवादी शिविर बंद करने पर विवश भी कर सकता है। इसके अलावा दाऊद इब्राहिम, हाफिज़ सईद और मौलाना मसूद जैसे आतंकवादियों को अपने हवाले करने पर पाकिस्तान को मज़बूर भी कर सकता है।
भारत सक्षम और समर्थ होने के बावजूद बेचारा बना हुआ है। यह सब बेहद कमज़ोर बिल पावर वाली लीडरशिप के कारण हो रहा है। भारतीय नेता अपने यहां, ख़ासकर कश्मीर में आतंकवाद के खात्मे के लिए पाकिस्तान पर निर्भर हैं। अब भी भारतीय नेताओं को लगता है कि वार्ता से बात बन जाएगी और अंततः वह बददिमाग़ देश मान जाएगा और अपनी हरकत से बाज आएगा। इस उम्मीद के साथ वार्ताओं का सिलसिला कई दशक से चल रहा है। 


उधर, देश का हर नागरिक, ख़ासकर शहरों में रहने वाले लोग, इस बात को लेकर तनाव में रहता है कि पाकिस्तान पोषित सिरफिरे आतंकवादी जेहाद के नाम पर कब और कहां बम न फोड़ दें या सशस्त्र हमला न कर दे और सैकड़ों मासूमों की जान न ले लें।



भारत का वह अचूक ब्रह्मास्त्र है, इंडस वॉटर ट्रीटी यानी सिंधु जल संधि। दरअसल, इंटरनैशनल बैंक फॉर रिकंस्ट्रक्शन ऐंड डेवलपमेंट (अब विश्वबैंक) की मध्यस्थता में 19 सितंबर 1960 को कराची में इंडस वॉटर ट्रीटी पर भारत के प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और पाकिस्तान के राष्ट्रपति जनरल अयूब ख़ान हस्ताक्षर किए। भारत पिछले 56 साल से सिधु वॉटर ट्रीटी यानी सिंधु जल संधि को ढो रहा है। आधुनिक विश्व के इतिहास में यह संधि सबसे उदार जल बंटवारा है।
सिंधु जल संधि के अनुसार भारत अपनी छह प्रमुख नदियों का अस्सी (80.52) फ़ीसदी से ज़्यादा यानी हर साल 167.2 अरब घन मीटर जल पाकिस्तान को देता है। तीन नदियां सिंधु, झेलम और चिनाब तो पूरी की पूरी पाकिस्तान को भेंट कर दी गई हैं। यह संधि दुनिया की इकलौती संधि है, जिसके तहत नदी की ऊपरी धारा वाला देश निचली धारा वाले देश के लिए अपने हितों की अनदेखी करता है। ऐसी उदार मिसाल दुनिया की किसी संधि में नहीं मिलेगी।



सबसे हैरान करने वाली बात है कि इस बेजोड़ संधि का लाभार्थी देश पाकिस्तान भारत की उदारता का जवाब आतंकवादी वारदातों से देता रहा है। लाभार्थी पाकिस्तान संधि के बाद जलदाता देश भारत के साथ दो बार (1965 और 1971 के भारत पाक युद्ध) घोषित तौर पर, एक बार (1999 का कारगिल घुसपैठ) अघोषित तौर पर युद्ध छेड़ चुका है।
इतना ही नहीं, सीमा पर गोलीबारी और घुसपैठ हमेशा करता रहता है। भारत के पानी पर जीवन यापन करने वाला यह देश जम्मू-कश्मीर में आतंकवादियों को शुरू से शह और मदद देता रहा है। जबकि किसी देश के संसाधन पर दूसरे देश का अधिकार तभी तक माना जाता है, जब तक लाभार्थी देश का रवैया दोस्ताना हो। सिंधु जल संधि की बात करें तो यहां तो पाकिस्तान का रवैया दुश्मन की तरह है, इसलिए भारत को उसे पानी देने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। 


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लिहाज़ा, इन परिस्थितियों में भारत को अपने इस ब्रम्हास्त्र का इस्तेमाल करना चाहिए। पाकिस्तान के सामने पानी देने के लिए स्पष्ट रूप से तीन शर्त रख देनी चाहिए। पहली शर्त, कश्मीरी आतंकवादियों को समर्थन बंद करे। दूसरी शर्त, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के आतंकवादी शिविर को नष्ट करे और शिविर नष्ट किया या नहीं, यह जांच भारतीय एजेंसियों को करने की इजाज़त दे। तीसरी शर्त, पाकिस्तान हाफिज़ सईद, ज़कीउररहमान लखवी (दोनों लश्करे तैयबा), मौलाना अज़हर मसूद (जैशे मोहम्मद), सैयद सलाउद्दीन (हिजबुल मुजाहिद्दीन), भटकल बंधु (इंडियन मुजाहिद्दीन) और दाऊद इब्राहिम एवं टाउगर मेमन (1993 मुंबई बम ब्लास्ट के आरोपी) को भारत को सौंपे। 



अगर पाकिस्तान तीनों शर्तें माने तब उसे सिंधु, झेलम, चिनाब, सतलुज, व्यास और रावी का पानी देना चाहिए अन्यथा पानी की आपूर्ति बंद कर देनी चाहिए। यक़ीनी तौर पर पानी बंद करने से पाकिस्तान की खेती पूरी तरह नष्ट हो जाएगी, क्योंकि पाकिस्तान की खेती बारिश पर कम, इन नदियों से निकलने वाली नहरों पर ज़्यादा निर्भर है। यह नुकसान सहन करना पाकिस्तान के बस में नहीं है। भारत से पर्याप्त पानी न मिलने से इस्लामाबाद की सारी अकड़ ख़त्म हो जाएगी और वह न तो आतंकवादियों का समर्थन करने की स्थिति में होगा और न ही कश्मीर में अलगाववादियों का। 


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ज़ाहिर है सिधु जल संधि का पाकिस्तान बेज़ा फायदा उठाता रहा है। आतंकवाद को समर्थ देने के अलावा इस्लामाबाद बगलिहार परियोजना के लिए भारत को ख़ासी मशक्कत करनी पड़ी। किशन-गंगा, वूलर बैराज और तुलबुल परियोजनाएं अधर में लटकी हैं। पाकिस्तान बगलियार और किशनगंगा पावर प्रोजेक्ट्स समेत हर छोटी-बड़ी जल परियोजना का अंतरराष्ट्रीय मंच पर विरोध करता रहा है। पाकिस्तान का मुंह बंद करने के लिए एक मात्र विकल्प है, सिधु जल संधि का ख़ात्मा।



सिधु जल संधि भंग करने के बाद पूरी संभावना है कि पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंचों पर विलाप करेगा। निश्तिच तौर पर वह अंतरराष्ट्रीय न्यायालय का भी दरवाज़ा खटखटाएगा। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय समुदाय या अंतरराष्ट्रीय संस्थान को बताने के लिए भारत के पास पर्याप्त कारण और आधार हैं। भारत इस संधि को निरस्त किए बिना रिपेरियन कानून के तहत अपनी नदियों के पानी पर उस तरह अपना अधिकार नहीं जता सकता जैसा कि स्वाभाविक रूप से जताना चाहिए। फिर 2002 में जम्मू-कश्मीर की विधान सभा आम राय से प्रस्ताव पारित कर सिंधु जल संधि को निरस्त करने की मांग कर चुकी है। राज्य की सबसे बड़ी जनपंचायत का यह सीरियस फ़ैसला था। 
सन् 2005 में इंटरनैशन वॉटर मैनेजमेंट इंस्टिट्यूट (आईडब्ल्यूएमआई) और टाटा वॉटर पॉलिसी प्रोग्राम (टीडब्ल्यूपीपी) भी अपनी रिपोर्ट में भारत को सिंधु जल संधि को रद्द करने की सलाह दे चुका है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस जल संधि से केवल जम्मू-कश्मीर को ही हर साल 65000 करोड़ रुपए की हानि हो रही है। "इंडस वॉटर ट्रीटी: स्क्रैप्ड ऑर अब्रोगेटेड" शीर्षक वाली रिपोर्ट में बताया गया है कि इस संधि के चलते घाटी में बिजली पैदा करने और खेती करने की संभावनों पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक घाटी में 20000 मेगावाट से भी ज़्यादा बिजली पैदा करने की क्षमता है, लेकिन सिधु जल संधि इस राह में रोड़ा बनी हुई है। 

इसके अलावा हर साल देश के कई हिस्सों में सूखा पड़ता है। जिन्हें पानी की बड़ी ज़रूरत पड़ती है। ऐसे में भारत अपने राज्यों को पानी क्यों न दे। जो देश ख़ुद पानी के संकट से दो चार हो, वह दूसरे देश, ख़ासकर जो देश दुश्मनों जैसा काम करे, उसे पानी देने की बाध्यता नहीं। अगर भारत जम्मू-कश्मीर में तीनों नदियों पर थोड़ी-थोड़ी दूरी पर बांध बना दे और हर बांध से थोड़ा पानी सिंचाई के लिए इस्तेमाल करना शुरू कर दे, तब निश्चित तौर पर पाकिस्तान घुटने टेक देगा। पाकिस्तान को मिसाइल, तोप या बम से मारने की जरूरत नहीं, उसके लिए सिंधु जल संधि ही पर्याप्त है।
चूंकि रावी, ब्यास, सतलुज, झेलम, सिंधु और चिनाब नदियों का आरंभिक बहाव भारतीय इलाके से है। इस हिसाब से रिपेरियन सिद्धांत के मुताबिक नदियों का नियंत्रण भारत के पास होना चाहिए। यानी नदियों के पानी पर सबसे पहला हक़ भारत का होना चाहिए। हां, अपनी ज़रूरत पूरी होने पर चाहे तो भारत अपना पानी पाकिस्तान को दे सकता है। वह भी उन परिस्थितियों में जब पाकिस्तान दोस्त और शुभचिंतक की तरह व्यवहार करे। पाकिस्तान का रवैया शत्रु जैसा होने पर भारत उसे एक बूंद भी पानी देने के लिए बाध्य नहीं है।

Pakistan Prime Minster Nawaz Sharif Meets Indian Prime Minister Narendra Modi

भारत को चीन से सीख लेनी चाहिए। राष्ट्रीय हित का हवाला देते हुए चीन ने अंतरराष्ट्रीय न्यायालय का फ़ैसला मानने से इनकार कर दिया है। हाल ही में अंतरराष्ट्रीय न्यायालय ने 3.5 वर्गकिलोमीटर में फैले दक्षिण चीन सागर क्षेत्र पर बीजिंग के दावे को खारिज़ करके फिलीपींस के अधिकार को मान्यता दी। चीन ने दो टूक शब्दों में कहा कि इसे मानने की बाध्यता नहीं है। चीनी के डिफेंस प्रवक्ता ने कहा कि चीनी सेना राष्ट्रीय संप्रभुता और अपने समुद्री हितों एवं अधिकारों की रक्षा करेगी। राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा कि देश की संप्रभुता और समुद्री अधिकारों पर असर डालने वाले किसी भी फ़ैसले या प्रस्ताव को उनका देश खारिज करता है।
भारत ख़ासकर मोदी सरकार को यह पॉइंट नोट करना चाहिए कि अंतरराष्ट्रीय न्यायालय के फ़ैसले पर चीनी लीडरशिप की प्रतिक्रिया का फिलीपींस के अलावा किसी राष्ट्र ने विरोध नहीं किया। संयुक्त राष्ट्रसंघ के अमेरिका, रूस, फ्रांस और ब्रिटेन जैसे शक्तिशाली देश भी ख़ामोश रहे। 

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कुल मिलाकर इसका मतलब यह है कि कोई राष्ट्र भी अपने राष्ट्रीय हित का हवाला देकर दुनिया की सबसे बड़ी अदालत के फ़ैसले को भी मानने से इनकार कर सकता है। इसे कहते हैं, विल पावर, जो कम से कम अभी तक सिंधु जल संधि को लेकर भारतीय लीडरशिप में अब तक नहीं रहा है। सवाल यह है कि क्या बलूचिस्तान का मामला उठाने वाले भारतीय प्रधानमंत्री सिंधु जल संधि के मुद्दे को आतंकवाद, दाऊद इब्राहिम और हाफ़िज़ सईद से जोड़ने का साहस करेंगे।
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कश्मीर मुद्दे पर चीन ने पाक को दे दिया सबसे बड़ा झटका !! रो पड़ेंगे नवाज़


कश्मीर मुद्दे पर चीन ने पाक को दे दिया सबसे बड़ा झटका !! रो पड़ेंगे नवाज़ 



पाकिस्तान का बुरा समय खत्म होने का नाम नहीं ले रहा । पाक का सबसे बड़ा साहियोगी माने जाने वाला चीन भी अब कश्मीर मुद्दे पर उसके साथ खड़ा नहीं दिखाई दे रहा है ।
कुछ ही दिन पहले चीन ने ये कहा था की अगर भारत बलूचिस्तान मुद्दे पर पीछे नहीं हटा तो वो पाक के पक्ष में दाखल देगा । परंतु फिर पता नहीं भारतीय सरकार ने चीन को क्या घुट्टी पिलाई की चीन ने 2 दिन के भीतर बिलकुल विपरीत बयान दे दिया है । लाइक करें हमारा फेसबुक पेज




चीन के विदेश मंत्रालय ने साफ साफ ये बात कही की “CEPC प्रोजेक्ट हमारा और पाकिस्तान का है ये दोनों देशों की तरक्की के लिए बनाया जा रहा है , बेशक यह प्रोजेक्ट POK  से होकर गुजरता है लेकिन ये किसी तीसरे देश के नुक्सान के लिए नही है | ” इसमे भारत का नाम नहीं लिया गया परंतु इशारा साफ है ।

चीन ने अपने इस प्रोजेक्ट पर कई करोड़ रूपय खर्च किए हैं और वो इसे जल्द से जल्द पूर्ण करना चाहता था परंतु भारत सरकार की कूटनीति ने उसे बैकफुट पर धकेल दिया है ।



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Wednesday, August 31, 2016

15 अगस्‍त 2017 को बलूचिस्‍तान में लहराएगा तिरंगा ! जानिए मोदी को मिला किसका साथ ?

15 अगस्‍त 2017 को बलूचिस्‍तान में लहराएगा तिरंगा ! जानिए मोदी को मिला किसका साथ ?












बलूचिस्‍तान की आजादी को लेकर मोदी सरकार को कई ऐसे देशों का साथ मिलता नजर आ रहा है जो यहां पर चीन के प्रभुत्‍व को पसंद नहीं करते हैं।

New Delhi Aug 27 : बलूचिस्‍तान के अच्‍छे दिन आने वाले हैं। बलूचिस्‍तान आजाद होने वाला है। वो दिन दूर नहीं जब आप बलूचिस्‍तान में तिरंगा फहराते हुए लोगों को देख सकेंगे। हालांकि बलूचिस्‍तान में अभी भी तिरंगा लहराया जा रहा है, मोदी-मोदी के नारे लगाए जा रहे हैं। लेकिन, इस वक्‍त वो गुलाम है। उसे आजादी की दरकार है। बलूचिस्‍तान की आजादी का प्‍लॉन तैयार हो रहा है। भारत के इस प्‍लान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कुछ और देशों का भी साथ मिलता नजर आ रहा है।

अगर भारत अकेले अपने दम पर चाहे तो भी वो बलूचिस्‍तान को पाकिस्‍तान के कब्‍जे से आजाद करा सकता है। लेकिन, अंतरराष्‍ट्रीय मसलों पर हमेशा विदेश नीति और इंटरनेशलनल पॉलिसी को ध्‍यान में रखकर ही सारे कदम उठाए जाते हैं। इन्‍हीं सारी नीतियों को ध्‍यान में रखकर भारत बलूचिस्‍तान की आजादी के लिए ऑपरेशन में जुट गया है। मोदी सरकार के इस प्‍लॉन में उसे ना सिर्फ अमेरिका का समर्थन मिल रहा है बल्कि अफगानिस्‍तान और इरान भी भारत के साथ खड़े नजर आ रहे हैं। 
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सामरिक दृष्टि से बलूचिस्‍तान पाकिस्‍तान के लिए भी महत्‍वपूर्ण है। चीन के लिए भी जरुरी है। अफगानिस्‍तान और ईरान के लिए भी जरुरी है। पाकिस्‍तान और चीन की खूब बनती है। जबकि पाकिस्‍तान और अफगानिस्‍तान के बीच 36 का आंकड़ा है। उधर, अफगानिस्‍तान और इरान की नहीं पटती है। इन सारे पड़ोसी देशों की हालत ऐसी है कि ये एक दूसरे को पसंद नहीं करते। लेकिन, केंद्र में मोदी की सरकार के आने के बाद भारत की विदेश नीति में गजब का परिवर्तन आया है। बेशक अफगानिस्‍तान और इरान की आपस में ना बनती हो लेकिन, भारत के लिए दोनों हाजिर हैं।

भारत और चीन के रिश्‍ते कितने मधुर है। ये बात ना तो बताने लायक है और ना ही छुपाने लायक। चीन की हालत उस जख्‍मी सांप की तरह है जो कभी भी अपने फन फैला सकता है। भारत को हमेशा इस बात का अंदाजा रहता है। पाकिस्‍तान हमेशा से भारत के खिलाफ षणयंत्रों में ही शामिल रहा है। ऐसे में चीन और पाकिस्‍तान को सबक सिखाने के लिए मोदी सरकार ने बलूचिस्‍तान को आजाद कराने का फैसला कर दिया है। जिसका सीधा फायदा भारत को मिलेगा।


दरअसल, बलूचिस्‍तान की अगर आप भौगोलिक स्थिति देखें तो उसकी एक सीमा अफगानिस्‍तान से सटती है। तो दूसरी सीमा इरान से जबकि तीसरी ओर पर अरब सागर है। चीन यहां पर पाकिस्‍तान के जरिए अपना प्रभुत्‍व बढ़ाना चाहता है। जबकि यहां के लोगों को ये बात नागवार गुजर रही है। बलूचिस्‍तान में चीन का बढ़ता दबदबा भारत के लिए भी काफी खतरनाक है। जबकि यहां के कुछ बार्डर इलाकों पर तालिबानी आतंकियों का दबदबा है।

अमेरिका इन तालिबानी आतंकियों को मारने के लिए पाकिस्‍तान को सैन्‍य मदद पहुंचता है। लेकिन, पाकिस्‍तान के नकारापन की वजह से अमेरिका पाकिस्‍तान को दी जाने वाली सैन्‍य मदद रोक चुका है। अभी हाल ही में ये भी खुलासा हुआ कि काबुल में अमेरिकी यूनिवर्सिटी में जो आतंकी हमला हुआ था उसकी साजिश भी पाकिस्‍तान में ही रची गई थी। पाकिस्‍तान की इस करतूत से अफगानिस्‍तान और अमेरिका दोनों उससे काफी खफा हैं।

ऐसे में सूत्र बताते हैं क‍ि बलूचिस्‍तान की आजादी के लिए अमेरिका और अफगानिस्‍तान भारत के साथ खड़े हैं। उधर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अफगानिस्‍तान और ईरान की विदेश यात्रा का भी असर यहां पर देखने को मिल रहा है। कई मामलों को लेकर भारत-अफगानिस्‍तान और ईरान में त्रिपक्षीय समझौते हो चुके हैं। भारत को उम्‍मीद है कि बलूचिस्‍तान की आजादी में उसे ईरान का भी पूरा साथ मिलेगा। अगर मोदी सरकार का ये प्‍लॉन हिट हुआ तो यकीनन पाकिस्‍तान और चीन को सबसे बड़ा नुकसान होगा।

अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्‍ता मार्क टोनर भी इशारों ही इशारों में बता चुके हैं कि बलूचिस्‍तान और पाक अधिकृत कश्‍मीर पर अमेरिका का क्‍या रुख है। अमेरिका के समर्थन वाली अफगानिस्‍तान की अशरफ गनी सरकार को भी मालूम है कि उसका फायदा भारत और अमेरिका के साथ मिलकर रहने में ही है। ईरान भी चाहता है कि बलूचिस्‍तान से चीन का दबदबा खत्‍म हो। ऐसे में ये सारे देश बलूचिस्‍तान की आजादी के लिए भारत के साथ हैं। उम्‍मीद कीजिए कि बलूचिस्‍तान जल्‍द आजाद हो।

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मोदी सिर्फ बलूचिस्‍तान के जरिए बरबाद कर देंगे चीन और पाकिस्‍तान को, जानिए कैसे ?



मोदी सिर्फ बलूचिस्‍तान के जरिए बरबाद कर देंगे चीन और पाकिस्‍तान को, जानिए कैसे ?



मोदी के बलूचिस्‍तान नारे से ना सिर्फ पाकिस्‍तान तिलमिलाया है बल्कि चीन भी बौरा गया है। मोदी ने बलूचिस्‍तान की आजादी को हवा देकर एक तीर से दो निशाने साधे हैं।

New Delhi Aug 20 : पहले एक नारा चलता था हिंदी-चीनी भाई-भाई। हिंदुस्‍तान ने कभी भी चीन को ये एहसास नहीं होने दिया कि हम उसके भाई नहीं हैं। लेकिन, इसके उलट चीन हमेशा से देश के खिलाफ खुराफात करता रहा है। वो हमेशा इस कोशिश में रहा है कि किसी भी सूरत में भारत चीन से ज्‍यादा ताकतवर ना बन पाए। लेकिन, अब सरकार बदलने के साथ-साथ हालात भी बदल गए हैं। चीन का पाला इस बार देश के सबसे ताकतवर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पड़ा है। लाइक करें हमारा फेसबुक पेज

मोदी के बलूचिस्‍तान नारे से ना सिर्फ पाकिस्‍तान तिलमिलाया घूम रहा है बल्कि चीन भी बौरा गया है। दरअसल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बलूचिस्‍तान की आजादी को हवा देकर एक तीर से दो निशाने साध दिए हैं। मोदी के इस कदम से पाकिस्‍तान और चीन दोनों ही सकते में हैं। पिछले कुछ सालों से बलूचिस्‍तान के गिलगिट और बाल्टिस्‍तान में चीन की पैठ बढ़ती जा रही है। चीन इस इलाके को अपने फायदे के लिए इस्‍तेमाल करना चाहता है। ताकि वो भारत पर दवाब बना सके।

दरअसल, पूरा मामला समझने से पहले बलूचिस्‍तान की भौगोलिक स्थिति को समझ लीजिए। बलूचिस्‍तान का एक हिस्‍सा अफगानिस्‍तान बार्डर से टच करता है। तो दूसरा हिस्‍सा ईरान से। जबकि तीसरा हिस्‍सा सीधे अरब सागर में खुलता है। चीन चाहता है कि वो पाकिस्‍तान की इस जमीन का इस्‍तेमाल कर के चीन से सीधे अरब सागर तक अपनी सार्टकट पहुंच बना ले। जो व्‍यापारिक और सामरिक दृष्टि से चीन के लिए बहुत महत्‍पूर्ण और भारत के उतना ही खतरनाक है।

चीन इस इलाके में चीन-पाकिस्‍तान इकॉनोमिक कॉरीडोर भी बना रहा है। बलूचिस्‍तान के लोग इस कॉरीडोर का विरोध कर रहे हैं। जिन्‍हें पाकिस्‍तान सरकार की ओर से धमकी दी गई है अगर वो इस कॉरीडोर का विरोध करेंगे तो उनके खिलाफ आतंकवाद रोधी कानूनों के तहत कार्रवाई की जाएगी। प्रदर्शनकारियों को आतंकी बताकर जेल में ठूंस दिया जाएगा। पाकिस्‍तान की इस धमकी के बाद भी यहां के लोगों का विरोध प्रदर्शन जारी है। यहां के लोगों ने अपनी आवाज को उठाने के लिए प्रधानमंत्री मोदी का समर्थन मांगा है। 
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पाकिस्तान को सबसे बड़ा झटका – कराची में लहराया भारत का झंडा, लगे मोदी-मोदी के नारे



पाकिस्तान को सबसे बड़ा झटका – कराची में लहराया भारत का झंडा, लगे मोदी-मोदी के नारे



कराची में लहराया भारत का झंडा, लगे मोदी-मोदी के नारे नई दिल्ली। एक तरफ जहां बलूचिस्तान में लोग आजादी की मांग कर रहे हैं। वहीं, उससे कहीं अधिक बड़ा आजादी का आंदोलन इस वक्त सिंध प्रांत में चल रहा है। सिंध के कई छोटे-बड़े शहरों और दूसरे देशों में बसे सिंध के लोगों ने विरोध-प्रदर्शन किए। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने भारत का झंडा लहराया और मोदी मोदी के नारे लगाए।



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यह भी पढ़ें : पीएम मोदी के बलूचिस्तान वाले बयान से तिलमिलाई पाक सेना, शुरू की हैवानियत

बलूचिस्तान के बाद अब सिंध और कराची में आजादी की मांग

दरअसल, पाकिस्तान ने यहां पर चीन को बड़े पैमाने पर जमीन दी हैं, जिस पर कथित तौर पर इकोनॉमिक कॉरीडोर बनाया जाना है। लोकल लोगों का कहना है कि इस कॉरीडोर से उन लोगों की जमीनें तो छीन ली जाएंगी, लेकिन जो उद्योग-धंधे लगेंगे उनमें बाहरी लोगों को लाकर बसाया जाएगा। साथ ही चीन और पाकिस्तानी सेना की गतिविधियां इस इलाके में बढ़ेंगी, जिससे अलग तरह की समस्याएं पैदा होंगी। पाकिस्तान सरकार यह सब सिंधी पहचान को हमेशा के लिए मिटाने के मकसद से कर रही है। इस कॉरीडोर के बनने से इस पूरे इलाके में पंजाबी मूल के पाकिस्तानियों की दखल बढ़ जाएगी और सिंधी लोग यहां अल्पसंख्यक बनकर रह जाएंगे।





बलूचिस्तान में फहराया गया था तिरंगा


इससे पहले बीते दिनों बलूचिस्तान की आज़ादी की मांग कर रहे लोगों ने बलूच रिपब्लिकन पार्टी (बीआरपी) ने प्रांत के कई हिस्सों में मोदी की तस्वीर के साथ तिरंगा फहाराया। पिछले चार दिनों से ब्लूचिस्तान के सुई डेरा बुगती, जाफराबाद और नसीराबाद समेत कई अन्य जगहों पर पाकिस्तान के खिलाफ प्रदर्शन जारी है। इस दौरान लोगों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भारत का झंडा तथा ब्लूच स्वतंत्रता सेनानी अकबर बुग्ती की तस्वीरें हाथों में लेकर पाकिस्तान के खिलाफ प्रदर्शन किया। नकाबपोश प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तान के झंडे को पैर से रौंदा और ‘बंद करो बलूच नरसंहार’ की तख्तियां भी दिखाईं।




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Tuesday, August 30, 2016

भारत और अमेरिका के बीच हुए रक्षा करार से उड़ी चीन की नींद

भारत और अमेरिका के बीच हुए रक्षा करार से उड़ी चीन की नींद




नयी दिल्ली/वाशिंगटन : भारत-अमेरिका रक्षा सहयोग समझौते से चीन और पाकिस्तान की नींद उड़ चुकी है हालांकि चीन इसे ज्यादा तवज्जो नहीं दे रहा है. उसने इस करार को दोनों देशों के बीच सामान्य सहयोग बताया है जबकि इसको लेकर चीन का मीडिया भारत से बेहद खफा है. उसने चेताया है कि अमेरिकी खेमे में जाने की भारत की कोशिश से चीन, पाकिस्तान और रूस की नाराजगी बढ़ सकती है.

आपको बता दें कि भारत और अमेरिका ने द्विपक्षीय सामरिक संबंधों को बढ़ावा देते हुए एक विशद साजो-सामान आदान-प्रदान करार पर हस्ताक्षर किये हैं, जिससे दोनों देशों की सेनाएं एक-दूसरे की सुविधाओं
एवं ठिकानों का उपकरणों की मरम्मत एवं आपूर्ति को सुचारु बनाये रखने के लिए उपयोग कर सकेंगे. इससे उनके संयुक्त अभियानों की दक्षता में इजाफा होगा. रक्षा मंत्री मनोहर पर्रीकर एवं अमेरिकी रक्षा सचिव एश्टन कार्टर ने ‘साजो-सामान आदान-प्रदान सहमति करार’ (एलइएमओए) पर हस्ताक्षर किये.

पर्रीकर ने कहा कि इससे व्यावहारिक संबंध एवं आदान-प्रदान के लिए अवसर का सृजन होगा. एलइएमओए से भारत एवं अमेरिका के बीच साजो-सामान सहयोग, आपूर्ति एवं सेवाओं का उसकी पुन:पूर्ति के आधार पर प्रावधान होगा. इसमें खाना, पानी, वस्त्र, परिवहन, पेट्रोलियम, तेल, लुब्रिकेंट, परिधान, चिकित्सा सेवाएं, कलपुर्जे एवं उकरण, मरम्मत एवं देखभाल सेवाएं, प्रशिक्षण सेवाएं तथा अन्य साजो-सामान की वस्तुएं एवं सेवाएं शामिल हैं. पर्रीकर ने स्पष्ट किया कि (समझौते में) भारत में किसी तरह का सैन्य अड्डा या किसी तरह की गतिविधि स्थापित करने का कोई प्रावधान नहीं है. करार पर हस्ताक्षर होने के बाद एक संयुक्त बयान में कहा गया, ‘वे इस तंत्र पर सहमत हुए कि इस प्रारूप से रक्षा प्रौद्योगिकी एवं व्यापार सहयोग में अभिनव एवं आधुनिक अवसरों के अवसर मिलने में सुविधा होगी.

अमेरिका अपने स्तर पर भारत के साथ रक्षा व्यापार एवं प्रौद्योकिगी को बढ़ाने पर सहमत हुआ है तथा यह भारत को उस स्तर के बराबर ले जायेगा, जो उसके नजदीकी सहयोगी एवं भागीदारों को प्राप्त है. बयान के अनुसार, दोनों देशों के बीच के रक्षा संबंध उनके ‘साझा मूल्यों एवं हितों’ तथा ‘वैश्विक शांति एवं सुरक्षा के प्रति उनकी स्थायी प्रतिबद्धता’ पर आधारित हैं.

चीन और पाकिस्तान की नींद उड़ी

भारत और अमेरिका के बीच सैन्य साजो-सामान हस्ताक्षर के बाद चीन और पाकिस्तान की नींद उड़ गयी है. दोनों देशों में साफ तौर पर बेचैनी देखी जा रही हैं. दोनों देशों के मीडिया में कहा जा रहा है कि इस समझौते से चीन और पाकिस्तान पर सीधा असर होगा. पाकिस्तानी और चीनी मीडिया में कहा जा रहा है कि एशिया में चीन के बढ़ते प्रभाव के लिए अमेरिका और भारत इस एग्रीमेंट को अंजाम दिया है.

पिछलग्गू न बने भारत

इस समझौते को लेकर चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है. अखबार ने अपने संपादकीय में लिखा है कि बेशक यह अमेरिका और भारत के सैन्य सहयोग में एक बड़ा कदम है. यदि भारत अमेरिकी गंठबंधन के तंत्र में जल्दबाजी में शामिल हो जाता है, तो इससे चीन, पाकिस्तान और यहां तक कि रूस भी नाराज हो सकता है. ग्लोबल टाइम्स ने चेतावनी दी है कि यह समझौता नयी दिल्ली को वाशिंगटन का ‘पिछलग्गू’ बना सकता है. 

 

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चीन के खिलाफ मोदी ने की 3 तरफ से घेराबंदी, चीन बुरी तरह बोखलाया

चीन के खिलाफ मोदी ने की 3 तरफ से घेराबंदी, चीन बुरी तरह बोखलाया


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वॉशिंगटन. भारत तीन तरीके से चीन को घेरने की कोशिश कर रहा है। इंडिपेंडेंस-डे की स्पीच में मोदी ने बलूचिस्तान का जिक्र कर चीन को बयान देने को मजबूर कर दिया था। इसी के बाद लंदन में चीनी एम्बेसी पर बलूच नेताओं ने प्रदर्शन किए। अब भारत ने चीन को रोकने के मकसद से यूएस के साथ बड़ा डिफेंस एग्रीमेंट किया है। मनोहर पर्रिकर की मौजूदगी में सोमवार को हुई इस डील के तहत दोनों देश एक-दूसरे के नेवल और एयर बेस का इस्तेमाल कर सकेंगे। वहीं, मोदी अगले महीने बीजिंग में जी-20 समिट से पहले चीन के विरोधी देश वियतनाम जाएंगे। इस बीच भारत-यूएस डील से तिलमिलाए चीन ने कहा, ‘भारत चतुराई भरा कदम उठा रहा है। लेकिन समझौते के चलते भारत को अपनी राजनीतिक आजादी गंवानी पड़ सकती है। डील से भारत के चीन, पाकिस्तान और रूस से रिलेशन खराब हो सकते हैं। साथ ही इससे भारत सेफ भी नहीं होगा।’
1# मोदी ने पर्रिकर को यूएस भेजा, बड़ी मिलिट्री डील कराई
 वॉशिंगटन में सोमवार को डिफेंस मिनिस्टर मनोहर पर्रिकर और उनके अमेरिकी काउंटरपार्ट एश्टन कार्टन ने लॉजिस्टिक्स एक्सचेंज मेमोरेंडम ऑफ एग्रीमेंट (LEMOA) पर साइन किए।
 डील का मकसद चीन की ताकत को खासकर समंदर में बढ़ने से रोकना है ।
 समझौते के मुताबिक, दोनों देशों की सेनाएं एक-दूसरे के इक्विपमेंट्स और नेवल-एयरबेस का इस्तेमाल कर सकेंगी। दोनों देशों को फाइटर प्लेन और वॉरशिप के लिए फ्यूल भी आसानी से मिल सकेगा।

पर्रिकर ने कहा, “समझौते के तहत भारत-अमेरिकी नेवी एक-दूसरे को ज्वाइंट ऑपरेशन और एक्सरसाइज में सपोर्ट करेंगी।”
अमेरिका भारत के साथ लंबे समय से ऐसा समझौता चाहता रहा है, जिसमें सिक्युरिटी को-ऑपरेशन के अलावा जानकारियां भी साझा की जा सकें।
LEMOA के तहत दोनों देश एक-दूसरे से पानी और खाने जैसे रिसोर्सेस की भी शेयरिंग करेंगे। हालांकि, इस समझौते के मायने भारत की धरती पर अमेरिकी सैनिकों की तैनाती नहीं है।
– वहीं, भारत के किसी मित्र देश से अमेरिका अगर वॉर छेड़ता है तो उसे ये फैसिलिटी नहीं मिलेगी।
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2# चीन को घेरने के लिए मोदी जी-20 बैठक से पहले जाएंगे उसके विरोधी देश वियतनाम
 मोदी अगले महीने चीन में होने वाली जी-20 समिट से पहले वियतनाम जाएंगे। 3 सितंबर को मोदी राजधानी हनोई में होंगे। यह किसी भी भारतीय पीएम की पिछले 15 साल में पहली वियतनाम विजिट होगी।
4 से 5 सितंबर को चीन में जी-20 समिट होनी है।
– मोदी वियतनाम विजिट साउथ-ईस्ट एशिया में भारत की बढ़ती स्ट्रैटजिक मौजूदगी का भी संकेत होगी।
– अफसरों की मानें तो मोदी इस दौरान वियतनाम को फौजी ताकत बढ़ाने में मदद का प्रपोजल भी दे सकते हैं।
– बता दें कि चीन और वियतनाम के बीच 1970, 1980 और 1990 के दशक में जंग हो चुकी है। दोनों के बीच साउथ चाइना सी को लेकर विवाद है।
3# इंडिपेंडेंस-डे की स्पीच में बलूचिस्तान का जिक्र किया तो चिढ़ा चीन, कार्रवाई की धमकी
– चीन के एक थिंक टैंक ने भारत को वॉर्निंग दी है। उसने कहा कि यदि भारत बलूचिस्तान में 46 अरब डॉलर की लागत से बन रहे चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर को बनने से रोकेगा तो चीन कार्रवाई से गुरेज नहीं करेगा।
– चीन के इंटरनेशनल रिलेशन इंस्टीट्यूट के डायरेक्टर हू शीशेंग ने कहा कि मोदी का बलूचिस्तान का जिक्र चीन की ‘ताजा चिंता’ है। भारत के अमेरिका से बढ़ते सैन्य संबंध और साउथ चाइना सी पर उसका रवैया चीन के लिए खतरे की घंटी के समान है।
– वहीं, चीन के सरकारी मीडिया ग्लोबल टाइम्स ने लिखा, “मोदी अपना सब्र खो चुके हैं और उन्होंने दुश्मनी के कट्टर लहजे को अपना लिया है।”
– ग्लोबल टाइम्स में ‘मोदी की उकसावे वाली कार्रवाई से भारत पर बढ़ता खतरा’ नामक रिपोर्ट में कहा गया, “जब भारत बलूचिस्तान में अपनी किसी भी तरह की भूमिका से इनकार करता रहा है तब मोदी क्यों पब्लिकली इसका जिक्र करते हैं? कश्मीर पर भी वे इतना उकसावे वाला कदम उठाते हैं?”
लॉजिस्टिक्स डील से घबराए चीन ने कहा- भारत पिछलग्गू न बने
– भारत-यूएस डील को लेकर चीनी सरकारी मीडिया ग्लोबल टाइम्स ने लिखा, ‘भारत-अमेरिका मिलिट्री रिलेशन में ये एक लंबी छलांग है। फोर्ब्स ने इस समझौते को वॉर पैक्ट बताते हुए कहा है कि भारत अपने पुराने साथी रहे रूस के पाले से निकलकर अमेरिका की तरफ शिफ्ट हो रहा है।’
– ग्लोबल टाइम्स लिखता है, ‘भारत चतुराई भरा कदम उठा रहा है। लेकिन समझौते के चलते भारत को अपनी राजनीतिक आजादी गंवानी पड़ सकती है। डील से भारत के चीन, पाकिस्तान और रूस से रिलेशन खराब हो सकते हैं। साथ ही इससे भारत सेफ भी नहीं होगा।’
– ‘बीते कुछ सालों से अमेरिका जानबूझकर भारत से ज्यादा नजदीकी दिखा रहा है ताकि इस इलाके में चीन के ऊपर दबाव बनाया जा सके।’
– ‘ये भी पॉसिबल है कि मोदी एडमिनिस्ट्रेशन भारत को एक गैर-परंपरागत रास्ते पर जाने की कोशिश कर रहा है। इस दिशा में अमेरिका से लॉजिस्टिक्स एग्रीमेंट अहम कदम है। सवाल ये है कि भारत-अमेरिका रिलेशन का भू-राजनीतिक मूल्यों पर क्या प्रभाव पड़ेगा?’
– ‘अगर भारत जल्दबाजी में अमेरिका का सहयोगी बन रहा है तो वह खुद ही रणनीतिक जाल में फंसेगा और एशिया में कॉम्पिटीशन को हवा देगा।’

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भारत-अमेरिका वॉर पैक्ट से पाक, चीन बुरी तरह डरे ,कहा- मोदी खुलकर दुश्मनी निभा रहे







भारत-अमेरिका वॉर पैक्ट से पाकिस्तान और चीन बुरी तरह डरे ,कहा- मोदी खुलकर दुश्मनी निभा रहे हैं

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नई दिल्ली.भारत-अमेरिका के बीच लॉजिस्टिक्स एक्सचेंज मेमोरैंडम ऑफ एग्रीमेंट से पाकिस्तान-चीन के मीडिया में हलचल मची है। दोनों देशों के मीडिया का कहना है कि एशिया में चीन के बढ़ते असर को देखते हुए अमेरिका और भारत ने इस समझौते को अंजाम दिया है। चीनी मीडिया ने यह तक कहा कि पाकिस्तान से रिश्ते बिगड़ने पर मोदी अब खुलकर दुश्मनी निभा रहे हैं। वहीं, अमेरिकी मीडिया का कहना है कि भारत-अमेरिका के बीच लगातार मिलिट्री पार्टनरशिप बढ़ रही है।
क्या है चीन और पाकिस्तान के बौखलाने की दो बड़ी वजह हैं…


# पहली:
– वॉशिंगटन में सोमवार को डिफेंस मिनिस्टर मनोहर पर्रिकर और उनके अमेरिकी काउंटरपार्ट एश्टन कार्टन ने लॉजिस्टिक्स एक्सचेंज मेमोरेंडम ऑफ एग्रीमेंट (LEMOA) पर साइन किए।
– डील का मकसद चीन की ताकत को खासकर समंदर में बढ़ने से रोकना है। समझौते के मुताबिक, दोनों देशों की सेनाएं एक-दूसरे के इक्विपमेंट्स और नेवल-एयरबेस का इस्तेमाल कर सकेंगी।
– LEMOA के तहत दोनों देश एक-दूसरे से पानी और खाने जैसे रिसोर्सेस की भी शेयरिंग करेंगे। हालांकि, इस समझौते के मायने भारत की धरती पर अमेरिकी सैनिकों की तैनाती नहीं है।
# दूसरी:
– इंडिपेंडेंस-डे की स्पीच में मोदी ने बलूचिस्तान पर चीन और पाकिस्तान को एकसाथ घेरने की कोशिश की है। इसी के बाद लंदन में चीनी एम्बेसी पर बलूच नेता प्रदर्शन कर रहे हैं।
– वहीं, बलूचिस्तान, सिंध और पीओके में भी पाक के खिलाफ प्रदर्शन तेज हो गये हैं। वहां के नेता खुलकर सामने आ रहे हैं।
चीन के ग्लोबल टाइम्स ने लिखा- अमेरिका का पिछलग्गू बन रहा है भारत
– “यह बेशक अमेरिका-भारत के बीच सैन्य साझेदारी की लंबी छलांग होगी। लेकिन ऐसा समझौता करने से भारत अपनी रणनीतिक आजादी खो सकता है और अमेरिका का पिछलग्गू बनता जा रहा है।”
– ”मोदी पाकिस्तान के साथ रिश्ते को सुधारने की कोशिशों के बाद अपना सब्र खो चुके हैं और उन्होंने रुख बदलकर दुश्मनी वाला भाव अपना लिया है।”
– अमेरिकी मैग्जीन फोर्ब्स ने इस पैक्ट को ‘वॉर पैक्ट’ बताते हुए कहा है कि भारत अपने शीत युद्ध के साथी रूस के पाले से निकल कर अमेरिका की तरफ जा रहा है।


India\\\'s alliance with US may irritate China and pakistan, international news in hindi, world hindi news

पाक के न्यूजपेपर डॉन ने लिखा- चीन को रोकने के लिए यह वॉर पैक्ट, पाक-चीन पर सीधा असर पड़ेगा
– “अमेरिका और भारत लॉजिस्टिक्स एक्सचेंज मेमोरैंडम ऑफ अग्रीमेंट के तहत दोनों देश एक दूसरे के सैन्य ठिकानों का इस्तेमाल कर सकेंगे। अमेरिकी सेना और उसकी वायुसेना के लिए भारत के सैन्य अड्डों से लड़ना आसान होगा।”
– ”भारत भी पूरी दुनिया में अमेरिकी बेस का इस्तेमाल कर सकता है। इसका सीधा असर पाकिस्तान और चीन पर पड़ेगा।”
– अखबार ने अमेरिकी पत्रिका फोर्ब्स में छपे एक आर्टिकल का हवाला भी दिया है, जिसमें कहा गया है कि पाकिस्तान और चीन सावधान हो जाएं, इस हफ्ते भारत और अमेरिका बहुत बड़ा सैन्य समझौता कर सकते हैं।

अमेरिका की फोर्ब्स मैगजीन ने लिखा- मोदी रूस को नजरअंदाज कर आगे बढ़ रहे हैं
– “चीन को काबू में रखने के लिए ओबामा प्रशासन के कार्यकाल का यह एक बेहद अहम एग्रीमेंट है। इससे भविष्य में भारत को चीन के सामने खड़े होने के लिए मजबूत आधार मिलेगा।”
– ”इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अमेरिकी सेना का प्रभाव भी बढ़ेगा। इराक और अफगानिस्तान में अमेरिका को सब कुछ बनाना पड़ा था लेकिन इंडिया के पास पहले से ही बुनियादी चीजें मौजूद हैं।”
– ”हालांकि इस समझौते से भारत और उसके भरोसेमंद सहयोगी रूस के रिश्तों में तनाव आ सकता है। मोदी को इसकी परवाह नहीं है।”

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बलूचिस्तान पर पीएम मोदी के दम पर लंदन अमेरिका रूस से भी मिला समर्थन, चीन तिलमिलाया

 बलूचिस्तान पर पीएम मोदी के दम पर लंदन अमेरिका रूस से भी मिला समर्थन, चीन तिलमिलाया





बलूचिस्तान पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिए गए बयान को विदेशों से भी समर्थन मिलने लगा है। अमेरिका, जर्मनी के बाद लंदन से भी PM के समर्थन की खबरें मिल रही हैं।
लंदन में ‘पीएम मोदी फॉर बलूचिस्तान’ और ‘कदम बढ़ाओ मोदी जी हम तुम्हारे साथ हैं’ जैसे नारों के साथ लोगों ने प्रदर्शन किया। लंदन में मौजूद सिंध और बलूचिस्तान के नेताओं ने चीन-पाकिस्तान इकनॉमिक कॉरिडोर कि भी खिलाफत की।  
बीते शनिवार को जर्मनी में भी इसी तरह के दृश्य देखने को मिले थे। जब वहाँ लेपिजिग शहर में कई बलूच कार्यकर्ता सड़क पर उतारे और एक रैली का आयोजन किया। इन लोगों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समर्थन में नारे भी लगाए। इस रैली कि ख़ास बात यह थी की कार्यकर्ताओं के हाथ में तिरंगा था।

अमेरिका ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर तथा बलूचिस्तान प्रांत में मानवाधिकार की स्थिति पर चिंता जताई थी। अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता मार्क टोनर ने कहा था कि अमेरिका वहां ‘मानवाधिकार की स्थिति’ को लेकर चिंतित है और ‘इसका उल्लेख अपनी मानवाधिकार रिपोर्ट में भी किया है।’ टोनर ने यह भी कहा था कि अमेरिका ने पाकिस्तान से क्षेत्र में मौजूद समस्याओं का समाधान हमेशा शांतिपूर्ण ढंग से और राजनीतिक प्रक्रिया के जरिये ढूंढ़ने का आग्रह किया है।
स बीच चीन के एक प्रभावी थिंक टैंक ने कहा है कि अगर भारत के किसी ‘षड्यंत्र’ ने बलूचिस्तान में 46 अरब डालर लागत की चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (सीपीईसी) परियोजना को बाधित किया तो फिर चीन को ‘मामले में दखल देना पड़ेगा।’
चाइना इंस्टीट्यूट ऑफ कंटम्पररी इंटरनेशनल रिलेशन्स के इंस्टीट्यूट ऑफ साउथ एंड साउथ-ईस्ट एशियन एंड ओसिनियन स्टडीज के निदेशक हू शीशेंग ने कहा है कि स्वतंत्रता दिवस पर लालकिले की प्राचीर से दिए गए भाषण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा बलूचिस्तान का जिक्र, चीन और इसके विद्वानों की ‘ताजा चिंता’ है।
चीन की स्टेट सिक्योरिटी के मंत्रालय से संबद्ध इस प्रभावी थिंकटैंक के अध्ययनकर्ता ने यह भी कहा कि भारत का अमेरिका से बढ़ता सैन्य संबंध और दक्षिण चीन सागर पर इसके रुख में बदलाव चीन के लिए खतरे की घंटी के समान है।
उन्होंने कहा कि यह पाकिस्तान के प्रति भारत की नीति में निर्णायक मोड़ हो सकता है। चीनी बुद्धिजीवियों की चिंता की वजह यह है कि भारत ने पहली बार बलूचिस्तान जिक्र किया है। विशेषज्ञों का कहना है कि मोदी द्वारा भाषण में इस इलाके के उल्लेख से पाकिस्तान को संकेत दिया गया है कि जम्मू एवं कश्मीर में आतंकियों को समर्थन देने पर उसे उसी की भाषा में जवाब मिलेगा। इससे भारत-चीन के संबंध और बिगड़ेंगे।
हू ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच बढ़ता रक्षा सहयोग भी चीन के लिए चिंता की वजह बन रहा है। पहले चीन को इससे फर्क नहीं पड़ता था कि भारत का किससे रक्षा सहयोग है, लेकिन अब चीन में इसे लेकर चिंता महसूस की जा रही है।

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Sunday, August 14, 2016

भारत ने बनाई ऐसी मिसाइल जो 1 मिनट में करेगी 6 देशों का सफाया

भारत ने बनाई ऐसी मिसाइल जो 1 मिनट में करेगी 6 देशों का सफाया






दिल्ली: भारतीय सेना लगातार अपनी सैन्य ताकत में इजाफा कर रही है। (India’s intercontinental Ballastic Missiles)

एक के बाद एक रक्षा के क्षेत्र में नई-नई इबारतें भारतीय वैज्ञानिक सेना को मजबूत करने के लिए लिख रहे हैं। ऐसा करने के पीछे भारत केवल एक ही तर्क देता है कि ऐसी खतरनाक मिसाइलों का प्रयोग हिन्दुस्तान केवल और केवल आत्मरक्षा के लिए कर रहा है।भारत की तीनों सेनाएं एक से बढ़कर एक अपने खेमें में जंगी हथियार जोड़ रहीं है। फिर चाहे वो एयर फोर्स के लड़ाकू विमान और मिसाइले हों या फिर नेवी के जंगी जलपोत वही थल सेना के लिए तोपों को भी जंगी बेड़े में शामिल किया जा रहा है। इससे साफ जाहिर होता है कि हमारी सेनाएं युद्ध कौशल के साथ-साथ युद्ध में फतह हासिल करने के लिए खुद को तैयार कर रही है।
भारतीय वैज्ञानिक भी एक के बाद एक नई मिसाइलों को इजाद कर भारतीय सेना को मजबूती देने की कोशिश कर रहे हैं। जिसमे आधुनिक तकनीकि से लैस मिसाइलों को बनाया जा रहा है और सेना को मजबूत करने के इरादे से सेना में शामिल किया जा रहा है। हाल ही में कई मिसाइले तैयार हुई हैं और पहले से भी कई मिसाइले सेना की ताकत की पहचान हैं। आज हम उन्ही मिसाइलों के बारे में बताएंगे कि कैसे वो दुश्मन के किले को भेद सकतीं हैं।

सूर्य मिसाइल पर काम कर रहा है DRDO (Intercontinetal Ballastic Missiles)


सूत्रों और मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो रक्षा अनुसन्धान और विकास संगठन पिछले कई सालों से सूर्य मिसाइल सिस्टम पर काम कर रहे है।
बताया जा रहा है कि इस मिसाइल का परीक्षण वर्ष 2017 में होने की उम्मीद है।


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एक ही साथ कई परमाणु हथियार ले जाने में है सक्षम
भारत की सूर्य मिसाइल दुनियां की सबसे खास मिसाइल है। इस मिसाइल की सबसे बड़ी खासबात यह है कि यह मिसाइल अपने साथ एक नहीं बल्कि कई परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम होगी और बेहतर ढंग से अगर इसे समझने का प्रयास करें तो पता चलता है कि यह मिसाइल एक ही साथ कई देशों को या फिर एक ही देश के कई इलाकों को तबाह कर सकनें में सक्षम है।
इंटरकॉन्टिनेंटल बैलेस्टिक मिसाइल है

भारत के सर्वाधिक सीक्रेट प्लान के तहत बनायी गयी इस मिसाइल की मारक क्षमता के बारे में बताया जा रहा है कि इसकी मारक क्षमता 10,000 से 12,000 किमी तक की है, यह एक इंटरकॉन्टिनेंटल मिसाइल है।
इस मिसाइल के भारतीय सेना के जखीरे में शामिल होने के बाद भारतीय सेना हिन्दुस्तान में ही बैठे-बैठे यूरोप, एशिया, अफ्रीका, अलास्का और उत्तरी कनाडा तक निशाना लगा सकती है।


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किन-किन देशों के पास है इंटरकॉन्टिनेंटल मिसाइल

अभी अमेरिका के पास 13 हजार किलोमीटर की मारक क्षमता वाली मिसाइल मौजूद है।

चीन ने हाल ही 14 हजार किलोमीटर तक मार करने वाली डोंगफेंग-41 नाम की मिसाइल का परीक्षण किया है।


जबकि रूस के पास अभी 10 हजार किलोमीटर और पाकिस्तान के पास सिर्फ 2 हजार 750 किलोमीटर की रेंज वाली मिसाइल मौजूद है।
भारतीय रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन के वैज्ञानिकों की लगातार कोशिश है कि वो भारतीय सेना को मजबूती प्रदान कर सकें। संस्थान के वैज्ञानिकों का हना है कि अपने देश की सेना और सेनाओं को वो मजबूती देने की कोशिश कर रहे हैं जिसके सामने किसी भी देश की सेना घुटने टेक दे और हार मान ले।


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Wednesday, May 25, 2016

आतंकियों को कुचलने के लिए सेना को खुली छूट – Manohar Parrikar

आतंकियों को कुचलने के लिए सेना को खुली छूट – Manohar Parrikar








रक्षा मंत्री Manohar Parrikar ने यूपीए सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होने कहा कि यूपीए ने सेना के मनोबल को तोड़ दिया था। हमने सेना को खुली छूट दे रखी है।

New Delhi, May 25: केंद्र सरकार में रक्षा मंत्री Manohar Parrikar तेजी से फैसले लेने वाले मंत्री माने जाते हैं। रक्षा मंत्री बनने के बाद से उन्होने देश की सुरक्षा और सेना की भलाई के लिए कई कदम उठाए हैं। देश पर आतंकी खतरे को देखते हुए रक्षा मंत्री ने सेना को खुली छूट दे रखी है। रक्षा मंत्री के मुताबिक मोदी सरकार में सेना के हाथ बंधे हुए नहीं है।

मोदी सरकार के दो साल पूरे होने के मौके पर दिए एक इंटरव्यू के दौरान Manohar Parrikar ने ये बातें कहीं। रक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार ने केवल सेना के आधुनिकिकरण पर ही ध्यान नहीं दिया है। सेना के मनोबल को बढ़ाने का काम भी किया है। मनोवैज्ञानिक रूप से सरकार ने सेना का साथ दिया है। सेना को भरोसा है कि देश का प्रधानमंत्री उनके पीछे खड़ा है।
यूपीए सरकार की आलोचना करते हुए Manohar Parrikar ने कहा कि यूपीए सरकार ने सेना के मनोबल को तोड़ के रख दिया था। रक्षा खरीद सौदे धीमी गति से आगे बढ़ रहे थे। सेना के पास सुविधाएं नहीं थी। वो आधुनिक हथियारों के लिए तरस रही थी। तो वहीं राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी के कारण आतंकवाद को लेकर सेना के हाथ बंधे हुए थे।

Manohar Parrikar ने कहा कि अब हालात बदल गए हैं। हमारी सरकार ने सेना को भरोसे में लिया है। देश की सुरक्षा में सेना का बहुत महत्वपूर्ण योगदान है, जिसे नजर अंदाज नहीं किया जा सकता है। मोदी सरकार ने सेना को खुली छूट दे रखी है। आतंकी घटनाओं और सीमा पार से होने वाली घुसपैठ को लेकर सेना को अब दो बार नहीं सोचना पड़ता है। मनोहर पार्रिकर ने साफ कर दिया  कि यूपीए सरकार के दौरान जो गलतियां हुई थी उन्हे दोहराया नहीं जाएगा। 
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Sunday, May 8, 2016

Manohar Parrikar ने अरविंद केजरीवाल को दिया करारा जवाब

Manohar Parrikar ने अरविंद केजरीवाल को दिया करारा जवाब

रक्षा मंत्री Manohar Parrikar ने ऑगस्ता मुद्दे पर अरविंद केजरीवाल के आरोपों का एक लाइन में जवाब देकर उन्हे खामोश कर दिया है।


ऑगस्ता मुद्दे पर दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार पर जोरदार हमला किया था। केंद्र सरकार की तरफ से पलटवार का जिम्मा उठाया है रक्षा मंत्री Manohar Parrikar ने। रक्षा मंत्री ने केजरीवाल के सारे हमलों का एक लाइन में जवाब दिया। पार्रिकर ने ऑगस्ता मामले पर भी कांग्रेस पर जमकर सियासी तीर चलाएं हैं। आपको बता दें कि केजरीवाल ने ऑगस्ता वेस्टलैंड मामले में मोदी सरकार पर कार्रवाई न करने का आरोप लगाया था।

सबसे पहले Manohar Parrikar ने कांग्रेस को अपने निशाने पर रखआ। उन्होने कहा कि ऑगस्ता मामले में जो भी दोषी पाया जाएगा उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होने कहा कि चाहे वो गांधी परिवार का हो या फिर किसी और परिवार का हो। पार्रिकर ने कहा कि कोई भी कानून से ऊपर नहीं है। चाहे वो देश का पहला परिवार हो या फिर आखिरी परिवार हो। उन्होने कहा कि कार्रवाई सबूतों के आधार पर होगी।
कांग्रेस पर हमला करने के बाद Manohar Parrikar ने दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल के आरोपों का जवाब दिया। केजरीवाल ने कहा थआ कि मोदी सरकार के पास सोनिया गांधी के खिलाफ कार्रवाई करने की हिम्मत नहीं है। इस पर पार्रिकर ने कहा कि पिछले लगभग 10 दिन से ऑगस्ता मामला लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। ऐसे में केजरीवाल को मीडिया कवरेज नहीं मिल पा रही है।

Manohar Parrikar ने कहा कि केजरीवाल ने कांग्रेस के घोटाले पर मोदी सरकार पर निशआना साधा है। जाहिर है कि वो पब्लिसिटी के लिए ये सब कर रहे हैं। उन्होने कहा कि केजरीवाल मीडिया में आने के लिए इस तरह के आरोप लगा रहे हैं। Manohar Parrikar ने कहा कि इस मामले में CBI और ED अपना काम ईमानदारी से कर रही हैं। सरकार घूस लेने वालों को उनकी सही जगह पहुंचाएगी।