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Sunday, August 7, 2016

ऊना के ‘गोरक्षकों’ के मास्टरमाइंड अहमद पटेल हैं? PM मोदी का इशारा अहमद पटेल की तरफ था?

ऊना के ‘गोरक्षकों’ के मास्टरमाइंड अहमद पटेल हैं?




ऊना में दलितों की पिटाई के मामले में बहुत जल्द बड़ा खुलासा हो सकता है। इस सिलसिले में गिरफ्तार 22 लोगों से पूछताछ और मोबाइल फोन रिकॉर्ड्स से कुछ ऐसी जानकारियां सामने आई हैं जो बेहद चौंकाने वाली हैं। घटना की जांच से जुड़े सीआईडी के अधिकारी इस मामले में बेहद गोपनीयता बरत रहे हैं। इस जांच के नतीजे जल्द ही गुजरात पुलिस प्रेस कॉन्फ्रेंस करके बता सकती है। शक की सुई सोनिया गांधी के करीबी अहमद पटेल की ओर है। इस बात के संकेत मिल रहे हैं कि अहमद पटेल ने इस पूरी साजिश को अपने करीबी कांग्रेसी विधायक वंश पंजाभाई भीमभाई के जरिए अंजाम दिया। सोशल मीडिया पर पहले ही दिन से कई लोग यह बात खुलकर लिख रहेहैं कि जिस तरीके से यह मामला हुआ है उसमें कहीं न कहीं अहमद पटेल की छाप दिखाई दे रही है। अब यह गुजरात पुलिस की सीआईडी पर है कि वो इसके पक्के सबूत निकाल पाती हैं या नहीं।

पीएम मोदी का इशारा अहमद पटेल की तरफ?

रविवार को हैदराबाद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक रैली में खुलकर कहा कि “दलितों का ठेका लेकर बैठे कुछ लोग उन पर अत्याचार करवाकर इश्यू क्रिएट कर रहे हैं। अगर उन्हें हमला करना है तो मुझ पर करें।” हमारी जानकारी के मुताबिक पीएम मोदी का इशारा दरअसल अहमद पटेल की तरफ ही है।  वो अहमद पटेल और कांग्रेस को इस बात के लिए ललकार रहे थे कि दलितों को निशाना बनाने के बजाय सामने से आकर मुझे निशाना बनाओ। क्योंकि मामले की अब तक कि जांच में जो बातें सामने आई हैं वो साफ तौर पर कांग्रेस की ओर इशारा कर रही हैं। हालांकि साजिश को इतनी सफाई से अंजाम दिया गया है कि सबूतों को ढूंढने और उनके जरिए असली साजिशकर्ता तक पहुंचना बेहद पेचीदा काम साबित हो रहा है।
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सरपंच और विधायक के बीच 300 से ज्यादा बार बात!

ऊना के कांग्रेसी विधायक और मोटा समधियाला गांव के सरपंच प्रफुल्ल कोराट के बीच घटना से पहले एक महीने में 300 बार से अधिक बातचीत की बात सामने आई है। यह बातचीत विधायक के डायरेक्ट नंबर पर नहीं बल्कि किसी करीबी के नंबर पर हो रही थी। घटना पर हंगामा मचते ही सरपंच फरार हो गया। उसे अभी तक पकड़ा नहीं जा सका है। जांच एजेंसी के सूत्रों के मुताबिक इस साजिश की कई परतें हैं, जिन्हें अभी आपस में जोड़ा जाना बाकी है। अब तक की जो जानकारियां सामने आई हैं वो कुछ इस तरह हैं।

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  • घटना के महीने भर पहले से सरपंच प्रफुल्ल कोराट और ऊना के कांग्रेसी विधायक फोन पर संपर्क में थे।
  • गांव के कई लोगों ने पूछताछ में बताया है कि सरपंच और लोकल कांग्रेसी विधायक में पहले से ही अच्छे संबंध रहे हैं।
  • सरपंच का दलित परिवार से झगड़ा चल रहा था। वो उन्हें जमीन खाली करने और जानवरों की खाल उतारने का काम छोड़ने के लिए धमकियां दे रहा था।
  • विधायक के कहने पर ही सरपंच पिछले कुछ समय से दलित बालू सरवैया के परिवार से अपने रिश्ते सुधारने में लग गया था, ताकि पहला शक उसी पर न हो।
  • जांच में इस बात की पुष्टि हो गई है कि घटना का वीडियो सरपंच के मोबाइल फोन से ही बनाया गया है।
  • सरपंच के फोन से यह वीडियो एक तेलुगु चैनल तक कैसे पहुंचा, इस बारे में कड़ियां अभी तक नहीं जुड़ पाई हैं। शक है कि सरपंच ने इसे विधायक के हवाले कर दिया था।
  • फिलहाल पुलिस पूरी कोशिश कर रही है कि किसी तरह सरपंच को गिरफ्तार किया जा सके।
  • सरपंच से पूछताछ के बाद ही विधायक से पूछताछ की जा सकेगी।
  • पिटाई के वीडियो में दिखे कथित गोरक्षकों को फोन करके किसने बुलाया यह भी एक रहस्य बना हुआ है। क्योंकि सभी गिरफ्तार आरोपी अलग-अलग नाम बता रहे हैं।
  • पिटाई में इस्तेमाल गाड़ी दमन से ऊना आई थी। दमन से ऊना की दूरी 600 किलोमीटर से ज्यादा है। इस सवाल का जवाब मिलना अभी बाकी है कि आखिर वो कौन था जिसके कहने पर 600 किलोमीटर दूर से ये कथित गोरक्षक ऊना आए थे।
  • आरोपियों में एक मुस्लिम लड़का भी है। उसने इस साजिश के बारे में कुछ अहम बातें जांचकर्ताओं को बताई हैं।
  • यह बात भी पता चली है कि पकड़े गए किसी भी आरोपी ने पहले कभी गोरक्षा के लिए मारपीट नहीं की थी। सवाल ये है कि ऐसा क्या हो गया कि उनकी हिम्मत इतनी बढ़ गई कि उन्होंने पहले गांव और फिर ऊना कस्बे में मारपीट की और उसका वीडियो भी बनाया?
  • आरोपी अपनी गाड़ी पर शिवसेना का नाम लिखते थे, लेकिन यह पता चला है कि उनका शिवसेना से औपचारिक तौर पर कोई लेना-देना नहीं है।


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ऐसे चल रहा है "फर्जी गौ सेवकों" का ‘धंधा’: एक गाय को 200 रु में निकालते हैं, पूरा ट्रक 2000 में पास

ऐसे चल रहा है "फर्जी गौ सेवकों" का ‘धंधा’: एक गाय को 200 रु में निकालते हैं, पूरा ट्रक पास करवाना है तो 2000


एक गाय को निकलने देने के 200 रुपए लिए जाते हैं और एक ट्रक, जिसमें 10 गाय होती हैं उसे जाने देने के लिए 2 हजार रुपए लिए जाते हैं। वहीं 6 महीने का एक प्लान भी तय किया गया है। इसमें 3.80 लाख रुपए लेकर 6 महीने तक रोकटोक नहीं की जाती।



ऐसे चल रहा है गौ सेवकों का ‘धंधा’: एक गाय को 200 रु में निकालते हैं, पूरा ट्रक पास करवाना है तो 2000



2015 में गौ सेवा कमीशन बनने के बाद गाय को बेचने से पहले तीन जगहों से इजाजत मांगनी पड़ती है।
पीएम मोदी ने नई दिल्ली में आम लोगों के सवालों के जवाब देते हुए शनिवार (6 अगस्त) को कहा था कि गौ रक्षकों के नाम पर कुछ लोग अपनी दुकानें खोलकर बैठे हैं। इसी बात को सच साबित करती एक खबर पंजाब से आई है। पंजाब में पशुओं को खरीदने-बेचने का काम करने वाले लोगों का आरोप है कि उन्हें गौरक्षक परेशान करते हैं और गाय या भेंस से भरे ट्रकों को बिना किसी परेशानी के निकलने देने के लिए पैसे मांगते हैं। पंजाब के चीमा गांव में रहने वाले अमरजीत सिंह ने इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत के दौरान बताया कि उन्हें हिंदू शिव सेना के एक नेता से बातचीत करके उसे दो लाख रुपए देने पड़े ताकि उनके ट्रकों को बिना किसी रोकथाम से आने-जाने दिया जाए। अमरजीत ने बताया कि अगर पैसे नहीं दिए जाते तो वे लोग भैंस-गाय को लेकर आ-जा रहे ट्रक को रोक लेते हैं और उन्हें परेशान करते हैं। लाइक करें हमारा फेसबुक पेज 


फिक्स हैं रेट: अमरजीत सिंह ने बताया कि ‘फर्जी’ गौ रक्षकों ने हर चीज के रेट भी फिक्स कर रखे हैं। जैसे एक गाय को निकलने देने के 200 रुपए लिए जाते हैं और एक ट्रक, जिसमें 10 गाय होती हैं उसे जाने देने के लिए 2 हजार रुपए लिए जाते हैं। वहीं 6 महीने का एक प्लान भी तय किया गया है। इसमें 3.80 लाख रुपए लेकर 6 महीने तक रोकटोक नहीं की जाती। इसमें ट्रक के नंबर उस गिरोह को दे दिए जाते हैं। जिन्हें उन्हें नहीं रोकना होता। अमरजीत ने बताया कि पहले तो यह सब ठीक था लेकिन अब पशुओं की कीमत गिरने से उन्हें नुकसान हो रहा है। उन्होंने कहा, ‘पहले गाय 1 लाख तक बिक जाती थी लेकिन अब कीमत 50 हजार के करीब है, इसलिए अब हम डेयरी फार्म का काम करने लगे हैं।’

गौ सेवा कमीशन बनने से बढ़ी मुश्किलें: अमरजीत ने बताया कि पहले गाय को बेचने के लिए सिर्फ पशुपालन विभाग से परमिशन लेनी होती थी लेकिन गौ सेवा कमीशन बनने के बाद तीन जगहों से इजाजत मांगनी पड़ती है।

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वहीं गौ सेवकों की सोच इससे बिल्कुल अलग है। 54 साल के सतीश कुमार जो कि राजपुरा में बने गौ रक्षा दल के अध्यक्ष हैं उन्होंने कहा कि वह अबतक 2.5 लाख से ज्यादा गायों को बचा चुके हैं। वहीं जब उनसे पूछा गया कि गाय बेचने वाले को परेशानियों का सामना क्यों करना पड़ता है तो वह बोले कि वे लोग काटने के लिए गाय को बेचना चाहते हैं इसलिए उन्हें NOC नहीं मिलती।




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Thursday, June 16, 2016

5 स्टार होटलों से गाय का मांस बंद कराएं, या इस्तीफा दे मोदी - आज़म खान



लखनऊ: केबिनेट मंत्री आज़म खान का पीएम मोदी को अल्टिमेटम कहा कि 24 घंटे के अंदर देश के 5 सितारा होटल से गाय का गोश्त बंद कराय। या फिर इस्तीफ़ा दे। आज़म खान का कहना है की दिल्ली, बॉम्बे, कोलकाता के पांच सितारा होटल में ज़िंदा गाय काट कर उनका गोश्त पकाया जाता है फिर बेचा जाता हैं। और मेनू पर रेट लिखा होता है। 

आज़म खान ने कहा की एक्सक्लूसिव आर्डर से यह बंद करे वरना मोदी इस्तीफा दें।

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Tuesday, May 31, 2016

कब होगी अख़लाक़ के परिवार की गिरफ़्तारी, यूपी में गौहत्या व् गौमांस पर 2 साल की है सजा





उत्तर प्रदेश के दादरी में अख़लाक़ के घर पर गाय के बछड़े की हत्या कर उसके शव को खाने का मामला अब साफ़ हो गया है
मथुरा लैब में जांच हुए मांस से साफ़ हो गया है की अख़लाक़ के फ्रिज में गाय का ही मांस रखा हुआ था
तथा उसकी हत्या की गयी थी तथा अख़लाक़ के साथ उसके परिवार ने भी गाय का मांस खाया था
अब अख़लाक़ तो दुनिया में नहीं है पर उसके परिवार के सदस्य अब भी मौजूद है, जिसमे उसकी बीवी तथा बच्चे इत्यादि सब है
आपको बता दें की उत्तरप्रदेश में गौहत्या तथा गौमांस रखने, खाने पर 2 साल की कड़ी कैद तथा जुर्माने की सजा है
अब जब साफ़ हो गया है की अख़लाक़ तथा उसके परिवार ने गौमांस खाया था तथा उसका मांस भी फ्रिज में रखा था तो अब देखना होगा की यहाँ भारत का कानून चलता है या नहीं
इस मुद्दे को पुरे देश को उठाना होगा तथा गौहत्यारे परिवार को जेल की सलाखों तक पहुचाना होगा और जनता के पैसे जो इनको रबड़ी के रूप में बांटे गए है इनसे सब वसूली करवाना होगा।






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दादरी कांड: फॉरेंसिक रिपोर्ट में खुलासा- अखलाक के घर फ्रिज में था गौमांस

दादरी कांड: फॉरेंसिक रिपोर्ट में खुलासा- अखलाक के घर फ्रिज में था गौमांस


Monday, January 25, 2016

शर्मनाक : गाय का मॉस खाना हैं तो मुझे वोट दो : असदुद्दीन औवेसी

गाय का मॉस खाना हैं तो मुझे वोट दो : असदुद्दीन औवेसी


बीफ पर डर्टी पॉलिटिक्‍स खत्‍म नहीं हुई है। हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन औवेसी ने आज इस मुद्दे पर भरी सभा में जोरदार ऐलान किया। हैदराबाद के निकाय चुनाव से जुड़ी एक जनसभा में असदुद्दीन आैवेसी ने कहा कि अगर लोग उनके कैंडीडेट को वोट देंगे तो उन्‍हें बीफ खाने से कोई नहीं रोक सकेगा।

यहां देखें वीडियो


असदुद्दीन औवेसी की हेट स्‍पीच

ऑल इंडिया मजलिस-ए-मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख असदुद्दीन आैवेसी यहीं नहीं रुके। उन्‍होंने दो टूक कहा, अगर आपकी पार्टी AIMIM हारी तो मैं आपसे कह देता हूं कि पिछड़ों और उनके नेताओं को बीफ मीट भूलना होगा।
औवेसी ने महाराष्‍ट्र की बीजेपी सरकार पर भी हमला किया। उन्‍होंने आरोप लगाया कि महाराष्‍ट्र में दलितों और मुस्लिमों को बीफ बैन के मुद्दे पर परेशान कर रही है। उन्‍होंने कहा, ‘महाराष्‍ट्र में उन्‍होंने बीफ पर बैन लगाया। लेकिन जब से नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री बने हैं, बीफ का निर्यात तेजी से बढ़ा है। अगर मेरे सूत्र सही हैं तो देश में 17 फीसदी तक बीफ का निर्यात बढ़ा है। मोदी इस रोकने के लिए क्‍या करेंगे।’




महाराष्‍ट्र में मार्च 2015 से सरकार ने बैन लगा रहा है। असदुद्दीन आैवेसी पहले भी इसके खिलाफ काफी कुछ बोल चुके हैं। औवेसी मोदी के खिलाफ भी लगातार बोलते हैं। वह कई बार मोदी की कॉपी करके भी उनके खिलाफ जहर उगलते रहे हैं। लेकिन अब आेवैसी ने नया पैंतरा आजमाना शुरू किया है। बीफ का मुद्दा बीते दिनों भी काफी गर्माया था। इसे देखते हुए असदुद्दीन औवेसी ने अब अपने चुनाव प्रचार में इसका इस्‍तेमाल शुरू कर दिया है।
हैदराबाद की चुनावी सभा में भी असदुद्दीन आैवेसी ने मोदी की कॉपी की। जिस तरह मोदी अपने भाषण की शुरुआत ‘मित्रों’ कहकर करते हैं। ठीक उसकी तरह औवेसी ने भी किया। उन्‍होंने कहा, मित्रों के जरिए बाकी जगह तो काम चल जाएगा लेकिन हैदराबाद में नहीं। हैदराबाद में मित्रों नहीं ‘बड़ा’ (बीफ) चलेगा। बताया जा रहा है कि औवेसी का यह बयान बीते हफ्ते की रैली में सामने आया है। इस रैली का वीडियो भी यूट्यूब पर वायरल हुआ है।