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Tuesday, May 31, 2016

कब होगी अख़लाक़ के परिवार की गिरफ़्तारी, यूपी में गौहत्या व् गौमांस पर 2 साल की है सजा





उत्तर प्रदेश के दादरी में अख़लाक़ के घर पर गाय के बछड़े की हत्या कर उसके शव को खाने का मामला अब साफ़ हो गया है
मथुरा लैब में जांच हुए मांस से साफ़ हो गया है की अख़लाक़ के फ्रिज में गाय का ही मांस रखा हुआ था
तथा उसकी हत्या की गयी थी तथा अख़लाक़ के साथ उसके परिवार ने भी गाय का मांस खाया था
अब अख़लाक़ तो दुनिया में नहीं है पर उसके परिवार के सदस्य अब भी मौजूद है, जिसमे उसकी बीवी तथा बच्चे इत्यादि सब है
आपको बता दें की उत्तरप्रदेश में गौहत्या तथा गौमांस रखने, खाने पर 2 साल की कड़ी कैद तथा जुर्माने की सजा है
अब जब साफ़ हो गया है की अख़लाक़ तथा उसके परिवार ने गौमांस खाया था तथा उसका मांस भी फ्रिज में रखा था तो अब देखना होगा की यहाँ भारत का कानून चलता है या नहीं
इस मुद्दे को पुरे देश को उठाना होगा तथा गौहत्यारे परिवार को जेल की सलाखों तक पहुचाना होगा और जनता के पैसे जो इनको रबड़ी के रूप में बांटे गए है इनसे सब वसूली करवाना होगा।






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दादरी कांड: फॉरेंसिक रिपोर्ट में खुलासा- अखलाक के घर फ्रिज में था गौमांस

दादरी कांड: फॉरेंसिक रिपोर्ट में खुलासा- अखलाक के घर फ्रिज में था गौमांस


Monday, February 29, 2016

इस तरह की अराजकताओं को जो नाम दिये जाते हैं वह ठीक नहीं है इसे सिर्फ और सिर्फ अराजकता कहा जाना चाहिए..!

पिछले दिनों हरियाणा में हुई अराजकता को जिस तरह जाट आंदोलन कहकर प्रचारित किया जा रहा है..!
वह गहरी राजनीतिक साजिस है.! इस तरह की अराजकताओं को जो नाम दिये जाते हैं वह ठीक नहीं है इसे सिर्फ और सिर्फ अराजकता कहा जाना चाहिए..!
दादरी कांड को हिन्दुत्ववादी आंदोलन से जोडा गया, मालदा की अराजकता को इस्लाम से जोडा गया, हरियाणा में दिन-दहाडे जो लूट-पाट, हत्यायें आगजनी बलात्कार हुए और पूरा जनजीवन अराजकता के हवाले किया गया उसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार की है। जो सरकार अराजकता नहीं रोक पायी उसे कटघरे में खडा किया जाना चाहिए लेकिन सरकारें कह रही हैं कि यह जाट आंदोलन था..!
ना तो जाट समुदाय को हम इकतरफा तौर पर इस तरह बदनाम कर सकते हैं और ना ही यह कोई आंदोलन था। आंदोलन की अपनी एक गरिमा और मर्यादा होती है। अराजकता को आंदोलन कैसे कहा जा सकता है..?
इसी तरह हिन्दूवादी आंदोलन और मुसलमानवादी आंदोलन कहने से पहले हमें विचार करना होगा कि हम क्या कह रहे हैं अराजकता और जंगलराज को किसी धर्म, जाति और समुदाय जोडना सही नहीं हैं..!
जहॉ भी सामाजिक अराजकता हो उसकी पूरी जिम्मेदार प्रशासन और सरकार की असफलता है और समाज को बॉटने की गहरी साजिश है ताकी वोटों की दुकानदारी की जा सके..!!