मायावती बोलीं - मुस्लिम, सिख व बौद्ध धर्म के लोग देश के मूल निवासी
लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती ने वीरवार को यहां प्रेस कांफ्रेंस के दौरान केंद्र की मोदी सरकार व उत्तर प्रदेश की समाजवादी पार्टी (सपा) की सरकार पर निशाना साधने के साथ-साथ अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय व जामिया मिलिया इस्लामिया का मुद्दा भी उठाया।
बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि केंद्र की भाजपा सरकार अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय व जामिया मिलिया इस्लामिया से अल्पसंख्यक का दर्जा छीनकर अल्पसंख्यक समाज के छात्रों को यतीम बनाने में लगी है।
इन दोनों संस्थानों से अल्पसंख्यक संस्थान का हक छीनने का भाजपा सरकार का प्रयास राजनीति से प्रेरित है, ताकि कुछ महीने में यूपी में होने वाले चुनाव में वोटों को जाति व मजहब के आधार पर बांटकर सपा का भी उल्लू सीधा किया जा सके।
मायावती ने कहा कि भाजपा के तर्क के मुताबिक अलीगढ़ व जामिया का दर्जा समाप्त होने से देश के दलितों व अन्य पिछड़े वर्गों को काफी सहायता मिलेगी। हालांकि बसपा इससे सहमत नहीं है। मायावती ने कहा कि अपने देश में मुस्लिम, सिख, ईसाई व बौद्ध अल्पसंख्यक वर्गों के लोग देश के मूल निवासी हैं।
इन लोगों में से 90 फीसदी ऐसे लोग हैं, जो कि मूल रूप से हिंदू धर्म में दलित, आदिवासी, पिछड़े वर्गों के लोग कहलाते थे, जिन्होंने जातिवादी मानसिकता वाले उच्च वर्ग के लोगों से तंग आकर धर्म बदल लिया था।
इसी आधार पर बसपा धर्म परिवर्तन करने वाले इन लोगों को अपने समाज का अंग मानती है। इन लोगों के दुख-तकलीफों को देखते हुए बसपा इन्हें आरक्षण की सुविधा देने की पक्षधर है। बसपा इसे लेकर कई बार केंद्र सरकार से मांग भी कर चुकी है, लेकिन सरकार ने इसे मंजूर नहीं किया।
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय व जामिया मिलिया इस्लामिया के मामले में भाजपा दलितों व पिछड़ों को गुमराह कर रही है। अगर केंद्र की भाजपा सरकार को दलितों-पिछड़ों की चिंता है तो सबसे पहले देशभर में प्राथमिक व माध्यमिक स्कूलों की हालत सुधारे। कांग्रेस की तरह भाजपा का भी इस ओर ध्यान नहीं है।
देश में दलित-पिछड़े वर्ग के बच्चे गांवों में खराब हालत में इन विद्यालयों में पढऩे के लिए मजबूर हैं। मायावती ने कहा कि अगर भाजपा सरकार को दलितों व पिछड़े वर्गों के छात्रों से इतना ही लगाव है तो इनको निजी स्कूलों में भी आरक्षण देने की व्यवस्था करे, ताकि शिक्षा के मामले में इनका हजारों सालों का पिछड़ापन दूर हो सके। मोदी की करनी और कथनी में अंतर है।
बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि केंद्र की भाजपा सरकार अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय व जामिया मिलिया इस्लामिया से अल्पसंख्यक का दर्जा छीनकर अल्पसंख्यक समाज के छात्रों को यतीम बनाने में लगी है।
इन दोनों संस्थानों से अल्पसंख्यक संस्थान का हक छीनने का भाजपा सरकार का प्रयास राजनीति से प्रेरित है, ताकि कुछ महीने में यूपी में होने वाले चुनाव में वोटों को जाति व मजहब के आधार पर बांटकर सपा का भी उल्लू सीधा किया जा सके।
मायावती ने कहा कि भाजपा के तर्क के मुताबिक अलीगढ़ व जामिया का दर्जा समाप्त होने से देश के दलितों व अन्य पिछड़े वर्गों को काफी सहायता मिलेगी। हालांकि बसपा इससे सहमत नहीं है। मायावती ने कहा कि अपने देश में मुस्लिम, सिख, ईसाई व बौद्ध अल्पसंख्यक वर्गों के लोग देश के मूल निवासी हैं।
इन लोगों में से 90 फीसदी ऐसे लोग हैं, जो कि मूल रूप से हिंदू धर्म में दलित, आदिवासी, पिछड़े वर्गों के लोग कहलाते थे, जिन्होंने जातिवादी मानसिकता वाले उच्च वर्ग के लोगों से तंग आकर धर्म बदल लिया था।
इसी आधार पर बसपा धर्म परिवर्तन करने वाले इन लोगों को अपने समाज का अंग मानती है। इन लोगों के दुख-तकलीफों को देखते हुए बसपा इन्हें आरक्षण की सुविधा देने की पक्षधर है। बसपा इसे लेकर कई बार केंद्र सरकार से मांग भी कर चुकी है, लेकिन सरकार ने इसे मंजूर नहीं किया।
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय व जामिया मिलिया इस्लामिया के मामले में भाजपा दलितों व पिछड़ों को गुमराह कर रही है। अगर केंद्र की भाजपा सरकार को दलितों-पिछड़ों की चिंता है तो सबसे पहले देशभर में प्राथमिक व माध्यमिक स्कूलों की हालत सुधारे। कांग्रेस की तरह भाजपा का भी इस ओर ध्यान नहीं है।
देश में दलित-पिछड़े वर्ग के बच्चे गांवों में खराब हालत में इन विद्यालयों में पढऩे के लिए मजबूर हैं। मायावती ने कहा कि अगर भाजपा सरकार को दलितों व पिछड़े वर्गों के छात्रों से इतना ही लगाव है तो इनको निजी स्कूलों में भी आरक्षण देने की व्यवस्था करे, ताकि शिक्षा के मामले में इनका हजारों सालों का पिछड़ापन दूर हो सके। मोदी की करनी और कथनी में अंतर है।
