Monday, May 2, 2016

मायावती बोलीं-मुस्लिम, सिख व बौद्ध धर्म के लोग देश के मूल निवासी

मायावती बोलीं - मुस्लिम, सिख व बौद्ध धर्म के लोग देश के मूल निवासी

लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती ने वीरवार को यहां प्रेस कांफ्रेंस के दौरान केंद्र की मोदी सरकार व उत्तर प्रदेश की समाजवादी पार्टी (सपा) की सरकार पर निशाना साधने के साथ-साथ अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय व जामिया मिलिया इस्लामिया का मुद्दा भी उठाया।
बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि केंद्र की भाजपा सरकार अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय व जामिया मिलिया इस्लामिया से अल्पसंख्यक का दर्जा छीनकर अल्पसंख्यक समाज के छात्रों को यतीम बनाने में लगी है।
इन दोनों संस्थानों से अल्पसंख्यक संस्थान का हक छीनने का भाजपा सरकार का प्रयास राजनीति से प्रेरित है, ताकि कुछ महीने में यूपी में होने वाले चुनाव में वोटों को जाति व मजहब के आधार पर बांटकर सपा का भी उल्लू सीधा किया जा सके।
मायावती ने कहा कि भाजपा के तर्क के मुताबिक अलीगढ़ व जामिया का दर्जा समाप्त होने से देश के दलितों व अन्य पिछड़े वर्गों को काफी सहायता मिलेगी। हालांकि बसपा इससे सहमत नहीं है। मायावती ने कहा कि अपने देश में मुस्लिम, सिख, ईसाई व बौद्ध अल्पसंख्यक वर्गों के लोग देश के मूल निवासी हैं।
इन लोगों में से 90 फीसदी ऐसे लोग हैं, जो कि मूल रूप से हिंदू धर्म में दलित, आदिवासी, पिछड़े वर्गों के लोग कहलाते थे, जिन्होंने जातिवादी मानसिकता वाले उच्च वर्ग के लोगों से तंग आकर धर्म बदल लिया था।
इसी आधार पर बसपा धर्म परिवर्तन करने वाले इन लोगों को अपने समाज का अंग मानती है। इन लोगों के दुख-तकलीफों को देखते हुए बसपा इन्हें आरक्षण की सुविधा देने की पक्षधर है। बसपा इसे लेकर कई बार केंद्र सरकार से मांग भी कर चुकी है, लेकिन सरकार ने इसे मंजूर नहीं किया।
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय व जामिया मिलिया इस्लामिया के मामले में भाजपा दलितों व पिछड़ों को गुमराह कर रही है। अगर केंद्र की भाजपा सरकार को दलितों-पिछड़ों की चिंता है तो सबसे पहले देशभर में प्राथमिक व माध्यमिक स्कूलों की हालत सुधारे। कांग्रेस की तरह भाजपा का भी इस ओर ध्यान नहीं है।
देश में दलित-पिछड़े वर्ग के बच्चे गांवों में खराब हालत में इन विद्यालयों में पढऩे के लिए मजबूर हैं। मायावती ने कहा कि अगर भाजपा सरकार को दलितों व पिछड़े वर्गों के छात्रों से इतना ही लगाव है तो इनको निजी स्कूलों में भी आरक्षण देने की व्यवस्था करे, ताकि शिक्षा के मामले में इनका हजारों सालों का पिछड़ापन दूर हो सके। मोदी की करनी और कथनी में अंतर है।

10 कारण, 2019 तक क्यों Congress मुक्त हो जाएगा भारत ?

2019 के लोकसभा चुनाव तक Congress का सफाया हो जाएगा. ये हम नहीं कह रहे हैं बल्कि कांग्रेस के हालात इस तरफ इशारा कर रहे हैं।


साल 2014 के लोकसभा चुनाव में Congress ने अपने इतिहास का सबसे बुरा प्रदर्शन किया था। देश की सबसे पुरानी पार्टी महज 44 सीटों पर सिमट के रह गई थी। हार के सदमें से Congress अभी तक उबर नहीं पाई है। 2014 के बाद से जिस तरह कांग्रेस खुद को संभालने की नाकाम कोशिश कर रही उस से भविष्य के अच्छे संकेत नहीं मिल रहे हैं। कहा जा रहा है कि 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव तक कांग्रेस का शायद सफाया हो जाए। हलांकि ये कहना अतिश्योक्ति होगा लेकिन हालात कुछ ऐसे ही दिख रहे हैं। इसके पीछे के कुछ कारण हैं जो हम आपको बता रहे हैं।

कांग्रेस नेताओं पर चलते कानूनी मामले


सबसे पहला कारण तो ये है कि Congress के कई नेता कानूनी झमेलों में फंसे हैं। कई वरिष्ठ नेताओं पर घोटालों के आरोप हैं, जिन पर सुनवाई चल रही है। पी चिदंबरम, सोनिया गांधी, राहुल गांधी, वीरभद्र सिंह, शशि थरूर, ओमान चांडी, मल्लिकार्जुन खड़गे, वीरप्पा मोइली, अशोक चव्हाण, भूपेंद्र सिंह हुड्डा, कार्ती चिदांबरम सब पर लगे आरोपों पर सुनवाई हो रही है। 2018-19 तक इनमें से कुछ नेताओं को अगर सजा का एलान हो जाता है तो पीएम मोदी इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ  अपनी जीत के तौर पर प्रचारित करेंगे।खास बात ये है कि NDA-2 के राज में भी UPA-2 के घोटालों की चर्चा हो रही है।

फंड की कमी से जूझती कांग्रेस

लोकसभा चुनाव हारने के बाद से Congress के फंड में लगातार गिरावट देखी जा रही है। कांग्रेस के पास पैसों की सख्त कमी है। अफवाहें तो यहां तक हैं कि Congress ने पार्टी नेताओं से पैसे देने की अपील की है। ये पहली बार है जब विपक्ष में होने के बाद कांग्रेस पैसों की कमी से जूझ रही है। यही हाल रहा तो 2019 तक पार्टी कैसे सर्वाइव कर पाएगी।

हाथ से निकलती राज्य सरकारें


Congress एक के बाद एक राज्यों के चुनाव हारती जा रही है। कांग्रेस का इतना बुरा हाल कभी नहीं रहा था। आज की तारीख में बीजेपी के पास Congress से ज्यादा विधायक हैं। जितने राज्यों में कांग्रेस की सरकार है वो भी कोई खास महत्व नहीं रखते हैं राष्ट्रीय राजनीति में। वहीं बीजेपी लगातार राज्यों में अपनी पैठ बनाती जा रही है। इस लिहाज से देखें तो 2019 तक कांग्रेस राज्यों में भी सिमट के रह जाएगी।

राज्यसभा में भी कांग्रेस की हालत खराब होगी

हाल के दिनों में देखा गया है कि केंद्र सरकार लोकसभा में विपक्ष के हंगामे पर खामोश रह जाती है। लेकिन 2016 तक ये खत्म हो जाएगा। 2016 तक बीजेपी राज्यसभा में सबसे बड़ी पार्टी बन जाएगी। 2018 तक Congress और बीजेपी के बीच का अंतर और बढ़ जाएगा। ये अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है कि जब बीजेपी दोनो सदनों में बहुमत में होगी तो क्या होगा। कांग्रेस के भविष्य के लिए ये खतरे की घंटी से कम नहीं है।
Congress Free India

बीजेपी की पसंद के होंगे राष्ट्रपति

2012 तक राष्ट्रपति चुनाव में Congress की मर्जी चलती थी। यहां तक कि अटल बिहारी वाजपेई को एपीजे अब्दुल कलाम का नाम आगे करना पड़ा ताकि सबकी सहमति बन सके। लेकिन 2017 तक बीजेपी लोकसभा राज्यसभा और राज्य विधानसभाओं के सदस्यों के आधार पर राष्ट्रपति चुनाव में अपने मर्जी चलाएगी। बीजेपी की पसंद का राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति होने से कांग्रेस के पास विकल्प और कम हो जाएंगे। यानि कांग्रेस एक कोने में दिखाई देगी।

बिजली-सड़क-रेल बीजेपी का नया मंत्र

मोदी सरकार के तीन मंत्रालय और उनकी मंत्री लगातार काम कर रहे हैं। रेल मंत्री सुरेश प्रभु, परिवहन मंत्री नितिन गडकरी और ऊर्जा मंत्री पीयूश गोयल सरकारी नीतियों को हकीकत का जामा पहनाने में लगे हैं। 2018 तक इनका काम और नतीजा जनता को दिखाई देने लगेगा। बिजली-पानी-सड़क के बदले बीजेपी बिजली-सड़क-रेल के मुद्दे पर जनता का दिल जीतेगी। Congress के लिए इसका मुकाबला करना बहुत कठिन होगा, क्योंकि कांग्रेस शासित राज्यों में गवर्नेंस बिखरा हुआ दिखाई दे रहा है।

कौन होगा कांग्रेस का पीएम कैंडिडेट?

2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेसCongress की तरफ से पीएम कैंडिडेट कौन होगा इस पर भी कांग्रेस का भविष्य निर्भर करता है। पीएम मोदी को टक्कर देने के लिए राहुल गांधी नाकाफी हैं। कांग्रेस किसी और नेता को आगे नहीं बढ़ा रही है। क्या कांग्रेस गठबंधन के सहारे चुनाव में उतरेगी, तो फिर पीएम कैंडिडेट के लिए मारामारी होगी। यानि यहां भी कांग्रेस के लिए हालात अच्छे नहीं दिख रहे हैं। पीएम मोदी के काम से जनता खुश लग रही है और कांग्रेस के पास इसकी कोई काट नहीं है।

पीएम मोदी की रहस्यमयी रणनीति


पीएम मोदी को आज की तारीख में देश का सबसे चलाक नेता माना जाता है। इसके पीछे कारण भी है। नरेंद्र मोदी ने अपने जीवन की सभी महत्वपूर्ण चुनावी लड़ाईयां जीती हैं। उनके दिमाग में मिशन 2019 को लेकर खास रणनीति जरूर होगी। जिस तरह से 2014 में नरेंद्र मोदी की रणनीति ने Congress को 44 सीटों पर ला दिया उसी तरह 2019 के लिए भी पीएम मोदी के पास जरूर कोई खास रणनीति होगी। जिसका काट खोजना कांग्रेस के लिए आसान नहीं होगा।

कांग्रेस का नवनिर्माण कैसे होगा?

कांग्रेस का इतिहास देखें तो पता चलता है कि इस पार्टी ने कई मौकों पर खुद को फिर से खड़ा किया है। इंदिरा गांधी से लेकर राजीव गांधी तक कई उदाहरण है। लेकिन हाल के दिनों में कांग्रेस नेताओं में मुद्दों की समझ और पार्टी कैडर को फिर से खड़ा करने की समझ नहीं दिखाई दे रही है। Congress के सबसे बड़े नेता राहुल गांधी की राजनीतिक समझ पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। वो हर मुद्दे पर जल्दबाजी दिखाते हैं। यही जल्दबाजी कांग्रेस के लिए सेल्फगोल का काम करती है। ऐसे में सवाल इस बात का है कि कांग्रेस की नवनिर्माण कैसे होगा और अगर नहीं होगा तो 2019 तक वो अपने सफाए की तरफ बढ़ जाएगी। बीजेपी के कांग्रेस मुक्त भारत के सपने को कांग्रेस खुद पूरा करती दिख रही है।

तो क्या सोनिया गांधी का बाप हिटलर का सिपाही और मुसोलिनी का समर्थक था

सोनिया गांधी का बाप हिटलर का सिपाही और मुसोलिनी का समर्थक था : द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान वह हिटलर की तरफ से रूस से हुई लड़ाई में शामिल था ।

स्टेफनो माइनो एक राजमिस्त्री था जिसकी बेटी सोनिया अंग्रेजी लैंगुयज पढ़ने के लिए चर्च के माध्यम से इंग्लैण्ड गई जहां के एक साधारण स्कुल में इसने दाखिल लिया उस समय सोनिया की उम्र तकरीबन 18 साल थी वहां सोनिया ने खर्चे के लिए वर्सिटी रेस्टुरेंट में वेट्रेस की नौकरी की । उस रेस्टुरेंट में शराब परोसने का काम भी सोनिया करती थी । 

जो लोग विदेशो के रेस्टुरेंट में गए है उन्हें पता होगा कि वेट्रेस को वेतन नाममात्र का मिलता है और उनका खर्च टिप्स तथा कुछ परमानेंट ग्राहकों को रिझाकर उतारे गए पैसे से चलता है । भारत में भी यही होता है । आठ दस परमानेंट कस्टमर के साथ ड्यूटी के बाद घूमना ,उनका मनोरंजन करना जिसमे बहुत सारे समझौते करने पड़ते है जैसे कार्य ये वेट्रेस करती है । फ़िल्म जगत के बारे में तो सबको पता है स्ट्रगल करने वाली लडकिया जिनकी मजबूत पारिवारिक पृष्ठभूमि नहीं होती है वे 5 हजार से 20 हजार तक में अपना सौदा करती है जिससे उनका खर्च चलता है ।
अमूमन वेट्रेस आमिर ग्राहकों को तलाशती है और प्रयास करती है कि उसे फसाकर शादी कर ले ।
जिस्म का सौदा इनकी मज़बूरी होती है । सोनिया इनसे अलग नहीं थी । हालांकि मज़बूरी में किये गए समझौते के लिए वेट्रेस को दोषी नहीं ठहराया जा सकता परंतु जब कोई वेट्रेस सच को इनकार करके खुद को महिमामंडित करने लगे तब आयना दिखाना जरुरी होता है ।
लालू यादव ने सोनिया गांधी को देश की बहु की उपाधि दी है और हेलीकॉप्टर घोटाले वाले प्रकरण में भाजपा -संघ के खिलाफ हल्ला मचा रहे है ।
लालू जी भारत की बहुए होटलो में शराब नहीं परोसती है न ही किसी आमिर को फाँसने के जुगाड़ में रहती है । क्या आप चाहेंगे शराब परोसने ,ग्राहकों का मनोरंजन करने वाली किसी वेट्रेस को अपनी बहु बनाना ? कम से कम बोलने के पहले जानकारी तो इकठ्ठी कर ले अन्यथा आपकी बात का वजन हल्का हो जाएगा । विदेशी उलट मुर्गियों को समझना इतना आसान नहीं है ।
कांग्रेसी चमचे भी सोनिया को अपनी माता बनाने के पहले एकबार अपनी असली माता से पूछ ले क्या वो कमर लचका के होटलो में शराब परोसना पसन्द करेंगी ? क्या वो नैपकिन पे ग्राहकों के साथ सन्देशो को आदान प्रदान और चूमा चाटी पसन्द करेंगी ?
कांग्रेसियो जिनके अपने मकान शीशे के होते है वे दुसरो के मकान पे पत्थर नहीं फेका करते ।