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Friday, May 6, 2016

देश मे सूखे की वजह बढता हुआ Secularism है। आप को लगेगा अजीब बकवास है तो पढिये...!


देश मे सूखे की वजह बढता हुआ  Secularism है।



देश मे सूखे की वजह बढता हुआ  Secularism है।
आप को लगेगा अजीब बकवास है, किन्तु यही
अटल सत्य है.. सेकुलरता के चक्कर मे पिछले 68
सालो मे हिन्दुत्व के प्रतीको को खत्म किया
गया। जिसमे पीपल, बड और नीम के पेडो को
सरकारी स्तर पर लगाना बन्द किया गया।
पीपल कार्बन डाई ऑक्साइड का 100%
आब्जरबर है, बड 80% और नीम 75 % है, अब चूँकि
हिन्दू धर्म मान्यता अनुसार हिन्दू समाज इन
पेडो पर जल चढाते है, पूजा करते है, इसलिए
सरकार ने तथाकथित कुछ लोगो को खुश करने
के चक्कर मे इन पेडो से दूरी बना ली तथा इसके
बदले यूकेलिप्टस को लगाना शुरू कर दिया जो
जमीन को जल विहीन कर देता है। इस पेड को
लगाना इंदिरा गांधी ने चालू किया.. आज हर
जगह यूकेलिप्टस, गुलमोहर और अन्य सजावटी
पेडो ने ले ली। अब जब वायुमण्डल में रिफ्रेशर ही
नही रहेगा तो गर्मी तो बढेगी ही और जब
गर्मी बढेगी तो जल भाप बनकर उडेगा ही।
आज दिल्ली मे इतना प्रदूषण है मेरा चैलेंज है..
अगर केजरीवाल सरकार ओड-इवन की नोटंकी
की जगह केंद्र सरकार के (सहयोग से) साथ
मिलकर हर 500 मीटर की दूरी पर एक पीपल
का पेड लगाये तो आने वाले कुछ साल भर बाद
प्रदूषण मुक्त दिल्ली होगी। वैसे आपको एक और
जानकारी दे दी जाए.. जब सोमनाथ चटर्जी
लोकसभा अध्यक्ष थे तब मंत्रियो और सांसदो
के आवास के अंदर से सभी नीम और पीपल के पेड़
कटवा दिए थे। कम्युनिस्ट कितने मानसिक रूप से
पिछडे है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा
सकता है कि तब लोकसभाध्यक्ष पीपल और
नीम के पेड कटवाने का कारण बताये थे कि इन
पेडो पर भूत निवास करते है। मिडिया मे बडा
मुद्दा नही बना, क्योंकि यह पेड हिन्दू
धार्मिक आस्था के प्रतीक थे। अब करने योग्य
कार्य..
इन जीवनदायी पेडो को ज्यादा से ज्यादा
लगाये तथा यूकेलिप्टस पर बैन लगाया जाय..
जिसके पास इतनी जगह न हो वह तुलसी जी
का पौधा लगाये। आइये हमसब मिलकर अपने
"हिन्दुस्तान" को प्राकृतिक आपदाओ से
बचाये.. अब आप समझ गए होगें की सूखे की वजह
देश का "Secularism" है..
शेयर कर सकते हो....

Friday, April 15, 2016

लातूर में 200 परिवारों को रोजाना पानी पहुंचाते है अब्दुल मतीन

इऩ दिनों देश के दस राज्य पानी की भयंकर कमी से जूझ रहे हैं। किसानों के खेत-खलिहान तो दूर यहाँ इंसानों औऱ जानवरों तक के लिए पीने का पानी नहीं है। इसी भयावह सूखे की चपेट में महाराष्ट्र का लातूर जिला भी पूरी तरह पानी-पानी को तरस रहा है। यहाँ लोग कुओँ में चम्मच डालकर पानी निकालने पर विवश है। इस भयावह मंजर में 200 परिवारों की उम्मीद बने अब्दुल मतीन जो रोजाना लोगों के घरों में पानी पहुंचाने का काम कर रहें है।
कहा जाता है कि ऐसे लोगों की वजह से इंसानियत जगह-जगह जिंदा है। अब्दुल मतीन का नाम भी उऩ्हीं लोगों में शुमार किया जाएगा। क्योंकि प्यासे और भूखे का कोई मजहब और घर्म-जाति नहीं होती। उसी तरह अब्दुल मतीन ने भी किसी तरह का भेदभाव नहीं अपनाया। उनके लिए वो 200 परिवार सिर्फ प्यासे है चाहे वह किसी भी मजहब से ताल्लुक रखते हों। अब्दुल मतीन पेशे से शिक्षक है। इंसानियत की खिदमत दिखाने के लिेए बल्कि लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए करते है। जिस कारण उऩकी तारीफ करते हुए लोगों ने उऩको सलाम बोला।
ऐसा बहुत बार देखा गया है। जहाँ चंद लोग पूरे समाज के लोगों के सामने एक ऐसी बेहतरीन मिसाल पेश कर देते है जो तारीफे के काबिल होती है। कभी चेन्नई बाढ़ में फंसे लोगों को मस्जिद में पनाह दी जाती है। तो कभी सांप्रदायिक माहौल में सभी वर्ग एक-दूसरे के साथ उठकर खड़े हो जाते है।