Saturday, February 13, 2016

JNU को 'जिहादी नक्सल यूनिवर्सिटी'' में तब्दील कर दिया है।

JNU में इस्लामिक जिहादियों और बामपंथी-नक्सलियों के गठजोड़ ने इस शिक्षा के मंदिर को ''जिहादी नक्सल यूनिवर्सिटी'' में तब्दील कर दिया है।

बामपंथी-नक्सली विचारधारा भारतीय लोकतंत्र के लिए किस कदर खतरनाक है, इसका अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं की बिहार बेगुसराय जिले के बीहट में जन्मा "कन्हैया कुमार" कश्मीर की आजादी और भारत की बर्बादी के सपने देख रहा है। बाप पत्थर तोड़ता है, माँ आगनबाडी में काम करती है, और बेटा दहशतगर्द अफजल का शहीदी दिवस मनाता है।

यह खतरे की घंटी है-- उन माँ-बाप के लिए जो JNU जैसे उच्च कोटि के शिक्षा-संस्थान में अपने बच्चों को पढ़ाने के सपने देखा करते थे --- भारत सरकार के लिए -- जिसके आँखों के सामने JNU "हाफिज सईद के इंडियन ट्रेनिंग सेंटर" के तौर पर काम कर रहा है। बामपंथी-नक्सली लाल-चड्डी गैंग ने एक अच्छे भले यूनिवर्सिटी का सत्यानाश कर दिया।

''जिहादी नक्सल यूनिवर्सिटी'' में "राष्ट्रवाद" की अलख जलाने के लिए सबसे पहले इसके नाम से देशद्रोही नेहरू का नाम हटाकर "नेताजी सुभाषचन्द्र बोस" के नाम पर रखा जाये और यूनिवर्सिटी VC के लिए "सुब्रह्मण्यम स्वामी" जी बेहतरीन कैंडिडेट होंगे

Thursday, February 11, 2016

दहशतगर्द इशरत मामले में बैकफुट पर आये Presstitute, NGO और बामपंथी-कांग्रेस गैंग

दहशतगर्द इशरत मामले में बैकफुट पर आये Presstitute, NGO और बामपंथी-कांग्रेस गैंग अब मोदीजी को बदनाम करने के लिए किसी "रोहित वेमुला" या "इखलाक" की मौत की वाट जोह रहे हैं।
इसलिए JNU के देशद्रोहीयों अपना ख्याल रखना-- आत्महत्या मत करना। सम्भावना है की राजनितिक लाभ के लिए तुम्हारी शाजिशन हत्या को भी "आत्महत्या" का रूप दिया जाए । हैदरावाद यूनिवर्सिटी में भी घटनाएँ कुछ इसी तरह शुरू हुई थी।
और इशरत जहाँ मामले में "काली दाढ़ी-सफ़ेद दाढ़ी" थ्योरी देने वाले केजरीवाल, "26/11 RSS की शाजिश" करार देने वाली कांग्रेस और "इशरत को बिहार की बेटी" बताने वाले नितीश जैसे बेशर्मों से जनता माफ़ी की उम्मीद तो नहीं करती --- पर -- कम से कम पाकिस्तान के प्रवक्ता की तरह बयान देना बंद करें। अंधे मोदी-RSS बिरोध में देशद्रोह का रास्ता मत अख्तियार करो । Narendra Modi साहब हिंदुस्तान के विकास की स्वर्णिम गाथा लिखने में जुटे हैं, उनकी राह में काँटे बिछाना बंद करो...!

Monday, February 1, 2016

जो लोग सोशल मीडिया पर हम जैसों को ‪#‎भक्त‬ कह के बुलाते हैं, उनसे मैं कहना चाहता हूँ कि यदि ऐसा कह के आपकी मंशा हमें अपमानित करने की है तो आप फेल हो गए हैं। स्वयं के लिए 'भक्त' शब्द का संबोधन सुनकर हम अपमानित नहीं बल्कि गौरवान्वित महसूस करते हैं। हमें अपनी भक्ति पर अभिमान होता है। इनलोगों को यह समझ नहीं आता कि भक्ति एक भारतीय परंपरा है। और इस परंपरा में भक्त अपना भगवान स्वयं चुनता है। भक्त की भक्ति उसके भगवान की गुलाम नहीं है। वह तो उसके प्यार, विश्वास और श्रद्धा पर टिकी हुई है। जिस दिन उसका विश्वास डिग गया, वह अपने भगवान की भक्ति का परित्याग कर देगा, उसे सवालों के घेरे में खड़ा कर देगा। मतलब यह कि भक्त का भक्त होना या न होना किसी और के ऊपर नहीं बल्कि स्वयं उसके ऊपर निर्भर होता है। इसलिए 'भक्त' शब्द उसके लिए गाली न होकर उपाधि होती है जिसे वह गर्व से गले में लटकाए घूमता रहता है। वहीँ दूसरी ओर हम, सोनिया समर्थको "गुलाम "कह के बुलाते हैं। ऐसा करते समय हमारा मकसद उन्हें लज्जित करना होता है और हम ऐसा करने में सफल भी होते हैं। क्या आपने किसी कांग्रेसी या आपी को देखा है जो अपने आपको 'गुलाम कहने में गर्व का अनुभव करता हो? हाँ जिस दिन भक्त को लगा कि उसका भगवान उसकी भक्ति के काबिल नहीं रहा, वह उससे भगवान का दर्ज़ा छीन लेगा। पर सवाल उठता है कि क्या कोई 'गुलाम' कभी अपनी गुलामी की जंजीरें तोड़ पायेगा? जवाब है 'नहीं' क्यूंकि एक गुलाम को पता ही नहीं होता कि वह गुलाम है। ...जिस दिन उसे पता चल गया कि वह गुलाम है,  उसी दिन वह आज़ाद हो जायेगा।