Thursday, February 11, 2016

दहशतगर्द इशरत मामले में बैकफुट पर आये Presstitute, NGO और बामपंथी-कांग्रेस गैंग

दहशतगर्द इशरत मामले में बैकफुट पर आये Presstitute, NGO और बामपंथी-कांग्रेस गैंग अब मोदीजी को बदनाम करने के लिए किसी "रोहित वेमुला" या "इखलाक" की मौत की वाट जोह रहे हैं।
इसलिए JNU के देशद्रोहीयों अपना ख्याल रखना-- आत्महत्या मत करना। सम्भावना है की राजनितिक लाभ के लिए तुम्हारी शाजिशन हत्या को भी "आत्महत्या" का रूप दिया जाए । हैदरावाद यूनिवर्सिटी में भी घटनाएँ कुछ इसी तरह शुरू हुई थी।
और इशरत जहाँ मामले में "काली दाढ़ी-सफ़ेद दाढ़ी" थ्योरी देने वाले केजरीवाल, "26/11 RSS की शाजिश" करार देने वाली कांग्रेस और "इशरत को बिहार की बेटी" बताने वाले नितीश जैसे बेशर्मों से जनता माफ़ी की उम्मीद तो नहीं करती --- पर -- कम से कम पाकिस्तान के प्रवक्ता की तरह बयान देना बंद करें। अंधे मोदी-RSS बिरोध में देशद्रोह का रास्ता मत अख्तियार करो । Narendra Modi साहब हिंदुस्तान के विकास की स्वर्णिम गाथा लिखने में जुटे हैं, उनकी राह में काँटे बिछाना बंद करो...!

Monday, February 1, 2016

जो लोग सोशल मीडिया पर हम जैसों को ‪#‎भक्त‬ कह के बुलाते हैं, उनसे मैं कहना चाहता हूँ कि यदि ऐसा कह के आपकी मंशा हमें अपमानित करने की है तो आप फेल हो गए हैं। स्वयं के लिए 'भक्त' शब्द का संबोधन सुनकर हम अपमानित नहीं बल्कि गौरवान्वित महसूस करते हैं। हमें अपनी भक्ति पर अभिमान होता है। इनलोगों को यह समझ नहीं आता कि भक्ति एक भारतीय परंपरा है। और इस परंपरा में भक्त अपना भगवान स्वयं चुनता है। भक्त की भक्ति उसके भगवान की गुलाम नहीं है। वह तो उसके प्यार, विश्वास और श्रद्धा पर टिकी हुई है। जिस दिन उसका विश्वास डिग गया, वह अपने भगवान की भक्ति का परित्याग कर देगा, उसे सवालों के घेरे में खड़ा कर देगा। मतलब यह कि भक्त का भक्त होना या न होना किसी और के ऊपर नहीं बल्कि स्वयं उसके ऊपर निर्भर होता है। इसलिए 'भक्त' शब्द उसके लिए गाली न होकर उपाधि होती है जिसे वह गर्व से गले में लटकाए घूमता रहता है। वहीँ दूसरी ओर हम, सोनिया समर्थको "गुलाम "कह के बुलाते हैं। ऐसा करते समय हमारा मकसद उन्हें लज्जित करना होता है और हम ऐसा करने में सफल भी होते हैं। क्या आपने किसी कांग्रेसी या आपी को देखा है जो अपने आपको 'गुलाम कहने में गर्व का अनुभव करता हो? हाँ जिस दिन भक्त को लगा कि उसका भगवान उसकी भक्ति के काबिल नहीं रहा, वह उससे भगवान का दर्ज़ा छीन लेगा। पर सवाल उठता है कि क्या कोई 'गुलाम' कभी अपनी गुलामी की जंजीरें तोड़ पायेगा? जवाब है 'नहीं' क्यूंकि एक गुलाम को पता ही नहीं होता कि वह गुलाम है। ...जिस दिन उसे पता चल गया कि वह गुलाम है,  उसी दिन वह आज़ाद हो जायेगा।

Monday, January 25, 2016

शर्मनाक : गाय का मॉस खाना हैं तो मुझे वोट दो : असदुद्दीन औवेसी

गाय का मॉस खाना हैं तो मुझे वोट दो : असदुद्दीन औवेसी


बीफ पर डर्टी पॉलिटिक्‍स खत्‍म नहीं हुई है। हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन औवेसी ने आज इस मुद्दे पर भरी सभा में जोरदार ऐलान किया। हैदराबाद के निकाय चुनाव से जुड़ी एक जनसभा में असदुद्दीन आैवेसी ने कहा कि अगर लोग उनके कैंडीडेट को वोट देंगे तो उन्‍हें बीफ खाने से कोई नहीं रोक सकेगा।

यहां देखें वीडियो


असदुद्दीन औवेसी की हेट स्‍पीच

ऑल इंडिया मजलिस-ए-मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख असदुद्दीन आैवेसी यहीं नहीं रुके। उन्‍होंने दो टूक कहा, अगर आपकी पार्टी AIMIM हारी तो मैं आपसे कह देता हूं कि पिछड़ों और उनके नेताओं को बीफ मीट भूलना होगा।
औवेसी ने महाराष्‍ट्र की बीजेपी सरकार पर भी हमला किया। उन्‍होंने आरोप लगाया कि महाराष्‍ट्र में दलितों और मुस्लिमों को बीफ बैन के मुद्दे पर परेशान कर रही है। उन्‍होंने कहा, ‘महाराष्‍ट्र में उन्‍होंने बीफ पर बैन लगाया। लेकिन जब से नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री बने हैं, बीफ का निर्यात तेजी से बढ़ा है। अगर मेरे सूत्र सही हैं तो देश में 17 फीसदी तक बीफ का निर्यात बढ़ा है। मोदी इस रोकने के लिए क्‍या करेंगे।’




महाराष्‍ट्र में मार्च 2015 से सरकार ने बैन लगा रहा है। असदुद्दीन आैवेसी पहले भी इसके खिलाफ काफी कुछ बोल चुके हैं। औवेसी मोदी के खिलाफ भी लगातार बोलते हैं। वह कई बार मोदी की कॉपी करके भी उनके खिलाफ जहर उगलते रहे हैं। लेकिन अब आेवैसी ने नया पैंतरा आजमाना शुरू किया है। बीफ का मुद्दा बीते दिनों भी काफी गर्माया था। इसे देखते हुए असदुद्दीन औवेसी ने अब अपने चुनाव प्रचार में इसका इस्‍तेमाल शुरू कर दिया है।
हैदराबाद की चुनावी सभा में भी असदुद्दीन आैवेसी ने मोदी की कॉपी की। जिस तरह मोदी अपने भाषण की शुरुआत ‘मित्रों’ कहकर करते हैं। ठीक उसकी तरह औवेसी ने भी किया। उन्‍होंने कहा, मित्रों के जरिए बाकी जगह तो काम चल जाएगा लेकिन हैदराबाद में नहीं। हैदराबाद में मित्रों नहीं ‘बड़ा’ (बीफ) चलेगा। बताया जा रहा है कि औवेसी का यह बयान बीते हफ्ते की रैली में सामने आया है। इस रैली का वीडियो भी यूट्यूब पर वायरल हुआ है।