Monday, May 2, 2016

भारत का निर्माणकर्ता ... पूरा पढें.., समजे


भारत का निर्माणकर्ता ...

पूरा पढें.., समजे


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कोई आदमी बार बार आकर हमारे साथ बदतमीजी,गाली गलौच, हमारी बेज्जती करता है ? एक दिन मैंने भी उसके साथ बदतमीजी, गाली गलौच कर दी. दूसरे ने मुझे अपनी negativity से इतना उकसाया की मैं भी उसके साथ negativity करने लगा.. .. लेकिन, मैं तब अपने आप को ताकतवर मानता.., जब दूसरा व्यक्ति मेरी positive बातों में आ कर खुद भी positive बातें करने लग जाता.
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मैंने उस आदमी के साथ Negative काम किया और अपने पैदाइशी Nature से छेड़ छाड़ की.. क्योकि इंसान का पैदाइशी Nature सिर्फ और सिर्फ Positive होता है. जब हम बच्चे थे और हमें समझ नहीं थी तो हम हर किसी के साथ चाहे जानवर हो या इंसान, Positivity में ही रहते थे.
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पर हम जैसे जैसे बड़े होने लगे, हम दूसरों की बातें सुन सुन कर Positivity से Negativity की तरफ जाने लगे, और इस तरह Negative काम/बात करके हम सिर्फ अपनी Ego Satisfy कर रहे हैं और कुछ नही...! हम "हर क्षण", "हर वक़्त" अपने को देख सकते हैं कि हम अपना Positive Increase कर रहे हैं या Negative.
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हम "तारीफ" करें हर उस व्यक्ति की, जो हमारे आस पास कुछ भी 'अच्छा' काम कर रहे हैं, तारीफ कर के उसको प्रोत्साहित कर सकते हैं और "टोकिए" हर उस व्यक्ति को, जो हमारे आसपास कुछ 'गलत' कर रहा है, हमारे चुप रहने से उसको शै मिलती है और हम अपना ही नुकसान कर रहे होते हैं.
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हम इसलिए पीछे नहीं कि हमारा देश Knowledge,Talent से भरपूर नहीं है. हम पीछे हैं.. "सही/अच्छे व्यक्तियों के गलत चीजों पर न बोलने की वजह से."
हमारे समाज में गलत लोग सिर्फ और सिर्फ पूरी जनसँख्या के 1% भी नहीं हैं.
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क्या हम फिर से इन 1% लोगों के गुलाम बनने की तैयारी में तो नहीं हैं ???
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इसलिए मित्रों, अब सिर्फ चुप रहने का समय नहीं है. अब समय आ गया है की "भारत का युवा उठे" और भारत को बुलंदियों तक पहुंचाने में अपना अपना योगदान दे चाहे वो योगदान कितना ही छोटा क्योँ न हो..

सोच है हमारी,

आखिर "भारत के निर्माणकर्ता" हैं हम.

जय हिन्द
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------------- Self Motivation ---------------

Sunday, May 1, 2016

बड़े शराब कारोबारी के साथ क्या कर रहा हैं कन्हैया ?

बड़े शराब कारोबारी के साथ क्या कर रहा हैं कन्हैया ?
शराब कारोबारी के साथ कन्हैया।
पटना। जेएनयू के छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार के शराबबंदी को लेकर शनिवार को दिए गए बयान के बाद एक एक बड़े शराब कारोबारी के साथ कन्हैया की तस्वीर सामने आयी है। तस्वीर सामने आने के बाद कई सवाल उठ रहे हैं।

रावत का कबूलनामा- ‘स्टिंग में मैं ही हूं, यूं ही कही पैसों की बात’


रावत का कबूलनामा- स्टिंग में मैं ही हूं, यूं ही कही पैसों की बात


देहरादून। उत्तराखंड की राजनीति में जिस स्टिंग ने भूचाल ला दिया था, उसपर हरीश रावत का कबूलनामा आया है। बागी विधायकों की कथित खरीद-फरोख्त में खुद की संलिप्तता दिखाने वाली स्टिंग सीडी को अब तक ‘फर्जी और गलत’ बताने वाले उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने स्टिंग में अपनी मौजूदगी को स्वीकार करते हुए कहा कि पत्रकार से मिलना कोई अपराध नहीं है।
रावत ने एक कार्यक्रम में भाग लेने के बाद संवाददाताओं से एक बातचीत में कहा, ‘‘क्या किसी पत्रकार से मिलना कोई अपराध है? क्या तब तक तकनीकी रूप से अयोग्य घोषित नहीं हुए विधायकों में से किसी ने भी मुझसे बातचीत की तो इससे क्या फर्क पड़ता है? राजनीति में क्या किसी चैनल को हम बंद कर सकते हैं?’’
‘दोषी साबित हुआ तो फांसी पर लटका देना’
इस संबंध में अपने निर्दोष होने का दावा करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि सीडी में से ऐसा कुछ भी प्रमाणित हो जाये कि उन्होंने असंतुष्ट विधायकों का समर्थन लेने के बदले में उन्हें नकद या किसी और प्रकार की पेशकश की तो वह जनता के सामने फांसी पर लटकने को तैयार है।
उन्होंने कहा, ‘‘अगर मेरे खिलाफ ऐसा कोई प्रमाण मिलता है कि कि मैंने किसी को धन या किसी और चीज की पेशकश की तो मुझे घंटाघर पर लटका दीजिये। घंटाघर चौक देहरादून के बिल्कुल बीचोबीच स्थित है।’’
पहले इनकार, अब स्वीकार !
हालांकि, पूर्व मुख्यमंत्री रावत के इस बयान से यह स्पष्ट हो गया है कि उनके और स्टिंग सीडी बनाने वाले उस पत्रकार के बीच मुलाकात हुई थी। महत्वपूर्ण बात यह है कि रावत अब तक सीडी की सत्यता को ही चुनौती देते रहे थे और उन्होंने उसे ’फर्जी और गलत’ बताया था।

‘टाइमपास कर रहा था पत्रकार’
रावत ने कहा, ‘‘मेरे लिये कोई क्यों 15 करोड़ रुपये खर्च करेगा। वह व्यक्ति (पत्रकार) मेरा समय निकालने के लिये कुछ अर्थहीन बातें कर रहा था और मैंने उसका समय गुजारने के लिये कुछ कहा। इससे क्या फर्क पड़ता है? हम रोजाना इस प्रकार की बातें कहते रहते हैं। क्या इसका मतलब है कि उनका प्रयोग हमारे खिलाफ किया जाये?’’


क्या है मामला
एक निजी चैनल के मुख्य संपादक द्वारा बनायी गयी और नौ बागी कांग्रेसी विधायकों द्वारा प्रसारित की गयी स्टिंग सीडी में कथित रूप से रावत को बागी विधायकों का समर्थन हासिल करने के लिये पत्रकार से सौदेबाजी करते दिखाया गया था। गत 18 मार्च को नौ कांग्रेसी विधायकों के बागी हो जाने और राज्य विधानसभा में भाजपा के साथ खड़े हो जाने के बाद प्रदेश में सियासी संकट पैदा हो गया था, जिसकी परिणिति 27 मार्च को राष्ट्रपति शासन के रूप में हुई थी।